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नई दिल्ली. हिंदुजा समूह बंद हो चुकी जेट एयरवेज को खरीदने के लिए निलामी में हिस्सा लेगी। कंपनी से संबंधित एक व्यक्ति के मुताबिक, ब्रिटेन से संबंध रखने वाले हिंदुजा समूह 15 जनवरी तक मिली समयसीमा तक इस निलामी में शामिल होने की तैयारी कर रही है। इस समूह को दो भाईयों गोपीचंद हिंदुजा और अशोक हिंदुजा संचालित करते हैं।
इससे पहले, सिनर्जी ग्रुप ने इस एयरलाइंस को खरीदने की इच्छा जताई थी। इसके बाद लेनदारों ने जेट एयरवेज को बेचने के लिए नए सिरे से निलामी शुरू करने की मांग कर रहे थे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक ने विमानन कंपनी पर 8230 करोड़ रुपए बकाया होने का दावा किया था। वहीं, कर्मचारियों और अन्य लेनदारों ने एयरलाइंस पर 6400 करोड़ रुपए बकाया होने का बात कही थी। इसमें 24 प्रतिशत हिस्सेदारी अबु धाबी की एतिहाद की थी।
हिंदुजाइस साल की शुरूआत में भी जेट एयरवेज को खरीदना चाहती थी
हिंदुजा समूह ने इस साल की शुरुआत में एतिहाद के साथ साझेदारी में जेट एयरवेज के लिए बोली लगाने पर विचार किया था, लेकिन एतिहाद ने इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया जिसके बाद जेट एयरवेज दिवालिया का शिकार हो गया था। गोपीचंद हिंदुजा ने इस महीने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया था कि एयरलाइन की देनदारियों से निंदा होने और इसकी स्थिति बिगड़ने के कारण हिंदुजा समूह जेट एयरवेज को खरीदने की इच्छा रखती है।
हिंदुजा के बाद अन्य कंपनियां भी निलामी में शामिल हो सकती है
लोगों का कहना है कि इसे खरीदने का मामला अभी शुरुआती चरण में है और हिंदुजा समूह बोली लगाने का फैसला कर सकती है। इसके बाद अन्य कंपनियां भी बोली लगाने के लिए सामने आ सकते हैं। निलामी में शामिल होने के लिए हिंदुजा समूह जेट की वैल्यू को लेकर होने वाली जटिलताओं से जूझ सकता है। इसमें हीथ्रो हवाई अड्डे को लेकर लैंडिंग अधिकार और कई अनावश्यक जगहों पर उड़ान स्लॉट की वैधता भी शामिल है।
नई दिल्ली.1 जनवरी 2020 से बदलावों का नया दौर शुरू होगा। नववर्ष की शुरुआत के साथ ही लोगों की जेब पर असर डालने वाले कई नए नियम लागू हो जाएंगे। इनमें पीएफ, बीमा, ज्वेलरी, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के नियम भी शामिल हैं। पढ़िए ऐसे 10 बदलावों के बारे में संक्षिप्त जानकारी...
पीएफ : खुद तय कर सकेंगे अंशदान
वो कंपनियां भी पीएफ के दायरे में होंगी, जहां 10 कर्मचारी हैं। कर्मचारी ही पीएफ का अंशदान तय कर सकेंगे। पेंशन फंड से एकमुश्त निकासी संभव होगी।
कर्ज : रेपो रेट से जुड़े कर्ज 0.25% सस्ते
एसबीआई ने रेपो रेट से जुड़े कर्ज का ब्याज 0.25% घटाया। नई दरों का फायदा पुराने ग्राहकों को भी मिलेगा, क्योंकि उनकी रीसेट डेट भी 1 जनवरी है।
एनईएफटी : लेन-देन पर शुल्क नहीं
नए साल से अब बैंकों में एनईएफटी के जरिए लेन-देन पर शुल्क नहीं चुकाना होगा। एनईएफटी भी अब हफ्ते के सातों दिन, चौबीसों घंटे हो सकेगा। भारत बिल पेमेंट सिस्टम से प्रीपेड छोड़कर सभी बिलों का भुगतान किया जा सकेगा।
ज्वेलरी : हॉलमार्किंग अब अनिवार्य
सोने-चांदी की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में 1 साल तक छूट रहेगी। ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग के नियम 2000 से लागू हैं, लेकिन हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं थी। इस वजह से अब दाम भी बढ़ सकते हैं।
रुपे-यूपीआई : अब चार्ज नहीं लगेगा
50 करोड़ रु. से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों को बिना एमडीआर चार्ज के रुपे कार्ड, यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए भुगतान की सुविधा देनी होगी।
पैन : आधार लिंक के लिए 3 माह मिले
31 दिसंबर तक पैन आधार से लिंक कराना जरूरी था। वरना 1 जनवरी से पैन कार्ड मान्य नहीं होता। अब इसके लिए मार्च 2020 तक का समय मिला है।
बीमा पॉलिसी : प्रीमियम महंगा होगा
आईआरडीए ने चेंज लिंक्ड और नॉन लिंक्ड जीवन बीमा पॉलिसी में बदलाव की घोषणा की है। इससे प्रीमियम महंगा होगा। वहीं, एलआईसी ने क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर लगने वाले चार्ज को भी खत्म करने की घोषणा की है।
डेबिट कार्ड : चिप वाले कार्ड ही चलेंगे
31 दिसंबर तक पुराने डेबिट कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक चिप वाले कार्ड से बदलवाना जरूरी है। नए साल में पुराने डेबिट कार्ड से कैश नहीं निकाल पाएंगे। इसमें लगी मैग्नेटिक स्ट्रिप बेकार हो जाएगी, जिससे एटीएम ग्राहक का डेटा पहचानती है।
एटीएम : कैश निकालने के लिए ओटीपी
एसबीआई ने एटीएम से 10 हजार रु. से ज्यादा कैश निकालने के नियम बदले हैं। रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक पैसे निकालने के लिए ओटीपी अनिवार्य होगा।
फास्टैग : अब जरूरी, वरना दोगुना टोल
15 जनवरी के बाद एनएच से गुजरने वाली गाड़ियों में फास्टैग अनिवार्य होगा। 1 करोड़ फास्टैग जारी हुए हैं। फास्टैग नहीं हुआ तो दोगुना टोल चुकाना होगा।
नई दिल्ली.1 जनवरी 2020 से बदलावों का नया दौर शुरू होगा। नववर्ष की शुरुआत के साथ ही लोगों की जेब पर असर डालने वाले कई नए नियम लागू हो जाएंगे। इनमें पीएफ, बीमा, ज्वेलरी, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के नियम भी शामिल हैं। पढ़िए ऐसे 10 बदलावों के बारे में संक्षिप्त जानकारी...
पीएफ : खुद तय कर सकेंगे अंशदान
वो कंपनियां भी पीएफ के दायरे में होंगी, जहां 10 कर्मचारी हैं। कर्मचारी ही पीएफ का अंशदान तय कर सकेंगे। पेंशन फंड से एकमुश्त निकासी संभव होगी।
कर्ज : रेपो रेट से जुड़े कर्ज 0.25% सस्ते
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एनईएफटी : लेन-देन पर शुल्क नहीं
नए साल से अब बैंकों में एनईएफटी के जरिए लेन-देन पर शुल्क नहीं चुकाना होगा। एनईएफटी भी अब हफ्ते के सातों दिन, चौबीसों घंटे हो सकेगा। भारत बिल पेमेंट सिस्टम से प्रीपेड छोड़कर सभी बिलों का भुगतान किया जा सकेगा।
ज्वेलरी : हॉलमार्किंग अब अनिवार्य
सोने-चांदी की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में 1 साल तक छूट रहेगी। ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग के नियम 2000 से लागू हैं, लेकिन हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं थी। इस वजह से अब दाम भी बढ़ सकते हैं।
रुपे-यूपीआई : अब चार्ज नहीं लगेगा
50 करोड़ रु. से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों को बिना एमडीआर चार्ज के रुपे कार्ड, यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए भुगतान की सुविधा देनी होगी।
पैन : आधार लिंक के लिए 3 माह मिले
31 दिसंबर तक पैन आधार से लिंक कराना जरूरी था। वरना 1 जनवरी से पैन कार्ड मान्य नहीं होता। अब इसके लिए मार्च 2020 तक का समय मिला है।
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आईआरडीए ने चेंज लिंक्ड और नॉन लिंक्ड जीवन बीमा पॉलिसी में बदलाव की घोषणा की है। इससे प्रीमियम महंगा होगा। वहीं, एलआईसी ने क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर लगने वाले चार्ज को भी खत्म करने की घोषणा की है।
डेबिट कार्ड : चिप वाले कार्ड ही चलेंगे
31 दिसंबर तक पुराने डेबिट कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक चिप वाले कार्ड से बदलवाना जरूरी है। नए साल में पुराने डेबिट कार्ड से कैश नहीं निकाल पाएंगे। इसमें लगी मैग्नेटिक स्ट्रिप बेकार हो जाएगी, जिससे एटीएम ग्राहक का डेटा पहचानती है।
एटीएम : कैश निकालने के लिए ओटीपी
एसबीआई ने एटीएम से 10 हजार रु. से ज्यादा कैश निकालने के नियम बदले हैं। रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक पैसे निकालने के लिए ओटीपी अनिवार्य होगा।
फास्टैग : अब जरूरी, वरना दोगुना टोल
15 जनवरी के बाद एनएच से गुजरने वाली गाड़ियों में फास्टैग अनिवार्य होगा। 1 करोड़ फास्टैग जारी हुए हैं। फास्टैग नहीं हुआ तो दोगुना टोल चुकाना होगा।
नई दिल्ली.महाराष्ट्र में सोमवार को उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे को भी कैबिनेट में जगह मिली है। यह आठवां मौका है जब किसी मुख्यमंत्रीने अपने बेटे को भी कैबिनेट में जगह दी। उद्धव से पहले 5 मुख्यमंत्रियों ने 7 बार ऐसा किया। पंजाब के सीएम रहे प्रकाश सिंह बादल और तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव ने 2-2 बार अपने बेटे को मंत्री बनाया। इनके अलावा कश्मीर, हरियाणा और तमिलनाडु में भी एक-एक बार ऐसा हुआ। करुणानिधिऔर प्रकाश सिंह बादल ने अपने बेटों को डिप्टी सीएम का पद भी दिया।





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