बेंगलुरु/गुड़गांव(सुमित पांडे,शैलेन्द्र सिंह चौहानऔर उमाशंकर) .मध्यप्रदेश की राजनीतिक उठापटक के पावर सेंटर बने बेंगलुरू में शनिवार को अजीब सियासी सन्नाटा पसरा रहा। कांग्रेस के बागी विधायक दिनभर गोल्फसायर रिजॉर्ट में रहे। कांग्रेस के दोनों मंत्री भी चले गए। कहीं कोई मैदानी हलचल नजर नहीं आई, लेकिन जमीनी रणनीति बनती रही। कर्नाटक पैटर्न की तर्ज पर भाजपा बागी विधायकों को सीआरपीएफ के पहरे में लेकर निकलेगी। ग्रीन कॉरिडोर बनेगा। एयरपोर्ट तक काफिले में कोई नहीं घुस सकेगा। सारे वाहन रोके जाएंगे। कांग्रेस सुरक्षा कवच तोड़ने की तमाम कोशिश करेगी। कमलनाथ सरकार को 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करना होगा।
फॉर्मूले की काट में कांग्रेस थिंक टैंक
कर्नाटक फॉर्मूले में अभी तक चल रहे सरकार गिराओ घटनाक्रम पर कांग्रेस की नजरें जमी हुई हैं। अभी तक 6 विधायकों के इस्तीफे को मंजूर करने तक सब कुछ एक जैसा चल रहा है। कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार आखिरी उपचुनाव तक जाने के दांव में चूक गई थी। अब रास्ता यहीं निकाला जा रहा है कि कैसे भी कुछ विधायक भाजपा में जॉइन नहीं करें। फ्लोर टेस्ट में सरकार के साथ खड़े हो जाए।
अब भाजपा तैयार कर रही ए और बी प्लान
भाजपा तयशुदा रणनीति के तहत ए और बी प्लान तैयार कर रही है। कांग्रेस को चकमा देने के लिए विधायकों को अलग-अलग रिजॉर्ट में ठहराया गया है। ऐसे ही एयरपोर्ट से वापसी के बाद दो दिन के लिए चार्टर्ड बुक हैं। फ्लोर टेस्ट के लिए इशारा मिलने पर सभी पहुंचेंगे। 15 और 16 मार्च दोनों दिन उड़ान की तैयारी है।
रिजॉर्ट तक पहुंचे कांग्रेस नेता पर अंदर नहीं जा पाए
कांग्रेस के पूर्व सीएम सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे यूएस उगरप्पा अचानक दोपहर में रिजॉर्ट पहुंचे। वे भीतर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने जाने नहीं दिया। विवाद की स्थिति भी बनी। उन्होंने कहा कि मैं विधायकों से मिलने नहीं, अपने परिचित के आयोजन में शामिल होने आया हूं।
हमने उनसे नौ चाल आगे की सोचते हैं
बेंगलुरु से एक विधायकने बताया- ‘‘स्पीकर एनपी प्रजापति ने हमें जिस दिन नोटिस जारी किया था, उसी दिन हमने उन्हें और राज्यपाल को मेल भेजकर केंद्रीय सुरक्षा मांगी थी। स्पीकर ने हमें 11 तारीख को नोटिस दिया था कि आप लोग आएं और अपने इस्तीफों का सत्यापन कराएं। इसके बाद हमने उन्हें मेल करके राज्यपाल महोदय से सुरक्षा की मांग कर ली थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहेऔर बार-बार नोटिस देकर खानापूर्ति कर रहे हैं।’’
‘‘विश्वनाथन आनंद शतरंज का वर्ल्ड चैंपियन इसलिए था, क्योंकि वह सामने वाले से नौ चाल आगे सोचकर चलता था। ऐसे ही हम उनसे(कांग्रेस)पहले ही अपनी चालें सोच लेते हैं। इतने सालउनके साथ ही रहे हैं। वह जो सोचते हैं, वो हम पहले ही समझ जाते हैं।’’
ब्रेकफास्ट करेंगे और 1.45 घंटे में पहुंच जाएंगे
भाजपा ने 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट की मांग की है। कल भर का टाइम है, ऐसे में अगर आप फ्लोर टेस्ट में नहीं आएंगे तो फिर कैसे होगा। इस सवाल पर विधायकने कहा- ‘‘हम जहां पर हैं, वहां से भोपाल पहुंचने में एक घंटा 45 मिनट लगता है। हम ब्रेकफास्ट करेंगे, 9.30 बजे चलेंगे और 11 बजे फ्लोर टेस्ट के लिए पहुंच जाएंगेया वो जब भी टाइम देंगे, हम पहुंच जाएंगे।’’
कमलनाथ आखिरी कश तक सरकार का मजा लेना चाहते हैं
बेंगलुरुमें विधायकों को भाजपा ने बंधक बनाकर रखा है, इस सवाल पर विधायक बोले- ‘‘कांग्रेस के लोग अफवाह फैला रहे हैं, हालांकि ये करना उनकी मजबूरी है। सारी भ्रांतियां इसलिए फैलाई जा रही है, ताकि जो 92 विधायक उनके साथ हैं, वेबने रहें। वरना वह भी भाग लेंगे। मजाक के लिए कह रहा हूं,एक सिगरेट आती थी, जिसमें लिखा होता था कि आखिरी कश तक मजा देती है। वैसे हीकमलनाथ आखिरी कश तक सरकार के मजे लेना चाहतेहैं।’’
विधायकने सभी विधायकों की कोरोनावायरस की जांच के सवाल पर कहा- कोरोना किसी को नहीं है, सब स्वस्थ और मस्त हैं। मेडिकल चेकअप कराया गया है, जिससे मध्य प्रदेश सरकार को देरी का बहाना न मिले।
गुड़गांव से रिपोर्ट
4 दिन से होटल में रुके भाजपा विधायकपरेशान
गुडगांव स्थितआईटीसी ग्रैंड भारत होटल में ठहरे मध्य प्रदेश के भाजपा विधायकों की सुध लेने के लिए शनिवार देर शाम तक कोई नेता होटल नहीं पहुंचा। होटल में 10 मार्च की रात से ठहरे 106 विधायक अब परेशान होने लगे हैं। उन्हें अपनी मर्जी से परिजनसे बात करने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके लिए विशेष आग्रह पर व्यवस्था की जा रही है। होटल में कुछ दिन और ठहरने की सूचना से विधायकों की बेचैनी और भी बढ़ गई है। कुछ विधायकों द्वारा होटल के स्टाफ के साथ रूखा बर्ताव करने सूचना मिल रही है। शुक्रवार शाम होटल से लौटते वक्त सांसद राकेश सिंह ने शनिवार शाम को आने का विधायकों को भरोसा दिलाया था। वे देर शाम तक उनके आने का इंतजार करते रहे। व्यवस्था में लगे पुलिस अधिकारी भी तैयार थे कि देर शाम तक सिंह आ सकते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी उनकी सुध लेने के लिए दो दिन से नहीं पहुंचे। विधायक होटल प्रबंधन से बार-बार पूछते रहे कि किसी के आने की कोई सूचना है क्या?
बेंगलुरु/गुड़गांव(सुमित पांडे,शैलेन्द्र सिंह चौहानऔर उमाशंकर) .मध्यप्रदेश की राजनीतिक उठापटक के पावर सेंटर बने बेंगलुरू में शनिवार को अजीब सियासी सन्नाटा पसरा रहा। कांग्रेस के बागी विधायक दिनभर गोल्फसायर रिजॉर्ट में रहे। कांग्रेस के दोनों मंत्री भी चले गए। कहीं कोई मैदानी हलचल नजर नहीं आई, लेकिन जमीनी रणनीति बनती रही। कर्नाटक पैटर्न की तर्ज पर भाजपा बागी विधायकों को सीआरपीएफ के पहरे में लेकर निकलेगी। ग्रीन कॉरिडोर बनेगा। एयरपोर्ट तक काफिले में कोई नहीं घुस सकेगा। सारे वाहन रोके जाएंगे। कांग्रेस सुरक्षा कवच तोड़ने की तमाम कोशिश करेगी। कमलनाथ सरकार को 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करना होगा।
फॉर्मूले की काट में कांग्रेस थिंक टैंक
कर्नाटक फॉर्मूले में अभी तक चल रहे सरकार गिराओ घटनाक्रम पर कांग्रेस की नजरें जमी हुई हैं। अभी तक 6 विधायकों के इस्तीफे को मंजूर करने तक सब कुछ एक जैसा चल रहा है। कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार आखिरी उपचुनाव तक जाने के दांव में चूक गई थी। अब रास्ता यहीं निकाला जा रहा है कि कैसे भी कुछ विधायक भाजपा में जॉइन नहीं करें। फ्लोर टेस्ट में सरकार के साथ खड़े हो जाए।
अब भाजपा तैयार कर रही ए और बी प्लान
भाजपा तयशुदा रणनीति के तहत ए और बी प्लान तैयार कर रही है। कांग्रेस को चकमा देने के लिए विधायकों को अलग-अलग रिजॉर्ट में ठहराया गया है। ऐसे ही एयरपोर्ट से वापसी के बाद दो दिन के लिए चार्टर्ड बुक हैं। फ्लोर टेस्ट के लिए इशारा मिलने पर सभी पहुंचेंगे। 15 और 16 मार्च दोनों दिन उड़ान की तैयारी है।
रिजॉर्ट तक पहुंचे कांग्रेस नेता पर अंदर नहीं जा पाए
कांग्रेस के पूर्व सीएम सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे यूएस उगरप्पा अचानक दोपहर में रिजॉर्ट पहुंचे। वे भीतर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने जाने नहीं दिया। विवाद की स्थिति भी बनी। उन्होंने कहा कि मैं विधायकों से मिलने नहीं, अपने परिचित के आयोजन में शामिल होने आया हूं।
हमने उनसे नौ चाल आगे की सोचते हैं
बेंगलुरु से एक विधायकने बताया- ‘‘स्पीकर एनपी प्रजापति ने हमें जिस दिन नोटिस जारी किया था, उसी दिन हमने उन्हें और राज्यपाल को मेल भेजकर केंद्रीय सुरक्षा मांगी थी। स्पीकर ने हमें 11 तारीख को नोटिस दिया था कि आप लोग आएं और अपने इस्तीफों का सत्यापन कराएं। इसके बाद हमने उन्हें मेल करके राज्यपाल महोदय से सुरक्षा की मांग कर ली थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहेऔर बार-बार नोटिस देकर खानापूर्ति कर रहे हैं।’’
‘‘विश्वनाथन आनंद शतरंज का वर्ल्ड चैंपियन इसलिए था, क्योंकि वह सामने वाले से नौ चाल आगे सोचकर चलता था। ऐसे ही हम उनसे(कांग्रेस)पहले ही अपनी चालें सोच लेते हैं। इतने सालउनके साथ ही रहे हैं। वह जो सोचते हैं, वो हम पहले ही समझ जाते हैं।’’
ब्रेकफास्ट करेंगे और 1.45 घंटे में पहुंच जाएंगे
भाजपा ने 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट की मांग की है। कल भर का टाइम है, ऐसे में अगर आप फ्लोर टेस्ट में नहीं आएंगे तो फिर कैसे होगा। इस सवाल पर विधायकने कहा- ‘‘हम जहां पर हैं, वहां से भोपाल पहुंचने में एक घंटा 45 मिनट लगता है। हम ब्रेकफास्ट करेंगे, 9.30 बजे चलेंगे और 11 बजे फ्लोर टेस्ट के लिए पहुंच जाएंगेया वो जब भी टाइम देंगे, हम पहुंच जाएंगे।’’
कमलनाथ आखिरी कश तक सरकार का मजा लेना चाहते हैं
बेंगलुरुमें विधायकों को भाजपा ने बंधक बनाकर रखा है, इस सवाल पर विधायक बोले- ‘‘कांग्रेस के लोग अफवाह फैला रहे हैं, हालांकि ये करना उनकी मजबूरी है। सारी भ्रांतियां इसलिए फैलाई जा रही है, ताकि जो 92 विधायक उनके साथ हैं, वेबने रहें। वरना वह भी भाग लेंगे। मजाक के लिए कह रहा हूं,एक सिगरेट आती थी, जिसमें लिखा होता था कि आखिरी कश तक मजा देती है। वैसे हीकमलनाथ आखिरी कश तक सरकार के मजे लेना चाहतेहैं।’’
विधायकने सभी विधायकों की कोरोनावायरस की जांच के सवाल पर कहा- कोरोना किसी को नहीं है, सब स्वस्थ और मस्त हैं। मेडिकल चेकअप कराया गया है, जिससे मध्य प्रदेश सरकार को देरी का बहाना न मिले।
गुड़गांव से रिपोर्ट
4 दिन से होटल में रुके भाजपा विधायकपरेशान
गुडगांव स्थितआईटीसी ग्रैंड भारत होटल में ठहरे मध्य प्रदेश के भाजपा विधायकों की सुध लेने के लिए शनिवार देर शाम तक कोई नेता होटल नहीं पहुंचा। होटल में 10 मार्च की रात से ठहरे 106 विधायक अब परेशान होने लगे हैं। उन्हें अपनी मर्जी से परिजनसे बात करने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके लिए विशेष आग्रह पर व्यवस्था की जा रही है। होटल में कुछ दिन और ठहरने की सूचना से विधायकों की बेचैनी और भी बढ़ गई है। कुछ विधायकों द्वारा होटल के स्टाफ के साथ रूखा बर्ताव करने सूचना मिल रही है। शुक्रवार शाम होटल से लौटते वक्त सांसद राकेश सिंह ने शनिवार शाम को आने का विधायकों को भरोसा दिलाया था। वे देर शाम तक उनके आने का इंतजार करते रहे। व्यवस्था में लगे पुलिस अधिकारी भी तैयार थे कि देर शाम तक सिंह आ सकते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी उनकी सुध लेने के लिए दो दिन से नहीं पहुंचे। विधायक होटल प्रबंधन से बार-बार पूछते रहे कि किसी के आने की कोई सूचना है क्या?
from Dainik Bhaskar /mp/bhopal/news/rebel-mlas-of-congress-to-be-removed-by-building-a-green-corridor-under-the-watch-of-crpf-in-bengaluru-126972107.html
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भास्कर रिसर्च. कोरोनावायरस से लोग दहशत में हैं। इसका फायदा उठाकर हैंड सैनिटाइजर और मास्क मनमाने दामों पर बेचे जा रहे हैं। जो मास्क 5 रुपए में मिलता था, वह कहीं 25 तो कहीं 30 रुपए का मिल रहा है। 100 रुपए वाला 350 से 400 रुपए में बिक रहा है। चौंकाने वाली बात ये है कि हर दुकानदार ने सैनिटाइजर और मास्क के दाम अपने हिसाब से तय कर लिए हैं। न ही कोई मॉनिटरिंग करने वाला है, न ही लोगों को यहपता है कि इस लूटमारी की शिकायत कहां और कैसे करना है। पढ़िए, देश के 7 राज्यों से दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट।
अक्षय बाजपेयी, भोपाल से
120 वाला मास्क 350 में, 500 एमएल का हैंड सैनिटाइजर450 रुपए में
सिंगल यूज मास्क 30 रुपए में बेचा जा रहा है।
रंगपंचमी पर मार्केट तो बंद है, लेकिन मेडिकल स्टोर्स खुले हैं। ग्राहकों की भीड़ भी है। कई लोग सैनिटाइजर, मास्क खरीदने आ रहे हैं। हम सबसे पहले एमपी नगर जोन-1 में चेतक ब्रिज के नीचे मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। हैंड सैनिटाइजर मिल जाएगा क्या? ये पूछने पर दुकानदार ने कहा, हां मिल जाएगा। 100 से लेकर 180 रुपए तक हैं। किस कंपनी का है? बोले, लाइफबॉय, डेटॉल, हिमालया जैसे किसी ब्रांड का नहीं है। दूसरे लोकल ब्रांड हैं, लेकिन वहभी खूब बिक रहे हैं।
क्या कोई डिस्काउंट मिलेगा? बोले, 140 वाला 100 रुपए में दे देंगे, बाकी दो पर डिस्काउंट नहीं है। 140 वाले पर ही डिस्काउंट क्यों दे रहे? इसमें एल्कोहल कंटेंट कम है, इसलिए कम में दे देंगे। बाकी में एल्कोहल ज्यादा है, इसलिए तय रेट में ही मिलेंगे। मास्क कितने का है? तो बोले, मास्क 30 से लेकर 350 रुपए तक का है। 30 वाला मास्क दिखाते हुए बोले ये सिंगल यूज मास्क है।
ये तो आप काफी महंगा दे रहे हो? जवाब में संचालक ने कहा, डिमांड ज्यादा है। पहले तो 5 से 10 रुपए में बेचे हैं ये मास्क, लेकिन अब हमें भी महंगा पड़ रहा है। फिर हम 10 नंबर स्थित मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। यहां मास्क के रेट और अलग मिले। जो वहां 30 का था, वहयहां 20 रुपए में दे रहे थे। क्या आपके पास एन-95 मास्क मिल जाएगा? संचालक ने कहा, हां मिल जाएगा। कितने का है? तो बोले 250 का है।
भैया पहले से रेट बहुत ज्यादा बढ़ गया क्या? संचालक ने कहा कि, पहले 120 का था। डिमांड बढ़ने से कंपनी ने रेट बढ़ा दिया। हैंड सैनिटाइजर देखने पर पूछा कि इस पर एमआरपी तो लिखी नहीं? संचालक ने कहा, यह पैकेट में आते हैं। पैकेट पर एमआरपी होती है। हर एक मास्क पर एमआरपी नहीं लिखी जाती। सिर्फ पैकेट पर ही लिखी जाती है।
यहीं नजदीक में दूसरी मेडिकल पर गए तो संचालक से पूछा कि भैया एन-95 मास्क असली या नकली, ये कैसे पता चलेगा? संचालक ने कहा, एन-95 लिखे नकली मास्क बहुत बेचे जा रहे हैं। असली-नकली की तो ऐसे पहचान कर पाना मुश्किल ही है। यहीं पास में स्थित हिमालया कंपनी के आउटलेट संचालक मोहम्मद शाकिब खान ने बताया, पिछले हफ्ते से ही कंपनी ने हैंड सैनिटाइजर नहीं भेजे। पिछले हफ्ते एक ही दिन में हमारे आउटलेट से 27 हजार रुपए के हैंड सैनिटाइजर बिके थे। ऐसी बिक्री मैंने पहले कभी नहीं देखी।
अरेरा कॉलोनी में मेडिकल शॉप पर आए खरीदार राजेंद्र भार्गव ने बताया कि 500 एमएल का सैनिटाइजर 450 रुपए में मिला। यह किसी नाम ब्रांड का भी नहीं है, लेकिन कुछ नहीं से कुछ सही। हिमालया का 500 एमएल का हैंड सैनिटाइजर 300 रुपए में मिलता है, लेकिन अभी उपलब्ध ही नहीं।
विष्णु शर्मा, जयपुर से
घर में मशीनें लगाकर तैयार कर रहे मास्क
50 से 90 रुपए वाला एन-95 मास्क मार्केट से गायब हो चुका है। जो हैं, वे प्राइवेट कंपनियों के एन-95 कैटेगरी के मास्क हैं। वहीं ब्रांडेड सैनिटाइजर भी मार्केट में उपलब्ध नहीं है। एसएमएस अस्पताल के सामने दवा विक्रेता अमित ने बताया कि नॉर्मल सर्जिकल मास्क दो तरह का आता है, टू प्लाईऔर थ्री प्लाई। कोरोना से पहले थ्री प्लाई को कोई नहीं जानता था। टू प्लाई ही चलता था। अभी थ्री प्लाई की डिमांड ज्यादा है। डिमांड इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि लोगों ने घर में मशीने लगाकर मास्क सिलना शुरू कर दिया है। जो लोकल वेंडर के जरिए मार्केट में बेच रहे हैं।
अमित ने कहा कि हम उन मास्क को नहीं खरीद रहे हैं। क्योंकि वे क्वॉलिटी के नहीं हैं। 15 रुपए एमआरपी है, जो 5 रुपए तक बिकता था। अब एमआरपी पर ही बिक रहा है। वहीं सैनिटाइजर भी लोकल वेंडर के जरिए काफी आ रहे हैं। पहले एक एन-95 मास्क आता था। अब अलग-अलग कंपनियों के एन-95 जैसे कई मास्क आ गए हैं। अगर किसी स्टॉकिस्ट के पास एन-95 कम है तो वहदुकानदार को रेट बढ़ा कर दे रहा है।
रोज बिक रहे 100 से 150 मास्क
एसएमएस अस्पताल के सामने मेडिकल शॉप मालिक दीपक ने बताया कि कोरोना आने के बाद मास्क की मार्केट में काफी किल्लत हो गई है। 2 रुपए वाला मास्क 10 का हो गया। वहीं, 15 वाला 50 में आ रहा है। रोज करीब 100 से 150 मास्क बिक रहे हैं। जिसमें एन-95 की डिमांड सबसे ज्यादा है। जो उपलब्ध नहीं है। प्राइवेट कंपनी का मास्क 150 रुपए का है, जो पहले 50 रुपए में बिकता था। वहीं, एन-95 तो 300 रुपए में भी नहीं मिल रहा। वहीं, सामान्य मास्क 15 रुपए में बेच रहे हैं। जो 10 से 11 रुपए में हमें पड़ते हैं। कोरोना से पहले यही मास्क 5 रुपए का था, जिसे 8 रुपए में बेचते थे।
एक दूसरे दवा विक्रेता ने बताया कि सैनिटाइजर की काफी शॉर्टेज है। अगर कंपनी से 1000 बोतल मांगते हैं, तो 10 भी नहीं मिल रही। सभी ब्रांडेट सैनिटाइजर की शॉर्टेज चल रही है। वहीं, एन-95 मास्क बिल्कुल नहीं आ रहा। ये 90 रुपए तक बिकता था। अब 300 रुपए में बेच रहे हैं। प्राइवेट कंपनियों के मास्क 150 रुपए तक बिक रहे हैं।
विवेक कुमार, पटना से
दुकानों पर न मास्क, न सैनिटाइजर
शहर में स्थिति यह है कि अधिकतर दवा दुकानों में अब सैनिटाइजर और मास्क नहीं है। जहां मिल भी रहे हैं, वहां पांच से छह गुना कीमत पर। राजीव नगर के ओम मेडिकल में रखे सभी सैनिटाइजर शुक्रवार शाम को ही बिक गए। शनिवार सुबह यहां सिर्फ मास्क बचे थे। यहां एन-95 मास्क की कीमत पहले 250 रुपए बताई गई। फिर कहा, आपके लिए 230 रुपए में लग जाएगा। जबकि, मास्क की कीमत 50-60 रुपए है। दुकानदार ने लोकल मास्क 53 रुपए में बेचा।
वेस्ट बोरिंग कैनाल रोड स्थित मेडिकाना के दो स्टोर पर मास्क और सैनिटाइजर नहीं मिले। इसी तरह ब्लू मेडिक्स में भी मास्क और सैनिटाइजर का स्टॉक नहीं था। बोरिंग रोड में स्थित सन फार्मा में सैनिटाइजर एमआरपी पर और मास्क 120 रुपए में बेचा जा रहा है। इस्ट बोरिंग कैनाल रोड स्थित पटना मेडी केयर्स में सैनिटाइजर नहीं था। मास्क उपलब्ध था। थाईलैंड में बने जिस मास्क को सन फार्मा ने 120 रुपए में बेचा, उसके लिए यहां 250 रुपए वसूल किए गए।
आशीष राय, पुणे से
हाथ से बना कपड़े का मास्क बेच रहे
पुणे में हमने पांच मेडिकल स्टोर्स पर पड़ताल की। ज्यादातर दुकानों पर लोकल मास्क और हैंड सैनिटाइजर बिक रहे हैं। 40 रुपए वाले मास्क 100 से 200 रुपए के बीच बेचा जा रहा है। हालांकि, एक दुकान पर हमें एमआरपी से भी 9 रुपए कम दाम पर मास्क मिला। पुणे के मांजरी इलाके में स्थित रवि मेडिको पर 'वी-स्वास' नाम का एक ब्रांडेड मास्क 90 रुपए में मिला। इसके पैकेट पर एमआरपी 99 रुपए लिखी थी, लेकिन थोड़े से मोलभाव के बाद दुकानदार ने इसे 90 में दे दिया।
मांजरी में स्थित अनुराधा मेडिकल पर 'सेफ हैण्ड' नाम का लोकल सैनिटाइजर बिक रहा था। दुकानदार के मुताबिक, सभी ब्रांडेड सैनिटाइजर खत्म हो चुके हैं। इसकी क्वालिटी भी बेहद खराब थी। दुकानदार 50 एमएल की बोतल 80 रुपए में बेच रहा था। जबकि, ब्रांडेड सैनिटाइजर भी इसी कीमत के हैं। गुरुकृपा मेडिकल पर हाथ से बना कपड़े का मास्क 50 रुपए में बेचा जा रहा है। वहीं, मंगल मेडिको में हिक्स कंपनी का मास्क 250 रुपए में और बिना ब्रांड का एन-95 मास्क 100 रुपए में मिल रहा था। हड़पसर के शशांक मेडिकल पर 40 रुपए का मास्क 200 रुपए में बेचा जा रहा है।
आदित्य तिवारी, लखनऊ से/ अमित मुखर्जी, वाराणसी से
सिंगल यूज मास्क 20 रुपए मे बेच रहे
दोपहर 12 बजे हम हजरतगंज स्थित ओम फार्मा मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। दुकानदार ने लोकल ब्रांड के दो सैनिटाइजर दिखाए। हमने पूछा क्या ब्रांडेड नहीं मिलेगा, तो दुकानदार ने कहा, यहां ही नहीं पूरे लखनऊ में नहीं मिलेगा। लोकल ब्रांड के दाम पूछे तो 500 एमएल वाला 500 का और उससे छोटा 230 रुपए का था। सिंगल यूज वाला 20 का और वॉशेबल मास्क 80 का है। केसरबाग चौराहे पर खालसा मेडिकल स्टोर पर सैनिटाइजर मांगा तो बताया कि लोकल ही मिल पाएगा। दाम पूछने पर 110 से 550 तक रेट मिला। वहीं, 240 और 350 रुपए वाला मास्क सामने रख दिया। महंगा क्यों हैं, ये पूछने पर कहा कि माल खत्महै कहांसे लाएं?
आरजे मेडिकल के संचालक रवि से एन-95 मास्क के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि, 250 और 350 वाला मास्क ही उपलब्ध है। वाराणसी के मेडिकल स्टोर्स से भी एन-95 मास्क गायब हैं, सामान्य मास्क की भरमार है। ब्रांडेड सैनिटाइजर भी नहीं हैं। सुशील मेडिकल पर लोकल मास्क की कीमत 40 रुपए थी। छोटा माल शॉप पर संचालक का दावा है 900 रुपए का मास्क जो पूरी तरह से संक्रमण से लोगों को बचाएगा। यह उसी को बेच रहे हैं।
सुमन पांडे, रायपुर से
5 रुपए वाला मास्क 50 में
रायपुर की मेडिकल शॉप में सैनिटाइजर नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर मेडिकल्स पर जवाब मिला- स्टॉक नहीं है। मास्क का भी यही हाल है। कम कीमत के मास्क कुछ जगहों पर ही मिल रहे हैं। 50 से 250 तक के मास्क मिल रहे हैं। मास्क एमआरपी पर बेच रहे हैं। कम कीमत वाले प्रोडक्ट स्टॉक में नहीं है। टिकरापारा स्थित प्रिज्म मेडिकल पर सैनिटाइजर स्टॉक में नहीं हैं। संतोषी नगर के सुमन मेडिकोज में भी नहीं मिला। मास्क 150, 170 और 250 रुपए के ही हैं।
सदर बाजार स्थित अनूप मेडिकल में सैनिटाइजर नहीं मिला। धमतरी शहर के अधिकांश मेडिकल में इसके स्टॉक लगभग खत्म हो गए हैं। जिनके पास हैं, वे मनमानी कीमत पर बेच रहे है। भास्कर ने 3 मेडिकल स्टोर परजाकर एन-95 मास्क की कीमत पूछी। दुकानदार नेशॉर्टेज के कारण 200 से 300 रुपए तक बढ़े हुए रेट में बेचने की बात कही।
आरती अग्निहोत्री, चंडीगढ़ से
300 रुपए तक मिल रहा है मास्क
2 प्लाईसिंपल मास्क जिसकी कीमत होलसेल में 60 पैसे प्रति मास्क होती थी, वह रिटेल में 20 रुपए से 30 रुपए में बिक रहा है। वहीं, 3 प्लाईमास्क जो 1 रुपए में होलसेल में मिलता है, वह 40 से 50 रुपए तक रिटेल में मिल रहा है। इसी तरह एन-95 मास्क जो होलसेल में 20 रुपए का है, वह रिटेल में 250 से 300 रुपए तक मिल रहा है। हालांकि, एन-95 मास्क की उपलब्धता न के बराबर है। कुमार ब्रदर्स सेक्टर-11 के अश्विनी कुमार कहते हैं कि कोरोना वायरस में अल्कोहल वाले सैनिटाइजर ही फायदेमंद हैं, लेकिन उनकी सप्लाय नहीं है।
मास्क की कालाबाजारी पर अब 7 साल की सजा
कालाबाजारी रोकने के लिए भारत सरकार ने एन-95 मास्क और हैंड सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तु श्रेणी में शामिल कर लिया है। इसका मतलब अबकेंद्र और राज्य सरकारकोरोनावायरस से बचाव करने वाले इन प्रोडक्टके उत्पादन, गुणवत्ता और डिस्ट्रिब्यूशन को नियंत्रित कर सकेंगी। ये आदेश 30 जून तक प्रभावी रहेगा। इसमें मास्क (2 प्लाई और 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क) और हैंड सैनिटाइजर्सको आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रखा गया है। इस अधिनियम का उल्लंघन करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
श्रीनगर. कश्मीर के बांदीपोरा के रहने वाले उमर सुहैल चीन के जिलिन शहर की बिहुआ यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। 21 जनवरी की सर्द रात में जब उनके पास एक फोन कॉल आता है तो वे पसीने से तरबतर हो जाते हैं। इस कॉल में उन्हें चीन में फैल रहे कोरोनावायरस के बारे में जानकारी दी जाती है। उन्हें यह भी बताया जाता है कि वे जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं, वायरस का संक्रमण उस ओर भी बढ़ रहा है। इस फोन कॉल के 10 दिन बाद ही उमर अपने घर आ जाते हैं,लेकिन ये 10 दिन और घर आने के बाद अगले 14 दिन उन्होंने कैसे गुजारें, शायद उन्हें जिंदगीभर याद रहने वाला है।
उमर बताते हैं,‘‘मैंने देखाहै कि उन दिनों में जिलिन शहर के सुपर मार्केट कितनी तेजी से खाली होने लगे थे। यह भी देखा है कि पूरे शहर में कैसे एकदम अशांति सी फैल गई थी। लोगों ने सुपर मार्केट की अलमारियों को छान मारा था। खाने-पीने के सामान और सेनिटाइजर्स इकट्ठा करने की होड़ मची हुई थी। मुझे याद है कि भारत लौटने से पहले किस तरह मैं सेनिटाइजर और मास्क के लिए लोगों के सामने हाथ फैला रहा था। बड़ी मुश्किल से मुझे एक बोतल सेनिटाइजर मिल पाया था।”
जब हर जगह बंद होने लगी और खाने-पीने के सामान की कमी होने लगी, तभी उमर ने घाटी में लौटने का फैसला लिया। 30 जनवरी को उन्होंने शंघाई से फ्लाइट पकड़ी और 1 फरवरी को भारत पहुंच गए। यहां पहुंचते ही उनका चेकअप किया गया। उनके परिवार के सदस्यों ने भी उनके आते ही सवालों की बौछार शुरू कर दी। उमर बताते हैं कि “एयरपोर्ट पर स्क्रिनिंग स्टॉफ ने उन्हें स्वस्थ पाया था, लेकिन जैसे ही वे अपने घर पहुंचे, बांदीपोरा के हॉस्पिटल से डॉक्टर्स की टीम आई, चेकअप किया और मुझे घर पर ही 14 दिन तक क्वारटाइन (कोरोनावायरस के संदिग्ध मरीजों को अलग रखना) कर दिया गया।”
उमर के लिए असल चुनौती क्वारटाइन पीरियड के साथ शुरू हुई। उन्हें किसी से भी मिलने की मनाही थी, वे परिवार के सदस्यों के साथ खाना भी नहीं खा सकते थे। उमर बताते हैं, "पड़ोसी और रिश्तेदार हर दिन मेरेघर आते और मां से पूछते कि क्या मैं ठीक हूं? उनके लगातार आने और बार-बार एक ही सवाल पूछने से मुझे भी ये लगने लगा था कि मैं एक जानलेवा इंफेक्शन का सोर्स हो गया हूं।"
उमर इंटरनेट की धीमी स्पीड की ओर इशारा करते हुए उदासी भरी आवाज में बताते हैं कि “सभी तरह की नकारात्मकता से दूर होने के लिए मैं अपना पूरा टाइम पढ़ाई में देना चाहता था, लेकिन इंटरनेट की 2G स्पीड के चलते ये भी संभव नहीं हो सका। मुझे अपनी ऑनलाइन क्लासेस भी छोड़नी पड़ी।”
चीन के हिलोंगजिआंग प्रांत की कीकीहार यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही खुशबू राथेर की भी कहानी कुछ ऐसी ही है। उनके प्रोफेसर ने उन्हें कई बार डोरमेट्री रूम से बाहर न निकलने की सलाह दी। बांदीपुरा क्षेत्र के चट्टी बांदी इलाके की रहने वाली खुशबू अभी 21 साल की हैं। वे उन दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि कैसे उन्हें इन्फेक्शन के फैलने के डर से रात-रात भर नींद नहीं आती थी।
खुशबू बताती हैं, "टीचर हमे ट्रिपल लेयर मास्क पहनने के लिए कहती थीं। वे हर घंटे हमारेबॉडी टेम्परेचर को मॉनिटर कर रहीथीं। उन दिनों हम सभी एक-दूसरे से कुछ सवाल बार-बार पूछ रहे थे- अगर हममें से कोई एक संक्रमित निकला तो क्या होगा? क्या हम जिंदा बच पाएंगे? क्या हमारा परिवार हमें फिर से देख पाएगा? क्या यहीं अंत है? हम चीनी भाषा नहीं जानते, अगर हमें क्वारटाइन किया गया तो हम उन लोगों से कैसे बात करेंगे?"
वायरस के तेजी से फैलने के डर से खुशबू ने 5 फरवरी को भारत आने का फैसला लिया। वे बताती हैं कि, “गुआंगझू से मेरी फ्लाइट थी। वहां कई ऐसे लोग थे, जो संक्रमित थे। मुझे लगातार यही डर सता रहा था कि मैं शायद सुरक्षित घर नहीं पहुंच पाऊंगी।"
खुशबू 7 फरवरी को श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरीं। स्क्रिनिंग के बाद उन्हें फौरन चेक अप के लिए ले जाया गया। वे बताती हैं कि “चेकअप में कोरोनावायरस का कोई लक्षण नजर नहीं आया। मुझे पूरी तरह से स्वस्थ बताया गया था, लेकिन एहतियात के तौर पर मुझे घर पर क्वारटाइन कर दिया गया।"
खुशबू को जब घर लाया गया, तो उनके भाई-बहन और रिश्तेदार उन्हें डर और कुछ तिरस्कार की नजर से देखते थे। वे बताती हैं कि, “मुझे अपने कमरे से बाहर आने की इजाजत नहीं थी। खाना भी परिवार के साथ नहीं खा सकती थी। मुझे बहुतही बुरा लगता था।"
पढ़ाई में आए इस ब्रेक से खुशबू थोड़ी परेशान भी नजर आती हैं। वे कहती हैं कि, “हमारा तीसरा सेमेस्टर अभी शुरू ही हुआ था। हम अपने नए विषयों को लेकर बेहद उत्साहित थे और अब मैं यहां हूं अकेले, सभी से अलग-थलग, जहां से वापसी की कोई उम्मीद भी फिलहाल नजर नहीं आती।"
कश्मीर में अब तक 1433 लोगों को क्वारटाइन किया गया
एक आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक, श्रीनगर एयरपोर्ट पर अब तक करीब 28 हजार 525 यात्रियों की स्क्रिनिंग हुई है। इसके मुताबिक कुल 1433 लोगों को होम क्वारटाइन किया गया है। डेटा के मुताबिक कश्मीर से 23 सैम्पल लिए गए हैं, इनमें से 20 नेगेटिव मिले हैं। अब तक कश्मीर में कोरोनावायरस का एक भी पॉजिटिव सैम्पल नहीं मिला है, लेकिन यहां लोग दुनियाभर में इस वायरस से हो रही मौतों से चिंतित हैं।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने निगरानी और कंट्रोल सिस्टम मजबूत किया
जम्मू और कश्मीर प्रशासन कोरोनावायरस के लक्षणों की पहचान के लिए और इसके फैलते संक्रमण से तुरंत निपटने के लिए लगातार तैयारी बेहतर कर रहा है। प्रशासन ने निगरानी और कंट्रोल सिस्टम को मजबूत किया है। केन्द्र शासित प्रदेश (+91-0191-2549676), जम्मू डिवीजन (+91-0191-25220982) और कश्मीर डिवीजन (+91-0194-2440283) के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नम्बर जारी किए गए हैं। इसके साथ हीश्रीनगर एयरपोर्ट और राष्ट्रीय राजमार्ग जम्मू और कश्मीर में स्क्रीनिंग के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षित कर्मचारियों को रखा गया है। सनत नगर में एक आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, अलग-अलग जिलों में क्वारटाइन फैसेलिटी को बढ़ाया गया है, ताकि संदिग्ध मामलों को तीसरे स्तर के केन्द्र पर सीधे लाने की बजाय लोगों को इन्हीं क्वारटाइन में रखा जाए।
श्रीनगर. कश्मीर के बांदीपोरा के रहने वाले उमर सुहैल चीन के जिलिन शहर की बिहुआ यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। 21 जनवरी की सर्द रात में जब उनके पास एक फोन कॉल आता है तो वे पसीने से तरबतर हो जाते हैं। इस कॉल में उन्हें चीन में फैल रहे कोरोनावायरस के बारे में जानकारी दी जाती है। उन्हें यह भी बताया जाता है कि वे जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं, वायरस का संक्रमण उस ओर भी बढ़ रहा है। इस फोन कॉल के 10 दिन बाद ही उमर अपने घर आ जाते हैं,लेकिन ये 10 दिन और घर आने के बाद अगले 14 दिन उन्होंने कैसे गुजारें, शायद उन्हें जिंदगीभर याद रहने वाला है।
उमर बताते हैं,‘‘मैंने देखाहै कि उन दिनों में जिलिन शहर के सुपर मार्केट कितनी तेजी से खाली होने लगे थे। यह भी देखा है कि पूरे शहर में कैसे एकदम अशांति सी फैल गई थी। लोगों ने सुपर मार्केट की अलमारियों को छान मारा था। खाने-पीने के सामान और सेनिटाइजर्स इकट्ठा करने की होड़ मची हुई थी। मुझे याद है कि भारत लौटने से पहले किस तरह मैं सेनिटाइजर और मास्क के लिए लोगों के सामने हाथ फैला रहा था। बड़ी मुश्किल से मुझे एक बोतल सेनिटाइजर मिल पाया था।”
जब हर जगह बंद होने लगी और खाने-पीने के सामान की कमी होने लगी, तभी उमर ने घाटी में लौटने का फैसला लिया। 30 जनवरी को उन्होंने शंघाई से फ्लाइट पकड़ी और 1 फरवरी को भारत पहुंच गए। यहां पहुंचते ही उनका चेकअप किया गया। उनके परिवार के सदस्यों ने भी उनके आते ही सवालों की बौछार शुरू कर दी। उमर बताते हैं कि “एयरपोर्ट पर स्क्रिनिंग स्टॉफ ने उन्हें स्वस्थ पाया था, लेकिन जैसे ही वे अपने घर पहुंचे, बांदीपोरा के हॉस्पिटल से डॉक्टर्स की टीम आई, चेकअप किया और मुझे घर पर ही 14 दिन तक क्वारटाइन (कोरोनावायरस के संदिग्ध मरीजों को अलग रखना) कर दिया गया।”
उमर के लिए असल चुनौती क्वारटाइन पीरियड के साथ शुरू हुई। उन्हें किसी से भी मिलने की मनाही थी, वे परिवार के सदस्यों के साथ खाना भी नहीं खा सकते थे। उमर बताते हैं, "पड़ोसी और रिश्तेदार हर दिन मेरेघर आते और मां से पूछते कि क्या मैं ठीक हूं? उनके लगातार आने और बार-बार एक ही सवाल पूछने से मुझे भी ये लगने लगा था कि मैं एक जानलेवा इंफेक्शन का सोर्स हो गया हूं।"
उमर इंटरनेट की धीमी स्पीड की ओर इशारा करते हुए उदासी भरी आवाज में बताते हैं कि “सभी तरह की नकारात्मकता से दूर होने के लिए मैं अपना पूरा टाइम पढ़ाई में देना चाहता था, लेकिन इंटरनेट की 2G स्पीड के चलते ये भी संभव नहीं हो सका। मुझे अपनी ऑनलाइन क्लासेस भी छोड़नी पड़ी।”
चीन के हिलोंगजिआंग प्रांत की कीकीहार यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही खुशबू राथेर की भी कहानी कुछ ऐसी ही है। उनके प्रोफेसर ने उन्हें कई बार डोरमेट्री रूम से बाहर न निकलने की सलाह दी। बांदीपुरा क्षेत्र के चट्टी बांदी इलाके की रहने वाली खुशबू अभी 21 साल की हैं। वे उन दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि कैसे उन्हें इन्फेक्शन के फैलने के डर से रात-रात भर नींद नहीं आती थी।
खुशबू बताती हैं, "टीचर हमे ट्रिपल लेयर मास्क पहनने के लिए कहती थीं। वे हर घंटे हमारेबॉडी टेम्परेचर को मॉनिटर कर रहीथीं। उन दिनों हम सभी एक-दूसरे से कुछ सवाल बार-बार पूछ रहे थे- अगर हममें से कोई एक संक्रमित निकला तो क्या होगा? क्या हम जिंदा बच पाएंगे? क्या हमारा परिवार हमें फिर से देख पाएगा? क्या यहीं अंत है? हम चीनी भाषा नहीं जानते, अगर हमें क्वारटाइन किया गया तो हम उन लोगों से कैसे बात करेंगे?"
वायरस के तेजी से फैलने के डर से खुशबू ने 5 फरवरी को भारत आने का फैसला लिया। वे बताती हैं कि, “गुआंगझू से मेरी फ्लाइट थी। वहां कई ऐसे लोग थे, जो संक्रमित थे। मुझे लगातार यही डर सता रहा था कि मैं शायद सुरक्षित घर नहीं पहुंच पाऊंगी।"
खुशबू 7 फरवरी को श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरीं। स्क्रिनिंग के बाद उन्हें फौरन चेक अप के लिए ले जाया गया। वे बताती हैं कि “चेकअप में कोरोनावायरस का कोई लक्षण नजर नहीं आया। मुझे पूरी तरह से स्वस्थ बताया गया था, लेकिन एहतियात के तौर पर मुझे घर पर क्वारटाइन कर दिया गया।"
खुशबू को जब घर लाया गया, तो उनके भाई-बहन और रिश्तेदार उन्हें डर और कुछ तिरस्कार की नजर से देखते थे। वे बताती हैं कि, “मुझे अपने कमरे से बाहर आने की इजाजत नहीं थी। खाना भी परिवार के साथ नहीं खा सकती थी। मुझे बहुतही बुरा लगता था।"
पढ़ाई में आए इस ब्रेक से खुशबू थोड़ी परेशान भी नजर आती हैं। वे कहती हैं कि, “हमारा तीसरा सेमेस्टर अभी शुरू ही हुआ था। हम अपने नए विषयों को लेकर बेहद उत्साहित थे और अब मैं यहां हूं अकेले, सभी से अलग-थलग, जहां से वापसी की कोई उम्मीद भी फिलहाल नजर नहीं आती।"
कश्मीर में अब तक 1433 लोगों को क्वारटाइन किया गया
एक आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक, श्रीनगर एयरपोर्ट पर अब तक करीब 28 हजार 525 यात्रियों की स्क्रिनिंग हुई है। इसके मुताबिक कुल 1433 लोगों को होम क्वारटाइन किया गया है। डेटा के मुताबिक कश्मीर से 23 सैम्पल लिए गए हैं, इनमें से 20 नेगेटिव मिले हैं। अब तक कश्मीर में कोरोनावायरस का एक भी पॉजिटिव सैम्पल नहीं मिला है, लेकिन यहां लोग दुनियाभर में इस वायरस से हो रही मौतों से चिंतित हैं।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने निगरानी और कंट्रोल सिस्टम मजबूत किया
जम्मू और कश्मीर प्रशासन कोरोनावायरस के लक्षणों की पहचान के लिए और इसके फैलते संक्रमण से तुरंत निपटने के लिए लगातार तैयारी बेहतर कर रहा है। प्रशासन ने निगरानी और कंट्रोल सिस्टम को मजबूत किया है। केन्द्र शासित प्रदेश (+91-0191-2549676), जम्मू डिवीजन (+91-0191-25220982) और कश्मीर डिवीजन (+91-0194-2440283) के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नम्बर जारी किए गए हैं। इसके साथ हीश्रीनगर एयरपोर्ट और राष्ट्रीय राजमार्ग जम्मू और कश्मीर में स्क्रीनिंग के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षित कर्मचारियों को रखा गया है। सनत नगर में एक आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, अलग-अलग जिलों में क्वारटाइन फैसेलिटी को बढ़ाया गया है, ताकि संदिग्ध मामलों को तीसरे स्तर के केन्द्र पर सीधे लाने की बजाय लोगों को इन्हीं क्वारटाइन में रखा जाए।
from Dainik Bhaskar /db-originals/news/coronavirus-china-kashmiri-student-speaks-to-dainik-bhaskar-over-novel-corona-covid-19-outbreak-in-china-india-latest-126975593.html
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भास्कर रिसर्च. कोरोनावायरस से लोग दहशत में हैं। इसका फायदा उठाकर हैंड सैनिटाइजर और मास्क मनमाने दामों पर बेचे जा रहे हैं। जो मास्क 5 रुपए में मिलता था, वह कहीं 25 तो कहीं 30 रुपए का मिल रहा है। 100 रुपए वाला 350 से 400 रुपए में बिक रहा है। चौंकाने वाली बात ये है कि हर दुकानदार ने सैनिटाइजर और मास्क के दाम अपने हिसाब से तय कर लिए हैं। न ही कोई मॉनिटरिंग करने वाला है, न ही लोगों को यहपता है कि इस लूटमारी की शिकायत कहां और कैसे करना है। पढ़िए, देश के 7 राज्यों से दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट।
अक्षय बाजपेयी, भोपाल से
120 वाला मास्क 350 में, 500 एमएल का हैंड सैनिटाइजर450 रुपए में
सिंगल यूज मास्क 30 रुपए में बेचा जा रहा है।
रंगपंचमी पर मार्केट तो बंद है, लेकिन मेडिकल स्टोर्स खुले हैं। ग्राहकों की भीड़ भी है। कई लोग सैनिटाइजर, मास्क खरीदने आ रहे हैं। हम सबसे पहले एमपी नगर जोन-1 में चेतक ब्रिज के नीचे मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। हैंड सैनिटाइजर मिल जाएगा क्या? ये पूछने पर दुकानदार ने कहा, हां मिल जाएगा। 100 से लेकर 180 रुपए तक हैं। किस कंपनी का है? बोले, लाइफबॉय, डेटॉल, हिमालया जैसे किसी ब्रांड का नहीं है। दूसरे लोकल ब्रांड हैं, लेकिन वहभी खूब बिक रहे हैं।
क्या कोई डिस्काउंट मिलेगा? बोले, 140 वाला 100 रुपए में दे देंगे, बाकी दो पर डिस्काउंट नहीं है। 140 वाले पर ही डिस्काउंट क्यों दे रहे? इसमें एल्कोहल कंटेंट कम है, इसलिए कम में दे देंगे। बाकी में एल्कोहल ज्यादा है, इसलिए तय रेट में ही मिलेंगे। मास्क कितने का है? तो बोले, मास्क 30 से लेकर 350 रुपए तक का है। 30 वाला मास्क दिखाते हुए बोले ये सिंगल यूज मास्क है।
ये तो आप काफी महंगा दे रहे हो? जवाब में संचालक ने कहा, डिमांड ज्यादा है। पहले तो 5 से 10 रुपए में बेचे हैं ये मास्क, लेकिन अब हमें भी महंगा पड़ रहा है। फिर हम 10 नंबर स्थित मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। यहां मास्क के रेट और अलग मिले। जो वहां 30 का था, वहयहां 20 रुपए में दे रहे थे। क्या आपके पास एन-95 मास्क मिल जाएगा? संचालक ने कहा, हां मिल जाएगा। कितने का है? तो बोले 250 का है।
भैया पहले से रेट बहुत ज्यादा बढ़ गया क्या? संचालक ने कहा कि, पहले 120 का था। डिमांड बढ़ने से कंपनी ने रेट बढ़ा दिया। हैंड सैनिटाइजर देखने पर पूछा कि इस पर एमआरपी तो लिखी नहीं? संचालक ने कहा, यह पैकेट में आते हैं। पैकेट पर एमआरपी होती है। हर एक मास्क पर एमआरपी नहीं लिखी जाती। सिर्फ पैकेट पर ही लिखी जाती है।
यहीं नजदीक में दूसरी मेडिकल पर गए तो संचालक से पूछा कि भैया एन-95 मास्क असली या नकली, ये कैसे पता चलेगा? संचालक ने कहा, एन-95 लिखे नकली मास्क बहुत बेचे जा रहे हैं। असली-नकली की तो ऐसे पहचान कर पाना मुश्किल ही है। यहीं पास में स्थित हिमालया कंपनी के आउटलेट संचालक मोहम्मद शाकिब खान ने बताया, पिछले हफ्ते से ही कंपनी ने हैंड सैनिटाइजर नहीं भेजे। पिछले हफ्ते एक ही दिन में हमारे आउटलेट से 27 हजार रुपए के हैंड सैनिटाइजर बिके थे। ऐसी बिक्री मैंने पहले कभी नहीं देखी।
अरेरा कॉलोनी में मेडिकल शॉप पर आए खरीदार राजेंद्र भार्गव ने बताया कि 500 एमएल का सैनिटाइजर 450 रुपए में मिला। यह किसी नाम ब्रांड का भी नहीं है, लेकिन कुछ नहीं से कुछ सही। हिमालया का 500 एमएल का हैंड सैनिटाइजर 300 रुपए में मिलता है, लेकिन अभी उपलब्ध ही नहीं।
विष्णु शर्मा, जयपुर से
घर में मशीनें लगाकर तैयार कर रहे मास्क
50 से 90 रुपए वाला एन-95 मास्क मार्केट से गायब हो चुका है। जो हैं, वे प्राइवेट कंपनियों के एन-95 कैटेगरी के मास्क हैं। वहीं ब्रांडेड सैनिटाइजर भी मार्केट में उपलब्ध नहीं है। एसएमएस अस्पताल के सामने दवा विक्रेता अमित ने बताया कि नॉर्मल सर्जिकल मास्क दो तरह का आता है, टू प्लाईऔर थ्री प्लाई। कोरोना से पहले थ्री प्लाई को कोई नहीं जानता था। टू प्लाई ही चलता था। अभी थ्री प्लाई की डिमांड ज्यादा है। डिमांड इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि लोगों ने घर में मशीने लगाकर मास्क सिलना शुरू कर दिया है। जो लोकल वेंडर के जरिए मार्केट में बेच रहे हैं।
अमित ने कहा कि हम उन मास्क को नहीं खरीद रहे हैं। क्योंकि वे क्वॉलिटी के नहीं हैं। 15 रुपए एमआरपी है, जो 5 रुपए तक बिकता था। अब एमआरपी पर ही बिक रहा है। वहीं सैनिटाइजर भी लोकल वेंडर के जरिए काफी आ रहे हैं। पहले एक एन-95 मास्क आता था। अब अलग-अलग कंपनियों के एन-95 जैसे कई मास्क आ गए हैं। अगर किसी स्टॉकिस्ट के पास एन-95 कम है तो वहदुकानदार को रेट बढ़ा कर दे रहा है।
रोज बिक रहे 100 से 150 मास्क
एसएमएस अस्पताल के सामने मेडिकल शॉप मालिक दीपक ने बताया कि कोरोना आने के बाद मास्क की मार्केट में काफी किल्लत हो गई है। 2 रुपए वाला मास्क 10 का हो गया। वहीं, 15 वाला 50 में आ रहा है। रोज करीब 100 से 150 मास्क बिक रहे हैं। जिसमें एन-95 की डिमांड सबसे ज्यादा है। जो उपलब्ध नहीं है। प्राइवेट कंपनी का मास्क 150 रुपए का है, जो पहले 50 रुपए में बिकता था। वहीं, एन-95 तो 300 रुपए में भी नहीं मिल रहा। वहीं, सामान्य मास्क 15 रुपए में बेच रहे हैं। जो 10 से 11 रुपए में हमें पड़ते हैं। कोरोना से पहले यही मास्क 5 रुपए का था, जिसे 8 रुपए में बेचते थे।
एक दूसरे दवा विक्रेता ने बताया कि सैनिटाइजर की काफी शॉर्टेज है। अगर कंपनी से 1000 बोतल मांगते हैं, तो 10 भी नहीं मिल रही। सभी ब्रांडेट सैनिटाइजर की शॉर्टेज चल रही है। वहीं, एन-95 मास्क बिल्कुल नहीं आ रहा। ये 90 रुपए तक बिकता था। अब 300 रुपए में बेच रहे हैं। प्राइवेट कंपनियों के मास्क 150 रुपए तक बिक रहे हैं।
विवेक कुमार, पटना से
दुकानों पर न मास्क, न सैनिटाइजर
शहर में स्थिति यह है कि अधिकतर दवा दुकानों में अब सैनिटाइजर और मास्क नहीं है। जहां मिल भी रहे हैं, वहां पांच से छह गुना कीमत पर। राजीव नगर के ओम मेडिकल में रखे सभी सैनिटाइजर शुक्रवार शाम को ही बिक गए। शनिवार सुबह यहां सिर्फ मास्क बचे थे। यहां एन-95 मास्क की कीमत पहले 250 रुपए बताई गई। फिर कहा, आपके लिए 230 रुपए में लग जाएगा। जबकि, मास्क की कीमत 50-60 रुपए है। दुकानदार ने लोकल मास्क 53 रुपए में बेचा।
वेस्ट बोरिंग कैनाल रोड स्थित मेडिकाना के दो स्टोर पर मास्क और सैनिटाइजर नहीं मिले। इसी तरह ब्लू मेडिक्स में भी मास्क और सैनिटाइजर का स्टॉक नहीं था। बोरिंग रोड में स्थित सन फार्मा में सैनिटाइजर एमआरपी पर और मास्क 120 रुपए में बेचा जा रहा है। इस्ट बोरिंग कैनाल रोड स्थित पटना मेडी केयर्स में सैनिटाइजर नहीं था। मास्क उपलब्ध था। थाईलैंड में बने जिस मास्क को सन फार्मा ने 120 रुपए में बेचा, उसके लिए यहां 250 रुपए वसूल किए गए।
आशीष राय, पुणे से
हाथ से बना कपड़े का मास्क बेच रहे
पुणे में हमने पांच मेडिकल स्टोर्स पर पड़ताल की। ज्यादातर दुकानों पर लोकल मास्क और हैंड सैनिटाइजर बिक रहे हैं। 40 रुपए वाले मास्क 100 से 200 रुपए के बीच बेचा जा रहा है। हालांकि, एक दुकान पर हमें एमआरपी से भी 9 रुपए कम दाम पर मास्क मिला। पुणे के मांजरी इलाके में स्थित रवि मेडिको पर 'वी-स्वास' नाम का एक ब्रांडेड मास्क 90 रुपए में मिला। इसके पैकेट पर एमआरपी 99 रुपए लिखी थी, लेकिन थोड़े से मोलभाव के बाद दुकानदार ने इसे 90 में दे दिया।
मांजरी में स्थित अनुराधा मेडिकल पर 'सेफ हैण्ड' नाम का लोकल सैनिटाइजर बिक रहा था। दुकानदार के मुताबिक, सभी ब्रांडेड सैनिटाइजर खत्म हो चुके हैं। इसकी क्वालिटी भी बेहद खराब थी। दुकानदार 50 एमएल की बोतल 80 रुपए में बेच रहा था। जबकि, ब्रांडेड सैनिटाइजर भी इसी कीमत के हैं। गुरुकृपा मेडिकल पर हाथ से बना कपड़े का मास्क 50 रुपए में बेचा जा रहा है। वहीं, मंगल मेडिको में हिक्स कंपनी का मास्क 250 रुपए में और बिना ब्रांड का एन-95 मास्क 100 रुपए में मिल रहा था। हड़पसर के शशांक मेडिकल पर 40 रुपए का मास्क 200 रुपए में बेचा जा रहा है।
आदित्य तिवारी, लखनऊ से/ अमित मुखर्जी, वाराणसी से
सिंगल यूज मास्क 20 रुपए मे बेच रहे
दोपहर 12 बजे हम हजरतगंज स्थित ओम फार्मा मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। दुकानदार ने लोकल ब्रांड के दो सैनिटाइजर दिखाए। हमने पूछा क्या ब्रांडेड नहीं मिलेगा, तो दुकानदार ने कहा, यहां ही नहीं पूरे लखनऊ में नहीं मिलेगा। लोकल ब्रांड के दाम पूछे तो 500 एमएल वाला 500 का और उससे छोटा 230 रुपए का था। सिंगल यूज वाला 20 का और वॉशेबल मास्क 80 का है। केसरबाग चौराहे पर खालसा मेडिकल स्टोर पर सैनिटाइजर मांगा तो बताया कि लोकल ही मिल पाएगा। दाम पूछने पर 110 से 550 तक रेट मिला। वहीं, 240 और 350 रुपए वाला मास्क सामने रख दिया। महंगा क्यों हैं, ये पूछने पर कहा कि माल खत्महै कहांसे लाएं?
आरजे मेडिकल के संचालक रवि से एन-95 मास्क के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि, 250 और 350 वाला मास्क ही उपलब्ध है। वाराणसी के मेडिकल स्टोर्स से भी एन-95 मास्क गायब हैं, सामान्य मास्क की भरमार है। ब्रांडेड सैनिटाइजर भी नहीं हैं। सुशील मेडिकल पर लोकल मास्क की कीमत 40 रुपए थी। छोटा माल शॉप पर संचालक का दावा है 900 रुपए का मास्क जो पूरी तरह से संक्रमण से लोगों को बचाएगा। यह उसी को बेच रहे हैं।
सुमन पांडे, रायपुर से
5 रुपए वाला मास्क 50 में
रायपुर की मेडिकल शॉप में सैनिटाइजर नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर मेडिकल्स पर जवाब मिला- स्टॉक नहीं है। मास्क का भी यही हाल है। कम कीमत के मास्क कुछ जगहों पर ही मिल रहे हैं। 50 से 250 तक के मास्क मिल रहे हैं। मास्क एमआरपी पर बेच रहे हैं। कम कीमत वाले प्रोडक्ट स्टॉक में नहीं है। टिकरापारा स्थित प्रिज्म मेडिकल पर सैनिटाइजर स्टॉक में नहीं हैं। संतोषी नगर के सुमन मेडिकोज में भी नहीं मिला। मास्क 150, 170 और 250 रुपए के ही हैं।
सदर बाजार स्थित अनूप मेडिकल में सैनिटाइजर नहीं मिला। धमतरी शहर के अधिकांश मेडिकल में इसके स्टॉक लगभग खत्म हो गए हैं। जिनके पास हैं, वे मनमानी कीमत पर बेच रहे है। भास्कर ने 3 मेडिकल स्टोर परजाकर एन-95 मास्क की कीमत पूछी। दुकानदार नेशॉर्टेज के कारण 200 से 300 रुपए तक बढ़े हुए रेट में बेचने की बात कही।
आरती अग्निहोत्री, चंडीगढ़ से
300 रुपए तक मिल रहा है मास्क
2 प्लाईसिंपल मास्क जिसकी कीमत होलसेल में 60 पैसे प्रति मास्क होती थी, वह रिटेल में 20 रुपए से 30 रुपए में बिक रहा है। वहीं, 3 प्लाईमास्क जो 1 रुपए में होलसेल में मिलता है, वह 40 से 50 रुपए तक रिटेल में मिल रहा है। इसी तरह एन-95 मास्क जो होलसेल में 20 रुपए का है, वह रिटेल में 250 से 300 रुपए तक मिल रहा है। हालांकि, एन-95 मास्क की उपलब्धता न के बराबर है। कुमार ब्रदर्स सेक्टर-11 के अश्विनी कुमार कहते हैं कि कोरोना वायरस में अल्कोहल वाले सैनिटाइजर ही फायदेमंद हैं, लेकिन उनकी सप्लाय नहीं है।
मास्क की कालाबाजारी पर अब 7 साल की सजा
कालाबाजारी रोकने के लिए भारत सरकार ने एन-95 मास्क और हैंड सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तु श्रेणी में शामिल कर लिया है। इसका मतलब अबकेंद्र और राज्य सरकारकोरोनावायरस से बचाव करने वाले इन प्रोडक्टके उत्पादन, गुणवत्ता और डिस्ट्रिब्यूशन को नियंत्रित कर सकेंगी। ये आदेश 30 जून तक प्रभावी रहेगा। इसमें मास्क (2 प्लाई और 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क) और हैंड सैनिटाइजर्सको आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रखा गया है। इस अधिनियम का उल्लंघन करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
ताइपे.चीन के पड़ोसी देश ताइवान ने कोरोनावायरस से बचाव के लिए ऐसे कदम उठाए, जिनसे दुनिया सीख ले सकती है। चीन के वुहान शहर से कोरोनावायरस फैला था। यहां से ताइवान केवल 130 किमी दूर है। जब वुहान में कोरोनावायरस फैला, तब कई लोग चीन से लूनर न्यू ईयर मनाकर ताइवान लौटे थे। उसी दौर में रोज चीन से 2 हजार पर्यटक ताइवान आ रहे थे। इसके बावजूद ताइवान में अब तक सिर्फ 50 मामले सामने आए हैं। इनमें से एक की मौत हुई है। ताइवान की आबादी 2.30 करोड़ है।
इन उपायों से हुए सफल
चीन ने 31 दिसंबर को बताया कि वुहान में निमोनिया मरीज बढ़ रहे हैं। इस पर ताइवान ने एयरपोर्ट पर यात्रियों की गहन जांच शुरू कर दी। अस्पतालों में इलाज की पूरी व्यवस्था की। ताइवान ने 2003 के सार्स संक्रमण से सबक लिया था।
ताइवान में पहला केस 21 जनवरी को आया तो 124 एक्शन टीम तैनात की गईं। चीन से यात्रियों के आने पर रोक लगाई। वुहान से आए उन लोगों पर 70 हजार रु. जुर्माना लगाया, जिन्होंने फ्लू को छुपाया।
मास्क का निर्यात रोका। टीवी, रेडियो चैनलों ने कोरोनावायरस से बचाव के हर घंटे संदेश जारी किए। सार्वजनिक स्थानों पर सैनिटाइजर रखे गए। स्कूलों में विद्यार्थियों को प्लास्टिक के डिवाइडर दिए गए, जिनके घेरे में बच्चे पढ़ते रहे।