Sunday, May 10, 2020

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हार्ट टू हार्ट की चाैथी कड़ी में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से कॉमेडियन कपिल शर्मा ने बात की। उन्हाेंने जीवन में सफलता से लेकर सकारात्मकता हासिल करने जैसे कई सवाल किए। उन्हाेंने श्री श्री से जाना कि माेह और प्रेम में क्या अंतर है। मुख्य अंश...

सवाल: हम जीवन में सकारात्मकता चाहते हैं, लेकिन नकारात्मक चीजें ही क्याें आकर्षित करती हैं?
नकारात्मकता से ऊपर उठना ही हमारे लिए चुनाैती है। बच्चाें में ऐसी बात नहीं हाेती। उनमें हमेशा सकारामकता अधिक हाेती है। बड़े हाेकर हम नकारात्मकता में दिलचस्पी लेने लगते हैं, लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं टिकती। हमें उसे नजरअंदाज कर देते हैं।
सवाल: किसी के पास बहुत है, कोई खाली हाथ?
यह लेनदेन की दुनिया है। किसी के पास देने के लिए है, ताे किसी काे लेना भी पड़ेगा। जिस तरह फिल्म में सब तरह के भूमिकाएं हाेती हैं, उसी तरह यह दुनिया है। ईश्वर फिल्म के डायरेक्टर हैं। वे साम्यवादी नहीं है, जाे सबकाे एक सा बना दें।
सवाल: क्या देर रात तक काम करना सही है?
रात में काम करने से काेई परेशानी नहीं, लेकिन जब भी जागें, 10 मिनट चिंतन, मनन, ध्यान करें। मैं इसे मेंटल हाइजीन कहता हूं। उठकर तुरंत काम में न लग जाएं। 10 मिनट अपने आपकाे देखें, परखें। इससे दिनभर उत्साह बना रहेगा।
सवाल: माेह और प्रेम एक ही है?
दाेनाें अलग-अलग हैं। प्रेम ताे हाेना चाहिए, लेकिन माेह नहीं। बेटी काे देखकर पिता में प्रेम उमड़े, ताे यह सही है। लेकिन यह साेचना कि 25-30 साल बाद वह ससुराल चली जाएगी, यह माेह है। इसे छाेड़ना चाहिए। अनुराग-प्रेम जीवन का अंग है, यह हाेना ही चाहिए।
सवाल: जीवन का मूल मंत्र क्या है?
हंसाे, हंसाओ। मत फंसाे और मत फंसाओ।
सवाल: सफल व्यक्ति काैन है?
दुख व्यक्ति काे गहराई देता है। इससे आप दूसराें का दुख समझ पाते हाे। जब सब ठीक चलता है, ताे मुस्कुराने वाले लाखाें लाेग हाेते हैं, लेकिन जब सब काम बिगड़े, तब भी हिम्मत न हारने वाला, मुस्कुराने वाला व्यक्ति ही सफल है।



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Ravi Shankar said - even if all the work gets spoiled, the one who does not lose courage, the one who smiles is successful


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लंबे समय से कोरोना महामारी झेल रहा खेल जगत अब इससे उबरता हुआ दिख रहा है। जहां कुछ देशों में खेल के इवेंट दोबारा शुरू हो गए हैं, तो वहीं कुछ जगह फैंस भी खेल देखने स्टेडियम में पहुंच रहे हैं। कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित अमेरिका में भी खेल की वापसी हो गई है। वहां शनिवार रात अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (यूएफसी) 249 के मुकाबले हुए।

यह अमेरिका में करीब दो महीने बाद हुआ खेल का पहला इवेंट था। अमेरिका के 31 साल के मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट जस्टिन गेजे चैंपियन बने। शनिवार को 11 फाइट हुईं। सभी में फैंस की एंट्री बैन थी। सिर्फ फाइटर, उनके कोच, यूएफसी से जुड़े कर्मचारी, ब्रॉडकास्ट क्रू और कुछ जर्नलिस्ट थे। अमेरिका में 13 लाख से ज्यादा संक्रमित हैं।

900 फैंस ने स्टेडियम में बैठकर बेसबॉल मैच देखा

ताइवान के रोग नियंत्रण केंद्र ने एक स्टेडियम में 1000 फैंस को मैच देखने की अनुमति दे दी है। न्यू ताइपे सिटी के जिनजुआंग स्टेडियम में करीब 900 फैंस घरेलू टीम फुबोन गार्डियंस और यूनीलाॅयंस का मैच देखने पहुंचे।

ताइवान में फैंस भी स्टेडियम पहुंचने लगे हैं।


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अमेरिका के 31 साल के मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट जस्टिन गेजे चैंपियन बने।


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अमेरिका के न्यूयॉर्क में रहस्यमय बीमारी से तीन बच्चों की मौत हो गई है। यहां इस बीमारी के 73 मामले आए हैं। 7 राज्यों में अब तक 100 ऐसे मामले आ चुके हैं। इस बीमारी वाले बच्चों की उम्र 2 से 15 साल है। गवर्नर एंड्रयू क्यूमो ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रहस्यमय बीमारी वाले ज्यादातर बच्चों में सांस संबंधी लक्षण नहीं दिखे हैं। जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें भी नहीं दिखाई दिए।

बीमारी का कारण जानने के लिए न्यूयॉर्क जीनोम सेंटर और रॉकफेलर यूनिवर्सिटी मिलकर रिसर्च कर रहे हैं। अब तक माता-पिता, हेल्थ एक्सपर्टयह सोचकर राहत महसूस कर रहे थे कि कोरोना से बच्चों की मौतें ज्यादा नहीं हुई हैं। अब उन्हें ज्यादा सतर्क रहना होगा। जिस समय क्यूमो मीडिया को नई बीमारी से मौतों की जानकारी दे रहे थे, उसी समय न्यूयॉर्क में कोरोना से 10 बच्चों की जान जाने की खबर आई। स्वास्थ्य विभाग जांच कर रहा है कि इन बच्चों की मौत रहस्यमय बीमारी से तो नहीं हुई।

दुनिया: ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड में भी 50 केस
यूरोपीय देशों में ब्रिटेन, फ्रांस, स्विटजरलैंड और इटली में भी इस रहस्यमय बीमारी के करीब 50 मामले आ चुके हैं। डब्ल्यूएचओ की वैज्ञानिक डॉ. मारिया वैन केरखोवे ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों में इस बीमारी के लक्षण बचपन में होने वाली बीमारी कावासाकी के लक्षणों जैसी है। जैसे हाथ-पैर में सूजन, शरीर में धब्बे आदि। ऐसे ही लक्षण अमेरिकी में भी देखे गए हैं।

लक्षण: त्वचा, धमनियों में सूजन, लंबे समय तक बुखार और पेट-सीने में दर्द
डॉक्टरों के मुताबिक इस रहस्यमय बीमारी में त्वचा और धमनियां सूज जाती हैं। आंखों में जलन होती है। शरीर पर धब्बे बनते हैं। त्वचा का रंग बदलने लगता है। लंबे समय तक बुखार, पेट-सीने में गंभीर दर्द होता है। लो ब्लड प्रेशर की परेशानी होती है।

इलाज: स्टेरॉयड, एस्पिरिन की खुराक दे रहे, वेंटिलेटर की भी जरूरत पड़ रही
डॉक्टर फिलहाल मरीजों को स्टेरॉयड, इंट्रावेनस इम्युनोग्लोबुलिन और एस्पिरिन दवाएं दे रहे हैं। एंटीबायोटिक्स भी दी जा रही हैं। कुछ मरीजों को सपोर्टिव ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ रही है। ज्यादा गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर पर रख रहे हैं।

अनुमान: बच्चे इसलिए चपेट में, क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों पर इस रहस्यमय बीमारी का असर इसलिए ज्यादा हो सकता है क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह से विकसित नहीं हुई है। अब डॉक्टर जैनेटिक टेस्ट पर जोर दे रहे हैं। इससे नए खुलासे होंगे।



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तस्वीर न्यूयॉर्क के एक अस्पताल की है। रहस्यमयी बीमारी के खतरे को देखते हुए यहां बच्चों की जांच बढ़ा दी गई है।


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कोरोना ने पूरी दुनिया में अब तक न जाने कितने घर उजाड़े हैं, लेकिन भोपाल में इसके कारण एक टूटा हुआ रिश्ता फिर जुड़ गया है। तीन साल पहले तलाक ले चुके पति-पत्नी के बीच पुराने गठबंधन को जिंदा करने पर मन बंधन हो गया। इस बार पहल सास ने की और बहू को समझाया कि कोरोना के चलते न जाने कब क्या हो जाए, आकर बेटे को संभाल लो। बहू और उसके माता-पिता को मनाने के लिए उनके घर पर धरना तक दिया। इसके बाद बहू भी नहीं रुक पाई और रिश्ता फिर जिंदा हो गया। दोनों की सात साल की एक बेटी है। फैसले से सबसे ज्यादा खुश वही है।

मामला सिंधी कॉलोनी का है। दंपती का विवाह जनवरी 2012 में हुआ था। एक साल बाद दोनों के यहां बेटी ने जन्म लिया। व्यवसाय की व्यस्तता के चलते व्यापारी पत्नी को समय नहीं दे पाता था। दोनों के बीच मां का भी दखल था। इस वजह से उनके बीच अक्सर विवाद होने लगे। मारपीट की नौबत आने लगी। युवती विवाद के बाद मायके चली जाती थी। दोनों के साथ उनके परिवारों में इतनी कड़वाहट आ गई कि साथ रहना मुश्किल हो गया। अदालत ने दोनों को साथ रखने के लिए तीन बार काउंसिल भी कराई। कोर्ट के मीडिएशन के बाद भी वे साथ रहने को तैयार नहीं हुए। फरवरी 2017 उनका तलाक हो गया। उस वक्त बेटी चार साल की थी। इस बीच पिता को बेटी से मिलने का मौका भी नहीं मिल पाया।

सास की बात सुन रो पड़ी बहू, परिवार वाले भी माने, दोबारा की शादी

लॉक डाउन में मां नहीं देख पाई बेटे की दशा
लॉक डाउन हुआ तो बेटा घर रहने लगा। वह हमेशा कमरे में अकेला रहता और पुरानी यादों में खोया रहता। वह केवल खाने के लिए कमरे से बाहर निकलता। बाकी समय शादी और बेटी के जन्म के बाद के फोटो एल्बम, वीडियो ही देखता रहता। मां यह बर्दाश्त नहीं कर पाई। बेटे काे डिप्रेशन में देख मां ने उसी काउंसलर का नंबर खोज निकाला,जिसने तलाक के दौरान काउंसलिंग की थी।

काउंसलर ने कहा कि यदि बेटे की पूर्व पत्नी ने कहीं शादी नहीं की है तो दोनों का रिश्ता फिर जुड़ सकता है। इसके बाद मां ने बहू को मनाने के प्रयास किए। काउंसलर से जानकारी लेने के बाद सास बहू और पोती को मनाने के लिए उनके घर पहुंच गई। उसने हर बात के लिए माफी मांगी। बाहर धरना तक दिया औरकहा- यदि कोरोना संक्रमण की वजह से उनकी मृत्यु हो जाती है तो बेटे को कौन संभालेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि तुमने भी दोबारा शादी शायद इसलिए नहीं की तुम भी बेटे को चाहती हो। इसके बाद महिला रो पड़ी। छह दिन के प्रयास के बाद आखिरकार महिला के परिजन भी मान गए और रविवार को दोनों की शादी हो गई और सादगी से बहू और पोती का गृहप्रवेश हुआ।

बेटी को माता-पिता मिल गए
सरिता राजानी, काउंसलर फैमिली कोर्ट के मुताबिक, तीन साल पहले तलाक रोकने के लिए काउंसलिंग की थी। हालांकि, उसके बाद भी उनका रिश्ता टूट गया था। पुरुष की मां ने मुझसे संपर्क किया। मैंने कानूनी जानकारी देने के साथ दोनों परिवार की फिर काउंसलिंग की। कोरोना के कारण हुए लॉक डाउन ने परिवार को फिर से बसा दिया। एक बेटी को माता-पिता दोनों मिल गए।



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Coronavirus Madhya Pradesh Cases Lockdown LIVE, Corona Virus Cases in MP Bhopal Indore Ujjain Gwalior Shivpuri (COVID-19) Death Toll Latest News and Updates


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कोविड-19 के खिलाफ देश की शीर्ष वैज्ञानिक अनुसंधान संस्था ‘काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च’ (सीएसआईआर) की 37 लैब में लॉकडाउन के दौरान वैज्ञानिक अलग-अलग शोध औरतकनीक तैयार करनेमें जुटेहैं। सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे ने कहा कि ये एक गलतफहमी है कि वैक्सीन ही काेराेना का एकमात्र इलाज है। यह दवा या वैक्सीन दोनों में से कुछ भी हो सकता है। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...

सवाल: सीएसआईआर की लैब लगातार कोविड-19 वायरस पर निगरानी कर रही है, अभी तक क्या पता चला है यानी क्या स्थिति है?
कोरोनावायरस के सर्विलांस के लिए हमारी तीन लैब-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (हैदराबाद), इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (नई दिल्ली) और इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (चंडीगढ़) में देश के अलग-अलग हिस्सों से मरीजों के 100 ज्यादा सैंपल से मिले वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग की गई। इनमें वायरस के अलग-अलग क्लैड (स्ट्रेंड) तो मिले लेकिन अभी तक भारत विशेष म्यूटेशन नहीं मिला है। जो क्लेड मिले हैं, उनसे पता चलता है कि वह यूरोप, मध्य एशिया, साउथ एशिया और पश्चिमी एशिया से भारत पहुंचा है।

मई के आखिरी तक एक हजार वायरस सैंपल के जीनोम सीक्वेंसिंग करने का लक्ष्य है। सीएसआईआर यह डेटा ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इंफ्लूूएंजा डेटा के साथ साझा करेगा। जीनोम सीक्वेंसिंग से न केवल वायरस की उत्पत्ति को समझने में मदद मिलती है बल्कि दवा या टीका बनाने की प्रक्रिया में यह मददगार साबित होता है।

सवाल: कोरोना का इलाज केवल वैक्सीन ही है?
ये एक गलतफहमी है कि वैक्सीन ही एकमात्र कोविड-19 का इलाज है। यह दवा या वैक्सीन दोनों में से कुछ भी हो सकता है। कोविड-19 पर शुरुआती शोध से हमारी समझ बढ़ रही है।

सवाल: क्या सीएसआईआर ने कोविड-19 की कोई दवा ढूंढ़ी या किसी दवा का ट्रायल चल रहा है?
सीएसआईआर ने दो दर्जन से ज्यादा दवाओं को कोरोना के इलाज में नए सिरे से उपयाेग के लिए चुना है। इनमें से माइक्रोबेक्टिरियम डब्ल्यू पर ट्रायल शुरू कर दिया है और इसके अलावा फेविपीराविर और एचसीक्यूएस के ट्रायल के लिए भी अनुमति मिली है। आज-कल में ही दो ट्रायल एक साथ एम्स दिल्ली, एम्स भोपाल और पीजीआई चंडीगढ़ में शुरू होंगे। फेविपीराविर का पेटेंट खत्म हो चुका है इसलिए यदि यह ट्रायल सफल रहा तो दवा सस्ती भी होगी।

चूंकि यह दवाएं पहले से इस्तेमाल में हैं, इनके मॉलीक्यूल सेफ हैं। इसलिए इनके लिमिटेड ट्रायल करने पड़ेंगे। एक-दो महीने में देश को खुशखबरी मिल सकती है। फिलहाल इन तीन दवाओं के अलावा आयुष की चार देसी औषधियों अश्वगंधा, मुलेठी, गुड़ची पीपली और आयुष-64 (एंटी मलेरिया ड्रग) पर भी ट्रायल शुरू किया जा रहा है।


सवाल: क्या सीएसआईआर वैक्सीन विकसित करने की दिशा में भी कुछ कर रहा है?
सीएसआईआई ने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी विकसित करने के प्रोजेक्ट को फंड किया है जिसमें नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस-पुणे, आईआईटी-इंदौर, प्रेडोमिक्स और भारत बायोटेक शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत ऐसा एंटीबॉडी तैयार होगा, जो कोविड-19 संक्रमण वाले मरीज के शरीर में वायरस का न्यूट्रिलाइज कर सकेगा।


सवाल: क्या यही प्लाज्मा ट्रीटमेंट है, जिसका सफल प्रयोग दिल्ली के अस्पताल में भी कुछ मरीजों पर किया गया?
नहीं, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी विकसित करना प्लाज्मा ट्रीटमेंट से अलग है। प्लाज्मा ट्रीटमेंट में किसी ठीक हो चुके मरीज का प्लाज्मा नए मरीज के शरीर में सीधे ही डाला जाता है। प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी वायरस को न्यूट्रीलाइज कर भी सकते हैं और नहीं भी। लेकिन मोनोक्लोनल वाले तरीके में वायरस को न्यूट्रीलाइज करने वाले एंटीबॉडी (इम्यून सेल) की पहचान करके उसे क्लोन करके तैयार किए जाते हैं। ये ज्यादा कारगार होता है। हालांकि प्लाज्मा ट्रीटमेंट में सीएसआईआर की इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कैमिकल बायोलॉजी (कोलकाता) में शोध जारी है और ट्रायल शुरू किए गए हैं।


सवाल: लैब उपकरणों या मेडिकल स्टाफ की सेफ्टी के लिए सीएसआईआर लैब में क्या योगदान किया?
सीएसआईआर के नेशनल एयरोस्पेस लैब ने मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के लिए पीपीई कवरऑल तैयार किया। बेंगलुरू की एक निजी कंपनी को इसकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की गई और वह प्रतिदिन 5 हजार कवरअॉल तैयार कर रहा है। 15 मई से इसका उत्पादन 30 हजार कवरऑल प्रतिदिन हो जाएगा। इसी लैब में बाइपैप वेंटीलेटर विकसित किया है। एक से दो दिन में इसकी टेक्नोलॉजी को मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है, तमाम कंपनियों ने पहले से ही इसे बनाने में अपनी दिलचस्पी दिखाई है।

तकनीकी ट्रांसफर में हमें बस एक दिन लगता है। कंपनियों को हो सकता प्रोडक्ट के उत्पादन से पहले उसका कच्चा माल जुटाने में दो-तीन हफ्ते लग जाए और चौथे हफ्ते तक प्रोडक्ट इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होने लगेगा। इसके अलावा चेेन्नई की लैब ने कोविड-19 की आपातकालीन स्थिति में महज 5 से 7 दिन में 100 से 200 बेड का आइसोलेशन वार्ड या अस्पताल विकसित करने की तकनीक व मॉडल विकसित किया है।

सवाल: पेपर बेस्ट टेस्टिंग किट महीनेभर में बाजार में होगी?
कोविड-19 की टेस्टिंग के लिए आरटीपीसीआर सबसे सटीक है। इसमें सीएसआईआर ने सैंपल पुलिंग की तकनीक विकसित की। एक बार में 1 की बजाय 5 टेस्ट से न केवल टेस्ट सस्ता होगा बल्कि इसकी सटीकता भी कम नहीं होती। दूसरा, हमने फेलुदा नामक पेपर बेस्ड टेस्टिंग किट विकसित की, जिसकी टेक्नोलॉजी टाटा संस को ट्रांसफर की जा चुकी है। आप उम्मीद कर सकते हैं कि अगले तीन से चार हफ्ते में वह बाजार में उपलब्ध होगा।



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सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे।


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हार्ट टू हार्ट की चाैथी कड़ी में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से कॉमेडियन कपिल शर्मा ने बात की। उन्हाेंने जीवन में सफलता से लेकर सकारात्मकता हासिल करने जैसे कई सवाल किए। उन्हाेंने श्री श्री से जाना कि माेह और प्रेम में क्या अंतर है। मुख्य अंश...

सवाल: हम जीवन में सकारात्मकता चाहते हैं, लेकिन नकारात्मक चीजें ही क्याें आकर्षित करती हैं?
नकारात्मकता से ऊपर उठना ही हमारे लिए चुनाैती है। बच्चाें में ऐसी बात नहीं हाेती। उनमें हमेशा सकारामकता अधिक हाेती है। बड़े हाेकर हम नकारात्मकता में दिलचस्पी लेने लगते हैं, लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं टिकती। हमें उसे नजरअंदाज कर देते हैं।
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यह लेनदेन की दुनिया है। किसी के पास देने के लिए है, ताे किसी काे लेना भी पड़ेगा। जिस तरह फिल्म में सब तरह के भूमिकाएं हाेती हैं, उसी तरह यह दुनिया है। ईश्वर फिल्म के डायरेक्टर हैं। वे साम्यवादी नहीं है, जाे सबकाे एक सा बना दें।
सवाल: क्या देर रात तक काम करना सही है?
रात में काम करने से काेई परेशानी नहीं, लेकिन जब भी जागें, 10 मिनट चिंतन, मनन, ध्यान करें। मैं इसे मेंटल हाइजीन कहता हूं। उठकर तुरंत काम में न लग जाएं। 10 मिनट अपने आपकाे देखें, परखें। इससे दिनभर उत्साह बना रहेगा।
सवाल: माेह और प्रेम एक ही है?
दाेनाें अलग-अलग हैं। प्रेम ताे हाेना चाहिए, लेकिन माेह नहीं। बेटी काे देखकर पिता में प्रेम उमड़े, ताे यह सही है। लेकिन यह साेचना कि 25-30 साल बाद वह ससुराल चली जाएगी, यह माेह है। इसे छाेड़ना चाहिए। अनुराग-प्रेम जीवन का अंग है, यह हाेना ही चाहिए।
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हंसाे, हंसाओ। मत फंसाे और मत फंसाओ।
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दुख व्यक्ति काे गहराई देता है। इससे आप दूसराें का दुख समझ पाते हाे। जब सब ठीक चलता है, ताे मुस्कुराने वाले लाखाें लाेग हाेते हैं, लेकिन जब सब काम बिगड़े, तब भी हिम्मत न हारने वाला, मुस्कुराने वाला व्यक्ति ही सफल है।



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Saturday, May 9, 2020

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम केयर्स फंड को लेकर एक बार फिर सरकार को घेरा है। शनिवार को राहुल ने कहा- पीएम केयर्स फंड में रेलवे जैसे कई पीएसयू से काफी पैसा जमा हुआ है। प्रधानमंत्री इसका ऑडिट कराएं और इसकी जानकारी जनता को दें।
यह पहली बार नहीं जब राहुल ने पीएम केयर्स फंड को मिले पैसे की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके पहले शुक्रवार को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीडिया से बातचीत की थी। तब भी उन्होंने यही मांग रखी थी।

दान और खर्च की जानकारी दें प्रधानमंत्री
शनिवार रात किए ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा, “पीएम केयर्स फंड में पीएसयू और रेलवे जैसी अहम सार्वजनिक सेवाओं ने काफी योगदान दिया है। ये जरूरी है कि प्रधानमंत्री इस फंड का ऑडिट कराएं। इसके अलावा उन्हें इस फंड में आए डोनेशन और इसके खर्च का हिसाब भी जनता के सामने लाना चाहिए।”

कैग नहीं करेगा जांच
राहुल सरकार से बार-बार पीएम केयर्स फंड को मिले दान और इसके खर्च का हिसाब मांग रहे हैं। दूसरी तरफ, इस तरह की खबरें हैं कि कोरोना के खिलाफ जंग में मदद के लिए बनाए गए इस फंड की जांच कैग (नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक) नहीं कर सकता। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कैग ने भी साफ कर दिया है कि चूंकि ये पैसा मुख्य रूप से डोनेशन से आया है, लिहाजा उसे इसके ऑडिट का अधिकार नहीं है। राहुल ने शुक्रवार को कहा था- पीएम केयर्स फंड का तुरंत ऑडिट कराया जाना चाहिए। देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि डोनेशन देने वाले लोग कौन हैं, और उन्होंने कितना दान दिया है।



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राहुल गांधी ने कहा है कि कोरोनावायरस से जंग के लिए बने पीएम केयर्स फंड को मिले डोनेशन की जांच होनी चाहिए और इसकी जानकारी जनता के सामने लानी चाहिए। (फाइल)


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