Friday, July 10, 2020

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मुंबई में 23 जून को कोरोना के 824 नए मामले आए थे। यह संख्या 40 दिन में सबसे कम रही। यहां कोरोना फैलने का एक नया ट्रेंड सामने आया है। अब कोरोना का कहर झुग्गी बस्तियों में कम हो रहा है, लेकिनपॉश इलाकों और हाउसिंग सोसाइटियों में पैर पसार रहा है।

संक्रमण फैलने की सबसे ज्यादा स्पीड बोरीवली के पॉश इलाकों में देखने को मिली। यहांं हर 16 दिन में मामले दोगुना होरहे हैं, जबकि कभी सबसे ज्यादा प्रभावित रहे धारावी में अब 76 दिनों में मामले दोगुनाहो रहे हैं। कोरोना टॉस्क फोर्स के प्रमुख डॉ. संजय ओक खुद कोरोना संक्रमित हो चुकेहैं। वे बताते हैं कि मुंबई में अब 13 दिन की जगह 37 दिन में मामले दोगुनाहो रहे हैं। हालांकि, पहले 7 दिनों में 5% की दर से पॉजिटिव केस बढ़ रहे थे। अब यह कम होकर 1.88% हो गया है। हालांकि, संजय मानते हैं कि अभी आईसीयू की मांग बढ़ रही है।

कोरोना से लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन पहल कर रहा है। मास्क पहनी हुई यह मूर्ति उसी पहल का हिस्सा है, जिसे बच्चा ध्यान से देख रहा है।

मुंबई मेंआईसीयू और वेंटिलेटर्स करीब-करीबफुल
मुंबई में 1219 आईसीयू हैं, जिसमें से सिर्फ 72 खाली हैं। वहीं वेंटिलेटर 701 है, जिसमें से सिर्फ 23 खाली हैं। मुंबई में अब तक 46 पुलिसकर्मी और नगर निगम के 70 कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। बीएमसी ने कंटेंनमेंट जोन की संख्या बढ़ाकर 770 कर दी है। 5932 से अधिक रिहायशी इमारतें और चॉल सील की गई हैं।

कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए प्रशासन ने बोरीवली, कांदीवली, मलाड और दहीसर इलाकों में लॉकडाउन लगाने का प्रस्ताव दिया है। इन इलाकों की आबादी लगभग 23 लाख है। बोरीवली रेड जोन में है। इसके पास कादहिसर ऑरेंज जाेन में है। श्री विश्वकर्मा चेरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से इन इलाकों में राहत सामग्री बांट रहे समाज सेवक रामा विश्वकर्मा कहते हैं कि बोरीवली में 7 दिन में 454 और दहिसर में 289 कोरोना संक्रमित मरीज बढ़े हैं। बोरीवली में 16 और दहिसर में 21 दिन में मरीजों की संख्या दोगुनी हो रही है।

बाेरीवली के राकांपा नेता मनीष दुबे कहते हैं कि लोगों की लापरवाही की वजह से यह इलाका रेड जोन में आ गया है।लॉकडाउन खुलते ही लोग सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए। वहीं भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया आरोप लगाते हैं कि कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच नहीं की जा रही है। मरीजों को बेड के लिए इधर-उधरभटकना पड़ रहा है। रोजाना 5-10 लोगों की मौत घरों में हो रही है क्योंकि उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ही नहीं मिल रहे हैं।

मुंबई में 1219 आईसीयू हैं, जिसमें से सिर्फ 72 खाली हैं। वहीं वेंटिलेटर 701 है, जिसमें से सिर्फ 23 खाली हैं।

पूर्वी उपनगर में युवा ब्रिगेड एसोसिएशन के सलाहकार डॉ. बाबूलाल सिंह बताते हैं कि मुलुंड के इंद्रानगर और रामगढ़ जैसे स्लम इलाकों में 95% संक्रमित ठीक होकर घर आ गए हैं। मगर संक्रमण अब मुलुंड के पॉश इलाकों की बिल्डिंग में फैल रहा है। वजह शायद यह गलतफहमी है किकोरोना सिर्फ स्लम में रहने वालों को होगा। लोग चोरी-छिपे सोसायटी के ग्राउंड फ्लोर पर इकट्‌ठा होते रहे और मौका मिलने पर इधर-उधर घूमने निकलने लगे।

नतीजा यह हुआकि मुलुंड में जहां अप्रैल में सिर्फ 13 संक्रमित थे वहीं 13 जून कोसंख्या 1,454 तक जा पहुंची और अब 1870 केस हो गए हैं। यानी पिछले सात दिन में ही 416 नए संक्रमित मिले हैं। दूसरी तरफ मलाड में हालात कुछ सुधरे हैं। भाजपा नेता योगेश वर्मा बताते हैं कि मलाड कुछ दिन पहले तक रेड जोन में था। अभी-अभी ऑरेंज जोन में आया है। यहां की घनी आबादी वाले झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में कुरार गांव, अप्पा पाड़ा, संतोषनगर, तानाजी नगर और सोमवारी बाजार में लॉकडाउन का सख्ती से पालन न होने की वजह सेमरीजों की संख्या बढ़कर 3720 हो गई है, जबकि अप्रैल में यहां सिर्फ 59 संक्रमित थे।

मुंबई में मिशन जीरो, घर-घर स्क्रीनिंग
मुंबई नगर पालिका के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने कर्मचारियों को ‘मिशन जीरो’ लक्ष्य दिया है। इसके तहत घर-घर स्क्रीनिंग की जाएगी। इस मिशन के तहत डॉक्टर, नर्स और दवाइयों के साथ 50 मोबाइल डिस्पेंसरी वैन मुलुंड, भांडुप, अंधेरी, मलाड, बोरीवली, दहिसर और कांदिवली में जाकर लोगों की जांच करेंगे। चहल ने भास्कर को बताया कि पिछले सप्ताह मुंबई जिले में कोरोनाकी ग्रोथ रेट 1.88% रही है। जबकि रिकवरी रेट 50% है। यही वजह है कि अब ‘मिशन जीरो’ के तहत मुंबई को कोरोना मुक्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।हालांकि वे बताते हैं कि मानसून की वजह से चुनौतियां बढ़ गई हैं।

मुंबई में अभी लोकल ट्रेनें 340 फेरे लगा रही हैं। इनसे रोजाना करीब 1 लाख 20 हजार लोग यात्रा कर रहे हैं।

लाइफलाइन के पहिए थमे, लेकिन 2786 बसें दौड़ रहीं
कोरोना ने मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों पर भी असर डाला है। मध्य रेलवे में कोरोना महामारी से पहले लोकल ट्रेनें तकरीबन 1774 फेरे लगाती थीं, जिनसे रोजाना 43 लाख यात्री सफर करते थे। लेकिन फिलहाल ये लोकल ट्रेनें सिर्फ 200 फेरे लगा रही हैं, जिनमें लगभग 70-80 हजार लोग सफर कर रहे हैं।

इसी तरह पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों के 1300 फेरे लगते थे, जिससे करीब 35 लाख लोग सफर करते थे। लेकिन इन दिनों 140 फेरे ही लगा रही हैं। इनमें 40-45 हजार लोग रोजाना सफर कर रहे हैं।

पहले जहां 1200 यात्री क्षमता वाले एक डिब्बे में 2000 लोग सफर करते थे, वहीं अब सोशलडिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सिर्फ 700 को ही सफर की इजाजत दी जा रही है। हालांकि, लोकल बसों पर अब कम असर देखने मिल रहाहै। मुंबई मनपा के बेडे में यूं तो साढ़े तीन हजार से अधिक बसें हैं। इनमें से 2786 बसें चल रही हैं। इनमें रोजाना लगभग ढ़ाई लाख लोग सफर कर रहे हैं। 9 जून से अब तक बेस्ट की बसों से कुल 7.78 लाख लोगों ने सफर किया हैजबकि मेट्रो अभी शुरू नहीं की गई है।

मुंबई की लोकल ट्रेनों में यात्री सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए यात्रा कर रहे हैं।

दुकानें, मॉल और सिनेमा हॉलको रोजाना 500 करोड़ का नुकसान
फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के विरेन शाह के मुताबिक, लॉकडाउन से अब तक मुंबई की दुकानें, मॉल और सिनेमा हॉलके बंद होने से रोजाना 500 करोड़ रुपए से ज्यादाका नुकसान होने का अनुमान है। जहां तक दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के खुलने का मामला हैतो शाह के मुताबिक, मुंबई की कुल साढ़े तीन लाख दुकानों में से महज 30% ही रोजाना खुल रही हैं। इन प्रतिष्ठानों में सोशल डिस्टेंसिंग का सख्त पालन हो रहा है।

मुंबई के झवेरी बाजार में कुल तीन हजार के करीब ज्वेलरी की दुकानें हैं, इनमें से इन दिनों एक हजार दुकानें ही खुल रही हैं। सरकारी ऑफिसों की बात करें, 25 से 50%कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि प्राइवेट दफ्तरों में यह संख्या 10-15% है।

मुंबई की कुल साढ़े तीन लाख दुकानों में से महज 30% ही रोजाना खुल रही हैं।

मायानगरी में बड़ी फिल्मों की शूटिंग नहीं
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) और सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा)के मुताबिक मायानगरी में इन दिनों बड़ी फिल्मों की शूटिंग नहीं हो रही। लॉकडाउन के दौरान एसोसिएशन ने 50 लाख काबीमा कवर, 8 घंटे की शिफ्ट और कर्मचारियों का भुगतान शूटिंग खत्म होते ही उसी दिन करने जैसी मांगें रखी थीं, जो अब तक पूरी नहीं हुई है। इसलिए दोनों एसोसिएशन मांगें पूरी होने तक शूटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे।

12 लाख प्रवासी घर गए, अब 15 हजार रोजाना लौट रहे हैं
महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिककोरोना और लॉकडाउन की वजह से मुंबई से करीब 12 लाख से अधिक लोगों ने पलायन किया था। इन दिनों मुंबई में रोजाना करीब 11 से 15 हजार प्रवासी मजदूरों की वापसी हो रही है। इसमें राज्य के अलग-अलग जिलों के मजदूरों के अलावा यूपी-बिहार के लोग भी शामिल हैं।

केंद्र सरकार का अनुमान था कि मुंबई में मई के आखिरी सप्ताह में 75 हजार तक कोरोना के केस होंगे लेकिन मई में यह आंकड़ा 39 हजार 500 रहा और 22 जून को 67 हजार पार कर गया है। यानी मामले उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं। इसलिए अब मुंबई के अस्पतालों में पहले की तरह भीड़ नहीं दिख रही है।

इन दिनों मुंबई में रोजाना करीब 11 से 15 हजार प्रवासी मजदूरों की वापसी हो रही है।

मुंबई का मनपा अस्पताल जबरन कोरोना मरीजों को प्राइवेट अस्पताल भेज रहाहै। क्योंकि, प्राइवेट अस्पतालों में एक हजार नए बेड उपलब्ध होने की बात उन्हें दिखानी है। इन प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होने वाले सामान्य मरीजों से मनमाना बिल वसूला जा रहा है। इसके पीछे वजह है यह है किप्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ बेड चार्ज ही सरकार ने तय किया है। बड़े अस्पताल मनमाने ढंग से दूसरे चार्ज लगाकर औसतन एक मरीज का बिल 5 लाख रुपए तक रहे हैं। यहां 26 अस्पतालों के खिलाफ 134 शिकायतें आई हैं।



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कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके विकास कृष्ण यादव समेत समेत नीरज गोयत और सतीश कुमार पर कोरोना नियम तोड़ने का आरोप लगा है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने क्वारैंटाइन नियम तोड़ने को लेकर इन एथलीट्स के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

सतीश ने एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता है, जबकि नीरज प्रोफेशनल बॉक्सर हैं। तीनों पर आरोप है कि उन्होंने पटियाला के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (एनआईएस) में सोशल डिस्टेंसिंग नियम तोड़ते हुए साथी खिलाड़ियों से घुल मिलकर बात की।

सतीश और विकास ओलिंपिक कोटा हासिल कर चुके
साई ने कहा, ‘‘मामले की जांच शुरू कर दी है। दोषी अधिकारी और खिलाड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’ विकास 69 किग्रा और सतीश 91 किग्रा कैटेगरी में पहले ही टोक्यो ओलिंपिक के लिए कोटा हासिल कर चुके हैं। कोरोना के बीच ओलिंपिक की तैयारियों को लेकर बॉक्सिंग कैंप 1-2 हफ्ते पहले ही शुरू हुआ है। इसमें ओलिंपिक क्वालिफाई कर चुके 7 दूसरे बॉक्सरों को भी क्वारैंटाइन में रखा गया है।

7 दिन रहना होता है क्वारैंटाइन
साई ने कहा, ‘‘कोरोना जांच के बाद ही खिलाड़ियों को कैंपस के होस्टल में एंट्री की अनुमति होती है। इसके बाद हमारी नई गाइडलाइंस के तहत खिलाड़ियों को होस्टल में ही 7 दिन क्वारैंटाइन में रहना होता है। छठे दिन कोरोना टेस्ट होता है। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही खिलाड़ियों को साथियों के साथ मिलने की अनुमति होती है।’’

तीनों खिलाड़ियों का कोरोना टेस्ट निगेटिव
गोयत ने कहा, ‘‘मैं और विकास होस्टल के मैस में नहीं गए थे। हमारा कोरोना टेस्ट निगेटिव आने के बाद हमने एनआईएस एक्जक्यूटिव डायरेक्टर राज सिंह बिश्नोई की परमिशन के बाद ही कैंपस में गए थे। सिर्फ सतीश एक बार मैस में गया था, क्योंकि उसे इसके बारे में पता नहीं था। इसके बाद कुछ वेटलिफ्टर और एथलीट्स साथियों ने इसकी शिकायत की। सतीश की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है।’’



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भारतीय बॉक्सर सतीश कुमार और विकाश कृष्ण का कोरोना टेस्ट निगेटिव आया है। दोनों पर सोशल डिस्टेंसिंग नियम तोड़ने का आरोप है। -फाइल फोटो


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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के चीफ टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस ने कोरोनावायरस कंट्रोल को लेकर मुंबई के धारावी की मिसाल दी। उनके मुताबिक, धारावी में स्थिति काफी खराब थी, लेकिन तेजी से कार्यवाही करने से कंट्रोल हो गई। गेब्रेयेसस के मुताबिक, कम्युनिटी एंगेजमेंट, टेस्टिंग, ट्रेसिंग, आइसोलेटिंग और सभी बीमारों के इलाज पर फोकस कर कोरोना की चेन को तोड़ना और संक्रमण को खत्म करना संभव है। यहां जानते हैं कि मुंबई के धारावी में आखिर किन तरीकों का इस्तेमाल करके संक्रमण पर काबू पाया गया।

ट्रिपल टी प्लान रहा सबसे कारगर
6 लाख से ज्यादा आबादी वाली एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी में कोरोना से लड़ने के लिए बीएमसी की ओर से ट्रिपल टी यानी ट्रेस-टेस्ट-ट्रीटमेंट के फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया। इसका इस्तेमाल कर दक्षिण कोरिया लगभग पूरी तरह से कोरोना मुक्त हो चुका है।

चेस द वायरस: एक्शन प्लान
धारावी मुंबई के जी-नॉर्थ वॉर्ड में आता है। यहां के असिस्टेंट कमिश्नर किरण दिघावकर के मुताबिक, धारावी के लिए चेस द वायरस नाम से एक एक्शन प्लान बनाया गया था। इसमें घने इलाकों की स्क्रीनिंग, फीवर क्लिनिक की स्थापना, सर्वे और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शामिल है।

ट्रेस कर लोगों को क्वारैंटाइन किया गया
बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने हर झुग्गी में जाकर लोगों की स्क्रीनिंग की। लक्षण वाले लोगों को आइसोलेट करना और टेस्ट करना शुरू किया। यहां के स्कूल, कॉलेज को क्वारैंटाइन सेंटर बनाया गया। यहां लगातार डॉक्टर, नर्स और 3 टाइम का खाना दिया गया। अब तक तकरीबन 12 हजार लोगों को इंस्टिट्यूशनल क्वारैंटाइन किया गया है। कुल 12 क्वारैंटाइन सेंटर बनाए गए थे, उनमें से 3 मरीज कम होने के बाद बंद हो गए हैं।

तकरीबन ढाई हजार लोगों की टीम यहां तैनात थी
धारावी के लिए बीएमसी 2450 लोगों की एक टीम तैनात की थी। जो लोगों को ट्रेस करने, टेस्ट करने और ट्रीटमेंट करने का काम कर रही थी। इसमें इसमें डॉक्टर, नर्स के साथ-साथ सैनिटाइजेशनवाले और सफाईकर्मी भी शामिल थे। इसके साथ 1250 लोगों की कॉन्ट्रेक्ट मेडिकल टीम भी यहां जुटी हुई थी। ये ज्यादातर लोगों की स्क्रीनिंग का काम करते थे।

टॉयलेट पर फोकस
संक्रमण बढ़ने का सबसे बड़ा करण यहां के सार्वजनिक शौचालय को माना गया। जिसे तकरीबन 80% लोग इस्तेमाल करते हैं। यहां तकरीबन 450 परमानेंट टॉयलेट्स हैं। बीएमसीकर्मियों ने इन्हें दिन में 5 से 6 बार सैनिटाइज करना शुरू किया। हर टॉयलेट के बाहर हैंडवाश रखा जाता था। प्राइवेट कंपनियों की सहायता से यहां फ्री में हाथ धोने का साबुन बांटा गया।

पहले दिन में आते थे 100 से ज्यादा केस, अब सिर्फ 2 केस
एक अप्रैल को धारावी में पहला मामला सामने आया था। इसके बाद हर हफ्ते करीब 100 केस सामने आए। अब यह संख्या बिल्कुल निचले स्तर पर आकर 2 हो गई है।

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1.डब्ल्यूएचओ चीफ ने मुंबई के धारावी का उदाहरण देकर कहा- तेजी से कार्यवाही कर संक्रमण को नियंत्रित करना संभव है
2.झुग्गियों की बजाय पॉश इलाकों में पैर पसार रहा कोरोना: बोरीवली में 16 दिन और धारावी में 76 दिन में दोगुना हो रहे कोरोना के केस



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एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी में पहला मामला एक अप्रैल को आया था। इसके बाद के हफ्तों में हर दिन करीब 100 मरीज मिले। अब यह संख्या 2 हो गई है। यहां लगातार सैनिटाइजेशन किया गया। (फाइल)


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ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने कोरोनावायरस के इलाज के लिए त्वचा से संबंधित बीमारी (सोरायसिस) के इटोलीजुमैब इंजेक्शन के सशर्त इस्तेमाल को मंजूरी दी है। इसका इस्तेमाल उन पेशेंट्स पर किया जा सकेगा जो संक्रमित होने के बाद मेडिकल टर्म एआरडीएस से पीड़ित हैं। इस स्थितिमें सांस संबंधी दिक्कतें भी होती हैं।

क्या फायदा होगा
ड्रग रेग्युलेटर डॉक्टर वीजी सोमानी ने शुक्रवार को इस इंजेक्शन के इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी। यानी अब इसका इस्तेमाल कोविड-19 के पेशेंट्स के इलाज में किया जा सकेगा। एआरडीएस के मरीजों को लंग्स में दिक्कत होती है। इसकी वजह से सांस लेना मुश्किल हो जाता है और कई बार बहुत तेज जलन भी होती है। इटोलीजुमैब इंजेक्शन बायोकॉन लिमिटिड द्वारा तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल प्लेग या सोरायसिस के इलाज में किया जाता है। पिछले साल ही इसे अप्रूवल मिला था।

भारत में कारगर साबित होगा
डीसीजीई के एक अफसर ने न्यूज एजेंसी से कहा- भारत में कोविड-19 के मरीजों पर इस इंजेक्शन का परीक्षण किया गया था। इसके नतीजे काफी अच्छे मिले। हमारी टीम में पल्मोनॉलिजिस्ट, फॉर्मालॉजिस्ट और एम्स के मेडिसिन एक्सपर्ट शामिल थे। हालांकि, डॉक्टरों को इसका इस्तेमाल करने के पहले मरीज को इसकी जानकारी देनी होगी। इसके लिए उसकी मंजूरी भी लेनी होगी।

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ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीई) ने कोरोनावायरस के इलाज के लिए इटोलीजुमैब इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है। इसका इस्तेमाल उन पेशेंट्स के इलाज में किया जाएगा जिन्हें सांस संबंधी दिक्कत है। (प्रतीकात्मक)


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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के चीफ टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस का कहना है कि कोरोनावायरस को कंट्रोल करना अब भी संभव है। उन्होंने इटली, स्पेन, दक्षिण कोरिया और मुंबई के धारावी का उदाहरण देते हुए कहा कि इन जगहों पर स्थिति काफी खराब थी, लेकिन तेजी से कार्यवाहीकरने से कंट्रोल हो गई।

'जहां पाबंदियां हट रहीं वहां संक्रमण बढ़ रहा'
डब्ल्यूएचओ चीफ का कहना है कि कम्युनिटी एंगेजमेंट, टेस्टिंग, ट्रेसिंग, आइसोलेटिंग और सभी बीमारों के इलाज पर फोकस कर कोरोना की चेन को तोड़ना और संक्रमण को खत्म करना संभव है। हर देश की कुछ लिमिट हैं। जहां पाबंदियां हट रही हैं, वहां संक्रमण के केस बढ़ रहे हैं। ऐसे में सभी लोग एकजुटता और तेजी दिखाएं तो फायदा हो सकता है।

'भीड़ वाले इलाकों में संक्रमण रोककरदूसरे लॉकडाउन से बच सकते हैं'
दूसरी तरफ डब्ल्यूएचओ के इमरजेंसी प्रोग्राम के हेड डॉ. माइक रेयान का कहना है कि मौजूदा हालात में कोरोनावायरस को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल लग रहा है। हालांकि, भीड़ वाले इलाकों में संक्रमण को रोककर कोरोना की दूसरी लहर के सबसे खराब दौर और फिर से लॉकडाउन जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।

दुनिया के 196 देशों में दिसंबर 2019 से अब तक कोरोना के 1.26 करोड़ केस आ चुके। अब तक 5.59 लाख लोगों की मौत हो चुकी। भारत में 8.21 लाख केस आए और 22 हजार लोगों की मौत हो गई।



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शुक्रवार का यह फोटो दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल का है। मेडिकल स्टाफ कोरोना संदिग्ध मरीज को ले जाते हुए।


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कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के नौगाम सेक्टर में सुरक्षाबलों ने 2 आतंकी मार गिराए। ये एलओसी से घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। जवानों ने इनके पास से दो एके-47 और भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद किया है। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि जवानों ने शनिवार तड़के नौगाम सेक्टर में संदिग्ध मूवमेंट देखा। इसके बाद कार्रवाई की।

सुरक्षाबलों ने इस महीने में अब तक 6 आतंकी मार गिराए हैं। इससे पहले पुलवामा जिले के गोसू इलाके में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया था। वहीं, एक जवान भी शहीद हो गया था। 4 जुलाई को कुलगाम के अर्राह इलाके में हिजबुल मुजाहिदीन के 2 आतंकी मारे गए थे। 2 जुलाई को श्रीनगर के मालबाग में सुरक्षाबलों ने आईएस के 1 आतंकी को ढेर किया था।

पिछले महीने 18 एनकाउंटर में 51 आतंकी मारे गए

  • जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से आतंकी घुसपैठ के अलर्ट के बाद सुरक्षाबलों ने मई से सर्च ऑपरेशन छेड़ रखा है। पिछले महीने 18 एनकाउंटर में 51 आतंकी मारे गए।
  • कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने पिछले दिनों कहा था कि श्रीनगर में आतंकियों का आना-जाना जारी है। वे इलाज करवाने, फंड जुटाने और मीटिंग करने के लिए श्रीनगर आते हैं, लेकिन हम कोशिश करेंगे कि वे यहां बेस नहीं बना पाएं। आतंकियों के आने की खबर मिलने पर एनकाउंटर होते रहेंगे।


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army elimination of two terrorists Two AK-47 and warlike stores recovered at North Kashmir in Kupwara


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जापान दुनिया के सबसे बेहतरीन स्टील्थ फाइटर जेट्स बनाने जा रहा है। यह स्टील्थ फाइटर जेट्स दो इंजन वाले होंगे और अगले कुछ साल में तैयार हो जाएंगे। डिफेंस मिनिस्ट्री ने इस प्रोजेक्ट की जानकारी संसद को दे दी है। माना जा रहा है कि चीन की तरफ से सेनकाकू आईलैंड और दूसरे विवादों में जापान को सैन्य टकराव की आशंका है। लिहाजा, वह अपनी तरफ से तैयारियां पुख्ता करने जा रहा है।

इस बीच, अमेरिका और जापान के बीच एफ-35 फाइटर जेट्स की डील भी हो गई है। अमेरिका के इन फाइटर जेट्स को अपनी कैटेगरी में बेहद खतरनाक माना जाता है।

सिक्सथ जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट्स
जापान के पास फिलहालअमेरिका में बने 100 एफ-2 फाइटर जेट्स हैं। वह अब अपनी एयरफोर्स को नए सिरे से तैयार कर रहा है। उसका पूरा फोकस चीन से निपटने पर है। जापान के पास टेक्नोलॉजी भी है और दूसरे रिर्सोसेस भी। लिहाजा, उसने स्टील्थ फाइटर प्रोजेक्ट को तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2031 तक जापान स्टील्थ फाइटर जेट्स की पूरी फ्लीट तैयार कर लेगा और सहयोगी देशों को इन्हें बेच भी सकेगा।

अमेरिका की बराबरी पर आएगा
स्टील्थ फाइटर जेट्स के मामले में अमेरिका इस वक्त दुनिया में सबसे आगे है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही इस पर काम शुरू कर चुका है। अब जापान भी इसी नक्शेकदम पर चल पड़ा है। उसने शुरुआती बजट 6100 लाख डॉलर रखा है। इसके अलावा वो मिलिट्री ड्रोन प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ाएगा।

स्टील्थ में ये खूबियां हो सकती हैं
सीएनएन के मुताबिक, जापान के स्टील्थ फाइटर जेट्स में मिसाइल इस तरह से फिट होंगी जो एक साथ दुश्मन के कई एयरक्राफ्ट्स को निशाना बना सकें। इसे इंटीग्रेटेड फायर कंट्रोल नेटवर्क शूटिंग कहते हैं। अमेरिका के एफ-22 स्टील्थ फाइटर जेट्स से बेहतर हथियार रखने की कैपेसिटी होगी। यह बेहद तेजी से पलट सकेंगे और उसी रफ्तार से निशाना भी लगा सकेंगे। डिफेंस मिनिस्टर तारो कोनो ने पिछले महीने साफ कहा था कि अब चीन से मुकाबले के लिए जापान को कमर कस लेनी चाहिए।

एफ-35 भी खरीदेगा
जापान ने चीन से मुकाबले की तैयारी भी शुरू कर दी है। उसने काफी महंगे लेकिन, बेहद खतरनाक अमेरिकी एफ-35 फाइटर जेट्स को खरीदने की प्रॉसेस पूरी कर ली है। जापान सरकार ने 100 एफ-35 खरीदने की डील कर ली है। अगले महीने पहला फाइटर जेट मिल सकता है। इनके अलावा जापान अमेरिका से ही 42 एफ-35बी जेट्स भी खरीदेगा। यह वर्टिकल लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला फाइटर एयरक्राफ्ट है। जापान की नेवी के लिए इसकी काफी अहमियत है।



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यह फोटो जापान की डिफेंस मिनिस्ट्री के हवाले से सीएनएन ने जारी की है। जापान स्टील्थ फाइटर जेट्स बनाने जा रहा है। उसका डिजाइन कुछ इसी तरह का होगा।


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