Saturday, August 22, 2020

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चीन भारतीय सीमा से करीब 90 किमी दूर मिसाइलें तैनात करने की तैयारी कर रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन कैलाश पर्वत के पास पवित्र मानसरोवर झील किनारे जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की साइट बना रहा है। साइट का निर्माण अप्रैल में शुरू हुआ था, जो अब लगभग पूरा होने वाला है।

सूत्रों के मुताबिक, यह चीन की साजिश है। वह कैलाश-मानसरोवर जैसे धार्मिक स्थान को मिलिट्री से घेरकर पर्वत की पवित्रता को खत्म करना चाहता है। वह लद्दाख वाले तनाव के बाद ऐसा कर रहा है। चीन ने भारत द्वारा लिपुलेख में सड़क बनाए जाने के विरोध में भी इस साइट का निर्माण कराया है।

भारत ने 17 हजार फीट की ऊंचाई पर 80 किमी लंबी सड़क बनवाई थी

भारत ने 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित कैलाश मानसरोवर जाने के लिए लिपुलेख के पास 80 किमी लंबी सड़क बनवाई थी।सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से पता चला है कि चीन मानसरोवर झील के किनारे एचक्यू-9 मिसाइल तैनात करने की तैयारी में है। ये मध्यम रेंज की मिसाइलें होंगी। चीन यहां एटी-233 रडार सिस्टम भी लगा रहा है।

इससे मिसाइल का फायर सिस्टम काम करता है। इसके अलावा टाइप 305बी, टाइप 120, टाइप 305ए, वाईएलसी-20 और डीडब्ल्यूएल-002 रडार सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। ये सभी टारगेट को ट्रैक कर उन्हें खत्म करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो चीन की वायुसेना चाहती है कि वह भारतीय सीमाओं पर निगरानी रख सके और भारतीय वायुसेना को जवाब दे सके। इसलिए भारतीय धार्मिक आस्थाओं को चोट पहुंचाने के लिए चीन ऐसी हरकतें कर रहा है। लिपुलेख को लेकर इस समय भारत और नेपाल के बीच तनाव चल रहा है। चीन इसी तनाव का फायदा उठाना चाहता है।

ट्विटर यूजर का दावा-100 किमी क्षेत्र में चीनी सेना की सक्रियता बढ़ी

चीन के ओपन सोर्स इंटेलिजेंस ट्विटर यूजर @detresfa ने एक सैटेलाइट इमेज ट्वीट की है। लिखा- ‘लिपुलेख में ट्राई-जंक्शन एरिया में मिसाइल ठिकानों का निर्माण कर रहा है। वहां सैनिकों की तैनाती है। यहां 100 किमी के क्षेत्र में चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की सक्रियता भी बढ़ी है। पीएलए ने यहां पहले तीर्थयात्रियों के लिए छोटा सा अस्थाई रहवास बनाया था। यहां होटल्स और घर बने हुए हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में यहां एक हाईवे, नए होटल्स और नई इमारतें बन चुकी हैं।’

वियतनाम ने भारत से कहा- दक्षिण चीन सागर में चीन के बमवर्षक विमान तैनात

चीन ने दक्षिण चीन सागर के पारासेल आईलैंड्स में बमवर्षक विमान एच-6 जे तैनात किए हैं। वियतनाम ने इसकी सूचना भारत को दी है। यह मुद्दा विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से वियतनाम के राजदूत फाम सान्ह चाउ की मुलाकात के दौरान उठा। दोनों तेल-प्राकृतिक गैस निगम के तेल खोज प्रोजेक्ट की मौजूदगी वाले जलक्षेत्र पर चर्चा कर रहे थे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ट्वीट कर बैठक की जानकारी दी। चीन ने इसी महीने आइलैंड्स में ये विमान तैनात किए। चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक, चीन ने ऐसा इसलिए किया ताकि उसकी सेना इस क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य गतिविधियों पर काबू कर सके। वियतनाम पारासेल आइलैंड्स पर अपना दावा करता है।



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China, being the site of missiles on the banks of the holy Mansarovar lake, these missiles are capable of land-to-air strikes.


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एमएस धोनी ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया है। धोनी से जानिए- कैसे विपरीत हालातों में भी वे मन को शांत रख पाते हैं-

‘मुझे भी हर आम इंसान की तरह परेशानी होती है, चिढ़ भी आती है, खासकर, तब ज्यादा जब चीजें अपने पक्ष में नजर नहीं आतीं। लेकिन मैं हमेशा सोचता हूं कि क्या ये फ्रस्ट्रेशन हमारी टीम के लिए अच्छा है? ऐसे हालात में मैं यह सोचने की कोशिश करता हूं कि क्या किया जाना चाहिए।

गलती किसी से भी हो सकती है...किसी एक से हो सकती है...पूरी टीम से हो सकती है कि हमारा जो प्लान था, चीजें उसके मुताबिक हो नहीं पाईं। ऐसे में सोचने की कोशिश करता हूं कि फिलहाल क्या बेहतर हो सकता है। फ्रस्ट्रेशन, चिढ़, गुस्सा, निराशा...इनमें से कुछ भी रचनात्मक नहीं है।

इसलिए मैं खुद को समझाता हूं कि इन सब भावनाओं से ऊपर वो काम है जो इस वक्त मैदान पर किया जाना है। ऐसे में मैं यह भी सोचने लगता हूं कि मुझे किस खिलाड़ी को क्या जिम्मेदारी देनी चाहिए, किस योजना पर काम करना चाहिए... इससे मुझे खुद पर काबू पाने में मदद मिलती है।

मैं खुद को इतना व्यस्त कर लेता हूं कि भावनाएं हावी नहीं हो पातीं। शायद इसीलिए आपको मैं मैदान पर ‘कूल’ महसूस होता हूं। मैं मानता हूं कि इंसानों में कई तरह की भावनाएं होती हैं और भारतीय तो भावनाओं में कुछ ज्यादा ही बहते हैं। इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि मेरे मन में भावनाएं नहीं आती हैं।

लेकिन मैं हर वक्त कोशिश करता हूं, इन भावनाओं पर नियंत्रण हासिल करने की, क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि अगर मैं भावनाएं काबू कर पाया तो ही ज्यादा रचनात्मक हो पाऊंगा।

क्रिकेट मैं सिर्फ खुश रहने के लिए खेलता था, बाद में लक्ष्य बनाया

क्रिकेट जब मेरे जीवन में आया था, तो मैं इसे सिर्फ मज़े के लिए खेलता था। मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि मैं देश के लिए खेलूंगा। मैं तो सिर्फ खुश रहने और अपने स्कूल की टीम के लिए खेलता था। फिर जब वहां अच्छा खेलने लगा तो आगे देखा... अंडर सिक्सटीन नजर आया... उसे खेला।

फिर जिले की टीम का हिस्सा बना तो राज्य के लिए खेलने की इच्छा भी जागी। धीरे-धीरे भारतीय टीम तक पहुंच गया। मैंने छोटे-छोटे लक्ष्य बनाए और उन्हें हासिल करके इंडियन क्रिकेट टीम तक पहुंच गया।

मुझे लगता है छोटे लक्ष्य हासिल करना ज्यादा आसान और मजेदार है, बड़े लक्ष्य सबको परेशान कर देते हैं। क्रिकेट को मैं जीवन समान ही मानता हूं, जिसमें कुछ तय नहीं होता और थोड़ा लक तो होता ही है। कितना रोचक है कि आप क्रिकेट मैच को एक सिक्का उछालने से शुरू करते हैं, जो किसी के भी पक्ष में गिर सकता है।

परिवार की चिंता मैं दूर कर चुका था

ओपनर के लिए पहली गेंद से ही अनिश्चितता शुरू होती है। तीसरे नंबर का बल्लेबाज दूसरे ओवर में पिच पर आ सकता है और 25वें ओवर में भी। मेरे मामले में मैं मानता हूं कि अनिश्चितता कुछ कम रही क्योंकि भारतीय परिवार की सबसे बड़ी चिंता को मैं पहले ही दूर कर चुका था।

रेलवे की नौकरी के बाद मेरे घरवाले निश्चिंत थे कि क्रिकेट में इसका कुछ नहीं हुआ तो ये तो कर ही लेगा। लेकिन इसकी नौबत ही नहीं आई। मैं हर आने वाली कमियों को स्वीकारता चला गया। मैं अपने आप से ईमानदार रहा। जब तक आप खुद से ईमानदार नहीं रहेंगे, दूसरों से कैसे रह सकते हैं।

इससे आपको अपनी कमियां स्वीकारने में परेशानी नहीं होती। भले ही आप अच्छे खिलाड़ी नहीं हो, अच्छे इंसान नहीं हो लेकिन कमियों को स्वीकार करेंगे तो उन्हें दूर करने की कोशिश भी उतनी ही ईमानदारी से करेंगे। आप अपने परिवार से मदद मांगेंगे, सीनियर्स से या दोस्तों से मदद लेंगे।

मैंने ऐसा ही किया और आगे बढ़ता गया। मेहनत, किस्मत, सब्र, समर्पण...सब अपनी जगह ठीक है लेकिन मेरा मानना है कि खुद से ईमानदार होना सबसे अहम है। अगर मूल रूप से आप ईमानदार नहीं हैं तो आप चीजों को खुद ही उलझाते चले जाएंगे। ईमानदारी से ही मैं वहां पहुंच पाया जिसकी कल्पना मुझे खुद भी नहीं थी।’

मेरी सफलता का मंत्र

मेहनत, किस्मत, सब्र, समर्पण ... सब अपनी जगह है लेकिन मेरा मानना है कि खुद से ईमानदार होना सबसे अहम है। अगर मूल रूप से आप ईमानदार नहीं हैं तो आप चीजों को खुद ही उलझाते चले जाएंगे।

मास्टरकार्ड के एक इवेंट में महेंद्र सिंह धोनी



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मास्टरकार्ड के एक इवेंट में महेंद्र सिंह धोनी ने खुद की जिंदगी से जुड़ी कई बातें शेयर कीं। (फाइल फोटो)


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कोरोना संकट के बीच देश में करोड़ों गरीब बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें स्कूल बंद होने और सरकारी लेटलतीफी के कारण मिड-डे मील मिलना मुश्किल हो गया है। भास्कर ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। देश के 12 राज्यों के करीब 1.1 करोड़ से ज्यादा बच्चों को बीते महीनों में समय पर मिड-डे मील नहीं मिल पाया है।

उत्तर प्रदेश में करीब 20% बच्चों को न तो मिड-डे मील का खाद्यान्न मिला है और न ही इसके लिए दी जाने वाली राशि। वहीं, बिहार के 8 जिले तो ऐसे हैं जहां पिछले सप्ताह तक 92% तक बच्चों को राशन नहीं दिया गया था। अधिकारियों को इसके लिए नोटिस भी दिया गया है। दूसरी तरफ खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी मासिक फूड ग्रेन बुलेटिन में खाद्यान्न उठाने का डेटा देखा तो मिड-डे मील की हकीकत सामने आ गई।

इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए खाद्यान्न (चावल, गेहूं, मोटा अनाज) का उठाव पिछले साल के मुकाबले 70% कम था। खाद्यान्न का उठाव मार्च-अप्रैल 2019 में 3,35,000 टन से घटकर 2020 में मात्र 1,09,000 टन रह गया था। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिए जाने वाले मिड-डे खाद्यान्न भी लगभग 60% कम उठा।

आईसीडीएस या इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट स्कीम के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा संचालित पोषण कार्यक्रम के लिए, खाद्यान्न का उठाव पिछले साल (मार्च और अप्रैल में) 2,38,000 टन से घटकर इस साल दो महीनों में केवल 97,000 टन हो गया था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब पूरा खाद्यान्न ही नहीं उठाया तो सभी को वितरण कैसे हो सकता है? कई राज्यों में इसके बदले दी जाने वाली राशि भी बच्चों को नहीं मिली है।

राजस्थान में आदेश लेट आया इसलिए अब दो माह का राशन एक साथ बंटेगा

प्रभावित : 18.8 लाख बच्चों को खाद्यान नहीं

राजस्थान में जुलाई का राशन समय पर नहीं मिल पाया है। केंद्र से आदेश देर से आने के कारण अब जुलाई और अगस्त का राशन साथ बांटा जाएगा। इससे पहले की अवधि में जो राशन बांटा गया है वो भी 70% बच्चों तक पहुंचा है। 30% बच्चे प्रभावित हैं। राज्य में 62.65 लाख बच्चों को पोषाहार और मिड-डे मील दिया जाता है।

मिड-डे मील योजना की अतिरिक्त आयुक्त हेमप्रभा कहती हैं कि खाद्यान बच्चों के अभिभावकों को वितरित किया गया था। जिलों से इसकी रिपोर्ट मंगवाई जा रही है। इसके लिए बजट की कोई कमी नहीं है।

उत्तर प्रदेश में 20% को नहीं मिला मिड-डे मील, जुलाई का पैसा अब तक नहीं

प्रभावित : 36 लाख बच्चे

बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के अनुसार केंद्र से जुलाई और अगस्त का पैसा नहीं मिला है। इसलिए जुलाई का राशन और पैसा अभी नहीं दिया गया है। 30 जून तक की राशि से 80% बच्चों को लाभ मिल चुका है। उत्तर प्रदेश में 1.80 करोड़ बच्चों को इसका लाभ दिया जाएगा। लॉकडाउन अवधि व गर्मी की छुट्टियों के 76 दिनों के मिड-डे मील का राशन व कन्वर्जन कॉस्ट बच्चों को दी जाएगी।

बिहार में 1.19 करोड़ बच्चों को पैसा नहीं

प्रभावित : 49 लाख को नहीं मिला खाद्यान्न

यहां लगभग 1.19 करोड़ बच्चों को 4 मई से 31 जुलाई तक 80 दिनों की मिड-डे मील राशि नहीं मिली है। विभिन्न जिलों में लगभग 70 लाख बच्चों को ही इस अवधि का खाद्यान्न मिला है। एमडीएम निदेशक कुमार रामानुज ने कहा कि उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित 16 जिलों में खाद्यान्न वितरण प्रभावित रहा।

वहीं, पिछले सप्ताह तक 8 जिलों में तो केवल 8% तक बच्चों को ही राशन दिया गया था। इन जिलों के जिम्मेदारों को नोटिस भी दिया गया है। बच्चों को 31 अगस्त तक मिड-डे मील की राशि दे दी जाएगी।

चंडीगढ़ में पैसों के लिए जुलाई की अप्रूवल आनी बाकी

प्रभावित : 92,396 बच्चे

यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट ने स्टूडेंट्स के बैंक खातों में मिड-डे मील का पैसा जमा करना शुरू कर दिया है। 30 जून तक का पैसा ट्रांसफर किया जा चुका है, लेकिन जुलाई का पैसा नहीं दिया गया। चंडीगढ़ में 114 गवर्नमेंट स्कूलों के 92 हजार 396 स्टूडेंट्स को मिड-डे मील दिया जाता है। यहां प्राइमरी लेवल पर एक दिन के खाने के 5 रुपए 22 पैसे और अपर प्राइमरी के एक दिन के 7 रु. 82 पैसे तय किए गए।

बड़ा सवाल यह है कि 5-7 रुपए में एक वक्त का खाना नहीं आता लेकिन एजुकेशन डिपार्टमेंट पूरे दिन के इतने दे रहा है। डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर हरबीर सिंह ने कहा-एक हफ्ते में फाइनेंशियल अप्रूवल मिल जाएगी और पैसा बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा।

महाराष्ट्र में ऐसे मामले

स्कूल बंद तो गरीबी से परेशान घर वाले शादी करवा रहे, ऐसे 200 मामले

दीप्ती राउत, नासिक। चाइल्ड लाइन को 4 महीनों मे देश में 5,584 बाल विवाह की घटनाओं में हस्तक्षेप करना पड़ा। सोलापुर के जिला बाल संरक्षण अधिकारी विजय मुत्तर बताते हैं कि हम रोजाना ऐसे विवाह रोक रहे हैं। महाराष्ट्र में करीब 200 शादियां रुकवाई गई हैं। बच्चियां पढ़ना चाहती हैं लेकिन स्कूल बंद है और गरीब बढ़ी है।

त्रिपुरा सरकार ने केवल भोजन पकाने की राशि ही दी

प्रभावित : 4.32 लाख बच्चे

भास्कर ने मिड-डे मिल भत्ता के आदेश पत्रों को खंगाला तो पता चला कि त्रिपुरा में लॉकडाउन के दौरान छात्रों को केवल खाना बनाने के हिसाब से राशि दी गई जो प्रतिदिन 4.97 रुपए से लेकर 7.95 रुपए प्रतिदिन तक है। इसमें खाद्यान्न का पैसा नहीं दिया गया। राज्य में कुल 432,279 बच्चों को मिड डे मील दी जा रही है।

उत्तराखंड : बच्चों का 18 दिन का भत्ता ही गायब

प्रभावित- 1.38 लाख बच्चे

यहां 6.89 लाख बच्चे मिड डे मील के भरोसे रहते हैं। उत्तराखंड में लॉकडाउन के 66 दिनों में से केवल 48 दिन का भी मिड-डे मिल योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता दिया गया। सरकार ने केवल 18 दिन का भत्ता ही नहीं काटा, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 फीसदी छात्रों को भत्ता ही नहीं दिया गया।

मिजोरम : 31 फीसदी बच्चों को नहीं मिला मिड डे मील

प्रभावित- 40 हजार बच्चे

उत्तर-पूर्व के राज्य मिजोरम के बच्चों को मिड-डे मील के तहत अप्रैल से लेकर जून तक 31 फीसदी बच्चों को राशि नहीं दी गई। इसी के साथ लॉकडाउन के दौरान मिड डे मिल पकाने की राशि मिलने का भी इंतजार है। राज्य में 1.31 लाख बच्चे मिड डे मील खाते हैं। पांच महीनों से मिड डे मील योजना प्रभावित चल रही है।

अन्य 4 राज्य : कुछ राज्य जैसे झारखंड, हरियाणा और छत्तीसगढ़ आदि के अधिकांश जिलों में फिलहाल मिड डे मील की स्थिति बेहतर है। पंजाब में पिछले हफ्ते मिड-डे मील का पैसा आ गया है।



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उत्तर प्रदेश में करीब 20% बच्चों को न तो मिड-डे मील का खाद्यान्न मिला है और न ही इसके लिए राशि, वहीं बिहार के 8 जिलों में 92% तक बच्चों को राशन नहीं दिया गया। (फाइल फोटो)


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दो दिन तक लगातार बारिश ने भले ही 12 घंटे में गंभीर डेम को लबालब कर दिया लेकिन निचली बस्तियों और कॉलोनियों के रहवासियों के लिए यह बारिश मुसीबत बन कर टूटी। जल निकासी सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ।

कई जगह गटरों का पानी घरों में घुस जाने से लोग हलाकान हो गए। इस बीच बिजली ने भी कई बार धोखा दिया। शिप्रा पांच साल बाद रौद्र रूप में दिखाई दी। बाढ़ में बड़ा पुल भी आने से बड़नगर रोड बंद रहा। उफनाती शिप्रा किनारे की बस्तियों के लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाना पड़ा।

लगातार बारिश से भोपाल जलमग्न

लगातार दो दिन से हो रही बारिश के कारण कलियासोत डेम के गेट खोलने पड़े। इस कारण भोपाल की बस्तियां जलमग्न हो गईं। लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान लोग इस तरह अपना सामान बचाते नजर आए।

बारिश: गणेश जी को लोग छतरी लगाकर ले गए

गणेश चतुर्थी पर शनिवार को घर-घर श्रीगणेश विराजे। हालांकि कोरोना के चलते शहर के छोटे-बड़े मिलाकर 100 से ज्यादा सार्वजनिक पांडालों में गणेश प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकी। दूसरी तरफ लोगों ने घरों में गणेश प्रतिमा स्थापित की। शुक्रवार रात से चल रही बारिश शनिवार दिनभर भी हुई। मगर बाजार से प्रतिमाएं लाने का लोगों का उत्साह फीका नहीं पड़ा। भरी बारिश में भक्त वाहनों व छतरी में प्रतिमा लाए। शुभ मुहूर्त देखकर विधिवत स्थापना की।

गणेश ध्वनि के बीच मूर्ति स्थापित

लॉकडाउन के कारण इस बार देशभर में कहीं भी बड़े स्तर पर गणेश चतुर्थी नहीं मनाई जा रही है। जहां पिछले साल तक बड़े स्तर पर आयोजन होता था, वहां इस बार छोटे कार्यक्रम रखे गए हैं। कोरोना के कारण इस बार गणेश की मूर्ति का विसर्जन भी एक दो दिन के अंदर ही करना शुरू किया जाएगा। वहीं चतुर्थी को लेकर घर-घर में भी गणेश की मूर्ति की स्थापना की गई है। यह फोटो पिंजौर के सेक्टर-19 के एक घर की है। यहां पर गणेश ध्वनि के बीच मूर्ति स्थापित की गई।

हे विघ्नहर्ता, अब बचाओ

कड़ी धूप में हाथों में माला-प्रसाद। आंखों में आंसू। होठों पर पुकार-हे देवा! क्या चूक हुई जो भक्तों के लिए सारे दरवाजे बंद हो गए। कहां जाएं? किसे पुकारे? हे विघ्नहर्ता, अब बचाओ। जूनागढ़ के दरवाजे पर खड़े भक्त ही नहीं बीकानेर के हर गणपति मंदिर के बाहर कुछ ऐसा ही दृश्य रहा। घरों में पूजन हुआ तब भी भगवान से प्रार्थना हुई-हे मंगलमूर्ति, अब अमंगल दूर करो। सुख-चैन बरसाओ।

कोविड-19 प्रतिबंधों के बीच गणेशोत्सव शुरू

कोरोना वायरस प्रकोप के बीच गणेश चतुर्थी के 10 दिवसीय उत्सव की आज से शुरुआत हुई। इस अवसर पर आज नई दिल्ली के द्वारका में श्री सिद्धिविनायक मंदिर सहित दिल्ली के कई हिस्सों में भगवान गणेश की भव्य ‘आरती’ की गई। इसके अलावा पुजारियों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में गणेश मंदिर में भी आरती की। इस अवसर पर मंदिरों और गणपति की मूर्तियों को खूबसूरती से सजाया गया है।

25 को है श्री गुरु नानक देव जी का विवाह पर्व

श्री गुरु नानक देव जी के विवाह पर्व को लेकर गुरुद्वारा श्री कंध साहिब और गुरुद्वारा श्री डेहरा साहिब को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। आज 23 अगस्त को सुबह गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब शुरू होंगे। दूसरी ओर गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में विवाह पर्व को समर्पित 10 क्विंटल भाजी तैयार की गई है। एसडीएम बलविंदर सिंह ने बताया कि कोरोना के चलते 25 अगस्त को बटाला उप मंडल की हद में नगर कीर्तन और लंगर लगाने की मनाही रहेगी।

लॉकडाउन में 7 हजार लोगों तक ऐसे पहुंचाया पैसा

फोटो ओडिश के कोरापुट जिले की सलोमी शशंकर की है। वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का किओस्क चलाती हैं, जो कमीशन आधारित प्राइवेट कस्टमर सर्विस देती हैं। लेकिन सलोमी बाकी किओस्क चलाने वालों से अलग हैं। वे अपने टू-व्हीलर से खुद ग्राहकों तक पहुंच रही हैं। संक्रमण काल में उन्होंने पिछले करीब पांच माह में 7 हजार से ज्यादा लोगों तक खुद जाकर पैसा पहुंचाया है।

टोयापुर गांव में रहने वाली सलोमी सुबह 8 बजे घर से निकलती हैं और शाम 5 बजे तक आसपास के 9 गांवों में अपनी सेवाएं देती हैं। इन गांवों में इंटरनेट की समस्या है इसलिए सड़क किनारे, खेतों की मेड़ पर जहां नेटवर्क मिलता है वहीं बैठकर काम शुरू कर देती हैं।

सबसे बड़ा राक्षस कोरोना

कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जयपुर के चेहरे अल्बर्ट हॉल पर भी लगाया फेस मास्क ताकि लोग जागरूक होकर बचाव के लिए अपने चेहरे पर लगाएं हमेशा मास्क।

एक ही पहाड़ी पर हैं 77 जैन मंदिर

फोटो ग्वालियर से करीब 60 किमी दूर दतिया जिले में स्थित अंचल के सबसे बड़े जैन तीर्थ सोनागिर की है। यहां एक ही पहाड़ी पर 9वीं और 10वीं शताब्दी के 77 मंदिर हैं। बारिश में जब पहाड़ी ने हरियाली ओढ़ी तो संगमरमर के मंदिरों के शिखर मोती जैसे दमक उठे। सोनागिर ऐसा पहला तीर्थ है, जहां पहाड़ी पर 77 और गांव में 26 जैन मंदिर हैं।

मान्यता है कि यहां साढ़े पांच करोड़ मुनिराजों-संतों ने मोक्ष को प्राप्त किया है। यहां अनंग कुमार ने मोक्ष प्राप्त करके जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाई थी। यहां 57 नंबर का मुख्य मंदिर चंद्रप्रभ भगवान की मूलनायक प्रतिमा से युक्त है, जो 17 फीट ऊंची है। यह क्षेत्र 132 एकड़ की 2 पहाड़ियों से जुड़ा हुआ है।

दिनभर में 25 एमएम बारिश

फोटो धनबाद जिले के कतरास की है। आसमान में काले बादल मंडराए। शाम 5:30 बजे ही रात सा नजारा बन गया। शनिवार को बारिश का सिलसिला जारी रहा। दिनभर में 25 एमएम बारिश हुई। शनिवार को जोरदार थंडरिंग में माथाडीह दास टोला ऊपरधौड़ा में एक ही परिवार की एक महिला समेत तीन लोग जख्मी हो गए।



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The same day's rain submerged Shipra, the big bridge, the shores of the shore and the roads; Bappa jiray across the country


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(मनीषा भल्ला) कोरोना का असर फिल्मी कहानियों पर भी दिखने लगा है। फिलहाल बॉलीवुड में जिन कहानियों पर काम हो रहा है उनमें कॉमेडी और हॉरर फिल्में अधिक हैं। लेखक ऐसी कहानियां लिख रहे हैं जिनकी शूटिंग कम भीड़ के साथ एक-दो कमरों में ही हो जाए। कंटेंट मार्केटिंग की प्रमुख कंपनी तुलसिया के पार्टनर एमडी और फिल्म प्रोडयूसर चैतन्य हेगड़े बताते हैं कि अभी उनकी प्राथमिकता में ऐसी कहानियां हैं जो किसी एक कमरे, बिल्डिंग या कस्बे में शूट हो। ऐसी कहानियां क्राइम थ्रिलर होती हैं।

साएकोपैथ किरदार वाली कहानियों पर भी काम चल रहा है। तुलसिया के साथ 200 से ज्यादा लेखक हैं। हेगड़े का कहना है कि प्रोडक्शन हाउसेज को लगता है कि जब सिनेमा हॉल खुलेंगे तो लोग मसाला फिल्में पसंद करेंगे। गंभीर और इमोशनल मुद्दों का बाजार शुरुआत में ठंडा रहेगा। इस वक्त फिल्म लेखन की प्राथमिकता में कॉमेडी, मसाला मूवी और हॉरर फिल्में हैं।

बर्फी, हीरोपंथी और सुपर-30 जैसी फिल्मों के लेखक संजीव दत्ता बताते हैं वे अब ऐसी फिल्में लिख रहे हैं जो किसी मध्यम वर्गीय परिवार की कहानी हो। जो किसी छोटे से मोहल्ले में पूरी शूट हो सके और उसमें नए चेहरे दिखाई दें। फिल्म आर्टिकल-15 के लेखक गौरव सोलंकी आजकल कोविड की कहानी पर काम कर रहे हैं। वे बताते हैं कि फिलहाल आने वाली फिल्मों में इस दौर के हालात दिखाई देंगे। वे कहते हैं ‘मैं शुरू से चीज़ों को देख रहा हूं और लगता है कि कोविड के हालात अभी 6-8 महीने रहेंगेे। इसलिए फिलहाल इस कहानी पर धीरे धीरे काम चल रहा है।’

एक्टर भीड़ वाले सीन के लिए तैयार नहीं

कोरोना का फिल्मों की कहानियों पर साफ-साफ असर दिखने वाला है। अब जो फिल्में बनेंगी उनकी स्क्रिप्ट में भीड़, भाषण और स्टंट के सीन या तो नहीं होंगे या ना के बराबर होंगे। अभी ड्रामा और कॉमेडी स्क्रिप्ट्स चलेंगी। धूलिया के अनुसार एक्टर भी भीड़ वाले सीन के शूट के लिए राज़ी नहीं हैं।

तिगमांशु धूलिया, लेखक और निर्देशक



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लेखक और निर्देशक, तिगमांशु धूलिया का कहना है कि अब जो फिल्में बनेंगी उनकी स्क्रिप्ट में भीड़, भाषण और स्टंट के सीन या तो नहीं होंगे या ना के बराबर होंगे।


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कोरोना संकट के बीच देश में करोड़ों गरीब बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें स्कूल बंद होने और सरकारी लेटलतीफी के कारण मिड-डे मील मिलना मुश्किल हो गया है। भास्कर ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। देश के 12 राज्यों के करीब 1.1 करोड़ से ज्यादा बच्चों को बीते महीनों में समय पर मिड-डे मील नहीं मिल पाया है।

उत्तर प्रदेश में करीब 20% बच्चों को न तो मिड-डे मील का खाद्यान्न मिला है और न ही इसके लिए दी जाने वाली राशि। वहीं, बिहार के 8 जिले तो ऐसे हैं जहां पिछले सप्ताह तक 92% तक बच्चों को राशन नहीं दिया गया था। अधिकारियों को इसके लिए नोटिस भी दिया गया है। दूसरी तरफ खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी मासिक फूड ग्रेन बुलेटिन में खाद्यान्न उठाने का डेटा देखा तो मिड-डे मील की हकीकत सामने आ गई।

इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए खाद्यान्न (चावल, गेहूं, मोटा अनाज) का उठाव पिछले साल के मुकाबले 70% कम था। खाद्यान्न का उठाव मार्च-अप्रैल 2019 में 3,35,000 टन से घटकर 2020 में मात्र 1,09,000 टन रह गया था। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिए जाने वाले मिड-डे खाद्यान्न भी लगभग 60% कम उठा।

आईसीडीएस या इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट स्कीम के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा संचालित पोषण कार्यक्रम के लिए, खाद्यान्न का उठाव पिछले साल (मार्च और अप्रैल में) 2,38,000 टन से घटकर इस साल दो महीनों में केवल 97,000 टन हो गया था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब पूरा खाद्यान्न ही नहीं उठाया तो सभी को वितरण कैसे हो सकता है? कई राज्यों में इसके बदले दी जाने वाली राशि भी बच्चों को नहीं मिली है।

राजस्थान में आदेश लेट आया इसलिए अब दो माह का राशन एक साथ बंटेगा

प्रभावित : 18.8 लाख बच्चों को खाद्यान नहीं

राजस्थान में जुलाई का राशन समय पर नहीं मिल पाया है। केंद्र से आदेश देर से आने के कारण अब जुलाई और अगस्त का राशन साथ बांटा जाएगा। इससे पहले की अवधि में जो राशन बांटा गया है वो भी 70% बच्चों तक पहुंचा है। 30% बच्चे प्रभावित हैं। राज्य में 62.65 लाख बच्चों को पोषाहार और मिड-डे मील दिया जाता है।

मिड-डे मील योजना की अतिरिक्त आयुक्त हेमप्रभा कहती हैं कि खाद्यान बच्चों के अभिभावकों को वितरित किया गया था। जिलों से इसकी रिपोर्ट मंगवाई जा रही है। इसके लिए बजट की कोई कमी नहीं है।

उत्तर प्रदेश में 20% को नहीं मिला मिड-डे मील, जुलाई का पैसा अब तक नहीं

प्रभावित : 36 लाख बच्चे

बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के अनुसार केंद्र से जुलाई और अगस्त का पैसा नहीं मिला है। इसलिए जुलाई का राशन और पैसा अभी नहीं दिया गया है। 30 जून तक की राशि से 80% बच्चों को लाभ मिल चुका है। उत्तर प्रदेश में 1.80 करोड़ बच्चों को इसका लाभ दिया जाएगा। लॉकडाउन अवधि व गर्मी की छुट्टियों के 76 दिनों के मिड-डे मील का राशन व कन्वर्जन कॉस्ट बच्चों को दी जाएगी।

बिहार में 1.19 करोड़ बच्चों को पैसा नहीं

प्रभावित : 49 लाख को नहीं मिला खाद्यान्न

यहां लगभग 1.19 करोड़ बच्चों को 4 मई से 31 जुलाई तक 80 दिनों की मिड-डे मील राशि नहीं मिली है। विभिन्न जिलों में लगभग 70 लाख बच्चों को ही इस अवधि का खाद्यान्न मिला है। एमडीएम निदेशक कुमार रामानुज ने कहा कि उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित 16 जिलों में खाद्यान्न वितरण प्रभावित रहा।

वहीं, पिछले सप्ताह तक 8 जिलों में तो केवल 8% तक बच्चों को ही राशन दिया गया था। इन जिलों के जिम्मेदारों को नोटिस भी दिया गया है। बच्चों को 31 अगस्त तक मिड-डे मील की राशि दे दी जाएगी।

चंडीगढ़ में पैसों के लिए जुलाई की अप्रूवल आनी बाकी

प्रभावित : 92,396 बच्चे

यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट ने स्टूडेंट्स के बैंक खातों में मिड-डे मील का पैसा जमा करना शुरू कर दिया है। 30 जून तक का पैसा ट्रांसफर किया जा चुका है, लेकिन जुलाई का पैसा नहीं दिया गया। चंडीगढ़ में 114 गवर्नमेंट स्कूलों के 92 हजार 396 स्टूडेंट्स को मिड-डे मील दिया जाता है। यहां प्राइमरी लेवल पर एक दिन के खाने के 5 रुपए 22 पैसे और अपर प्राइमरी के एक दिन के 7 रु. 82 पैसे तय किए गए।

बड़ा सवाल यह है कि 5-7 रुपए में एक वक्त का खाना नहीं आता लेकिन एजुकेशन डिपार्टमेंट पूरे दिन के इतने दे रहा है। डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर हरबीर सिंह ने कहा-एक हफ्ते में फाइनेंशियल अप्रूवल मिल जाएगी और पैसा बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा।

महाराष्ट्र में ऐसे मामले

स्कूल बंद तो गरीबी से परेशान घर वाले शादी करवा रहे, ऐसे 200 मामले

दीप्ती राउत, नासिक। चाइल्ड लाइन को 4 महीनों मे देश में 5,584 बाल विवाह की घटनाओं में हस्तक्षेप करना पड़ा। सोलापुर के जिला बाल संरक्षण अधिकारी विजय मुत्तर बताते हैं कि हम रोजाना ऐसे विवाह रोक रहे हैं। महाराष्ट्र में करीब 200 शादियां रुकवाई गई हैं। बच्चियां पढ़ना चाहती हैं लेकिन स्कूल बंद है और गरीब बढ़ी है।

त्रिपुरा सरकार ने केवल भोजन पकाने की राशि ही दी

प्रभावित : 4.32 लाख बच्चे

भास्कर ने मिड-डे मिल भत्ता के आदेश पत्रों को खंगाला तो पता चला कि त्रिपुरा में लॉकडाउन के दौरान छात्रों को केवल खाना बनाने के हिसाब से राशि दी गई जो प्रतिदिन 4.97 रुपए से लेकर 7.95 रुपए प्रतिदिन तक है। इसमें खाद्यान्न का पैसा नहीं दिया गया। राज्य में कुल 432,279 बच्चों को मिड डे मील दी जा रही है।

उत्तराखंड : बच्चों का 18 दिन का भत्ता ही गायब

प्रभावित- 1.38 लाख बच्चे

यहां 6.89 लाख बच्चे मिड डे मील के भरोसे रहते हैं। उत्तराखंड में लॉकडाउन के 66 दिनों में से केवल 48 दिन का भी मिड-डे मिल योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता दिया गया। सरकार ने केवल 18 दिन का भत्ता ही नहीं काटा, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 फीसदी छात्रों को भत्ता ही नहीं दिया गया।

मिजोरम : 31 फीसदी बच्चों को नहीं मिला मिड डे मील

प्रभावित- 40 हजार बच्चे

उत्तर-पूर्व के राज्य मिजोरम के बच्चों को मिड-डे मील के तहत अप्रैल से लेकर जून तक 31 फीसदी बच्चों को राशि नहीं दी गई। इसी के साथ लॉकडाउन के दौरान मिड डे मिल पकाने की राशि मिलने का भी इंतजार है। राज्य में 1.31 लाख बच्चे मिड डे मील खाते हैं। पांच महीनों से मिड डे मील योजना प्रभावित चल रही है।

अन्य 4 राज्य : कुछ राज्य जैसे झारखंड, हरियाणा और छत्तीसगढ़ आदि के अधिकांश जिलों में फिलहाल मिड डे मील की स्थिति बेहतर है। पंजाब में पिछले हफ्ते मिड-डे मील का पैसा आ गया है।



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उत्तर प्रदेश में करीब 20% बच्चों को न तो मिड-डे मील का खाद्यान्न मिला है और न ही इसके लिए राशि, वहीं बिहार के 8 जिलों में 92% तक बच्चों को राशन नहीं दिया गया। (फाइल फोटो)


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एमएस धोनी ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया है। धोनी से जानिए- कैसे विपरीत हालातों में भी वे मन को शांत रख पाते हैं-

‘मुझे भी हर आम इंसान की तरह परेशानी होती है, चिढ़ भी आती है, खासकर, तब ज्यादा जब चीजें अपने पक्ष में नजर नहीं आतीं। लेकिन मैं हमेशा सोचता हूं कि क्या ये फ्रस्ट्रेशन हमारी टीम के लिए अच्छा है? ऐसे हालात में मैं यह सोचने की कोशिश करता हूं कि क्या किया जाना चाहिए।

गलती किसी से भी हो सकती है...किसी एक से हो सकती है...पूरी टीम से हो सकती है कि हमारा जो प्लान था, चीजें उसके मुताबिक हो नहीं पाईं। ऐसे में सोचने की कोशिश करता हूं कि फिलहाल क्या बेहतर हो सकता है। फ्रस्ट्रेशन, चिढ़, गुस्सा, निराशा...इनमें से कुछ भी रचनात्मक नहीं है।

इसलिए मैं खुद को समझाता हूं कि इन सब भावनाओं से ऊपर वो काम है जो इस वक्त मैदान पर किया जाना है। ऐसे में मैं यह भी सोचने लगता हूं कि मुझे किस खिलाड़ी को क्या जिम्मेदारी देनी चाहिए, किस योजना पर काम करना चाहिए... इससे मुझे खुद पर काबू पाने में मदद मिलती है।

मैं खुद को इतना व्यस्त कर लेता हूं कि भावनाएं हावी नहीं हो पातीं। शायद इसीलिए आपको मैं मैदान पर ‘कूल’ महसूस होता हूं। मैं मानता हूं कि इंसानों में कई तरह की भावनाएं होती हैं और भारतीय तो भावनाओं में कुछ ज्यादा ही बहते हैं। इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि मेरे मन में भावनाएं नहीं आती हैं।

लेकिन मैं हर वक्त कोशिश करता हूं, इन भावनाओं पर नियंत्रण हासिल करने की, क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि अगर मैं भावनाएं काबू कर पाया तो ही ज्यादा रचनात्मक हो पाऊंगा।

क्रिकेट मैं सिर्फ खुश रहने के लिए खेलता था, बाद में लक्ष्य बनाया

क्रिकेट जब मेरे जीवन में आया था, तो मैं इसे सिर्फ मज़े के लिए खेलता था। मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि मैं देश के लिए खेलूंगा। मैं तो सिर्फ खुश रहने और अपने स्कूल की टीम के लिए खेलता था। फिर जब वहां अच्छा खेलने लगा तो आगे देखा... अंडर सिक्सटीन नजर आया... उसे खेला।

फिर जिले की टीम का हिस्सा बना तो राज्य के लिए खेलने की इच्छा भी जागी। धीरे-धीरे भारतीय टीम तक पहुंच गया। मैंने छोटे-छोटे लक्ष्य बनाए और उन्हें हासिल करके इंडियन क्रिकेट टीम तक पहुंच गया।

मुझे लगता है छोटे लक्ष्य हासिल करना ज्यादा आसान और मजेदार है, बड़े लक्ष्य सबको परेशान कर देते हैं। क्रिकेट को मैं जीवन समान ही मानता हूं, जिसमें कुछ तय नहीं होता और थोड़ा लक तो होता ही है। कितना रोचक है कि आप क्रिकेट मैच को एक सिक्का उछालने से शुरू करते हैं, जो किसी के भी पक्ष में गिर सकता है।

परिवार की चिंता मैं दूर कर चुका था

ओपनर के लिए पहली गेंद से ही अनिश्चितता शुरू होती है। तीसरे नंबर का बल्लेबाज दूसरे ओवर में पिच पर आ सकता है और 25वें ओवर में भी। मेरे मामले में मैं मानता हूं कि अनिश्चितता कुछ कम रही क्योंकि भारतीय परिवार की सबसे बड़ी चिंता को मैं पहले ही दूर कर चुका था।

रेलवे की नौकरी के बाद मेरे घरवाले निश्चिंत थे कि क्रिकेट में इसका कुछ नहीं हुआ तो ये तो कर ही लेगा। लेकिन इसकी नौबत ही नहीं आई। मैं हर आने वाली कमियों को स्वीकारता चला गया। मैं अपने आप से ईमानदार रहा। जब तक आप खुद से ईमानदार नहीं रहेंगे, दूसरों से कैसे रह सकते हैं।

इससे आपको अपनी कमियां स्वीकारने में परेशानी नहीं होती। भले ही आप अच्छे खिलाड़ी नहीं हो, अच्छे इंसान नहीं हो लेकिन कमियों को स्वीकार करेंगे तो उन्हें दूर करने की कोशिश भी उतनी ही ईमानदारी से करेंगे। आप अपने परिवार से मदद मांगेंगे, सीनियर्स से या दोस्तों से मदद लेंगे।

मैंने ऐसा ही किया और आगे बढ़ता गया। मेहनत, किस्मत, सब्र, समर्पण...सब अपनी जगह ठीक है लेकिन मेरा मानना है कि खुद से ईमानदार होना सबसे अहम है। अगर मूल रूप से आप ईमानदार नहीं हैं तो आप चीजों को खुद ही उलझाते चले जाएंगे। ईमानदारी से ही मैं वहां पहुंच पाया जिसकी कल्पना मुझे खुद भी नहीं थी।’

मेरी सफलता का मंत्र

मेहनत, किस्मत, सब्र, समर्पण ... सब अपनी जगह है लेकिन मेरा मानना है कि खुद से ईमानदार होना सबसे अहम है। अगर मूल रूप से आप ईमानदार नहीं हैं तो आप चीजों को खुद ही उलझाते चले जाएंगे।

मास्टरकार्ड के एक इवेंट में महेंद्र सिंह धोनी



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मास्टरकार्ड के एक इवेंट में महेंद्र सिंह धोनी ने खुद की जिंदगी से जुड़ी कई बातें शेयर कीं। (फाइल फोटो)


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