Saturday, October 3, 2020

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कुछ समय पहले हैकर्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर अकाउंट हैक कर लिया और उनसे डोनेशन मांग रहे थे। इससे आप सोच सकते हैं कि जब देश के प्रधानमंत्री ऑनलाइन फ्रॉड से नहीं बच सकते हैं, तो हम कैसे बचेंगे।

अब आंकड़ों की बात करते हैं। देश में पिछले साल एक अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच सिर्फ 92 दिन में हैकर्स ने 128 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया। ये सब उन्होंने नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड में सेंध लगाकर किया।

डिजिटल टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट ललित मिश्रा बताते हैं कि हैकर्स ज्यादातर ऑनलाइन फ्रॉड आइडेंटिटी थेफ्ट के जरिए करते हैं, यानी वे हमारी पहचान और निजी जानकारी को चुरा लेते हैं। इसके बाद वे हमारे अकाउंट से ट्रांजेक्शन कर लेते हैं और हमें पता भी नहीं चलता है।

कैसे चुराते हैं हमारी पर्सनल जानकारी?

  • ललित मिश्रा कहते हैं कि देश में ज्यादातर ऑनलाइन फ्रॉड स्कीमिंग डिवाइस के जरिए ही हो रहा है। दरअसल, हमारे जितने भी डिजिटल कार्ड हैं, उनके पीछे एक मैग्नेटिक स्ट्रिप लगी होती है। इसी में यूजर्स की निजी जानकारी सेव होती है। हैकर्स इसे चुराने के लिए एटीएम या पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन में स्किमिंग डिवाइस लगा देते हैं। यह एक पतली डिवाइस होती है।
  • इसके बाद जैसे ही आप किसी शॉपिंग मॉल या एटीएम में जाकर कार्ड से ट्रांजेक्शन करेंगे, आपकी सारी जानकार उस डिवाइस में सेव हो गई। फिर हैकर्स आपके अकाउंट से कभी भी पैसे निकाल सकता है। हैकर्स ओपन सोर्स इंटेलीजेंस का भी इस्तेमाल करते हैं।

देश में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की क्या है स्थिति?

  • आरबीआई के 2019 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल ट्रांजेक्शन का 29.9% डिजिटल कार्ड के जरिए होता है।
  • इनमें से अधिकांश में मैग्नेटिक स्ट्रिप का इस्तेमाल होता है। इन पर हैकर्स कार्ड रीडर की जगह स्कीमिंग डिवाइस लगा देते हैं। इससे हैकर्स आपके कार्ड की क्लोनिंग करके अवैध ट्रांजेक्शन शुरू कर देते हैं।

आइडेंटिटी थेफ्ट से बचने का तरीका?

  • आरबीआई का कहना है कि दुकानदार कार्ड स्वाइप करने वाले एटीएम रीडर की जगह पिन पैड वाली रीडिंग डिवाइस का इस्तेमाल करें।
  • इसके अलावा यूजर्स को पिन नंबर टाइप करके ट्रांजेक्शन करना चाहिए, इसे स्कीमिंग डिवाइस में रीड नहीं किया जा सकता है।
  • कार्ड की जगह UPI ट्रांजेक्शन ज्यादा सेफ है, यह आरबीआई की निगरानी में होता है। यदि कोई फ्रॉड करता है, तो आरबीआई के पकड़ में आ जाता है।

ओपन सोर्स इंटेलीजेंस क्या है?

साइबर क्राइम की दुनिया में इसे 'क्रिडेन्शियल स्टफिंग अटैक' कहा जाता है। इसी साल सितंबर में कनाडा में ऐसा ही मामला सामने आया था, जब ऑनलाइन टैक्स रेवेन्यू सर्विस समेत कुछ अन्य सरकारी एजेंसियों पर क्रिडेन्शियल स्टफिंग अटैक हुआ।

इसमें हैकर्स ने हजारों लोगों की जानकारी चुराई, फिर कोविड रिलेटेड ग्रांट के लिए एप्लाई किया और पैसा निकाल लिया। इसके लिए हैकर्स ओपन सोर्स इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करते हैं। वे आपकी हर जानकारी जुटाते हैं, जो आपके फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन पोस्ट से भी मिल सकती है।

कौन से हैकर्स ग्रुप जो ज्यादा सक्रिय हैं?
ललित मिश्रा बताते हैं कि दुनिया में एम-ऐजकार्ट, क्रिक दो बड़े हैकर्स सिंडीकेट हैं। पिछले साल इन्होंने ट्रैवल वेबसाइट्स से 90 लाख से ज्यादा यूजर्स का पर्सनल डेटा चुराया था। कुछ समय पहले ब्रिटिश एयरवेज की साइट से 3.80 लाख ट्रेवलर्स का पर्सनल डेटा हैक कर लिया था। एम-ऐजकार्ट ने ट्विटर का डेटा चुराया था।

आइए ऐसे 5 तरीके जानते हैं, जिससे आपके ऑनलाइन आंकड़े चुराए जा सकते हैं। और जानिए आप कैसे सुरक्षित रह सकते हैं...
1. फिशिंग

  • फिशिंग एक फ्रॉड इमेल है, जिसकी मदद से आपसे आंकड़े मंगाए जाते हैं। यह देखने में असली जैसा ही लगता है। लेकिन हैकर फिशिंग ईमेल के जरिए पहले आपको भरोसा दिलाने की कोशिश करता है। फिर बताता है कि वो आपके फायदे के लिए बैंक एकाउंट की जानकारी या अन्य आंकड़े मांग रहा है।
  • फिशिंग में आपके बैंक के नाम से ईमेल आते हैं, जिसमें कहा जाता है कि आपका डेबिट कार्ड रद्द हो गया है और कार्ड नंबर या आधार नंबर बताने पर ही आपको नया कार्ड जारी किया जाएगा। आपको लग सकता है कि बैंक ने ही यह जानकारी मांगी है, लेकिन यह हैकर हो सकता है।

कैसे रहें सुरक्षित?

  • डोमेन नाम या ईमेल एड्रेस में स्पेलिंग की गलतियों पर ध्यान दें।
  • किसी भी संदिग्ध लिंक या ईमेल पर क्लिक करने से पहले दो बार सोचें।

2. मेल वेयर

  • यह एक सॉफ्टवेयर होता है, जो किसी सिस्टम की जानकारी या आंकड़े की चोरी के लिए बनाया जाता है। यह आपके मोबाइल या लैपटॉप से संवेदनशील आंकड़े चुराने, उसे डिलीट करने या फिर आप पर नजर रखने जैसी एक्टिविटी करता है।

मेल वेयर 4 तरह के होते हैं-

  1. वायरस: यह कंप्यूटर के हार्ड डिस्क में जाकर फाइल/सिस्टम तक आपकी पहुंच को मुश्किल बनाता है।
  2. ट्रोजन: यह आपके सिक्योरिटी सिस्टम से परे जाकर बैक डोर बनाता है, जिससे हैकर आपके सिस्टम पर नजर रख सकता है।
  3. स्पाई वेयर: यह आपकी जासूसी करने के लिए बनाया जाता है। यह आपकी आईडी, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर और नेट व की-बोर्ड चलाने की आदत को पढ़ता है।
  4. की लॉगर: यह स्पाई का ही एक विकल्प है, जो आपके की-वर्ड को रिकॉर्ड कर लेता है।

कैसे रहें सुरक्षित?

  • अच्छा एंटी वायरस सॉफ्टवेयर इंस्टाल करें।
  • कोई नकली सॉफ्टवेयर डाउनलोड ना करें।
  • एंटी वायरस के नकली पॉप-अप पर कभी क्लिक ना करें।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम को हमेशा अपडेट रखें।
  • पायरेटेड ऐप या सॉफ्टवेयर से हमेशा बचें।

3. मोबाइल ऐप्स
गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर पर मौजूद सभी ऐप सुरक्षित नहीं होते। ऐप आपसे मोबाइल के सभी डेटा तक पहुंचने की परमिशन मांगते हैं, जिससे हैकर आपकी सारी जानकारी चुरा सकता है। साथ ही आपकी गोपनीय जानकारी भी सार्वजनिक कर सकता है। इसलिए हर किसी ऐप को सभी अनुमति हमेशा ना दें।
कैसे सेफ रहें?

  • किसी ऐप को डाउनलोड करने से पहले परमिशन चेक करें।
  • उसकी समीक्षा और रेटिंग पर ध्यान दें।
  • 50,000 से कम डाउनलोड वाले ऐप ना इंस्टाल करें।
  • पायरेटेड/क्रैक ऐप डाउनलोड ना करें।

4. स्मिशिंग

  • स्मिशिंग यह भी फिशिंग का ही एक तरीका है, जिसमें आप फोन या SMS पर किसी को व्यक्तिगत जानकारी दे देते हैं। इसमें हैकर्स आपसे सोशल इंजीनियरिंग का उपयोग कर आपसे जानकारी मांगते हैं।

कैसे सुरक्षित रहें?

  • यदि आपसे कोई फोन या SMS करके गोपनीय जानकारी मांगता है, तो कतई न दें।
  • किसी मैसेज पर आए लिंक पर क्लिक करने से पहले उसे अच्छी तरह चेक करें।

5. फिजिकल खतरे

  • आपका लैपटॉप, हार्ड डिस्क, मोबाइल लेकर भी कोई उससे गोपनीय जानकारी चुरा सकता है। यह कई बार अंजाने में आपका कोई करीबी भी कर सकता है। यह आपके घर या दफ्तर, कहीं भी हो सकता है।

कैसे बचें ?

  • अपनी पर्सनल डिवाइस किसी को मत दें। अगर आपके लैपटॉप, मोबाइल में कोई गोपनीय जानकारी है तो उसे पासवर्ड डालकर सुरक्षित करें।

तीन साल में हैकर्स ने देश में 547 करोड़ रुपए चुराए

अप्रैल 2017 से लेकर दिसंबर 2019 के बीच देशभर में ऑनलाइन फ्रॉड के 1.1 लाख केस दर्ज हुए। जबकि इन तीन सालों में लोगों के 547 करोड़ रुपए भी चुराए गए।



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Online Fraud and Social Media Connection; Five Ways Hackers Steal Information, Know How To Avoid It In Simple Words


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बिहार में चुनाव की तारीखों का ऐलान तो हो गया, लेकिन जिन्हें चुनाव लड़ना है, वो पार्टियां अभी तक ये तय नहीं कर पाई हैं कि वो कितनी सीटों पर लड़ेंगी और कहां से लड़ेंगी? बीता पूरा हफ्ता सभी पार्टियों ने इसी माथापच्ची में गुजारा। वहीं दलित वोटबैंक को साधने के लिए हर पार्टी अपनी-अपनी ओर से कुछ न कुछ कर रही हैं। कोई दलित वोटरों पर पकड़ रखने वाली पार्टियों से गठबंधन कर रहा है, तो कोई दलित नेता को कार्यकारी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बना रहा है। बिहार चुनाव की पिछले हफ्ते की सियासत को हमारे कार्टूनिस्ट मंसूर ने कुछ ऐसे देखा...



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स्थान- पूरब बाजार, कायस्थ टोला, सहरसा
समय- सुबह के साढ़े 6 बजे

लॉकडाउन की तरह अक्टूबर की सुबह भी अब थोड़ी नरम हो चली है। मॉर्निंग वॉक पर निकले कुछ लोग चहलकदमी कर रहे हैं। इसी बीच पैसेंजर ट्रेन के जाते ही रेलवे ढाला खुल जाता है और बाइक से सरसराते हुए बिधान चच्चा सीधे पूरब बाजार स्थित कायस्थ टोला के फेमस अशोक टी स्टॉल पहुंच जाते हैं। जाने क्या काम रहा होगा जो सुबह की चाय तक घर पर नहीं पी पाए हैं।

खैर, हेलमेट उतारते हुए बेंच पर धस्स से बैठ गए और कहने लगे- ‘सहर का हाल तो एकदम्मे गेल है।’ उनकी बात सुन सुबह की हवा खाने निकले लकी दत्ता (एलटी) से रहा नहीं गया। तपाक से बोल उठा- ‘काहे चच्चा क्या हो गया? चुनाव है, सहर का हाल तो एकदम चकाचक होने वाला है’।

पेट फुलाए बिधान चच्चा बगले में बैठे हट्टे-कट्टे मार्शल से बोले- 'देखते हो? ई है आज का नवजुवक...शहर का विकास देख रहा है, अइसा होता है विकास। इहो पिंटुए की तरह चाय बेचकर आत्मनिर्भर बनेगा।'

ऐ चच्चा ऐसा काहे बोलते हैं। हम तो लकी दत्ता से एलटी बन गए और आप हमारा स्टेटस गिराने में लग गए? बताइए क्या हो गया...चच्चा सुनाने लगे की कहियो रे लक्किया गंगजला में गिर गेलियौ, पैर बैच गेलौ, नै त कैल्हे साफ रहियो।

धड़फड़ाते हुए टोले के एक और युवक बॉली ने पूछा- ‘क्या हो गया? चच्चा उधर काहे गए, हाल तो सच्चे में खराब है। कल का अखबार नहीं देखे क्या? दो लड़का का पैर फ्रैक्चर हो गया गड्ढा में गिरने से। पूरे सहर में विकास का गड्ढा खोद दिए हैं। ऐसे कोड़े है पूरा सहर कि सहरसा का लहरिया कट मारे वाला सब भी घरे सुत्तल है।

बॉली ने जैसे लक्की के जुबान की बात छीन ली, कहने लगा- ‘ठीके कह रहे हैं भाईजी, कोनो वार्ड जाइए वही हाल है। गंगजला हो या तिवारी टोला सब जगह जाने जाए के डर है। का विकास कर लिए विधायक जी? लॉकडाउन में तीन महीना घरे में ऐश फरमाए, आ अब देखिए बरसाती मेंढक बन के कैसे पूरे सहरसा को कोड़ रहे हैं?’

बिधान चच्चा कहने लगे- ‘रे तू सब आज देख रहा है। हम त सत्ता के खेल 85 से देख रहे हैं। भोकाल पार के सब पार्टी वोट ले जाता रहा। विकास के नाम पर कुच्छो किया है? ना तो सहर के सड़के ठीक किया ना फ्लाईओवरे बनवाया। वही सुपौल का सड़क देखो लगता है मक्खन लगा दिया गाड़ी के स्पीड में। हड़हड़ा के गाड़ी 25-30 किलोमीटर तक कब पहुंच जाता है पते नहीं चलता है।'

बॉली कहने लगता है एकदम सही कहे हैं। उधर तो अपाची पर बैठकर हवा में बात कीजिए लेकिन सहरसा में तो भूल जाइए। यहां का सड़क आज बना कल टूटा। विधायक जी और ठेकेदार पैसे का बंदरबांट करके जनते को ना बेवकूफ बना रही है?

चाय की चुस्की लेते-लेते चच्चा कहते हैं- पार्टी वोट ले जाता रहा, विकास के नाम पर कुच्छो किया है?

बहुत देर से चुप मार्शल से अब नहीं रहा जाता है...अशोक को देख कर कहने लगता है 'याद नहीं है कैसे कहरा में ठेकेदार बोरिया बिस्तरा बांध के भागा था? रातोंरात ऊ सब सी ग्रेड का मसाला उझल के रोड पिटवा रहा था? जनता बेवकूफ है क्या। विकास के नाम पर वोट देती जरूर है लेकिन अब नेते नहीं है किसी पार्टी में जिसको वोट दिया जाए तो क्या करें?

बरगंडी डाई किए बाल और हाथ में सलमान वाले ब्रेसलेट पहने लक्की दत्ता (एलटी) ने चुटकी लेते हुए कहा नोटा दबा दीजिए भाईजी...आप ही जैसे परेशान आत्मा सबके लिए विकल्प है।

अखबार के पन्ने पलटता हुआ राकेश कहने लगता है, 'मजाक छोड़िये भाई, इधर गली-गली में गड्ढा तो उधर पूरा सहरे जाम... फ्लाईओवर का कुच्छो हो पाया आज तक? खाली घोषणे हो रहा है। पप्पा बताते हैं हम जन्मे ही थे तो 96वें में रामविलास पासवान घोषणा किए।

होश संभाले तो हम भी दिग्विजय सिंह,लालू यादव और राजीव रंजन चौधरी को दिलासा देते देखे। देखिए कोसी प्रमंडल के हेड क्वाटर का हाल? दुपहरिया से मक्खी की तरह गाड़ी सब भिनभिना के काड़ फाड़ने लगता है। बंगाली बाजार में शिलान्यास वाला पट्टा ई नेता के विकास पर थूक फेंक रहा है।

उधर महेशखूंट से मधेपुरा-पूर्णिया वाला एनएच भी आज तक बनिये रहा है। इसी पर लेंगे ई सब वोट। सब काम में फोक्कासी में फोटो खिंचाने के लिए दस गो मीडियावाला को बुला के हाथ लगा देना है बस। बांकी कौन देखने जाता है कि क्या हुआ उस योजना का।'

बाली कहने लगा 'अरे ऐसा नहीं है भैया, ई पब्लिक है और ऊ सब जानती है। इसलिए कुर्सी से उतारना और बिठाना तो हमही लोग डिसाइड करेंगे।'

अचानक से चच्चा का फोन बज उठता है... ऊं नमः शिवाय ऊं नमः शिवाय। कुरते के पाकेट को आधा नोंचते आधा पटकते हुए चच्चा फोन उठाते हैं। कहने लगते हैं 'अच्छा... अच्छा आ रहे हैं, सोनम को बोलो तैयार रहने। इस बार दूसरे रास्ते से जाएंगे। अकेले नहीं जाए बोल दो। हम आ रहे हैं।'

धूप अब कड़क होने लगी थी तो बॉली और लक्की अपाची से निकल लेते हैं तो मार्शल अशोक को कॉपी में चाय के पैसे लिखवाने लगता है।



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Saharsa (Bihar) Assembly Election 2020 Voters News | Political Discussion On Upcoming Vidhan Sabha Chunav


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मेरी उम्र उस समय कुछ 17 साल रही होगी। मेरा एक दोस्त था, जिसे उसके 18वें जन्मदिन पर पिताजी ने बाइक गिफ्ट दी। एक दिन वो मेरे घर आया और मुझसे कहने लगा चलो घूमकर आते हैं। थोड़ी देर में हम एक पेट्रोल पंप पर पहुंचे। वहां बहुत लंबी लाइन लगी थी।

मैंने एक चीज नोट की कि लोग पेट्रोल तो भरवा रहे थे, लेकिन पैसे कोई नहीं दे रहा था। मेरे दोस्त ने भी अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवाया और पैसे नहीं दिए। मैंने जब उससे पूछा तो उसने कहा कि नेताजी की रैली में जा रहे हैं। सब इंतजाम उनकी तरफ से है।

हो सकता है कि ऐसा कभी न कभी आपके साथ भी हुआ है। लेकिन, बिहार में चुनाव की तारीखें आने के बाद अब किराए से बाइक वालों की भीड़ जुटाने का बिजनेस शुरू हो गया है। इसके लिए बाकायदा ठेकेदार हैं, जो नेताओं के लिए भीड़ इकट्ठी करती है और उसके बदले में इन्हें पैसा मिलता है। हालांकि, कोरोना की वजह से इस बार बड़ी-बड़ी रैलियों और भीड़ इकट्ठा करने पर रोक जरूर है, उसके बावजूद इसे चलाने वाले सक्रिय हो गए हैं।

भास्कर ने जब किराए की भीड़ की पड़ताल के लिए ठेकेदारों का स्टिंग ऑपरेशन किया तो चौंकाने वाली बातें सामने आई। पता चला कि महज 300 रुपए में बाइकर्स मिल जाते हैं, जो नेताजी के लिए भीड़ बढ़ाने का काम करते हैं। ये भीड़ नेताओं की जयकार भी करती है और उनकी पार्टी का झंडा भी उठाती है। थोड़ी देर बाद यही भीड़ किसी दूसरी पार्टी के नेता के जयकार करने लगती है।

ऐसे हुआ किराए की भीड़ लाने वाले ठेकेदारों का खुलासा

सबसे पहले नेताओं के लिए किराए की भीड़ जमा कराने वाले ठेकेदारों की पहचान की, उनसे बात की और खुद राजनीतिक पार्टी के लिए इलेक्शन मैनेजमेंट का काम करने की बात कहकर भरोसा बनाया। भरोसा होते ही ठेकेदार ने एक-एक करके वो सारी बातें बता दीं, जो नेताओं के साथ होती थी।

बातचीत में पता चला कि ये किराए की भीड़ एक तरह से टैरिफ पर काम करती है। ठेकेदार पहले नेताओं से किलोमीटर के हिसाब से डील करते हैं। ये भीड़ नेताओं के साथ टैरिफ वाले समय तक जिंदाबाद करती है।

नीचें पढ़े भास्कर रिपोर्टर और ठेकेदार के बीच बातचीत...

रिपोर्टर - हैलो, नमस्ते भैया...मैं...बोल रहा हूं।

ठेकेदार - बोलो।

रिपोर्टर - बात हुई थी आपसे...बोरिंग रोड पर मुलाकात हुई थी।

ठेकेदार – हां...हां...बताओ।

रिपोर्टर - भैया मैं रहने वाला तो बाहर का हूं, यहां इवेंट मैनेजमेंट का काम कर रहा हूं।

ठेकेदार - हां बोलो क्या?

रिपोर्टर - कुछ पार्टियों की डिमांड आई थी रैली के लिए बाइक के साथ लड़कों की, आपकी मदद मिल जाएगी क्या?

ठेकेदार - ऐसा है न…तुम एक आध घंटे में हमको कॉल करोगे।

रिपोर्टर - भैया अभी....नेताजी को बताना था।

ठेकेदार - हां हो, ओह

रिपोर्टर - अच्छा ये बता दीजिए कितना लगेगा?

ठेकेदार - पर बाइक 300 रुपया देना होगा।

रिपोर्टर - तेल देना होगा अलग से?

ठेकेदार - नहीं…तेल के साथ, कहां से कहां जाना है अगर लॉन्ग डिस्टेंस हुआ तो पर बाइक 500...कम दूरी हुई तो 300 देना होगा।

रिपोर्टर - कितने किलो मीटर का 500 और कितने किलो मीटर का 300 देना होगा।

ठेकेदार - 10 किलोमीटर जाना है तो 300...अगर 15 से 20 किलोमीटर जाना हो तो 500 देना होगा।

रिपोर्टर - कितना मैक्सिमम हो सकता है, कितना लोग मिल सकते हैं?

ठेकेदार - 100 बाइक का हो जाएगा।

रिपोर्टर - कागज पत्र तो होगा उन सभी का, हालांकि कागज पत्र कौन चेक करेगा।

ठेकेदार - रैली में कागज पत्र कौन चेक करता है, पहले पूछ लो बात करके कंफर्म कर लो।

रिपोर्टर - भैया वो तो ज्यादा बता रहे थे, उन्हें ढाई से तीन सौ तक चाहिए था।

ठेकेदार - पहले पूछो तो सही पैसा देंगे या नहीं देंगे।

रिपोर्टर - पैसा तो देंगे, पैसा तो एडवांस देने की बात हुई है।

ठेकेदार - हां तो पैसा एडवांस दिला दो, फिर हम करेंगे आगे। नहीं दिए तो नहीं हो पाएगा।

रिपोर्टर - भैया ढाई तीन सौ की व्यवस्था हो जाएगी न।

ठेकेदार - ढाई तीन सौ नहीं कह सकते बाबू, हम डेढ़ सौ मिनिमम...झूठ नहीं बोलेंगे डेढ़ सौ तक का कर देंगे।

रिपोर्टर - इधर कोई ऑर्डर मिला है क्या?

ठेकेदार - नहीं अभी तो ऑर्डर कोई नहीं मिला है, पहले पूछ लेना रैली निकल रहा है, आचार संहिता लागू हो गई है।

रिपोर्टर - वो दूसरे तरह की रैली निकाल रहा है।

ठेकेदार - हां पहले पूछ लेना, फिर बताना।

रिपोर्टर - ठीक है भैया, व्यवस्था हो जाएगी न ।

ठेकेदार - हां हां हो जाएगी।

भीड़ को नारे लगाने होते हैं, एक गाइड भी होता है

किराए की भीड़ के कई काम होते हैं। सबसे पहला काम तो यही होता है कि इन्हें नेताजी की गाड़ी के पीछे अपनी बाइक दौड़ानी होती है। नेताजी के नारे लगाने होते हैं। नारे क्या लगेंगे, ये नेताजी और ठेकेदार तय करते हैं। भीड़ को गाइड करने वाला भी होता है, जो ये ध्यान रखता है कि बाइकर्स झंडे सही से उठा रहे हैं या नहीं।

ज्यादातर बाइकर्स वो होते हैं, जो बिगड़ैल और आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं

भीड़ बढ़ाने का काम करने वाले इन बाइकर्स में ज्यादातर वो लड़के होते हैं, जो बिगड़ैल और आपराधिक प्रवृत्ति वाले होते हैं। लूट, चोरी जैसी वारदातों में बाइकर्स का नाम आने के बाद करीब तीन साल पहले पटना के उस समय के एसएसपी मनु महाराज ने इन गैंग्स की पड़ताल की। पटना में ही करीब 50 से ज्यादा गैंग के 150 से ज्यादा लड़कों के नाम सामने आए थे, जो लूट, चोरी समेत कई वारदातों में शामिल थे। कार्रवाई हुई थी, लेकिन गैंग पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ।

समय बदला है, पहले भीड़ आती थी, अब बुलाई जाती है

एक्सपर्ट सुनील सिन्हा बताते हैं कि पहले नेताओं को सुनने के लिए भीड़ अपने साधन से या ट्रैक्टर-ट्रॉली से या बसों से पहुंच जाती थी। लेकिन, अब ट्रेंड बदल रहा है। अब भीड़ जुटाने के लिए नेताओं को मशक्कत करनी पड़ती है।

वहीं, बिहार की राजनीति में लंबे अरसे से नजर रखने वाले धनवंत सिंह राठौर कहते हैं कि पहले नेताओं के पास मुद्दे होते थे, लोग उनकी बात सुनने के लिए खुद आते थे। लेकिन, अब भीड़ में शामिल किसी व्यक्ति से पूछ लिया जाए कि वो किसकी रैली या जुलूस में आया है, तो शायद वो इसका जवाब भी न दे पाए।

डॉ. आशुतोष बताते हैं, बिहार में ऐसे कई बड़े नेता हुए हैं, जिन्हें सुनने के लिए गांधी मैदान भर जाता था, लेकिन अब ऐसा ट्रेंड आया है कि नेताओं को अपनी दमदारी दिखाने के लिए किराए की भीड़ लानी पड़ती है। वो कहते हैं पहले भीड़ आती थी, अब बुलानी पड़ती है।



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Bihar Election 2020; Dainik Bhaskar Sting Update | Political Party Pay Money to Fake Crowd For Bihar Vidhan Sabha Chunav Rally


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कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मेरीलैंड के वॉल्टर रीड हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। उन्हें हल्का बुखार, सर्दी और सांस लेने में कुछ परेशानी बताई गई है। डॉक्टर्स ट्रम्प का इलाज ऐसी एंटीबॉडी ड्रग से कर रहे हैं जो फिलहाल दूसरे कोरोना मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं है। यह एंटीबॉडी कॉकटेल ड्रग है। इसका नाम REGN-COV2 है। ट्रम्प को इस दवा के 8 ग्राम का एक डोज दिया गया है।

ट्रम्प के ट्रीटमेंट से जुड़ी 4 खास बातें

1. अमेरिकी कम्पनी ने तैयार की दवा REGN-COV2
REGN-COV2 दवा को अमेरिकी कम्पनी रीजेनेरन ने तैयार किया है। जिसका ट्रायल लंदन में चल रहा है। कम्पनी का दावा है कि ट्रायल के रिजल्ट बेहतर दिख रहे हैं। इस दवा में चूहे और कोरोना से रिकवर हुए मरीज की एंटीबॉडी का इस्तेमाल किया गया है। कम्पनी का दावा है, दोनों एंटीबॉडी मिलकर कोरोना को न्यूट्रिलाइज करने में मदद करेंगी। यह दवा कितनी असरदार है, आधिकारिक तौर पर इसकी ट्रायल रिपोर्ट आनी बाकी है।

2. एंटीबॉडी ड्रग पर सवाल भी उठे
डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन दो मरीजों का ट्रीटमेंट इस एंटीबॉडी ड्रग से हुआ है, उनमें साइडइफेक्ट दिखे हैं। लेकिन, अमेरिकी कम्पनी रीजेनेरन ने यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की। दोनों ही मरीजों को इस दवा की लो डोज दी गई थी। ट्रम्प के फिजिशियन डॉ. सिएन कॉन्ले के आधिकारिक बयान के मुताबिक, ट्रीटमेंट के दौरान ट्रम्प को 8 ग्राम REGN-COV2 दवा की सिंगल डोज दी गई है।

3. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का दावा, दवा सुरक्षित है
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर हॉर्बी का कहना है, यह ड्रग सुरक्षित है। इसकी एक डोज से मरीज को 6 हफ्तों तक की सुरक्षा मिल जाती है। यह एक तरह से आर्टिफिशियल एंटीबॉडी है। जिनमें दो तरह की एंटीबॉडीज हैं। इसका काम कोरोना को इंसान में घुसने से रोकना है और संख्या बढ़ाने पर भी रोक लगाना है। यह वायरस को खत्म करने में इम्यून सिस्टम की मदद करती है।

प्रो. पीटर के मुताबिक, ट्रायल में यह ड्रग कोरोना के हल्के और गंभीर लक्षण वाले करीब 500 मरीजों को दिया गया है। अभी तक सुरक्षा को लेकर कोई भी दिक्कत सामने नहीं आई हैं। यह काफी असरदार दवा है और लैब में इसकी पुष्टि भी हुई है।

4. ट्रीटमेंट में शामिल की गईं 6 अन्य दवाएं क्या करती है, इसे समझिए
इसके अलावा ट्रम्प को ट्रीटमेंट में रेमडेसेविर, जिंक, विटामिन-डी, फेमोटिडिन, मेलाटोनिन और एस्प्रिन दी जा रही है। डॉक्टर्स को उम्मीद है, दवाओं का कॉम्बिनेशन उनकी रिकवरी को तेज करेगा। लेकिन ये सभी दवाएं क्या काम करती हैं, इसे समझिए-

  • रेमडेसेविर : यह एंटी-वायरल ड्रग है, जिसे इबोला का ट्रीटमेंट करने के लिए तैयार किया गया था। महामारी की शुरुआत से ही इसे कोरोना के मरीजों को दिया जा रहा है। यह ड्रग शरीर में मेर्स, इबोला और कोरोनावायरस की संख्या बढ़ने से रोकता है।
  • जिंक : यह ऐसे मरीजों को दी जाती है जिनके गले में समस्या होती है। कोरोना के मामलों में जिंक कितना कारगर, इस पर रिसर्च जारी है। एक्सपर्ट का कहना है, यह नुकसान नहीं पहुंचाता, इसलिए कोरोना के मरीजों को दिया जा सकता है।
  • विटामिन-डी : कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि विटामिन-डी की कमी होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ता है। ब्रिटेन के हेल्थ सेक्रेटरी का कहना है, विटामिन-डी के सप्लिमेंट्स सुरक्षित और किफायती हैं, इसे लिए जा सकते हैं।
  • फेमोटिडिन : यह ड्रग पेप्सिड के नाम से बाजार में मिलता है। सीने में जलन होने पर इसे मरीज को दिया जाता है। न्यूयॉर्क में कोरोना के मरीजों पर इसका ट्रायल चल रहा है। शुरुआती दौर के ट्रायल में यह दवा मददगार साबित हुई है।
  • मेलाटोनिन : यह दवा नींद न आने पर मरीजों को दी जाती है। टेक्सास के डॉक्टर्स का कहना है, कोरोना के 400 मरीजों को यह दवा दी गई। उनमें से कुछ ही मरीजों की हालत नाजुक हुई। साउथ फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी में इस दवा पर रिसर्च चल रहा है। लेकिन, अब तक कोई सटीक परिणाम सामने नहीं आए हैं।
  • एस्प्रिन : यह जानी-मानी पेनकिलर दवा है जो शरीर में वायरस को उसकी संख्या बढ़ाने से रोकती है। विशेषज्ञों का कहना है, यह दवा कोरोना के मामले को गंभीर होने से रोकने में मदद करती है। इसके अलावा कोरोना के मरीजों में हृदय रोगों के कारण होने वाले कॉम्पलिकेशन को भी रोकती है।


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President donald trump coronavirus treatment given experimental antibodies from mice that are NOT available to the public and 6 other drug


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देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। आम आदमी से लेकर केंद्र सरकार तक के पास पैसों की कमी है। केंद्र ने राज्यों को जीएसटी के 2.35 लाख करोड़ रुपए नहीं दिए हैं। बावजूद इसके केंद्र सरकार नए संसद भवन निर्माण में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। सेंट्रल विस्टा नाम से चल रहे प्रोजेक्ट के लिए 25 हजार करोड़ का बजट भी है और इसमें बन रही पार्लियामेंट बिल्डिंग के लिए 861 करोड़ के खर्च पर बहुत तेजी से काम चल रहा है।

विपक्ष ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को कोरोना काल में रोकने की मांग की। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी के अनुसार विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है। बलूनी बताते हैं कि देश के किसी भी प्रोजेक्ट को रोका नहीं गया है। सभी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। विपक्ष अपने कर्तव्य का निर्वहन ही नहीं कर पा रहा है। उसे पता ही नहीं है कि देश कितनी तरक्की कर रहा है, विकास कार्य कितनी तेजी से चल रहे हैं।

सरकार के फैसले पर सवाल खड़े हुए

ऑल इंडिया सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के नेशनल जनरल सेक्रेटरी पीएस नायर कहते हैं कि सीआरपीएफ की दिल्ली समेत कई बिल्डिंग जर्जर हो रही हैं, लेकिन कोई उसे नहीं बनाना चाहता। फोर्स को रिटायर होने के समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। सभी नौकरियों पर रोक लगा दी गई। रिटायर होने वाले एक्स सर्विसमैन को कोई जॉब नहीं मिल रहा है और सरकार ने हमारा डीए भी रोक लिया है। जबकि सेंट्रल विस्टा बनाने के लिए रुपया है। क्या संसद भवन जर्जर होकर बैठने लायक नहीं बचा है।

सरकार ने 8 अप्रैल 2020 और 23 जून 2020 के आदेश में केवल 17 मंत्रालयों को छोड़कर बाकी सभी मंत्रालयों के खर्च बजट में 40 फीसदी तक कटौती करने को कहा। यह कटौती शुरुआती सितंबर तक होनी थी, लेकिन अब भी जारी है।

वहीं वित्त विभाग, भारत सरकार के

डीजी मीडिया एंड कम्युनिकेशन राजेश मल्होत्रा ने कहा कि सभी विभागों को गैरजरूरी खर्चों में कटौती के लिए कहा गया है। जो पूर्व से स्वीकृत कार्य हैं उन्हें संबंधित विभाग प्राथमिकता के आधार पर करें। स्वीकृत बजट नहीं रोका गया है। केंद्र की ओर से राज्यों को दिया जाने वाला शत प्रतिशत बजट दिया गया है।

इस तरह रुके हैं दूसरे कई जरूरी काम

राज्य मांग रहे हैं पैसा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, तमिलनाडु के ईके पलानीस्वामी ने प्रधानमंत्री को और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी लिखकर दो टूक कहा है कि उन्हें पैसे चाहिए। केंद्र के पास राज्यों का 2.35 लाख करोड़ रुपए बकाया है, जो उसे राज्यों को जीएसटी नुकसान की भरपाई के रूप में देना है।

महंगाई भत्ते पर भी रोक

कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर 1 जनवरी 2020 से 1 जुलाई 2021 तक रोक है। इससे केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों तथा 61 लाख पेंशनभोगियों पर असर पड़ा। ऑल इंडिया सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के नेशनल जनरल सेक्रेटरी पीएस नायर का कहना है कि इस फैसले का असर 20 लाख सेवारत और सेवानिवृत्त परिवारों पर पड़ेगा।



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प्रस्तावित संसद भवन(फाइल फोटो)


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प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को रोहतांग में करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी टनल का उद्घाटन किया। 9.2 किमी लंबी यह अटल टनल 10 साल में बनकर तैयार हुई है। वहीं, भारत में कोरोना से पहली मौत के 204 दिन बाद आंकड़ा 1 लाख पार हो गया। ब्राजील में इतनी मौतें 158 दिनों में जबकि अमेरिका में सिर्फ 83 दिनों में हुईं। बहरहाल, शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...

आज इन 4 इवेंट्स पर रहेगी नजर

1. आज मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच शारजाह में दोपहर 3.30 बजे से मैच खेला जाएगा।

2. आज चेन्नई सुपर किंग्स और किंग्स इलेवन पंजाब भी आमने-सामने होंगे। मैच दुबई में शाम 7.30 बजे से खेला जाएगा।

3. मुंबई और तटीय कोंकण इलाके में आज भारी बारिश की चेतावनी। बीएमसी ने लोगों को बारिश के दौरान समुद्र किनारे नहीं जाने की अपील की है।

4. आज राहुल गांधी पंजाब में कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। वह यहां 3 दिन ट्रैक्टर रैलियां करेंगे। आज इसकी शुरुआत होगी।

अब कल की 6 महत्वपूर्ण खबरें

1. बिहार महागठबंधन में सीटों का बंटवारा, राजद 144 और कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ेगी

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन में सीटों का फॉर्मूला तय हो गया। राजद 144, कांग्रेस 70, सीपीआई माले 19, सीपीआई 6, सीपीएम 4 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। पर, सीटों के ऐलान के साथ ही गठबंधन में दरार पड़ गई। फॉर्मूले से नाखुश वीआईपी के नेता मुकेश सहनी ने कहा- हम गठबंधन से बाहर हो रहे हैं। राजद के सीएम कैंडिडेट तेजस्वी बोले- हम पहली कैबिनेट में पहली कलम से 10 लाख स्थाई और सरकारी नौकरी देंगे।

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2. राहुल-प्रियंका हाथरस पहुंचे, साथ में कांग्रेस के 35 सांसद भी थे, जिन्हें पुलिस ने रोका

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हाथरस गैंगरेप पीड़ित के परिवार से मिलने शनिवार को हाथरस पहुंचे। दरअसल, 5 लोगों के डेलिगेशन को पीड़ित के गांव जाने की इजाजत मिली थी। साथ में कांग्रेस के 35 सांसद भी थे, जिन्हें पुलिस ने दिल्ली-नोएडा फ्लाइ वे (नोएडा बॉर्डर) पर रोक दिया। इसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया तो पुलिस ने लाठीचार्ज भी कर दिया।

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3. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प कोरोना पॉजिटिव, यदि तबियत बिगड़ी तो क्या होगा?

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक 32 दिन पहले डोनाल्ड ट्रम्प कोविड-19 पॉजिटिव हो गए हैं। 74 वर्षीय ट्रम्प को मेरीलैंड के वॉल्टर रीड हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। उन्हें हल्का बुखार, सर्दी और सांस लेने में कुछ परेशानी बताई गई है। ट्रम्प के कोविड-19 पॉजिटिव होने का अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है? जानिए भास्कर एक्सप्लेनर में...

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4. एम्स के पैनल ने सुशांत की हत्या की आशंका को खारिज किया

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के 110 दिन बाद बड़ा खुलासा हुआ है। एम्स के पैनल ने अपनी रिपोर्ट में एक्टर की हत्या की आशंका से इनकार किया है। इंडिया टीवी से बातचीत में एम्स के फॉरेंसिक विभाग के हेड डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा, 'यह क्लियर कट खुदकुशी का मामला है। सुशांत का मर्डर नहीं हुआ था।' हालांकि, सीबीआई की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि होनी बाकी है।

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5. दुनिया के देशों में 1 लाख मौतों का हिसाब, भारत तीसरे नंबर पर

2 अक्टूबर को भारत में कोरोना से मौतों का आंकड़ा 1 लाख को पार कर गया। भारत में कोरोना से होने वाली पहली मौत के 204 दिनों के बाद यह संख्या 1 लाख मौतों तक पहुंची है। वहीं, ब्राजील में यह आंकड़ा 158 दिनों में ही पहुंच चुका था, जबकि अमेरिका में शुरुआती 1 लाख मौतें 83 दिनों में हुई थीं। मौतों के मामले में भारत दुनिया में अमेरिका, ब्राजील के बाद अभी तीसरे नंबर पर है।

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6. वायरल ऑडियो में जिसे कांग्रेस कार्यकर्ता बताया, वो पीड़ित का रिश्तेदार

हाथरस गैंगरेप मामले में पहले पुलिस ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई। अब टेप किए गए फोन कॉल के आधार पर दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता ने पीड़ित परिवार को अधिक मुआवजा दिलाने का झांसा दिया। इस पर युवक बोला- जिसका ऑडियो वायरल किया जा रहा है वो मैं हीं हूं और मैं कोई कांग्रेसी कार्यकर्ता नहीं हूं। मैं तो पीड़ित की बुआ का लड़का हूं। पढ़िए हाथरस से भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट...

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अब 4 अक्टूबर का इतिहास

1824: मेक्सिको ने नया संविधान बनाया और फेडरल रिपब्लिक बना।

1830: नीदरलैंड से अलग होकर बेल्जियम साम्राज्य बना।

1957: सोवियत संघ ने पहला उपग्रह स्पूतनिक सफलता पूर्वक अंतरिक्ष में भेजा।

आखिर में जिक्र हिंदी के प्रमुख साहित्यकार और आलोचक रामचंद्र शुक्ल का। आज ही के दिन 1884 में उनका जन्म हुआ था। पढ़िए उन्हीं का एक विचार...



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AIIMS 'new claim on Sushant's death; In Rahul-Priyanka Hathras, Tejashwi promises 10 lakh jobs, but breaks in grand alliance


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