Sunday, October 4, 2020

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कोरोना से देश में 27 दिनों से रोज औसतन 1 हजार से ज्यादा मौतें हो रही हैं। इस रफ्तार से जनवरी में दूसरे और अगस्त के बाद पहले नंबर पर होगा भारत। हाथरस में आरोपियों के परिवारों के साथ ठाकुरों की महापंचायत हुई। वहीं, गैंगरेप पीड़ित के परिवार की रसोई में खाना नहीं बन सका। बहरहाल, शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...

आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर

1. आज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स आमने-सामने होंगे। टॉस शाम 7 बजे होगा। मैच शाम 7.30 बजे से दुबई में खेला जाएगा।

2. हाथरस गैंगरेप के विरोध में कांग्रेस छत्तीसगढ़ में धरना और झारखंड में मौन सत्याग्रह करेगी। पंजाब में कांग्रेस के खेती बचाओ ट्रैक्टर मार्च का दूसरा दिन है।

3. राजस्थान में बिगड़ती कानून व्यवस्था के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन। वहीं, आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल भी हाथरस जाएगा।

अब कल की 6 महत्वपूर्ण खबरें

1. हाथरस गैंगरेप पर राजनीति तेज, सपा-रालोद कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज

उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप पीड़ित के गांव बूलगढ़ी में राजनीति तेज हो गई है। रविवार को समाजवादी पार्टी का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल यहां पहुंचा। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। रालोद-सपा कार्यकर्ताओं का हंगामा रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद भी गांव जाने के लिए पैदल निकले।

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2. बिहार चुनाव: नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी लोजपा

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में दरार पड़ गई है। रविवार को दिल्ली में लोजपा के संसदीय दल की बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि पार्टी जदयू चीफ नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ेगी। लोजपा एनडीए में मनचाही संख्या में सीट न मिलने से नाराज है। पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि भाजपा के साथ कुछ सीटों पर लोजपा की फ्रेंडली फाइट होगी।

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3. कोरोना रोकने में सफल देश के 3 राज्यों से ग्राउंड रिपोर्ट

भारत के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों तक कोरोना फैल चुका है। एक लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। लेकिन, कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां कोरोना के शुरुआती केस आने के बाद कड़े कदम उठाए गए और नए केस और मौतों पर काबू पाने की कोशिश की गई। गोवा, उत्तराखंड और केरल इसका उदाहरण हैं। गोवा से मनीषा भल्ला, उत्तराखंड से राहुल कोटियाल और केरल से बाबू के. पीटर की रिपोर्ट।

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4. पेशे से डॉक्टर, लेकिन करते हैं खेती, हर साल 1.5 करोड़ रुपए कमाई

यह कहानी हैदराबाद के कुकटपल्ली के रहने वाले श्रीनिवास राव माधवराम की है। वह पेशे से एक डॉक्टर हैं। हर दिन सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक मरीजों का इलाज करते हैं। इसके बाद निकल पड़ते हैं अपने खेतों की तरफ। चार साल से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे है। फिलहाल 12 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट लगाया है। सालाना 1.5 करोड़ रुपए की कमाई हो रही है।

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5. बिहार चुनाव से पहले भास्कर स्टिंग, नेताओं की रैली में ठेकेदार लाता है बाइक और लड़के

बिहार चुनाव को लेकर जारी घमासान के बीच भास्कर ने जब किराए की भीड़ की पड़ताल के लिए ठेकेदारों का स्टिंग ऑपरेशन किया तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पता चला कि 300 रुपए में बाइकर्स मिल जाते हैं, जो नेताजी के लिए भीड़ बढ़ाने का काम करते हैं। बकौल ठेकेदार- किसी भी रैली के लिए 100 से 150 बाइक वाले ला सकता हूं। 10 किमी के 300, 20 किमी के 500 रुपए लगेंगे।

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6. डिजिटल ट्रांजेक्शन में फ्रॉड से बचना हो तो इन 5 तरीकों से सेफ रहें

देश में पिछले साल एक अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच सिर्फ 92 दिन में हैकर्स ने 128 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया। ये सब उन्होंने नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड में सेंध लगाकर किया। डिजिटल टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट ललित मिश्रा बताते हैं कि हैकर्स ज्यादातर ऑनलाइन फ्रॉड हमारी पहचान और निजी जानकारी को चुराकर करते हैं। इनसे बचने के लिए 5 तरीकों को आजमा सकते हैं।

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अब 5 अक्टूबर का इतिहास

1864: कलकत्ता शहर में आए चक्रवात से लगभग 50,000 लोगों की मौत हुई।

1910: पुर्तगाल में राजशाही खत्म हो गई और गणतंत्र की स्थापना हुई।

2011: भारत में दुनिया का सबसे सस्ता 2250 रुपये का टैबलेट पीसी ‘आकाश’ जारी किया गया।

आखिर में जिक्र एपल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स का। 2011 में आज ही के दिन 56 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था। पढ़िए उन्हीं की एक बात...



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Politics strongly in Hathras; Rift in NDA before elections in Bihar; 3 states of the country succeeded in stopping Corona


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आईफोन, आईपॉड, आईपैड और मैक जैसे प्रोडक्ट्स के जरिए दुनियाभर में इनोवेशन के लिए प्रसिद्धि पाने वाले स्टीव जॉब्स की मौत पैन्क्रियाटिक कैंसर की वजह से 5 अक्टूबर 2011 को हुई थी। उनकी जिंदगी से जुड़ी कई कहानियां ऐसी हैं, जो युवाओं सहित हर एक को प्रेरित करती हैं। उन्होंने 12 जून 2005 को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम में जो कहा, उसके प्रमुख अंश इस प्रकार हैं-

जॉब्स ने कहा- मुझे कॉलेज से निकाला गया था। दरअसल, मेरी मां कॉलेज स्टूडेंट थी और उनकी शादी भी नहीं हुई थी। मेरे जन्म से पहले ही मां ने तय कर लिया था कि मुझे एक ग्रेजुएट दंपती को गोद देंगी। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। मेरी मां शुरू में गोद देने के खिलाफ थी, लेकिन बाद में राजी हो गई। शर्त यह थी कि मुझे कॉलेज में भेजा जाएगा। लेकिन, मैंने कॉलेज से ड्रॉप ले लिया। आज पीछे देखता हूं, तो मुझे लगता है कि मेरा निर्णय सही था।

उन्होंने कहा- मैं लकी रहा कि जो करना चाहता था, वह सब मैं कर सका। गैरेज में एपल शुरू किया, तो उस समय मैं सिर्फ 20 साल का था। 10 साल में एपल ऊंचाई पर था। दो लोगों से शुरू हुई कंपनी दो बिलियन लोगों तक पहुंची और 4000 कर्मचारी थे। हमने मेकिंटोश लॉन्च किया। भविष्य को लेकर हमारा विजन फेल हो गया था। 30 साल की उम्र में मुझे कंपनी से निकाल दिया गया था। जॉब्स कहते थे कि उन्होंने 17 साल की उम्र में एक कोटेशन पढ़ा था- आप हर दिन यह सोचकर जियो कि आज आखिरी दिन है। इसने उन्हें खूब प्रभावित किया। 33 साल तक वे रोज सुबह आईने में चेहरा देखते और सोचते कि आज आखिरी दिन है। इसने मुझे वह करने को प्रेरित किया, जो मुझे करना था।

1962: जेम्स बॉन्ड पहली बार परदे पर उतरा

जेम्स बॉन्ड पर बनी पहली फिल्म का पोस्टर।

काल्पनिक चरित्र ब्रिटिश जासूस जेम्स बॉन्ड जिसे कोड नेम 007 से भी जाना जाता है, पहली बार 1962 में बड़ी स्क्रीन पर नजर आया। ब्रिटिश जासूसी एजेंसी MI6 के लिए काम करने वाले जेम्स बॉन्ड का चरित्र इयान फ्लेमिंग के नॉवेल से लिया गया। शुरुआती फिल्में फ्लेमिंग के नॉवेल और शॉर्ट स्टोरीज पर आधारित थीं। यह फ्रेंचाइज इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार चलने वाली फिल्म सीरीज में से एक बना हुआ है, जो 1962 से लेकर 2010 तक लगातार बनती रहीं। पहली फिल्म सीन कॉनरी को जेम्स बॉन्ड के तौर पर देखा गया था।

1947: अमेरिका में प्रेसिडेंट ने टीवी के जरिए दिया भाषण

प्रेसिडेंट हैरी ट्रूमैन (बाएं) और प्रेसिडेंट्स सिटीजंस फूड कमेटी चेयरमैन चार्ल्स लकमैन 5 अक्टूबर 1947
को टीवी कैमरा के सामने खड़े दिख रहे हैं।

अमेरिका के 33वें राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने टीवी के जरिए लोगों को भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि यूरोप दूसरे विश्वयुद्ध के दुष्परिणामों का सामना कर रहा है और इस वजह से अनाज का इस्तेमाल कम करें। उन्होंने लोगों से मंगलवार को मांस न खाने, गुरुवार को अंडे और पोल्ट्री से परहेज करने और रोज एक स्लाइस ब्रेड कम खाने की अपील की थी।

आज की तारीख को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है-

  • 1524ः भारतीय इतिहास की प्रसिद्ध वीरांगना रानियों में से एक रानी दुर्गावती का जन्म हुआ।
  • 1676: ईस्ट इंडिया कंपनी को इंग्लैंड के राजा से मुंबई में भारतीय मुद्रा ढालने का अधिकार मिला।
  • 1789ः फ्रांस की क्रांति के दौरान पेरिस की महिलाओं ने वर्सेलिस तक मार्च किया।
  • 1793: फ्रांसीसी क्रांति के दौरान फ्रांस में ईसाई धर्म विस्थापित हुआ।
  • 1796ः स्पेन ने इंग्लैंड के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
  • 1864: सिनेमेटोग्राफर का पेटेंट कराने वाले लुइस ज्‍यां ल्‍यूमियरे का जन्म हुआ।
  • 1880: अलोंजो टी क्रॉस ने पहले बॉल प्वाइंट पेन का पेटेंट कराया।
  • 1910ः पुर्तगाल में राजशाही खत्म हो गई और गणतंत्र की स्थापना हुई।
  • 1915: बुल्गारिया ने प्रथम विश्व युद्ध में हिस्सा लिया।
  • 1944: फ्रांस में महिलाओं को मताधिकार मिला।
  • 1988ः ब्राजील की संविधान सभा ने संविधान को मंजूरी दी।
  • 1989: मीरा साहिब बीवी 1989 में सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनी।
  • 1989ः तिब्बत के 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो को मानवाधिकारों के क्षेत्र में कार्य के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला।


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Today History for October 5th/ What Happened Today | Apple CEO and Co-Founder Steve Jobs Death Anniversary| First James Bond Film Released | First Televised Speech of US President


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Saturday, October 3, 2020

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भारत में कोरोना से होने वाली पिछली 30 हजार मौतों का ट्रेंड देखें तो, भारत में हर दिन हो रही मौतें ब्राजील और अमेरिका से 40% ज्यादा हैं। इस रफ्तार से अगर मौतें होती रहीं तो, भारत ब्राजील को 127 और अमेरिका को 346 दिनों में पीछे छोड़ देगा।

भारत में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी को आया था और पहली मौत 12 मार्च को हुई थी। मौतों का आंकड़ा 10 हजार पहुंचने में 96 दिन लगे। शुक्रवार को आंकड़ा 1 लाख पहुंच गया है। भारत में कोरोना से मौतों की रफ्तार अमेरिका और ब्राजील से कम थी, लेकिन समय के साथ ब्राजील और अमेरिका में जहां मौतें कम होती गईं, वहीं भारत में मौतें बढ़ती गईं।

भारत में कोरोना के चलते 204 दिन में एक लाख मौतें हुई हैं। शुरुआती 10 हजार मौतें होने में 95 दिन लगे थे। जबकि अगले 95 दिनों में 60 हजार से ज्यादा मौतें हुईं। पिछली 50 हजार यानी, आधी मौतें 50 दिनों से भी कम समय में हुई हैं। पिछली 30 हजार मौतों का औसत निकाला जाए तो, 1 हजार 111 मौतें हर दिन हो रही हैं।

अमेरिका में 22 मई को ही कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा 1 लाख पार कर चुका था। 29 सिंतबर तक अमेरिका में कोरोना से 2 लाख 10 हजार मौतें हो चुकी थीं। लेकिन अमेरिका में पिछली 50 हजार मौतें होने में 56 दिन लगे हैं। यानी भारत से 8 दिन कम। अमेरिका में जुलाई और अगस्त के शुरूआती दो हफ्तों तक कोरोना से होने वाली मौतें पीक पर थीं। लेकिन अगस्त के आखिरी हफ्ते से अब तक पिछले दिनों की तुलना में अमेरिका में कम मौतें हो रही हैं। अमेरिका में आखिरी 30 हजार मौतों का औसत देखा जाए तो एक दिन में औसतन 789 मौतें हो रही हैं।

ब्राजील में 8 अगस्त को ही कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा 1 लाख पार कर चुका था। ब्राजील में 29 सितंबर तक कोरोना से 1 लाख 40 मौतें हो चुकी थीं। ब्राजील में कोरोना से होने वाली मौतें पिछले दिनों की तुलना में कम हो रही हैं। ब्राजील में पिछली 50 हजार मौतें 58 दिन में हुई हैं। यानी भारत और अमेरिका की तुलना में ब्राजील में पिछली 50 हजार मौतें धीरे हुई हैं। ब्राजील में पिछली 30 हजार मौतों का औसत देखा जाए तो हर दिन औसतन 789 मौतें हो रही हैं।

भारत में हर दिन होने वाली मौतों का आंकड़ा अमेरिका और ब्राजील की तुलना में 40% ज्यादा है। पिछले 30 हजार मौतों के ट्रेंड के आधार पर देखा जाए तो भारत में कोरोना से 1 हजार 111, ब्राजील और अमेरिका में 789 मौतें हर दिन हो रही हैं। इस रफ्तार से अगर मौतें होती रहीं तो, भारत अमेरिका को 346 दिनों में और ब्राजील को 127 दिनों में पीछे छोड़ देगा।

इस औसत से 346 दिनों में भारत में कोरोना से होने वाली कुल मौतों का आंकड़ा 4 लाख 84 हजार और अमेरिका में 4 लाख 82 हजार होगा। अगर ब्राजील के औसत से तुलना करें तो 127 दिनों बाद भारत में कोरोना के 2 लाख 41 हजार और ब्राजील में 2 लाख 40 हजार मौतें हो जाएंगी।



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India Coronavirus Cases Death Toll Updates | Coronavirus (Covid-19) Death Toll Cross 1 Lakh | know how many Days Taken To Reach 100000 Deaths and Covid-19 Cases Breakup


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देश में काेरोना से एक लाख मौतें हो चुकी हैं। भारत के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों तक कोरोना फैल चुका है। लेकिन इनमें कुछ ऐसे राज्य भी शामिल हैं, जहां कोरोना के शुरुआती केस आने के बाद कड़े कदम उठाए गए और नए केस और मौतों पर काबू पाने की कोशिश की गई। गोवा, उत्तराखंड और केरल इसका उदाहरण हैं। गोवा से मनीषा भल्ला, उत्तराखंड से राहुल कोटियाल और केरल से बाबू के. पीटर की रिपोर्ट।

गोवा से मनीषा भल्ला की रिपोर्ट

पूरी तरह से खुल गया गोवा, पटरी पर लौट रही है जिंदगी

गोवा में हर दिन करीब 400 नए मामले आ रहे हैं। बावजूद इसके गोवा अपनी सामान्य जिंदगी में लौट रहा है। पर्यटकों की रौनक लौटने लगी है। आज से दो महीने पहले गोवा में होटल ऑक्युपेंसी सिर्फ 7% थी। यह अब बढ़कर 18% हो चुकी है।

गोवा के लिए आने वाले दो महीने अहम
गोवा का मुख्य रोजगार टूरिज्म है और इसे नुकसान से बचाने के लिए गोवा सरकार अब नए कदम उठा रही है। कोविड के लिए सर्विलांस अफसर डॉ. उत्कर्ष बेटोडकर बताते हैं कि हमने मरीजों की बढ़ती तादाद देखते हुए निजी अस्पतालों को भी कोविड ट्रीटमेंट की परमिशन दी है। कंटेंटमेंट जोन खत्म कर दिए गए हैं, लेकिन नए नियम बहुत सख्त हैं। आने वाले दो महीने तक गोवा में कोविड केस में ठहराव आने की उम्मीद है।

स्थानीय पंचायतों को भरोसे में लिया
भारत सरकार ने 8 जून से टूरिज्म के लिए हरी झंडी दी थी। दो जुलाई को गोवा पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। गोवा ट्रैवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के अध्यक्ष निलेश शाह बताते हैं कि सबसे बड़ी दिक्कत थी स्थानीय गांव पंचायतों का पर्यटकों को न आने देना। लेकिन एसोसिएशन ने सरकार की मदद से पंचायतों को भरोसा दिलाया कि आने वाले पर्यटकों से बीमारी नहीं फैलेगी। वे नियमों का पूरी तरह पालन करेंगे।

क्या नियम बनाए?

  • डॉ. उत्कर्ष ने बताया कि गांव पंचायतों के साथ लगातार मीटिंग की जा रही है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि अगर उन्हें आसपास कोई पर्यटक संदिग्ध संक्रमित लगता है तो फौरन हेल्थ अफसरों को सूचित करें।
  • गोवा आने वालों की एयरपोर्ट-रेलवे स्टेशन पर पूरा हेल्थ टेस्ट किया जा रहा है। जरा सी भी शंका होने पर लोगों को आइसोलेशन में रखा जा रहा है।
  • होटल इंडस्ट्री को सख्ती से नियमों का पालन करने को कहा गया है। राज्य सरकार के पास कुल 3900 होटल रजिस्टर्ड हैं। इनमें से सिर्फ 700 होटल को काम करने की इजाजत मिली है। पर्यटकों द्वारा कमरा छोड़ने के बाद एक दिन होटल का कमरा खाली रखा जाएगा।
  • खाने के लिए रूम सर्विस अभी शुरू नहीं की जाएगी। कोई भी पर्यटक बिना मास्क के नहीं दिखाई देगा। हर जगह सैनेटाइजर की व्यवस्था होगी। होटल में फ्रंट सर्विस के लोग फेस शील्ड, दस्ताने आदि पहनकर रखेंगे।
  • टैक्सी ड्राइवरों के लिए भी सरकार की तरफ से अभियान चलाया गया है कि वे अपनी सुरक्षा कैसे कर सकते हैं।

40 हजार लोगों ने खोया था रोजगार
होटल-रेस्त्रां इंडस्ट्री में वर्करों का आना शुरू हो गया है। महामारी की वजह से यहां तकरीबन 40 हजार लोगों का रोजगार चला गया था। नॉर्थ गोवा में अंजुना बीच पर जिंजर ट्री होटल के मैनेजर हरीश बताते हैं कि कामकाज शुरू हो चुका है। आने वाले एक महीने के अंदर इसे रफ्तार मिलेगी। कैसीनो छोड़कर बाकी सब खुल चुका है। गांव पंचायतें भी सहयोग कर रही हैं। इस दफा गांव पंचायतों ने अपनी सालाना फीस भी नहीं बढ़ाई है। इससे पहले हर साल यह फीस बढ़ जाया करती थी।

उत्तराखंड से राहुल कोटियाल की रिपोर्ट

उत्तराखंड में कोरोना का पहला मामला 15 मार्च को सामने आया था। बीते 2 अक्टूबर को इसके 202 पूरे हुए हैं। सबसे पहले अब तक के आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं।

अन्य राज्यों से तुलना में ये आंकड़े ज्यादा डराने वाले नहीं लगते। लेकिन बीते 30 दिनों में इनमें जो तेजी आई है, वह जरूर राज्य सरकार के माथे पर बल डाल रही है। सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन ने इन आंकड़ों को बारीकी से परखा है। जहां शुरुआती 170 दिनों कुल 269 लोगों की मौत हुई थी, वहीं पिछले 30 दिनों में 342 लोगों की जान चली गई। हालांकि सकारात्मक पहलू यह है कि इन 30 दिनों में टेस्टिंग भी तेजी से बढ़ाई गई हैं और रिकवरी रेट में भी तेजी आई है।

पहाड़ी जनपदों ने किया बेहतर काम
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल कहते हैं, "शुरुआती दौर में उत्तराखंड ने जरूर कोरोना संक्रमण की रोकथाम में अन्य राज्यों से बेहतर काम किया था और इसमें सबसे अहम भूमिका पहाड़ी जनपदों के लोगों और अफसरों ने निभाई थी।" उत्तराखंड राज्य में कुल 13 जिले हैं, जिनमें से नौ पहाड़ी जिले हैं और चार मैदानी जिले। मैदानों की तुलना में पहाड़ों पर कोरोना का संक्रमण काफी हद तक सीमित रहा है। राज्य में अब तक कोरोना के जो 49 हजार मामले सामने आए हैं, इनमें से 36,907 मामले सिर्फ इन चार मैदानी जिलों के ही हैं।


कैसे लड़ी कोरोना के खिलाफ लड़ाई
नौटियाल बताते हैं कि पहाड़ों में लोगों ने स्वतः ही कोरोना से निपटने के लिए कदम उठाए, जिसके नतीजे भी साफ देखने को मिले हैं। व्यापार मंडल के लोगों प्रशासन से छूट मिलने के बाद भी दुकानें बेहद सीमित समय के लिए ही खोली और लॉकडाउन का असली असर पहाड़ी कस्बों में ही नजर आया। अनलॉक के दौरान भी शाम होते ही पहाड़ी कस्बे पूरी तरह सुनसान हो जाते थे और ये एक बड़ा कारण है कि पहाड़ों में संक्रमण अब तक अनियंत्रित नहीं हुआ।

केंद्र की गाइडलाइन का सख्ती से किया पालन

  • राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अफसर के मुताबिक, "प्रशासन की सक्रिय भूमिका से इतर हमें इसका भी लाभ मिला कि अन्य राज्यों की तुलना में प्रवासियों का वापस लौटना उत्तराखंड में कम हुआ।"
  • उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति भी कोरोना की रोकथाम में कुछ हद तक प्रदेश के लिए उपयोगी साबित हुई। सीमांत राज्य होने के चलते प्रदेश में सिर्फ वे ही लोग दाखिल हुए, जिन्हें उत्तराखंड ही आना था। दिल्ली, हरियाणा या मध्य भारत के राज्यों जैसा दबाव उत्तराखंड पर नहीं था। प्रवासी इन राज्यों की सीमाओं से होते हुए अपने-अपने प्रदेश लौट रहे थे।
  • प्रदेश की नाकेबंदी भी उत्तराखंड में अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा मजबूत रही। राज्य पुलिस अफसर प्रमोद साह कहते हैं, "प्रदेश में दाखिल होने के पांच मुख्य मार्ग हैं। इन पर नाकेबंदी होते ही पूरा प्रदेश सील हो जाता है। ऐसे में हर आने वाले पर नजर रखना और उनकी मॉनिटरिंग करना हमारे लिए अन्य राज्यों की तुलना में थोड़ा आसान है।"
  • अनूप नौटियाल कहते हैं, ‘सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर जो गाइडलाइन समय-समय से जारी होती रही, प्रदेश ने उन्हीं का अनुपालन किया है।’

केरल से बाबू के. पीटर की रिपोर्ट

इन दिनों कोरोना की दूसरी लहर से केरल राज्य बुरी तरह से परेशान है। देश में सबसे पहला मामला केरल में ही सामने आया था। इसके बाद राज्य ने काेरोना के खिलाफ सही दिशा में कदम उठाए और कुछ हद तक इस पर काबू पाने की कोशिश की। लेकिन अब यहां दिन-ब-दिन केस बढ़ते जा रहे हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़े हर दिन बड़े होते जा रहे हैं।

केरल में डेथ रेट सबसे कम
देश में सबसे पहले कोरोना पॉजिटिव केस 30 जनवरी 2020 को केरल के त्रिशूर में मिला था। वुहान में पढ़ने वाली स्टूडेंट छुटि्टयों में अपने घर लौटी थी। भले ही देश में पहला केस केरल में मिला हो, लेकिन राज्य सबसे कम मृत्युदर (0.4%) वाले राज्यों में शामिल है। देश में कोरोना की वजह से औसत मृत्युदर 1.58% है। इस लिहाज से केरल डेथ रेट के मामले में टॉप-20 राज्यों में भी शामिल नहीं है।

जनता कर्फ्यू से पहले लॉकडाउन
मार्च में राज्य में सबसे ज्यादा केस आने शुरू हुए थे। तब राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के जनता कर्फ्यू की अपील से एक दिन पहले ही अपने यहां लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। केरल सरकार के प्रभावी कदम की वजह से राज्य में अप्रैल के आखिर तक केस बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो गई थी। अप्रैल के महीने में काेई नया केस भी सामने नहीं आया था।

बाहरी लोग हैं जिम्मेदार
पहले हर दिन नए केस की संख्या 100 के भी नीचे आती थी, लेकिन जल्द ही ये नंबर सैकड़ों और हजारों में बदल गया। इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार भारत के बाहर रह रहे केरल के निवासी हैं, जो महामारी के दौरान राज्य लौटे हैं।



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Goa Kerala Uttarakhand (India) Coronavirus Cases - Ground Report Update | Top Three States Who Have Controlled (COVID-19) Infectious Disease


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नई दिल्ली. बीते एक महीने से अस्पताल में भर्ती केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री मंत्री रामविलास पासवान की हार्ट सर्जरी शनिवार की रात दिल्ली के एक अस्पताल में की गई। उनके बेटे और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) नेता चिराग पासवान ने ट्वीट किया- मेरे पिताजी का दिल्ली के अस्पताल में इलाज चल रहा है। अचानक कुछ वजहों से शनिवार देर रात उनकी हार्ट सर्जरी करनी पड़ गई। अगर जरूरत हुई तो अगले कुछ हफ्तों में दूसरी सर्जरी भी संभव है। आप सभी का मुश्किल की इस घड़ी में मेरे और मेरे परिवार के साथ खड़े होने के लिए शुक्रिया।

शनिवार को बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच गठबंधन पर फैसला के लिए बैठक होने वाली थी। हालांकि, पासवान की खराब सेहत को देखते हुए यह बैठक टाल दी गई।

चिराग ने पार्टी कार्यकर्ताओं से किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा था

सितंबर में चिराग ने कहा था कि उनकी पिता की तबीयत खराब है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग और दूसरे मुद्दों पर चर्चा के लिए उनके बिहार दौरे में देर हो सकती है। इसके बाद उन्होंने पार्टी समर्थकों से मुलाकात भी की थी और उन्हें किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा था।

एनडीए में सीटों को बंटवारे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीटों के बंटवारे को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। बीजेपी ने पहले कहा था कि यह जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के गठबंधन में चुनाव लड़ेगी। बिहार की 243 विधानसभा सीटों में एनडीए गठबंधन में शामिल लोजपा ज्यादा सीटों की मांग कर रही है। बिहार में तीन चरणों में 28 अक्टूबर और 3 और 7 नवम्बर को विधानसभा चुनाव होगा। वोटों की गिनती 10 नवम्बर को होगी।



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लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान हार्ट से जुड़ी समस्याएं होने की वजह से दिल्ली के अस्पताल में भर्ती हैं।- फाइल फोटो


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उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप पीड़ित का गांव बूलगढ़ी सियासी पार्टियों के लिए अखाड़ा बन चुका है। रविवार को समाजवादी पार्टी का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बूलगढ़ी गांव जाएगा। परिवार को सांत्वना देने के साथ कुछ आर्थिक मदद भी दी जा सकती है। प्रतिनिधिमंडल मौके पर जांच कर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को रिपोर्ट करेगा। वहीं, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी भी पीड़ित परिवार से मिलने जाएंगे। ऐसे में आज भी हंगामे के आसार हैं।

बसपा सुप्रीमो का ट्वीट

एसआईटी पिता का बयान लेने पहुंची गांव

योगी सरकार की तरफ से गठित एसआईटी पीड़ित परिवार का बयान दर्ज करने के लिए बूलगढ़ी पहुंच चुकी है। टीम के साथ एक एंबुलेंस है। टीम की अगुआई कर रहे गृह सचिव भगवान स्वरूप 7 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। अभी तक पीड़ित की मां, भाई के बयान दर्ज हो चुके हैं। शनिवार रात करीब 10 बजे एसआईटी परिवार के बीच जांच के लिए पहुंची थी, लेकिन पिता की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण बयान दर्ज नहीं हो सके थे। टीम आज पिता और अन्य रिश्तेदारों के बयान दर्ज करेगी।

सीबीआई जांच की सिफारिश की, परिजन बोले- हमें न्यायिक जांच चाहिए
सियासी संग्राम के बीच योगी सरकार ने शनिवार को हाथरस गैंगरेप मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए, लेकिन पीड़ित परिवार इस पर संतुष्ट नहीं है। पीड़ित के भाई ने कहा कि हम चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में मामले की जांच की जाए। सरकार केवल अपनी कर रही है। अभी तक की जांच से हमें संतुष्टि नहीं है। हमें हमारे सवालों के जवाब चाहिए। जिसकी बॉडी जलाई गई थी, वह किसकी थी? अगर वह शव मेरी बहन का था तो रात में इस तरह क्यों जलाया गया? डीएम ने हमारे साथ बदसलूकी क्यों की?

राहुल-प्रियंका ने शनिवार की शाम परिवार से मुलाकात की थी।

दूसरी कोशिश में राहुल-प्रियंका की पीड़ित परिवार से हुई मुलाकात
शनिवार शाम राहुल और प्रियंका गांधी ने पीड़ित परिवार से करीब 50 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की थी। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि हम परिवार के साथ खड़े हैं। प्रियंका गांधी का कहना था कि जब तक इस परिवार को न्याय नहीं मिलता, हमें ना वो (यूपी सरकार) रोक सकते हैं और ना हम रुकेंगे। 1 अक्टूबर को भी राहुल-प्रियंका हाथरस के लिए निकले थे, लेकिन ग्रेटर नोएडा में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। दोनों को 4 घंटे बाद छोड़ा गया।

क्या है पूरा मामला?
हाथरस जिले के चंदपा इलाके के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को 4 लोगों ने 19 साल की लड़की से गैंगरेप किया था। आरोपियों ने लड़की की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और उसकी जीभ भी काट दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान पीड़ित की मौत हो गई। चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि दुष्कर्म नहीं हुआ था।

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राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी रविवार सुबह पीड़ित परिवार के घर पहुंची। यहां पिता और अन्य रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।


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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के स्पेशल एडवाइजर शाहबाज गिल ने शनिवार को दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारत से मिले हुए हैं। गिल ने कहा, ‘मैं यह नहीं कहता कि नवाज शरीफ पाकिस्तान विरोधी हैं, लेकिन वे एक छोटी सोच वाले बिजनेसमैन हैं। क्या एक पाकिस्तानी ट्रेडर भारतीय पीएम मोदी से मिलेगा, लेकिन नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री रहते हुए नेपाल की राजधानी काठमांडू में मोदी से गुपचुप मुलाकात की थी। उन्होंने इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय तक को नहीं दी।’

उधर, पाकिस्तान को शरीफ को ब्रिटेन में नॉन-बेलेबल अरेस्ट वॉरंट जारी करवाने की कोशिशों में झटका लगा है। ब्रिटेन सरकार ने पाकिस्तानी अधिकारियों से कहा है कि वह पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति से जुड़े मामलों में दखल नहीं दे सकती।

नवाज के भारतीयों के साथ बिजनेस रिलेशन: गिल
गिल ने कहा कि सरकार को इस बात की जानकारी भी हुई है कि नवाज शरीफ ने हाल ही में लंदन स्थित एक देश के दूतावास में मीटिंग की थी। उन्होंने कहा- पठानकोट पर हमले के बाद भारत के बिजनेसमैन सज्जन जिंदल और नवाज ने एक जैसे बयान दिए थे। नवाज और उनके परिवार का भारतीयों के साथ निजी तौर पर बिजनेस रिलेशन है। उन्हें इसका फायदा हुआ है। दो दिन पहले इमरान ने कहा था कि नवाज भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान की फौज को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछले साल नवंबर से लंदन में हैं नवाज

70 साल के नवाज का लंदन में पिछले साल नवंबर से इलाज चल रहा है। लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें सिर्फ चार हफ्ते के लिए देश से बाहर जाने की इजाजत दी गई थी, लेकिन वे अब तक नहीं लौटे। कोर्ट की ओर से बार-बार समन भेजे जाने के बाद भी नवाज पेश नहीं हुए। इसे देखते हुए उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को लंदन के पाकिस्तान दूतावास के जरिए नवाज के खिलाफ वाॅरंट जारी करवाने को कहा है।



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यह फोटो दिसंबर 2015 की है। उस समय पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नवाज शरीफ ने शानदार मेहमानवाजी की थी। -फाइल फोटो


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