Friday, January 10, 2020

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नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप के चार गुनहगारों में से विनय कुमार शर्मा और मुकेश सिंह ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर की थी। जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करने का फैसला लिया है। जस्टिस एनवी रमना, अरूण मिश्रा, आर एफ नरीमन, आर. भानुमति और अशोक भूषण की बेंच 14 जनवरी को इस मामले पर सुनवाई करेगी। इससे पहले, दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को निर्भया के चारों दुष्कर्मियों अक्षय ठाकुर (31), पवन गुप्ता (25), मुकेश सिंह (32) और विनय शर्मा (26)के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी किया था। अदालत ने सभी चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी देने का आदेश दिया है।

सभी चारों गुनहगारों ने कोर्ट के फैसले के बाद क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने की बात कही थी। उधर, एक एनजीओ ने निर्भया के दोषियों को अंगदान करने की अनुमति मांगी थी जिसे दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को इस याचिका खारिज कर दी थी। याचिका में कहा गया था- वे समाज कल्याण के लिए दोषियों को अंगदान के लिए प्रेरित करना चाहते हैं ऐसे में उन्हें दोषियों से मिलने दिया जाए। कोर्ट ने कहा था कि दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी हुआ है। ऐसे में उनसे परिवार का एक सदस्य और वकील के अलावा कोई नहीं मिल सकता।

निर्भया केस में वारदात के 2578 दिन बाद डेथ वॉरंट जारी हुआ था
चारों दोषियों को जेल नंबर 3 में फांसी दी जाएगी। तीन दोषी जेल नंबर 2 में रखे गए हैं और एक को जेल नंबर 4 में रखा गया है। निर्भया के केस में वारदात के 2578 दिन बाद डेथ वॉरंट जारी हुआ था। 16 दिसंबर 2012 को निर्भया गैंगरेप का शिकार हुई थी। नौ महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी।



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अदालत ने सभी चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी देने का आदेश दिया है।


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मुंबई. एडलवाइज ग्रुप के को-फाउंडर और चेयरमैन रशेश शाह से 2000 करोड़ रुपए के विदेशी मुद्रा एक्सचेंज घोटाले के सिलसिले में पूछताछ होगी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शाह को 9 जनवरी को पेश होने का समन भेजा था, लेकिन उन्होंने अगली तारीख मांगी। ईडी ने नए सिरे से समन जारी कर दिया है। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से शुक्रवार को यह जानकारी दी।

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रशेश शाह।


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नई दिल्ली. पुलिस की विशेष जांच ईकाई ने ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ नामक वॉट्सऐप ग्रुप के 60 में से 37 सदस्यों की पहचान कर ली है। यह खुलासा शनिवार को न्यूज एजेंसी नेदिल्ली पुलिस के सूत्रों के आधार पर किया। बता दें कि शुक्रवार शाम दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जेएनयू हिंसा मामले में छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत 9 छात्रों की पहचान उजागर की थी। पुलिस का कहना था कि फिलहाल किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। सभी को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। वहीं, आइशी का कहना था कि मेरे पास भी सबूत हैं, जिनसे साबित होता है कि मुझ पर हमला किया गया।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि एक वॉट्सऐप ग्रुप की पहचान की गई है, जिसका नाम ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’है। इसमें 60 मेंबर हैं। कुछ लोगों की पहचान भी की है। इसमें आइशी घोष समेत चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, भास्कर, सुचेता, प्रिया रंजन, सामंत, योगेंद्र भारद्वाज, विकास पटेल शामिल हैं, इन लोगों की पहचान की गई है। किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है।

हम दिल्ली पुलिस से डरने वाले नहीं- आइशी घोष

आइशी घोष ने कहा था- दिल्ली पुलिस अपनी जांच कर सकती है। मेरे पास भी सबूत हैं, जिनसे जाहिर हो जाएगा कि मुझपर किस तरह हमला किया गया। मेरा देश के कानून और व्यवस्था में पूरा विश्वास है। मैं जानती हूं कि जांच निष्पक्ष होगी। मुझे न्यायमिलेगा, लेकिन दिल्ली पुलिस पक्षपात क्यों कर रही है? मेरी शिकायत पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। मैंने किसी पर कोई हमला नहीं किया। हमने कुछ गलत नहीं किया है। हम दिल्ली पुलिस से डरने वाले नहीं। हम कानून-व्यवस्था के साथ खड़े रहेंगे और अपना अभियान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाएंगे।

छात्रों को अब केवल रूम रेंट देना होगा- कुलपति

जेएनयू के वीसी एम जगदीश कुमार ने कहा था- हजारों छात्र विंटर सेमेस्टर एग्जाम्स के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। हम छात्रों की मदद के लिए हर कदम उठा रहे हैं। अब कोई भी सर्विस और यूटिलिटी चार्ज नहीं लिया जाएगा। छात्रों को केवल रूम रेंट देना होगा, जो कि 300 रुपए है। जो पैसा छात्रों से लिया जा रहा है, उसका इस्तेमाल उन्हीं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए किया जाएगा।


हंगामा इसलिए ताकि एबीवीपी और भाजपा पर इल्जाम लग सके- जावड़ेकर
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था- शुक्रवार की पुलिस ब्रीफिंग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पिछले 5 दिनों से जानबूझकर इसलिए हंगामा मचाया जा रहा था ताकि एबीवीपी, भाजपा और अन्य पर आरोप लगाया जा सके। यह सच नहीं है। यह लेफ्ट संगठन थे, जिन्होंने हिंसा की साजिश रची, सीसीटीवी खराब किए और सर्वर को बर्बाद दिया।



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नई दिल्ली: पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जांच से जुड़ी बातें साझा कीं।


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बेंगलुरु. सचिन बंसल की माइक्रो फाइनेंस कंपनी चैतन्य इंडिया फाइनेंस क्रेडिट ने यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए आरबीआई में आवेदन किया है। कंपनी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बंसल का कहना है कि यूनिवर्सल बैंक शुरू करने की इच्छा जरूरतमंद लोगों को वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करवाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

चैतन्य की 40 शाखाएं

चैतन्य की शुरुआत 2009 में हुई थी। कर्नाटक, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड में इसकी 40 शाखाएं हैं। फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर सचिन बंसल ने सितंबर 2019 में 739 करोड़ रुपए में चैतन्य को खरीदा था।

चैतन्य का कहना है कि वह उपभोक्ता केंद्रित और तकनीक आधारित सोच के साथ बैंकिंग को आसान, सस्ता बनाने के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहता है। कंपनी रिटेल ग्राहकों और छोटे उद्यमियों पर फोकस करेगी।



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सचिन बंसल पिछले साल फ्लिपकार्ट में हिस्सेदारी बेचने के बाद स्टार्टअप और फाइनेंशियल सर्विसेज में निवेश पर फोकस कर रहे हैं।


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नई दिल्ली. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘बेबस मुख्यमंत्री’ बताया। उन्होंने कहा- केजरीवाल जेएनयू हिंसा में घायल हुए छात्रों से मिलने भी नहीं जा पाए। थरूर ने केजरीवाल पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ मजबूती से न खड़े होने का आरोप भी लगाया।

थरूर ने कहा- केजरीवाल शायद चाहते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून केविरोधी और समर्थक दोनों ही उनकी तरफ रहे,इसलिए उन्होंने इस मामले पर मजबूत स्टैंड नहीं लिया। यदि वे इस मामले पर कुछ बोल ही नहीं सकते हैं तो आखिर लोगों कोकिस आधार पर केजरीवाल को वोट देना चाहिए।

पुलिस ने जेएनयू में कोई कार्रवाई नहीं की- केजरीवाल

पिछले रविवार को जेएनयू कैंपस में नकाबपोशों हमलावरों ने छात्रों-शिक्षकों पर रॉड और पत्थरों से हमला कर दिया था, जिसमें 30 से ज्यादा लोग घायल हुएथे। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस मेंइस मामले में छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत 9 छात्रों की पहचान उजागर की थी। वहीं,केजरीवाल ने जेएनयू हिंसा पर कहा था कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि उन्हें केंद्र से आदेश था कि हस्तक्षेप न करें।

केजरीवाल किसके आदेश सुन रहे हैं- थरूर

थरूर ने कहा- मैं नहीं जानता कि केजरीवाल किसके आदेश सुन रहे हैं। आखिर आपको किसने कहा कि छात्रों के साथ हुई हिंसा के खिलाफ न बोले, उनसे न मिले या फिर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ स्पष्ट स्टैंड न लें? आप तो मुख्यमंत्री हैं। कोई दूसरा नहीं है जोआपको आदेश दे।

केजरीवाल ने कभी शीला दीक्षित को बेबस बताया था- थरूर

थरूर नेदावा किया कि केजरीवाल ने कभी दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को ‘बेबस मुख्यमंत्री’ बताया था। अब उन्हें खुद अपना ट्वीट पढ़ना चाहिए। क्या अभिभावक ऐसा मजबूर मुख्यमंत्री चाहते हैं, जब उनके बच्चों को लाठीचार्ज का सामना करना पड़े तो मुख्यमंत्री उनसे मिलने भी न जाए।



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थरूर ने कहा- आखिर जनता को किस आधार पर केजरीवाल को वोट देना चाहिए।


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तेहरान. ईरान ने शनिवार को ऐलान किया कि उसकी सेना ने गलती से यूक्रेन के यात्री विमान को निशाना बना दिया। सरकार की तरफ से जारी बयान में इसे मानवी भूल (ह्यूमन एरर) बताया गया। इससे पहले ईरान ने हादसे के दो दिन बाद तक विमान पर मिसाइल से टकराने की बात से इनकार किया। हालांकि, शुक्रवार को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया कि विमान ईरान कीमिसाइल टकराने से ही दुर्घटनाग्रस्त हुआ। ईरान ने पहले दोनों नेताओं से इन दावों के सबूत सौंपने के लिए कहा, लेकिन शनिवार सुबह ईरानी सरकार ने गलती कबूल ली।यूक्रेन का विमान बुधवार को दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इसमें 176 लोग मारे गए थे।

ट्रूडो और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के दावे के ठीक बादसोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था।इसमें यूक्रेन के विमान को मिसाइल से टकराने के बाद आग के गोले में बदलते देखा जा सकता है। विमान बोइंग 737-800 उड़ान भरने के 3 मिनट बादही इमाम खोमेनी एयरपोर्ट से कुछ ही दूरी पर गिर गया था। मृतकों में63 कनाडाई नागरिक शामिल थे। इसके अलावा 82 ईरानी, 11 यूक्रेनी, 10 स्वीडिशऔर जर्मनी-ब्रिटेन के 3-3 नागरिक भी दुर्घटना में मारे गए थे।



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Iran says it unintentionally shot down Ukrainian jetliner that killed 176 onboard news and updates


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वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरानी कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी अमेरिका के चार दूतावासों को निशाना बनाने वाले थे। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वह चार दूतावासों पर हमले की साजिश रच रहा था। शायद बगदाद स्थित दूतावास पर भी हमले की साजिश थी।” हालांकि, सुलेमानी की हत्या के एक हफ्ते बाद भी ट्रम्प ने यह दावाबिना कोई सबूत या अन्य जानकारी दिए ही कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल-51 के मुताबिक, किसी भी देश को दूसरे देश में कार्रवाई करने के बाद अपने पक्ष में सबूत पेश करने होते हैं।अमेरिकी प्रशासन अब तक जनरलसुलेमानी को मारने की सटीक वजहें नहीं बता पाया है।

जनरल सुलेमानी की हत्या के बाद विदेश मंत्रीपोम्पियो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस मेंकहा था कि जनरल सुलेमानी पश्चिमी एशिया क्षेत्र में अमेरिकी अफसरों को निशाना बनाने वाला था,लेकिन उन्होंनेइस बारे में आगे कोई जानकारी नहीं दी। जब उनसे पूछा गया कि सुलेमानी किस तरह से खतरा था, तो पोम्पियो ने मुद्दा दिसंबर में विद्रोहियों के हमले में मारे गएअमेरिकी कॉन्ट्रैक्टर की तरफ मोड़ दिया।

अमेरिका ने 3 जनवरी को ईरान की कुद्स सेना के जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराया था। इसके बाद ईरान ने अमेरिका को बदला लेने की धमकी दी थी। 7 जनवरी को ईरान ने अमेरिका के दो बेसों पर 22 मिसाइलें गिराईं थीं। इसमें 80 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया।

ट्रम्प प्रशासनसंसद को अहम जानकारियां नहीं देता: डेमोक्रेट
अमेरिकी सरकार के दावों पर विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी ने ही भरोसा करने से इनकार कर दिया। कनेक्टिकट से डेमोक्रेट सांसद क्रिस मर्फी ने कहा कि अगर चार दूतावासों पर हमले की आशंका थी तो प्रशासन को यह हमें संसद मेंबताना चाहिए था,लेकिन ट्रम्प ने यह जानकारी फॉक्स न्यूज चैनल को इंटरव्यू में दी। शायद न्यूज चैनल को ज्यादा उच्च-स्तरीय जानकारियां मिलती हैं या फिर असल में कोई खतरा था ही नहीं।

दूसरी तरफ डेमोक्रेट पार्टी में राष्ट्रपति पद के दावेदार बर्नी सैंडर्स ने कहा कि न तो विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और न ही रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने संसद में चार दूतावासों को निशाना बनाए जाने की कोई जानकारी दी। ऊटा राज्य से डेमोक्रेट सांसद माइक ली ने कहा कि यह उनके 9 साल के करियर की सबसे खराब मिलिट्री ब्रीफिंग थी।



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अमेरिका ने जनरल सुलेमानी की बगदाद एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले में हत्या कर दी थी, ट्रम्प इस कार्रवाई की वजह नहीं बता पाए हैं।


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