Friday, January 31, 2020

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मुंबई. बजट की वजह से आज शेयर बाजार में शनिवार होने के बावजूद ट्रेडिंग होगी। बताया जा रहा है कि बाजार से जुड़े लोगों की अपील पर यह फैसला लिया गया। क्योंकि, बजट की घोषणाओं से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं। 2015 में भी बजट के दिन शनिवार होने के बावजूद बीएसई पर ट्रेडिंग हुई थी। सामान्य तौर पर शनिवार-रविवार को शेयर बाजार बंद रहता है।

शेयर बाजार से जुड़े ऐलान संभव
सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत दे सकती है। शेयर खरीदने के एक साल बाद बेचने पर अगर एक लाख रुपए से ज्यादा मुनाफा होता है उस पर अभी 10% टैक्स लगता है। ऐसी अटकलें हैं कि इस टैक्स को खत्म किया जा सकता है या फिर इसका समय बढ़ाकर 2 साल किया जा सकता है। डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के नियमों में भी बदलाव किए जा सकते हैं।

पिछले साल सरकार ने सुपर रिच पर सरचार्ज बढ़ाया, बाद में फैसला वापस लिया
बजट के दिन सेक्टर विशेष के लिए जो घोषणाएं होती हैं उनका सेक्टर विशेष की कंपनियों के शेयरों पर असर पड़ता है। मोदी सरकार के पिछले 6 पूर्ण बजटों की बात करें तो बजट के दिन 4 बार शेयर बाजार नुकसान में रहा। पिछले साल 5 जुलाई को बजट पेश किया गया था। उस दिन सेंसेक्स 1% और निफ्टी 1.14% नुकसान में रहा था। पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुपर रिच पर सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया था। विदेशी निवेशकों को भी इसके दायरे में माना गया। इससे बाजार में गिरावट बढ़ गई थी। हालांकि, सरकार ने कुछ दिनों बाद सरचार्ज बढ़ोतरी का फैसला वापस ले लिया था।



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नई दिल्ली.देश में इनकम टैक्स का पहला कानून 160 साल पहले आया था। 1860 में अंग्रेज अफसर जेम्स विल्सन ने पहला बजट पेश किया था। इसी में इनकम टैक्स कानून को जोड़ा गया था। देश के पहले बजट में 200 रुपए तक की सालाना कमाई वालों को इनकम टैक्स में छूट दी गई थी।अभी देश में 1961 का आयकर कानून लागू है। इसमें समय-समय पर संशोधन होते रहते हैं।


1860 में 200 रुपए से ज्यादा की कमाई पर 4% तक टैक्स लगता था
देश के पहले बजट में 200 रुपए से 500 रुपए तक की सालाना आय वालों पर 2% और 500 रुपए से ज्यादा कमाई पर 4% टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया था। इनकम टैक्स कानून में सेना, नौसेना और पुलिस कर्मचारियों को छूट दी गई थी। हालांकि, उस समय ज्यादातर कर्मचारी अंग्रेज ही थे। सेना के कैप्टन का वेतन 4,980 रुपए और नौसेना के लेफ्टिनेंट का 2,100 रुपए था। हालांकि, इनकम टैक्स का कानून का उस समय कड़ा विरोध हुआ था। उस समय के मद्रास प्रांत के गवर्नर सर चार्ल्स टेवेलियन ने भी विरोध किया था। विल्सन का ये कानून ब्रिटेन के इनकम टैक्स कानून की तरह ही था। ब्रिटेन में 1798 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विलियम पिट ने भी सेना का खर्च निकालने के लिए इनकम टैक्स कानून बनाया था।


1858 में भारत में ब्रिटिश सरकार का राज शुरू हो गया
1857 में भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था। भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर दी। इससे देशभर में आंदोलन छिड़ गया। इससे निपटने के लिए अंग्रेजों ने अपनी सेना के खर्च में बेहिसाब बढ़ोतरी कर दी। 1856-57 में अंग्रेजों ने सेना पर 1 करोड़ 14 लाख पाउंड खर्च किए थे। यह खर्च 1857-58 में बढ़ाकर 2 करोड़ 10 लाख पाउंड तक कर दिया गया। उस जमाने में 1 पाउंड 10 रुपए के बराबर हुआ करता था। एक नवंबर 1858 में ब्रिटेन की तत्कालीन महारानी विक्टोरिया ने घोषणा की थी कि अब भारत में ब्रिटिश सरकार की ही हुकूमत होगी। इसी दौरान 'द गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858' आया। इस कानून के प्रावधानों के मुताबिक भारत के सभी आर्थिक मामलों का नियंत्रण भारत के पहले मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) चार्ल्स वुड के हाथों में आ गया।


1857 की क्रांति में अंग्रेजों को नुकसान हुआ, तो इनकम टैक्स लगाया
1857 की क्रांति की वजह से 1859 में इंग्लैंड का कर्ज 8 करोड़ 10 लाख पाउंड पहुंच गया। इस समस्या से निपटने के लिए ब्रिटेन ने नवंबर 1859 में जेम्स विल्सन को भारत भेजा। विल्सन ब्रिटेन के चार्टर्ड स्टैंडर्ड बैंक के संस्थापक और अर्थशास्त्री थे। उन्हें भारत में वायसराय लॉर्ड कैनिंग की काउंसिल में फाइनेंस मेंबर (वित्त मंत्री) बना दिया गया। विल्सन ने 18 फरवरी 1860 को भारत का पहला बजट पेश किया। पहले ही बजट में पहली बार तीन टैक्स का प्रस्ताव दिया गया। पहला- इनकम टैक्स, दूसरा- लाइसेंस टैक्स और तीसरा- तंबाकू टैक्स। इन तीनों टैक्सों की घोषणा करते समय विल्सन ने मनुस्मृति का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका ये कदम 'इंडियन' नहीं बल्कि 'भारतीय' ही है।

ब्रिटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन। इन्होंने ब्रिटेन में स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की स्थापना की थी। वे द इकोनॉमिस्ट मैगजीन के भी फाउंडर थे।


प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है इनकम टैक्स का जिक्र

  • मनुस्मृतिमें आयकर के बारे में लिखा है कि शास्त्रों के अनुसार राजा कर लगा सकता है। करों का संबंध प्रजा की आय और व्यय से होना चाहिए। राजा को हद से ज्यादा कर लगाने से बचना चाहिए। करों की वसूली की ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि प्रजा अदायगी करते समय कठिनाई महसूस न करें।
  • मनुस्मृति के अलावा 2300 साल पहले लिखे गए 'कौटिल्य अर्थशास्त्र' में भी आयकर का उल्लेख मिलता है। कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में लिखा था- सरकार (राजा) की सत्ता, उसके राजकोष की मजबूती पर निर्भर करती है। राजस्व और कर सरकार के लिए आय है, जो उसे अपनी जनता (प्रजा) की सेवा, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मिलती है।

द इकोनॉमिस्ट मैग्जीन के फाउंडर थे जेम्स विल्सन
जेम्स विल्सन का जन्म 3 जून 1805 को स्कॉटलैंड में रॉकशायर परगने के होइक गांव में हुआ था। अपने माता-पिता की 15 संतानों में जेम्स चौथे थे। विल्सन का जन्म गरीबी में बीता। इसके बाद जेम्स और उसके छोटे भाई विलियम ने हैट बनाने का बिजनेस शुरू किया जो शुरुआत में सफल रहा। बाद में दोनों भाइयों ने लंदन में काम शुरू किया, लेकिन ज्यादा समय तक नहीं चल सका और कंपनी बंद करनी पड़ी। इसके बाद जेम्स ने 'द इकोनॉमिस्ट' मैग्जीन शुरू की और इसके संपादक-लेखक बन गए। 1844 में जेम्स ने अपनी सारी कमाई द इकोनॉमिस्ट में लगा दी। 'द इकोनॉमिस्ट' आज भी दुनिया की सबसे पॉपुलर मैग्जीन में गिनी जाती है। भारत आने के आठ महीने बाद यानी जुलाई 1860 में जेम्स बीमार हो गए। बीमारी की वजह से 11 अगस्त 1860 को उनका निधन हो गया।


1922 में नया इनकम टैक्स कानून आया, इसके बाद ही आयकर विभाग बना

  • असहयोग आंदोलन के समय 1922 में भारत में नया इनकम टैक्स कानून आया। इसी समय आयकर विभाग के विकास की कहानी भी शुरू हुई। नए कानून में आयकर अधिकारियों को अलग-अलग नाम दिए गए। 1946 में पहली बार परीक्षा के जरिए आयकर अधिकारियों की सीधी भर्ती हुई। इसी परीक्षा को ही 1953 में 'इंडियन रेवेन्यू सर्विस' यानी 'आईआरएस' नाम दिया गया।
  • 1963 तक आय कर विभाग के पास संपत्ति कर, सामान्य कर, प्रवर्तन निदेशालय जैसे प्रशासनिक काम थे। इसलिए 1963 में राजस्व अधिनियम केंद्रीय बोर्ड कानून आया, जिसके तहत केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) का गठन किया गया।
  • 1970 तक टैक्स की बकाया राशि वसूल करने का अधिकार विभाग के राज्य प्राधिकारियों के पास था। लेकिन 1972 में टैक्स वसूली के लिए नई विंग बनाई गई और कमिश्नर नियुक्त किए गए। इनकम टैक्स कानून में समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं।

(सोर्स : https://ift.tt/1cBhzMi, मिलिंद संगोराम की लिखी किताब 'भारतीय इनकम टैक्स की कहानी')



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Income Tax | Income Tax Year History Timeline [Hindi Updated]; Income tax, law came into force 160 years ago


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गुलमर्ग (इशफाक-उल-हसन).दुनिया की सबसे खूबसूरत पर्वत श्रृंखला, बर्फ से ढंके पहाड़ और सस्ती सुविधाएं दुनिया भर के पर्यटकों को जम्मू-कश्मीर की तरफ आकर्षित करती हैं। हर साल लाखों लोग कश्मीर की वादियों में घूमने आते हैं और कभी न भूलने वाला अनुभव लेकर जाते हैं। लेकिन अब कश्मीर को ये पर्यटक नसीब नहीं हो पा रहे हैं। राजनीतिक उथल-पुथल इसकी बड़ी वजह है।


हालात ये हैं कि कश्मीर आने वाले पर्यटकों की संख्या 10 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। वही दिसंबर में आने वाले पर्यटकों की संख्या एक साल में 5 गुना तक घट गई है। जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग के आंकड़ों की मानें, तो कश्मीर आने वाले देश-दुनिया के पर्यटकों की संख्या 10 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस दौरान पहली बार इनकी संख्या 5 लाख से नीचे रही है। इसकी वजह यहां लगातार बदलते राजनीतिक हालात हैं। इसका नुकसान पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय कारोबारियों को भुगतना पड़ा है। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुताबिक इससे राज्य को कुल 17,800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इनमें 9,191 करोड़ रुपए का नुकसान तो अकेले पर्यटन क्षेत्र को हुआ है।


2012 में 13 लाख पर्यटक पहुंचे थे: कश्मीर पहुंचने वाले पर्यटकों का आंकड़ा एक साल में पिछले 10 साल में सबसे ज्यादा 13 लाख पर्यटक 2012 में घाटी में पहुंचे थे। 2011 में 7.36 लाख, जबकि 2010 में करीब 10 लाख टूरिस्ट यहां पहुंचे थे। 2013 और 2014 में लगातार दो साल 11 लाख से ज्यादा पर्यटक जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे।


ट्रैवल एजेंट्स के मुताबिक कश्मीर में अनिश्चितता और अगस्त से इंटरनेट सेवाओं के बंद होने से भी नुकसान हुआ है। कश्मीर टूरिज्म अलायंस के प्रेसिडेंट मंजूर अहमद पख्तून बताते हैं कि इंटरनेट सेवाओं की कमी की वजह से व्यापारिक गतिविधियां कम हो गई हैं। सर्दी और बर्फ चरम पर होने के बावजूद एडवेंचर स्पोर्ट्स भी नहीं हो पा रहे हैं।

दिसंबर में पर्यटकों की संख्या 5 साल में पहली बार 32,000 से कम
दिसंबर महीने में बर्फबारी, एडवेंचर और कश्मीर की खूबसूरती निहारने सबसे ज्यादा टूरिस्ट आते हैं, लेकिन 2019 में यह भारी निराशाजनक रहा। इतना ही नहीं, 5 साल में दिसंबर में पर्यटकों की संख्या 7 हजार से कम रही है। इससे पहले कभी भी दिसंबर में 32 हजार से कम पर्यटक नहीं आते थे।



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प्रतीकात्मक फोटो।


from Dainik Bhaskar /national/news/tourists-coming-to-kashmir-decreased-by-68-in-a-year-in-december-it-decreased-by-12-times-in-5-years-a-loss-of-9191-crore-126645166.html
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मुंबई. बजट की वजह से आज शेयर बाजार में शनिवार होने के बावजूद ट्रेडिंग होगी। बताया जा रहा है कि बाजार से जुड़े लोगों की अपील पर यह फैसला लिया गया। क्योंकि, बजट की घोषणाओं से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं। 2015 में भी बजट के दिन शनिवार होने के बावजूद बीएसई पर ट्रेडिंग हुई थी। सामान्य तौर पर शनिवार-रविवार को शेयर बाजार बंद रहता है।

शेयर बाजार से जुड़े ऐलान संभव
सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत दे सकती है। शेयर खरीदने के एक साल बाद बेचने पर अगर एक लाख रुपए से ज्यादा मुनाफा होता है उस पर अभी 10% टैक्स लगता है। ऐसी अटकलें हैं कि इस टैक्स को खत्म किया जा सकता है या फिर इसका समय बढ़ाकर 2 साल किया जा सकता है। डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के नियमों में भी बदलाव किए जा सकते हैं।

पिछले साल सरकार ने सुपर रिच पर सरचार्ज बढ़ाया, बाद में फैसला वापस लिया
बजट के दिन सेक्टर विशेष के लिए जो घोषणाएं होती हैं उनका सेक्टर विशेष की कंपनियों के शेयरों पर असर पड़ता है। मोदी सरकार के पिछले 6 पूर्ण बजटों की बात करें तो बजट के दिन 4 बार शेयर बाजार नुकसान में रहा। पिछले साल 5 जुलाई को बजट पेश किया गया था। उस दिन सेंसेक्स 1% और निफ्टी 1.14% नुकसान में रहा था। पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुपर रिच पर सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया था। विदेशी निवेशकों को भी इसके दायरे में माना गया। इससे बाजार में गिरावट बढ़ गई थी। हालांकि, सरकार ने कुछ दिनों बाद सरचार्ज बढ़ोतरी का फैसला वापस ले लिया था।



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मुंबई. बजट की वजह से आज शेयर बाजार में शनिवार होने के बावजूद ट्रेडिंग होगी। बताया जा रहा है कि बाजार से जुड़े लोगों की अपील पर यह फैसला लिया गया। क्योंकि, बजट की घोषणाओं से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं। 2015 में भी बजट के दिन शनिवार होने के बावजूद बीएसई पर ट्रेडिंग हुई थी। सामान्य तौर पर शनिवार-रविवार को शेयर बाजार बंद रहता है।

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सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत दे सकती है। शेयर खरीदने के एक साल बाद बेचने पर अगर एक लाख रुपए से ज्यादा मुनाफा होता है तोउस पर अभी 10% टैक्स लगता है। ऐसी अटकलें हैं कि इस टैक्स को खत्म किया जा सकता है या फिर इसका समय बढ़ाकर 2 साल किया जा सकता है। डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के नियमों में भी बदलाव किए जा सकते हैं।

पिछले साल सरकार ने सुपर रिच पर सरचार्ज बढ़ाया, बाद में फैसला वापस लिया
बजट के दिन सेक्टर विशेष के लिए जो घोषणाएं होती हैं उनका सेक्टर विशेष की कंपनियों के शेयरों पर असर पड़ता है। मोदी सरकार के पिछले 6 पूर्ण बजटों की बात करें तो बजट के दिन 4 बार शेयर बाजार नुकसान में रहा। पिछले साल 5 जुलाई को बजट पेश किया गया था। उस दिन सेंसेक्स 1% और निफ्टी 1.14% नुकसान में रहा था। पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुपर रिच पर सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया था। विदेशी निवेशकों को भी इसके दायरे में माना गया। इससे बाजार में गिरावट बढ़ गई थी। हालांकि, सरकार ने कुछ दिनबाद सरचार्ज बढ़ोतरी का फैसला वापस ले लिया था।



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बीजिंग/नई दिल्ली. कोरोनावायरस के डर बीच चीन के वुहान में फंसे भारतीय लोगों को लेकर एयर इंडिया का डबल डेकर जंबो 747 विमान दिल्ली पहुंच चुका है। 423 यात्रियों की क्षमता वाले बोइंग बी-747 विशेष विमान ने शुक्रवार देर रात चीन के वुहान से उड़ान भरी थी। इस विमान में दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के 5 डॉक्टरों की टीम भी मौजूद थे। भारतीयों को निकालने के लिए चीन के प्रयास की भारत ने सराहना की है।

भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया, “चीन के हुबेई प्रांत में रह रहे 324 भारतीय नागरिकों को लेकर एयर इंडिया का विमान शनिवार तड़के वुहान से उड़ान भरी। अधिकांश यात्री भारतीय छात्र थे। हम चीन सरकार को इस प्रयास के लिए धन्यवाद देते हैं।”

गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए सफदरजंग में 50 बेड की व्यवस्था

इससे पहले, वुहान में फंसे भारतीयों को वापस भारत लाने के लिए शुक्रवार को दिल्ली एयरपोर्ट से एक विमान वुहान पहुंचा था। स्वास्थ्य मंत्रालय में विशेष सचिव संजीव कुमार ने बताया कि चीन से 366 लोग शनिवार तड़के भारत पहुंचेंगे। उन्हें एहतियातन 14 दिनों तक दिल्ली के छावला में स्थित आईटीबीपी सेंटर में रखा जाएगा। वहीं, सफदरजंग अस्पताल में भी गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए अलग से 50 बेड का इंतजाम किया गया है।

हरियाणा के मानेसर में सेना ने शिविर बनाया है

हरियाणा के मानेसर में भी चीन से लौटने वाले भारतीयों के लिए सेना ने एक शिविर बनाया है, जिसमें करीब 300 लोगों को रखा जा सकता है। सभी लोग डॉक्टरों की टीम और स्टाफ की निगरानी में रहेंगे। भारतीय सेना के मुताबिक, वुहान से लाए गए सभी भारतीय छात्रों की एयरपोर्ट पर आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (एएफएमएस) और एयरपोर्ट हेल्थ अथॉरिटी की संयुक्त टीम द्वारा स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद उन्हें मानेसर के शिविर ले जाया जाएगा। कोरोनावायरस से संक्रमित होने पर मरीज को दिल्ली कैंट के बेस अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

डब्ल्यूएचओने शुक्रवार को ग्लोबल इमरजेंसी की घोषणा कीथी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को ग्लोबल इमरजेंसी की घोषणा कर दी थी। हालांकि, चीन की यात्रा और किसी भी प्रकार के व्यापार पर रोक नहीं लगाई गई थी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, भारत समेत 21 देशों में कोरोनावायरस संक्रमण के 100 मामले सामने आए हैं। इनमें चीन, हॉन्गकॉन्ग, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, भारत, श्रीलंका, नेपाल, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, ताइवान, मकाऊ, वियतनाम, यूएई, रूस और ब्रिटेन शामिल हैं।



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Air India aircraft carrying 324 Indians from Wuhan reached Delhi; Will be taken to manesar camp


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नई दिल्ली. इस दशक का पहला आम बजट आज पेश होने जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में 11 बजे बजट भाषण देंगी। वे लगातार दूसरी बार बजट पेश करने वाली पहली महिला वित्त मंत्री होंगी। उनसे पहले इंदिरा गांधी ने एक बार फरवरी 1970 में बजट पेश किया था। 60 वर्षीय निर्मला अपने बजट भाषण में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव का ऐलान कर सकती हैं। टैक्स कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी के प्री-बजट सर्वे के मुताबिक, 18 सेक्टर की 219 कंपनियों में से 82% कंपनियों को लगता है कि इस बार 80सी के तहत डिडक्शन की डेढ़ लाख रुपए की लिमिट बढ़ाई जा सकती है। बजट में नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी का ऐलान भी हो सकता है।

बजट को अंतिम रूप देने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी टीम।

इनकम टैक्स
मौजूदा दर : पिछले साल अंतरिम बजट की घोषणा के मुताबिक 5 लाख रुपए तक टैक्सेबल इनकम टैक्स फ्री है। यह छूट रिबेट के जरिए मिल रही है, लेकिन टैक्स स्लैब 2.5 लाख रुपए से ही शुरू हो रहा है।
मांग : इनकम टैक्स में छूट की लिमिट मौजूदा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की जाए। यानी इतनी आमदनी वाले इनकम टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर हो जाएं। उन्हें रिटर्न भरने की भी जरूरत न पड़े। इसके बाद 5 लाख से 10 लाख रुपए इनकम पर टैक्स 20% से घटकर 10% करने की भी मांग है। ऐसा हुआ तो 10 लाख तक की टैक्सेबल इनकम वालों के सालाना 46,800 रुपए बचेंगे।

सभी डिडक्शन के बाद भी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपए से ज्यादा है तो यह टैक्स स्लैब लागू हो जाता है-

सालाना आय (रुपए) मौजूदा टैक्स रेट
2.5 लाख तक 0%
2.5 लाख से 5 लाख 5%
5 लाख से 10 लाख 20%
10 लाख से ज्यादा 30%

(टैक्स के ऊपर 4% सेस भी लागू)

नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी का ऐलान हो सकता है
देश में व्यापारिक ट्रांसपोर्टेशन को आसान बनाने के लिए सरकार बजट में नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी का ऐलान कर सकती है। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों से हवाले से सोमवार को ये जानकारी दी। इसके मुताबिक वाणिज्य मंत्रालय के लॉजिस्टिक्स डिवीजन ने पॉलिसी पर काम किया है। व्यापारियों के लिए माल ढुलाई का खर्च घटाना इसका मकसद है। इसके लिए एक सेंट्रल पोर्टल बनाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है, ताकि कंपनियों को लॉजिस्टिक्स से जुड़े समाधान मिल सकें।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत की उम्मीद

  • प्रॉपर्टी बिक्री पर कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म किया जा सकता है। शेयर निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स का समय 1 साल से बढ़ाकर 2 साल किया जा सकता है। निवेशक एक साल तक शेयर रखने के बाद बेचते हैं तो उन्हें 10% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाना पड़ता है।डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) की देनदारी का नियम कंपनियों की बजाय शेयरधारकों पर लागू हो सकता है।
  • प्रॉपर्टी बिक्री पर कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म होता है तो यह रिएल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छा होगा। अभी नियम है कि प्रॉपर्टी की बिक्री से मिली रकम को 3 साल में फिर से प्रॉपर्टी में ही निवेश नहीं किया तो मुनाफे पर 30% कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाना होता है। दूसरी ओर कोई 24 महीने में ही प्रॉपर्टी को बेच देता है तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाना पड़ता है। 24 महीने बाद 20% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। घर की बिक्री से हुए कैपिटल गेन से अधिकतम दो घर खरीद सकते हैं। लेकिन, टैक्स में छूट का दावा करने के लिए कैपिटल गेन 2 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यह छूट जीवन में सिर्फ एक बार ली जा सकती है।

एक्सपर्ट की राय

ज्योति रॉयडीवीपी (इक्विटी स्ट्रैटजिस्ट),एंजेल ब्रोकिंग अर्थव्यवस्था में सुस्ती को देखते हुए सरकार बड़े ऐलान कर सकती है। पिछले कुछ सालों में सख्त नीतियों और आईएलएंडएफएस जैसे संकटों की वजह से जीडीपी ग्रोथ प्रभावित हुई। सितंबर तिमाही में यह 4.5% रह गई। हालांकि, कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती का फैसला अहम था, लेकिन इसके असर से निवेश आने में वक्त लगेगा। सरकार बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव के साथ ही हाउसिंग और ऑटो सेक्टर के लिए बड़े ऐलान कर सकती है।
अनंत पद्मनाभन,चेयरमैन (ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल) सोने के गहनों की खरीद पर पैन नंबर देने का नियम 2 लाख की खरीद की बजाय 5 लाख की खरीद पर लागू होना चाहिए। जेम्स एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए ईएमआई की सुविधा की दी जानी चाहिए।
जी प्रदीप कुमार,सीईओ (यूनियन एसेट मैनेजमेंट कंपनी) इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने के लिए सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स घटाने समेत कई फैसले लिए। लेकिन, म्यूचुअल फंड और शेयरों से जुड़े टैक्स पर भी ध्यान देना चाहिए। रिएल एस्टेट और फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश बढ़ाने के उपाय करने की भी जरूरत है। 10 लाख रुपए तक की आय टैक्स फ्री कर दी जाए तो इकोनॉमी को फायदा हो सकता है। हालांकि, टैक्स कलेक्शन के मोर्चे पर नुकसान होगा, लेकिन इसके फायदों का भी आकलन करना चाहिए।
उदय वर्मा,पूर्व सचिव, एमएसएमई बजट में वित्त मंत्री को एमएसएमई सेक्टर पर ध्यान देना होगा। मैन्युफैक्चरिंग में इस सेक्टर का 40%, एक्सपोर्ट में 35% और देश की कुल जीडीपी में 29% से 30% तक योगदान है। इस सेक्टर का ध्यान रखे बिना इकोनॉमिक स्लोडाउन और बेरोजगारी की चुनौती से निपटना संभव नहीं होगा।


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