देश में कोराना संक्रमितों की संख्या 1 लाख 73हजार 453हो गई है। शुक्रवार को एक दिन में सबसे ज्यादा 8101मरीज मिले तो रिकॉर्ड 11 हजार 729लोग ठीक भी हुए, जबकि 269की मौत हुई। महाराष्ट्र में 116 मरीजों की जान गई। यह एक दिन में सबसे बड़ी संख्या है। राज्य में संक्रमितों का आंकड़ा 62 हजार के पार हो गया। उधर,दिल्ली में भी रिकॉर्ड 1106 संक्रमित बढ़े और82 ने जान गंवाई। लगातार दूसरे दिन 1 हजार से ज्यादा मरीज बढ़ने परदिल्ली सरकार ने 5 बड़े होटलों से उनके कैंपस कोरोना हॉस्पिटल के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए मांगे हैं।
आज महाराष्ट्र में 2682, दिल्ली में 1105,तमिलनाडु में 874, गुजरात में 372, राजस्थान में 298,प. बंगाल में 277, उत्तरप्रदेश में 275,कर्नाटक में 248, हरियाणा में 217, उत्तराखंड में 216, बिहार में 174, जम्मू-कश्मीर में 128 और असम में 144 मरीज मिले। इनके अलावा 341 मरीजों और बढ़े, लेकिन ये किन राज्यों से हैं यह स्पष्ट नहीं हो सका। ये आंकड़े Covid19.Org के आधार पर हैं।
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में अब तक 1 लाख 65 हजार 799 लोग संक्रमित हुए हैं।इनमें से 89 हजार 987 का इलाज चल रहा है। 71 हजार 105 ठीक हो चुके हैं और 4706 की मौतहो चुकी है।
5 दिन जब सबसे ज्यादा मामले
तारीख
केस
27 मई
7271
28 मई
7258
24 मई
7111
23 मई
6665
22 मई
6570
पांच राज्यों का हाल
मध्यप्रदेश:शुक्रवार को संक्रमण के192 नए मामले सामने आए और 13 मौतें हुईं। इंदौर में 84, सागर में 27, भोपाल में 22 और उज्जैन में 19 मरीज मिले हैं।इसके साथ संक्रमितों की संख्या बढ़कर 7645हो गई। अब तक 4269 मरीज ठीक हुए और 334 की जान गई है।
मध्यप्रदेश की रहने वाली पार्वती अपने 10 दिन के बच्चे को गोद में लेकर दिल्ली के यमुना स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में बैठी हैं। इन्हें अपने गांव जाते समय दिल्ली की सीमा पर रोक दिया गया था। यमुना स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स को लॉकडाउन की वजह से फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए शेल्टर होम बनाया गया है।
महाराष्ट्र:शुक्रवारको संक्रमण के 2682 केस मिले, एक दिन में रिकॉर्ड 8381 मरीज ठीक हुए और 116की मौत हुई। राज्य में अब कोरोना के मरीजों की संख्या 62हजार 228हो गई है। 26 हजार 997लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि कुल 2098 लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं।
मुंबई के बोरीवली स्टेशन पर प्रवासी मजदूर। ये लोग श्रमिक स्पेशल ट्रेन से अपने गृह राज्य रवाना होने के लिए यहां पहुंचे।
उत्तरप्रदेश:राज्य में प्रवासियों की वजह से गांवों में भी संक्रमण तेजी से फैल रहा है। शुक्रवारको कोरोना के 275 मरीज मिले और 4की मौत हुई। राज्य में अब तक 7445लोग संक्रमित हुए हैं। इनमें 1820 प्रवासी हैं। राज्य में इस बीमारी से 201मौत हो चुकी हैं।
राजस्थान:यहां शुक्रवार को 298 संक्रमित मिले। इनमें जोधपुर के 67, झालावाड़ के 42, भरतपुर के 45, जयपुर के 23 मरीज शामिल हैं।राज्य में कुल संक्रमितों का आंकड़ा 8365 पहुंच गया। अब तक 5244 मरीज ठीक हुए और मौतों का आंकड़ा184हो गया है।
यह तस्वीर राजस्थान के ब्यावर की है। कोरोना संक्रमण, ऊपर से बढ़ती गर्मी ने मनरेगा के तहत मजदूरी कर रहे इन लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
बिहार:राज्य में शुक्रवारको 174मरीजों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इनमें से भागलपुर में 25, शेखपुरा में 20, जहानाबाद में 19 और मधुबनी में 14 मरीज मिले हैं। मरीजों की संख्या 3359हो गई है। कोरोना से अब तक 15 लोग जान गंवा चुके हैं।
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जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपोरा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस इलाके में दो से ज्यादा आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। पुलिस, आर्मी और सीआरपीएफ की टीमों ने इन्हें घेर रखा है।
इससे पहले सुरक्षाबलों ने गुरुवार को पुलवामा जैसे आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया। यहां के राजपोरा रोड पर शादीपुरा के पास एक सफेद रंग की सेंट्रो कार मिली, जिसमें 50 किग्रा आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बरामद किया। वरिष्ठ पुलिस अफसरों को शक था कि जैश के निशाने पर सीआरपीएफ के जवान थे।
कश्मीर में बीते 13 दिन में 3 बड़े एनकाउंटर
19 मई, श्रीनगर:सुरक्षाबलों ने डाउनटाउन इलाके में हिजबुल मुजाहिदीन 2 आतंकियों को मार गिराया। इसमें से एक जुनैद सहराई था जो अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत प्रमुख मोहम्मद अशरफ सहराई का बेटा था।
16 मई, डोडा:सुरक्षाबलों ने डोडा के खोत्रा गांव में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी ताहिर को 5 घंटे चली मुठभेड़ में मार गिराया था।
6 मई, पुलवामा:सुरक्षाबलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर रियाज नायकू को मारा गिराया था। वह दो साल से मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। वह बीमार मां से मिलने पुलवामा के गांव बेगपोरा आया था। पुलिस को इस गांव में नायकू और उसके कुछ साथियों की मौजूदगी का इनपुट मिला था।
कश्मीर में इस सालअब तक हुए अन्यएनकाउंटर
22 अप्रैल:शोपियां में चार आतंकवादियों को मार गिराया। 17 अप्रैल: राज्य में दो अलग-अलग जगहों पर मुठभेड़ हुई, इसमें चार आतंकी मार गिराए गए थे। 11 अप्रैल:कुलगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी, इसमें आतंकी हथियार छोड़कर भाग गए थे। 7 अप्रैल:सेना ने आमने-सामने की लड़ाई में 5 आतंकी मार गिराए थे। यह कश्मीर में साल का सबसे मुश्किल ऑपरेशन था। इसमें सर्जिकल स्ट्राइक कर चुकी पैरा यूनिट के 5 जवान शहीद हो गए थे। 4 अप्रैल:कुलगाम में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में हिजबुल के 4 आतंकियों को मार गिराया। 15 मार्च:अवंतीपोरा जिले के वटरीग्राम में सुरक्षाबलों ने चार आतंकियों को मार गिराया। 22 फरवरी:दक्षिण कश्मीर के संगम बिजबेहरा में जवानों और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। दो आतंकी मारे गए। 19 फरवरी:पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर के दौरान 3 आतंकियों को ढेर किया। 5 फरवरी:श्रीनगर के पास मुठभेड़ में 2 आतंकी मारे गए थे,एक सीआरपीएफ जवान शहीद हुआ था। बाइक पर आए 3 आतंकियों ने सीआरपीएफ चैकपोस्ट पर फायरिंग की थी। 31 जनवरी:जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर ट्रक में छिपे 4-5 आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया था। ट्रक को नगरोटा के टोल प्लाजा पर चैकिंग के लिए रोका गया था। इसके बाद सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया। मुठभेड़ के दौरान 3 आतंकी मारे गए, जबकि एक पुलिस जवान जख्मी हो गया। ट्रक का ड्राइवर पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले आतंकी आदिल डार का चचेरा भाई है और वही आतंकियों का मुख्य हैंडलर था। 25 जनवरी:पुलवामा जिले के अवंतीपोरा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें 2 पाकिस्तानी आतंकी कारी यासिर और बुरहान शेख मारे गए थे। यासिर जैश-ए-मोहम्मद का कश्मीर एरिया कमांडर था। 21 जनवरी:पुलवामा जिले के अवंतिपोरा में मुठभेड़ में 2 आतंकी मारे गए थे। सेना का एक जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एसपीओ शहीद हुए थे। 20 जनवरी:शोपियां जिले में मुठभेड़ के दौरान हिजबुल मुजाहिदीन के 3 आतंकी मारे गए थे।
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लॉकडाउन में ‘कुपोषण की कुप्रथा’ की रूह कंपा देने वाली तस्वीर सामने आई है। पौधे की नन्हीं टहनियों सा दिख रहा यह मासूम सिर्फ 10 दिन का है। वजन मात्र 1.3 किलोग्राम। बागसेवनिया पुलिस को यह होशंगाबाद रोड पर एक कार शो-रूम के सामने बने बीआरटीएस बस स्टॉप पर रोता-बिलखता मिला। आसपास मां को खोजा, लेकिन वह नहीं मिली। बच्चे की कमजोर हालत देख पुलिस बिना देर किए उसे जेपी अस्पताल ले गई। डॉक्टरों ने बताया- बच्चा कुपोषित है और भूखा है। उसके शरीर पर गहरी खरोंचें भी हैं। उसे जेपी के पीआईसीयू में भर्ती किया है।
घर लौटने के लिएमजदूरों का संघर्ष जारी है
तस्वीर गुजरात के सूरत की है। यहां लॉकडाउन के दौरान कर्मभूमि से जन्मभूमि की ओर लौटने का सिलसिला जारी है। चलने में लाचार मां को गोद में उठाकर स्टेशन ले जाता युवक।
देश के पहले जुड़वां जो कोरोना को हराने में कामयाब हुए
तस्वीर गुजरात के वडनगर की है। यहां 16 मई को जन्में जुड़वां भाई-बहन ने कोरोना को हरा दिया है। इनकी मां कोरोना पॉजिटिव थी। पैदा होते ही बच्चे भी संक्रमित हो गए। दोनों को शुक्रवार को पहली बार मां की गोद नसीब हुई। ये देश के पहले जुड़वां है, जो कोरोना को हराने में कामयाब रहे हैं। इलाज कर रहे डॉक्टरों ने ही बच्चों का नाम सुवास और स्वरा रखे हैं। डॉक्टरों ने कहा कि अब तीनों ठीक हो चुके हैं। अभी तक मां-बच्चे अस्पताल में अलग-अलग थे।
कोरोनाकाल में बदलते रिवाज
तस्वीर मध्य प्रदेश के उज्जैन की है। यहांमंगलनाथ मंदिर परिसर में शुक्रवार को सुबह 10 बजे चिंतामन नगर की शिवानी और धार निवासी गोविंद का विवाह हुआ। इस विवाह में शासन के निर्देशानुसार 10 लोगों से भी कम 8 लोग ही शामिल हुए। शादी में भीड़ जमा नहीं हो इसलिए पुलिस भी तैनात रही।
ट्रेन रुकने से पहले ही पानी और खाने के लिए हाथ फैलाते मजबूर मजदूर
तस्वीर मध्य प्रदेश के बीना की है। यहां स्थानीय रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में श्रमिक ट्रेनें निकल रही है। इन ट्रेनों में यात्रा कर रहे यात्रियों की स्थिति दयनीय है। जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंचती है तो पानी की बॉटल एवं खाद्य सामग्री को देख कर यात्री ट्रेन के रुकने से पहले ही पानी की बॉटल के लिए हाथ निकालने लगते हैं। गौरतलब है कि स्थानीय रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को आईआरसीटीसी के द्वारा भोजन, ब्रेक फास्ट एवं पानी की बॉटल का इंतजाम किया जा रहा है।
पानी के लिए सीढ़ी के सहारे सूखी बावड़ी में उतरना पड़ता
तस्वीर नांदेड़ (महाराष्ट्र) जांभलीतांडा गांव की है। गांव से करीब दो किमी दूर एक बावड़ी है। यह करीब 50 फीट गहरी है। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी रिसता है। लोग जान जोखिम में डालकर बावड़ी में उतरते हैं और परिवार की प्यास बुझाने के लिए एक-एक घड़ा भरते हैं।
सूरज की तपती गर्मी पानी के लिए दस किमी तक का सफर
तस्वीर महाराष्ट्र के नासिक की है।सूरज की तपती गर्मी। कोरोना संक्रमण का डर और पानी की किल्लत। पानी की तलाश में महिलाएं पानी भरने के लिए 10 किमी दूर चलकर जाती है।
तपती गर्मी से मिली राहत
तस्वीर चंडीगढ़ की है। यहां शुक्रवार सुबह करीब एक घंटा हुई बारिश हुई। तापमान गिरके 32 डिग्री पर आ गया। जो सामान्य से 7 डिग्री कम है।
गर्मी में राहत के बादल
बादलों से घिरी तस्वीर मुंबई की है। देश को भिगोने के लिए मानसून दहलीज तक आ चुका है। यह केरल के तटीय इलाकों में अरब सागर में पहुंच चुका है और समुद्री इलाकों में भारी बारिश हो रही है।
नौतपा में बारिश, मानसून जैसीपरेशानी
तस्वीर हरियाणा के सिरसा की है। 25 मई से शुरू हुए नौतपा में पड़ रही भीषण गर्मी से शुक्रवार की शाम को हुई तेज बरसात ने निजात दिला दी। बरसात से शहर में जलभराव हो गया। शहर के निचले इलाके पानी से भर गए। करीब पांच घंटे बाद पानी की निकासी हो पाई।
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कोरोना से निपटने के लिए अलग-अलग सरकारों की तैयारियों को ट्रैक करने वाले ऑक्सफोर्ड कोविड-19 गवर्मेंट रिस्पॉन्स ट्रैकर ने अप्रैल में भारत को 100 में से 100 पॉइंट्स दिए थे। महामारी को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए टोटल लॉकडाउन ने भारत को कोरोना से निपटने की तैयारियों में अमेरिका, इटली समेत कई विकसित देशों से आगे रखा था। डब्लूएचओ ने भी भारत के जल्दी लॉकडाउन के फैसले की तारीफ की थी। लेकिन इसके बाद क्या हुआ?
भारत अब कोरोना के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में 9वें स्थान पर है। अमेरिका और ब्राजील के बाद अब भारत में ही कोरोना के सबसे ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। पिछले 2 दिनों से हर दिन 7 हजार से ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं।
जबकि जिन यूरोपीय देशों में पहले हर दिन 7-7 हजार से ज्यादा मामले मिल रहे थे वहां इनकी संख्या 10 गुना तक कम हो गई है। मोदी सरकार के इस महामारी से लड़ने के अपने जो भी दावे हों लेकिन ये आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि मोदी सरकार ने कोरोना की रोकथाम में जो शुरुआती बढ़त हासिल की थी, अब वोखो गईहै।
कोरोना से लड़ाई में पिछड़ी मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकालके पहले साल में कई और मामलों में भी पीछे रही है। ऐसे ही 9 और मामलों पर एक रिपोर्ट..
1. पड़ोसी देश: हमेशा साथ देने वाला नेपाल भी अब आंख दिखा रहा
नेपाल.. भारत और चीन दोनों का पड़ोसी देश है। दोनों ही देश इसे अपने पक्ष में करने के लिए अपनी-अपनी विदेश नीतियों में उसे हमेशा से तरजीह देते रहे हैं। भारत के नेपाल के साथ संबंध हमेशा अच्छे ही रहे हैं लेकिन हाल ही में लिपुलेख को लेकर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद शुरू हो गया है।
लिपुलेख भारत, नेपाल और चीन की सीमा से लगता है। भारत इस इलाके को उत्तराखंड का हिस्सा मानता है और नेपाल इसे अपना हिस्सा बताता है। नेपाल का भारत से विवाद होनाचीन के खिलाफ रणनीतिक दृष्टि से एक खास साथी को खोने जैसा है।
2015 में नेपाल में मधेसी आंदोलन के दौरान भी भारत और नेपाल के बीच संबंधों में खटास आई थी। भारत से नेपाल होने वाला निर्यात बॉर्डर पर रोक लिया गया था।
इस समय चीन के साथ भी भारत के संबंध ज्यादा बेहतर नहीं है। इसी महीने पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे और सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में भारत-चीन के सैनिकों के बीच टकराव जैसी स्थिति बनी।इसके बाद किसी देश का नाम लिए बिना चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना को तैयार रहने के निर्देश दिए थे।
यानी साल 2017 में 73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद के बाद भारत-चीन के रिश्तों में सुधार लाने में दोनों ही देशों की सरकार कुछ खास नहीं कर पाई। उधर, 2008 मुंबई अटैक के बाद से ही पाकिस्तान से हमारे रिश्ते नहीं सुधर पाए हैं। पहले कार्यकाल में हुआ मोदी का पाकिस्तानी दौरा भी कुछ खास बदलाव न ला सका था।
2. विदेश नीति: पहले कार्यकाल में पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदमों पर दुनियाभर के देशों का साथ मिला था लेकिन इस बार आर्टिकल 370 और सीएए पर भारत की आलोचना हुई
आर्टिकल 370 हटने के बावजूद कश्मीर में कोई बड़ी हिंसा या आंदोलन नहीं होने देना मोदी सरकार की कामयाबी रही लेकिन, विदेश नीति के तौर पर इस कदम से कश्मीर मुद्दे का कुछ हद अंतरराष्ट्रीयकरण भी हुआ जो भारत सरकार कभी नहीं चाहती थी।
जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने कश्मीर के हालात काबू से बाहर बताए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प कई बार मध्यस्थता कराने की पहल कर रहे थे। यूरोपीयन संसद में भी 370 के हटने पर चर्चा हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 16 अगस्त 2019 को कश्मीर मुद्दे पर चर्चा हुई। 1965 के बाद 55 सालों में यह पहली बार था, जब यूएनएससी में कश्मीर पर बैठक रखी गई।
दिसंबर में नागरिकता संशोधन बिल लाने के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण भी मोदी सरकार को आलोचना झेलनी पड़ी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने सीएए को भेदभावपूर्ण बताया था। यूएन महासचिव एंटोनियो गुतरेज ने इस बिल के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को बलपूर्वक बंद करवाने के सरकार के रवैये पर भी चिंता जाहिर की थी। मलेशिया, टर्की, कुवैत, अफगानिस्तान जैसे कई देशों ने सीएए के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर चिंता जताई थी।
3. दिल्ली दंगे: हिंसा में दंगाइयों के साथ पुलिस के दिखने से गृहमंत्रालय की विश्वसनीयता पर सवाल उठा
दिल्ली चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने सीएए के खिलाफप्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ कई उकसावे वाले बयान दिए थे। चुनाव के बाद भी ये जारी रहे। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी 23 फरवरी को ऐसा ही उकसावे वाला बयान दिया। इसके अगले दिन ही दिल्ली में दंगे भड़क गए।
1984 के सिख दंगों के 36 साल बाद देश की राजधानी में इतने बड़े स्तर पर दंगे हो रहे थे। तीन दिनों तक हिंसा होती रही। कई तस्वीरों में तो गृहमंत्रालय के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस दंगाइयों के साथ पत्थर फेंकते नजर आई। इस हिंसा में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
खास बात यह कि जब दिल्ली में हिंसा भड़की थी तब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भारत दौरे पर थे। ऐसे में विदेशी मीडिया ने ट्रम्प के दौरे के दौरान भड़के इन दंगों को प्रमुखता से छापा। इंटरनेशनल मीडिया में मोदी सरकार पर दंगों पर समय रहते काबू न करने के लिए आलोचना हुई।
4. धार्मिक असहिष्णुता : भारत की सेक्युलर छवि पर असर
अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आजादी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने इस साल अप्रैल में अपनी रिपोर्ट में सीएए, एनआरसी, धर्मांतरण विरोधी कानून, मॉब लिंचिंग, जम्मू-कश्मीर से विशेष अधिकार छिनने, अयोध्या में राम मंदिर सुनवाई के दौरान भारत सरकार के एकतरफा रवैये जैसी कई चीजों के आधार पर भारत को धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला देश बताया था।
कमीशन ने अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट को भारत को विशेष चिंताजनक स्थिति वाले देशों (सीपीसी) की लिस्ट में डालने का सुझाव दिया था। इसी कमीशन ने यह भी कहा था कि कोरोना के दौरान भारत में मुस्लिमों को बलि का बकरा बनाया गया।
मोदी के पहले कार्यकाल की तरह ही दूसरे कार्यकाल में भी मॉब लिंचिंग की घटनाएं जारी रहीं। झारखंड में जून 2019 में 24 साल के तबरेज अंसारी की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी।
ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2015 से दिसंबर 2019 तक गौमांस खाने और बेचने की शंका के आधार पर 50 लोगों की हत्या हुई। ऐसे ही हमलों में 250 लोग घायल भी हुए। यही नहीं मार्च में लॉकडाउन के बाद जब कोरोना के मामले बढ़ने लगे तोकेन्द्र सरकार ने इसका ठिकरा जमातियों पर फोड़ा।
असर यह हुआ कि गांवों में मुस्लिम व्यापारियों के प्रवेश पर पाबंदी लगने के पोस्टर चिपकाए गए। मुस्लिम फल-सब्जी बेचने वालों को गली-मोहल्लों से भगाया जाने लगा। ऐसी तमाम खबरें पिछले 2 महीने से देश के कोने-कोने से आती रही हैं। इन घटनाओं के कारण बाहर भारत की सेक्युलर छवि को नुकसान पहुंचा।
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के एक गांव में मुस्लिम व्यापारियों के प्रवेश को लेकर एक पोस्टर लगाया गया था। इसमें लिखा गया था कि मुस्लिम व्यापारियों का गांव में प्रवेश निषेध है।
5. सीएए के खिलाफ तीन महीने से जारी प्रदर्शन कोरोना के कारण रूक पाए, सरकार ने कोई पहल नहीं की
नागरिकता संशोधन बिल जैसे ही संसद से पास हुआ, उसके अगले दिन से ही देशभर में इसके खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए थे। आईआईएम, आईआईटी जैसे संस्थानों समेत देशभर की कई यूनिवर्सिटियों के छात्र संगठन सड़कों पर उतरने लगे थे। धीरे-धीरे आमजन भी इसमें शामिल होते गए। शाहीन बाग सबसे बड़ा उदाहरण बना, जहां महिलाएं तीन महीनों तक 24 घंटे सड़कों पर बैठीं रहीं।
शाहीन बाग में 14 दिसंबर की रात से लॉकडाउन लगने तक (24 मार्च) महिलाओं का धरना जारी था।
इस तर्ज पर देशभर में कई जगह मुस्लिम महिलाओं ने शाहीन बाग बनाएं। यूपी में प्रदर्शन रोकने के लिए योगी सरकार ने जुर्माना लगाया। लेकिन, देशभर में कई जगहों पर यह प्रदर्शन जारी रहे। केन्द्र सरकार इन प्रदर्शनकारियों को विश्वास में नहीं ले पाई और न ही बातचीत के जरिए कोई हल निकाला जा सका। इतने लंबे समय तक और इतने बड़े स्तर पर हुए ये प्रदर्शन नई पीढ़ी ने पहले कभी नहीं देखे थे।
6. कोराना के पहले ही अर्थव्यवस्था गोते खा रही थी, नए रोजगार पैदा करने में भी सरकार फैल रही
2019-20 के दौरान जीडीपी ग्रोथ 4.2% रही। यह पिछले 11 सालों का न्यूनतम स्तर है। अब कोरोना के बाद तो इसका नेगेटिव जाने का अनुमान है। मोदी सरकार नए रोजगार भी नहीं ला पाई। मोदी के पिछले कार्यकाल में पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे की एक रिपोर्ट में सामने आया था कि देश में बेरोजगारी दर 45 सालों के सबसे उच्चतम स्तर पर है।
इसमें अब और इजाफा हो गया है। हाल ही में आई सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन के कारण महज अप्रैल महीने में 12 करोड़ भारतीयों को नौकरी गंवानी पड़ी है।
7. हेल्थ सेक्टर: मोदी हकीकत जानते थे इसलिए कोराना से बचाव के लिए बहुत पहले ही लॉकडाउन लगा दिया
देश में हेल्थ पर कुल जीडीपी का 2% से भी कम खर्च होता है। जबकि, अमेरिका में जीडीपी का 8.5% और जर्मनी में 9.4% खर्च हेल्थ पर किया जाता है। डब्लूएचओ के मुताबिक, हेल्थ पर जीडीपी का हिस्सा खर्च करने के मामले में 191 देशों में भारत 184 वें नम्बर पर आता है।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले साल में भी इस सेक्टर में कुछ खास सुधार नहीं देखा गया। हालांकि, मोदी सरकार ने 25 सितंबर से शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों या 50 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की बात कही है, जो एक बड़ा कदम है।
8. महंगाई दर: दिसंबर में 7 सालों के उच्चतम स्तर पर थी
भारत में महंगाई दर मार्च 2019 के बाद से ही लगातार बढ़ रही है। मार्च 2019 में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 0.30% थी जो दिसंबर 2019 में 14.12% पर पहुंच गई थी। यह साल 2013 के बाद सबसे ज्यादा बढ़ोतरी थी। खुदरा महंगाई दर भी मार्च 2019 में 2.86% थी, वह मार्च 2020 में 5.54% पर पहुंच गई।
9. प्रेस की आजादी: हर साल लगातार भारत की रैंकिंग गिर रही
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 142 है। यह पिछले तीन सालों से लगातार गिर रही है। 2019 में यह 140 थी और 2018 में यह 138 थी। हाल ही में 11 मई को गुजरात के एक पत्रकार धवल पटेल को देशद्रोह का केस लगाकर जेल में बंद कर दिया गया है। उन्होंने 7 मई के एक आर्टिकल में लिखा था कि कोरोना की रोकथाम न कर पाने के कारण गुजरात सीएम विजय रुपाणी अपना पद खो सकते हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में कोरोनावायरस के केस पिछले तीन दिनों में अचानक बढ़े हैं। पिछले दो दिन गुरुवार और शुक्रवार को ये आंकड़ा 1000 पार कर गया।
गुरुवार को पहली बार दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों की संख्या 1000 पार गई थी। गुरुवार को 1024 और शुक्रवार को 1106 पॉजिटिव मिले थे।
इससे पहले 10 दिन तक पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों की संख्या 500 से ज्यादा आ रही थी। बुधवार को 792 पॉजिटिव मिले जो तब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था।
दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या शुक्रवार को 17 हजार का आंकड़ा पार कर गई है। यह पहली बार है जब लगातार दो दिन तक 1000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।
दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या 17 हजार का आकंड़ा पार कर चुकी है।
इससे पहले 22 मई के दिन सबसे ज्यादा 660 और 27 मई को 792 मामले सामने आए थे।
इसके अलावा गुरुवार से शुक्रवार के बीच 24 घंटो में मरने वाले मरीजों की लिस्ट में 82 नए नाम जुड़ गए हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन के मुताबिक, इनमें 13 लोग वो हैं जिनकी उन 24 घंटों में मौत हुई है जबकि 69 नाम वे हैं जिनकी मौत की जानकारी अब मिली है। देश में मुंबई के बाद सबसे ज्यादा कोरोना मरीज दिल्ली में ही हैं।
दिल्ली में पॉजिटिव 17 हजार पार
प्रदेश में अब तक 17 हजार 386 पॉजिटिव मिले हैं
इनमें से 7846 संक्रमित ठीक हो चुके हैं
अब तक 398 लोगों की मौत हुई है
निजी अस्पताल में इलाज करवाना चाहते हैं मरीज
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक एक्टिव मामलों में से भी क़रीब 50 प्रतिशत लोगों को उनके घरों में ही क्वारैंटाइन किया गया है।
वहीं 2 हजार से ज्यादा संक्रमित दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में दाख़िल किए गए हैं।
मेरे दिल्लीवासियों, अगर आपको कोरोना हो जाए तो घबराना मत। आप में से ज्यादातर लोगों का इलाज #HomeIsolation में ही हो सकता है। लेकिन अगर आपको अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत हो तो हमारी उसके लिए भी पूरी तैयारी है। आपके अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।
कोरोना संक्रमितों का इलाज करने वाले सभी बड़े निजी अस्पताल लगभग भर चुके हैं जबकि सरकारी अस्पतालों में तुलनात्मक रूप से भीड़ कम दिख रही है।
लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल, जिसे दिल्ली सरकार ने कोरोना संक्रमितों के इलाज का मुख्य केंद्र बनाया है, यहां कोरोना संक्रमितों के लिए उपलब्ध दो हजार बेड में से क़रीब 1200 बेड खाली हैं।
सिर्फ़ आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि सरकार से जुड़े लोगों की भी प्राथमिकता सरकारी नहीं बल्कि निजी अस्पताल ही बन रहे हैं।
दिल्ली में केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक के कई बड़े सरकारी अस्पताल होने के बावजूद भी भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा कोरोना के लक्षण होने पर गुड़गांव स्थित एक निजी अस्पताल में ही दाख़िल हुए हैं।
प्राइवेट बनाम सरकारी
शहर के 7 प्राइवेट अस्पताल में कोविड के लिए 82 आईसीयू बेड हैं, दो दिन पहले तक उनमें से 74 भरे हुए थे।
शहर के 6 सरकारी अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए 348 आईसीयू बेड हैं, जिनमें से 111 पर ही मरीज हैं।
दिल्ली के 16 अस्पतालों में कोरोना मरीजों का ईलाज किया जा रहा है।
10 निजी और 6 सरकारी अस्पताल में चल रहा है इलाज
फ़िलहाल दिल्ली के 10 निजी और 6 सरकारी अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों का इलाज किया जा रहा है।
इनमें सबसे बड़ा लोक नायक अस्पताल है जहां दो हजार बेड उपलब्ध हैं। यहां आईसीयू में 64 बेड हैं और 125 वेंटिलेटर मौजूद हैं। सरकार का दावा है कि वह वेंटिलेटर बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है।
हाल ही में हुई एक बैठक में दिल्ली की स्वास्थ्य सचिव पद्मिनी सिंगला ने उप राज्यपाल को रिपोर्ट देते हुए बताया है कि ‘कोविड 19 के संक्रमितों के लिए दिल्ली में जो अस्पताल चुने गए हैं उनमें 4,462 बेड, 429 आईसीयू बेड, 343 वेंटिलेटर और 2,632 ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड उपलब्ध हैं।
कोरोना के लिए जो अस्पताल चुने गए हैं उनमें से2,632 ऑक्सिजन सपोर्ट वाले बेड उपलब्ध हैं।
अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में प्रेस को बताया है कि ‘हमारे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध 3,829 बेड में से 3,164 बेड ऑक्सीजन सपोर्ट वाले हैं।
हम इसे और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि कोरोना के गम्भीर मरीज़ों को सांस लेने में ही सबसे ज्यादा तकलीफ होती है और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है।’
केजरीवाल ने हर अस्पताल से कोरोना मरीजों के लिए बेड मांगे
हाल ही में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 50 बेड से ज्यादा की क्षमता वाले दिल्ली के तमाम अस्पतालों और नर्सिंग होम से अपने 20 प्रतिशत बेड कोरोना संक्रमितों के लिए आरक्षित रखने की अपील की है।
लेकिन अस्पताल मालिकों का कहना है कि कोरोना संक्रमितों को बाक़ी मरीज़ों के साथ अस्पताल में रखना घातक हो सकता है, इससे संक्रमण और भी तेजी से फैल सकता है।
लिहाजा इन लोगों का मानना है कि दिल्ली सरकार को कुछ निजी और सरकारी अस्पतालों को पूरी तरह से सिर्फ़ कोरोना के मरीज़ों के इलाज के लिए चयनित करना चाहिए।
The Delhi govt felt an imperative need to increase the no. of beds, dedicated to COVID19 patients. Hence, all 117 pvt hospitals/nursing homes with a capacity of 50 beds or more, have been directed to reserve 20% of their total bed strength for COVID19 patients. pic.twitter.com/dxpPOdwHit
लॉकडाउन 4 में दी गई छूट को कोरोना के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण माना जा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी यह बयान दिया है कि ‘लॉकडाउन में ढील दिए जाने से संक्रमण के बढ़ने की उम्मीद हमें थी।’
भीड़ बढ़ने से कोरोना संक्रमितों की संख्या में भी इजाफा होते जा रहा है।
बीते कुछ दिनों में दिल्ली में न सिर्फ़ हवाई उड़ानें, रेल यात्राएं और सड़क पर यातायात बढ़ा है बल्कि बाजारों में अब भीड़ नज़र आने लगी है।
हालांकि दुकानें अब भी सीमित समय के लिए ही खुल रही हैं लेकिन लोगों के घरों से निकलने पर पाबंदी हटा ली गई हैं। इसके चलते बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों तक में अब भीड़ होने लगी है। यह भीड़ ऐसे समय पर उमड़ रही है जब देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ रही है।
नौतपा के पांचवें दिन मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश हुई। इसके बादगर्मी से लोगों को राहत मिली है। मध्यप्रदेश में पिछले चौबीस घंटे में नौगांव, जबलपुर, सागर समेत 15 शहरों में तेज बारिश हुई और तापमान एक से तीन डिग्री कम हो गया। भोपाल में पारा 41.9 डिग्री रिकॉर्ड हुआ, जो कि गुरुवार के मुकाबले करीब दो डिग्री कम है। मौसम वैज्ञानिक पीके साह ने बताया कि उत्तरी हिस्से में बारिश हुई और राजस्थान के पास चक्रवती घेरा बना हुआ है इस कारण तापमान में गिरावट हुई। शनिवार काे राजधानी में बारिश के आसार हैं। 2 जून तक ऐसा ही मौसम रहेगा।
राजस्थान मेंसबसे गर्म कोटा, उसका तापमान भी 43.8 डिग्री
प्रदेश में नौतपा की शुरुआत में 50 डिग्री तक पहुंचा पारा चार दिन में ही लुढ़क गया। लगातार दूसरे दिन कई इलाको में आंधी चली और बारिश हुई। ओले भी गिरे। इससे दिन का पारा करीब 3 से 8 डिग्री तक नीचे आ गया। श्रीगंगानगर में पारा सबसे ज्यादा 7.8 डिग्री लुढ़ककर 39 डिग्री रहा। 26 अप्रैल को 50 डिग्री के साथ दुनिया और 27 अप्रैल को 49.6 डिग्री पारे के साथ देश का सबसे गर्म शहर रहने वाले चूरू में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री रह गया।चूरू में बारिश के बाद पारा अब 43.5 रह गया है।
शहर
शुक्रवार (तापमान)
गुरुवार (तापमान)
कोटा
43.8
45.0
चूरू
43.5
46.6
जैसलमेर
43.0
45.4
जयपुर
41.8
44.1
बाड़मेर
41.6
44.3
अजमेर
41.5
41.1
बीकानेर
41.5
45.2
जोधपुर
40.1
42.3
गंगानगर
39.0
46.9
हरियाणा में बदला मौसम;करनाल में दिन का पारा 29.80 पर आया
सप्ताहभर से गर्मी में तप रहे प्रदेश में शुक्रवार को तेज आंधी के साथ बरसात हुई। रेवाड़ी में सर्वाधिक 71 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहां ओले भी गिरे हैं। भुड़ला गांव में आंधी से दीवार गिरने से सांपली निवासी उमराव की मौत हो गई। कई जगह खंभे व पेड़ गिरने से बिजली सप्लाई ठप हो गई। प्रदेश में औसतन 2.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। मौसम में ठंडक घुल गई है। तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक कम हो गया। करनाल में यह 29.8 डिग्री पर आ गया। यह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से करीब 1 डिग्री कम था। मई में अब तक 21.2 मिमी बरसात हुई है, जो सामान्य से 22% अधिक है।
आगे क्या : 30 मई को भी बारिश हो सकती है, कहीं-कहीं तेज आंधी चलेगी। 31 मई व 1 जून को भी बंूदाबांदी के आसार हैं। दिन व रात के तापमान में 3-4 डिग्री की कमी आ सकती है। उधर, केरल में प्री मॉनसून की बारिश हो रही है। 1 जून को मॉनसून दस्तक दे सकता है।
बिहार: 4 जिलों में ठनका, तेज हवा के झोंके 11 में धूल से भरी आंधी की भी आशंका
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार रात से शनिवार तक के लिए राज्य के आरा, अरवल और गोपालगंज को छोड़ बाकी सभी जिलों के लिए ‘निगरानी’ अलर्ट जारी किया है। आईएमडी की ओर से चेतावनी, सतर्क, निगरानी और कोई चेतावनी नहीं स्तर पर पूर्वानुमान जारी किया जाता है। शनिवार को नवादा, नालंदा, बेगूसराय, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, बांका, मधेपुरा, सहरसा और भागलपुर में बिजली चमकने, ठनका गिरने, तेज हवा के झोंके और धूल भरी आंधी का निगरानी अलर्ट दिया गया है। शेष 14 जिलों में धूल भरी आंधी का निगरानी अलर्ट नहीं, लेकिन बिजली चमकने, ठनका गिरने और तेज हवा के झोंके का पूर्वानुमान है।
from Dainik Bhaskar /local/mp/bhopal/news/many-cities-of-madhya-pradesh-are-soaked-mercury-below-42-degrees-in-bhopal-storm-falls-in-hail-hail-in-haryana-one-killed-after-wall-collapses-127354855.html
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तारीख थी 26 जून 2019। दूसरी बार बनी मोदी सरकार को 27 दिन ही हुए थे। इस तारीख का जिक्र इसलिए, क्योंकि यही वो तारीख थी जब अमित शाह गृहमंत्री बनने के बाद पहली बार दो दिन के दौरे पर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे।
इसके बाद 5 अगस्त 2019 को अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के उन सभी खंडों को हटा दिया, जिसके तहत कश्मीर को जो अलग स्वायत्ता मिली थी, जो अधिकार मिले थे, सब हटा लिए गए। केवल एक खंड लागू रहा, जो जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाता था।
26 जून से लेकर 5 अगस्त के बीच बहुत सी घटनाएं घटीं। 26-27 जून को अमित शाह के दौरे के करीब एक महीने बाद 24 जुलाई को एनएसए अजित डोभाल सीक्रेट मिशन पर श्रीनगर गए। उनके लौटते ही सरकार ने घाटी में 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी। अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को जल्द से जल्द घाटी से लौटने की एडवाइजरी जारी की। 30 साल में ये पहली बार था जब केंद्र सरकार की तरफ से ऐसी एडवाइजरी जारी की गई थी।
गृहमंत्री अमित शाह राज्यसभा में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने का संकल्प पेश करने के बाद सदन से बाहर आते हुए। ये तस्वीर पिछले साल 6 अगस्त की है।
देश को लग रहा था कि राज्य के लोगों को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद 35-ए को हटाया जाएगा, लेकिन मोदी सरकार ने एक कदम और आगे जाते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को ही निष्प्रभावी कर दिया। उसके बाद 24 घंटे के अंदर ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया।
अनुच्छेद 370, एक ऐसा वादा था, जिसे भाजपा शुरू से ही करती आ रही थी। अप्रैल 1980 में बनी भाजपा ने 1984 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था। तब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का वादा किया था। उसके बाद से भाजपा ने 10 चुनाव लड़े और इनमें से 9 बार घोषणापत्र में यही वादा किया।
जो वादा अटल-आडवाणी के समय से किया जा रहा था, उसे 35 साल बाद मोदी सरकार ने पूरा किया।
ये तस्वीर तेलंगाना की है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद यहां बसे कश्मीरी पंडितों ने खुशी जताई थी।
अच्छी बात ये रही कि 370 हटने के बाद कोई बड़ा हमला नहीं हुआ
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। अकेले कश्मीर में ही 5 अगस्त से लेकर 18 अगस्त के बीच 4 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
लेकिन, अच्छी बात ये रही कि 70 साल पुराने अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद कोई बड़ा हमला या प्रदर्शन नहीं हुआ। हालांकि, आतंकियों ने इससे घबराकर कुछ गैर-कश्मीरी मजदूरों की हत्या जरूर कर दी थी।
गृह मंत्रालय ने पिछले साल 3 दिसंबर को लोकसभा में जवाब देते हुए बताया था कि, 5 अगस्त के बाद आतंकियों ने 19 लोगों की हत्या कर दी। इसमें गैर-कश्मीरी मजदूर और आम नागरिक शामिल थे।
मोदी सरकार के इस फैसले का अफगानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, फ्रांस, इजरायल, मालदीव, श्रीलंका, थाइलैंड, यूएई ने इसे भारत का आंतरिक मसला बताते हुए समर्थन किया था। हालांकि, चीन और पाकिस्तान ने इसका खुलकर विरोध किया था।
1989 से भाजपा राम मंदिर का वादा कर रही थी, इस बार सुप्रीम कोर्ट से सुलझा मामला
1989 में भाजपा ने दूसरा लोकसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उसने घोषणापत्र में राम मंदिर का वादा भी शामिल किया। 2019 के आम चुनावों में भी भाजपा ने घोषणापत्र में वादा किया था कि संविधान के दायरे में रहकर जल्द से जल्द राम मंदिर निर्माण की संभावनाओं को तलाशा जाएगा।
मोदी सरकार के लौटते ही 6 अगस्त से अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हो गई। 40 दिन तक चली सुनवाई के बाद फैसला भी आ गया। 134 साल पुराना मसला जो उलझता ही जा रहा था, उसे 40 दिन की सुनवाई में सुलझा दिया गया।
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दे दी।
ये फैसला आया तो सुप्रीम कोर्ट से था, लेकिन इसे मोदी सरकार की उपलब्धि से जोड़ा गया। मोदी और शाह ने इस फैसले के बाद झारखंड और दिल्ली के विधानसभा चुनावों में जमकर राम मंदिर के फैसले को अपनी उपलब्धि भी बताया। हालांकि, उसके बाद भी भाजपा चुनाव नहीं जीत सकी थी।
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर 40 दिन की लगातार सुनवाई में 200 घंटे तक बहस चली थी। कोर्ट ने 1045 पन्नों का फैसला सुनाया था।
इसमें भी अच्छी बात यही रही कि इतना बड़ा फैसला आने के बाद भी देश में न दंगे भड़के और न ही कहीं कोई हिंसा हुई। इतना ही नहीं कहीं से छुटपुट झड़पों की खबर भी नहीं आई।
ये सब इसलिए भी हो पाया क्योंकि सरकार ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। फैसला आने से पहले ही उत्तर प्रदेश के अयोध्या और लखनऊ में पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस के हजारों जवान तैनात कर दिए गए। सीसीटीवी कैमरा और ड्रोन से निगरानी की गई। इंटरनेट बंद कर दिया गया।
सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर के सभी संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी किया गया। जगह-जगह पुलिस तैनात कर दी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरे देश में स्वागत किया गया। मुस्लिम संगठनों ने भी इसे माना।
1400 साल से चली आ रही थी तीन तलाक प्रथा, कानून लाकर खत्म की
अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक को असंवैधानिक और गैर-कानूनी करार दिया। साथ ही साथ सरकार को इसे खत्म करने के लिए कानून बनाने का आदेश दिया।
इसके बाद सरकार 1400 साल पुरानी तीन तलाक प्रथा को खत्म करने के लिए मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल लेकर आई। ये बिल 2 साल में 2 बार लोकसभा में तो पास हो गया, लेकिन राज्यसभा में अटक गया।
तीन तलाक पर कानून बनने पर मुस्लिम महिलाओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की थी।
बाद में जब दोबारा मोदी सरकार सत्ता में लौटी, तो फिर से 25 जुलाई को कुछ बदलाव के साथ बिल लोकसभा में पेश हुआ और पास हो गया। बाद में 30 जुलाई को ये बिल राज्यसभा से भी पास हो गया और 31 जुलाई से ये कानून बन गया।
इस कानून के तहत तीन तलाक अब गैर-कानूनी है। तीन तलाक देने पर दोषी पति को तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही अब मुस्लिम महिलाएं अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता भी मांग सकती हैं।