Saturday, July 18, 2020

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हम आपको बता रहे हैं कि खबरों के लिहाज से कल का दिन कैसा था और आज का दिन आपके और आपके परिवार के लिए कैसा रहने वाला है? आपको बस इतना करना है कि कुछ मिनट निकालकर इसे आखिर तक पढ़ जाना है।

1. राजस्थान में सुर्खियों में वसुंधरा
तो चलिए शुरू करते हैं…। कल यानी शनिवार को भी खबरों में राजस्थान का सियासी ड्रामा छाया रहा। ताजा घटनाक्रम ये कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी। उन्होंने एक ट्वीट किया है, जिसमें वे कहती हैं, 'कांग्रेस की अंदरूनी कलह का नुकसान प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।' एक और ट्वीट में कहा कि वे ‘भाजपा’ और ‘उसकी विचारधारा’, दोनों के साथ हैं।

इससे पहले उन पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का साथ देने का आरोप लगा। रालोपा के नेता हनुमान बेनीवाल ने गुरुवार को कहा था कि वे (वसुंधरा) गहलोत सरकार को बचा रही हैं। पायलट खेमे ने भी उन पर ऐसे ही आरोप लगाए थे।

राजस्थान में विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर जारी फोन टैपिंग पर भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। कहा कि क्या आधिकारिक रूप से फोन टैपिंग हुई, क्या सरकार ने खुद को बचाने के लिए गैर संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया? इसकी जांच सीबीआई से कराई जाना चाहिए।

पढ़ें: 9 दिन बाद वसुंधरा ने चुप्पी तोड़ी: 3 घंटे में 2 ट्वीट किए

2. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तारीखें
अब बढ़ते हैं कल की दूसरी सबसे बड़ी खबर की तरफ और आपको लिए चलते हैं उत्तर प्रदेश के अयोध्या। खबर है कि राम मंदिर निर्माण की नींव 3 या 5 अगस्त को रखी जाएगी। आखिरी फैसले के लिए ये दो तारीखें पीएमओ को भेजी गई हैंताकि प्रधानमंत्री मोदी आ सकें। मंदिर की ऊंचाई 161 फीट होगी और मंदिर में तीन की बजाय पांच गुंबद होंगे। कल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अयोध्या में बैठक हुई, जिसमें ये फैसले लिए गए।

3. महाकाल में सिर्फ मध्य प्रदेश के लोग आ सकेंगे
कल की तीसरी अहम खबर महाकाल की नगरी उज्जैन से। अगर आप मध्य प्रदेश से बाहर रहते हैं और महाकाल में आस्था रखते हैं तो ये जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। उज्जैन में कोरोना मरीजों की बढ़ रही संख्या को देखते हुए शनिवार को मंदिर प्रबंधन समिति ने दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर अहम फैसला लिया है। अब केवल मध्य प्रदेश के निवासी ही बाबा महाकाल के दर्शन कर पाएंगे। दूसरे राज्यों से आने वालों को महाकाल मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

4. टिकटॉक के खिलाफ ट्रम्प कैम्पेन चला रहे
एक खबर विदेश से। बात अमेरिका की। यहां जल्द ही टिकटॉक पर बैन को लेकर फैसला हो सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इसके खिलाफ एड कैम्पेन चला रहे हैं। इसमें कहा जा रहा है कि चीन का यह ऐप अमेरिकी नागरिकों की जासूसी कर रहा है। भारत ने पिछले महीने चीन के 59 ऐप्स पर बैन लगा दिया था। अमेरिका के सांसद भारत के इस कदम की तारीफ करते हुए ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन पर भी टिकटॉक को बैन करने का दबाव बना रहे हैं।

5. आज का दिन कैसा रहेगा?
आज रविवार है। सात राशियों कन्या, कुंभ, मीन, मेष, मिथुन, तुला और सिंह राशि वालों के लिए आज संभलकर रहने का दिन है। पांच राशियों वृष, कर्क, वृश्चिक, धनु और मकर राशि वाले लोगों के लिए दिन ठीक-ठाक रहेगा। पढ़ें: सभी 12 राशि वालों के दिन कैसा रहेगा...

ऊपर हुई एस्ट्रोलॉजी की बात। अब जानते हैं कि टैरोकार्ड्स क्या कहते हैं। तो रविवार को धनु राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। दोस्तों की सलाह अहम साबित हो सकती है। मेष राशि वालों के लिए एक काम के लिए कई बार कोशिश करने का दिन रहेगा। पढ़ें: सभी राशि वालों के लिए टैरोकार्ड्स क्या कह रहे हैं...

6. चलते-चलते वो खबरें, जिन्हें शायद आप पढ़ना चाहें

फोन टैपिंग कितनी सही?

राजस्थान में फोन टैपिंग पर सियासत गरमाई हुई है। पिछले साल कर्नाटक और उसके बाद छत्तीसगढ़ में भी फोन टैपिंग के आरोप लगे थे। दरअसल, केंद्र और राज्य सरकारें दो व्यक्तियों के बीच की बातचीत को इंटरसेप्ट कर सकती हैं। पोस्ट ऑफिस एक्ट, इंडियन टेलीग्राफ एक्ट औरइन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट में सरकार को यह अधिकार मिला हुआ है। भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़ें: किन एजेंसियों को फोन रिकॉर्ड करने की इजाजत है?

कोरोना की दवा
मॉडर्न मेडिसिन के सामने कोरोना से बड़ा संकट पहले कभी नहीं आया। दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिक लगातार वैक्सीन की खोज में लगे हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर तय समय में कोरोना की वैक्सीन तैयार हो जाती है, तो यह इतिहास का सबसे तेज वैक्सीन प्रोग्राम होगा। पढ़ें: कोरोना के सबसे चर्चित ड्रग्स और ट्रीटमेंट के बारे में...



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शनिवार, 25 जुलाई को नाग पंचमी है। हर साल सिर्फ इसी दिन उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के शिखर पर मौजूद नागचंद्रेश्वर भगवान के पट आम भक्तों के लिए खोले जाते हैं। लेकिन, इस साल कोरोना वायरस की वजह से श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन नहीं कर पाएंगे। मंदिर समिति की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर भक्तों के लिए लाइव दर्शन की व्यवस्था की जाएगी।

उज्जैन के पंचांग निर्माता और शास्त्रों के जानकार ज्योतिषाचार्य पं. आनंद शंकर व्यास ने बताया कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का पौराणिक महत्व है। हजारों साल पुराने शास्त्रों में भी महाकालेश्वर का जिक्र है। लेकिन, महाकाल मंदिर की वर्तमान इमारत का इतिहास250-300 साल पुराना है। मुगलों के समय में प्राचीन महाकाल मंदिर ध्वस्त हो गया था। इसके बाद मराठा राजाओं ने उज्जैन पर राज किया। राणोजी सिंधिया ने अपने शासनकाल में महाकाल मंदिर का निर्माण फिर से करवाया था।

मंदिर निर्माण के बाद समय-समय पर अलग-अलग राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। जब मंदिर का पुनर्निमाण हुआ, तब नागचंद्रश्वेर की मूर्ति को मंदिर के ऊपरी तल पर एक दीवार में लगा दिया गया था। संभवत: ये मूर्ति मुगलों द्वारा ध्वस्त किए गए मंदिर के अवशेषों में से मिली थी।पं. व्यास के अनुसार, नागदेव की पूजा सिर्फ नागपंचमी पर ही करने का विशेष महत्व है। इसीलिए महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर भगवान के पट नागपंचमी पर ही खोले जाते हैं।

नागचंद्रेश्वर की इस प्रतिमा शिव-शक्ति का साकार स्वरूप है।

नाग आसन पर विराजित शिवजी और पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा

मंदिर में नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। ये 11वीं शताब्दी की बताई जाती है।इस प्रतिमा में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती विराजित हैं। महाकालेश्वर मंदिर के सबसे ऊपरी तल पर ये प्रतिमा स्थित है। नागचंद्रेश्वर मंदिर में प्रवेश करते हीदीवार पर भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा दिखाई देती है।

भक्तों के लिए रहेगी ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था

महाकाल मंदिर के प्रशासक सुजान रावत ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते नागपंचमी पर आम श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन नहीं कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर की वेबसाइट https://ift.tt/2YWj8Wm और सोशल मीडिया पर ऑन लाइन दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा सिर्फ मध्य प्रदेश केभक्तों को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन प्री-बुकिंग के आधार पर ही कराए जाएंगे। महामारी के चलते अन्य प्रदेश के लोगों को मंदिर में दर्शन करने की अनुमति नहीं मिल सकेगी।

महाकालेश्वर दर्शन के लिए मोबाइल में प्ले स्टोर से महाकालेश्वर मंदिर के लाइव दर्शन ऐप को डाउनलोड करना होगा। इस ऐप से दर्शन के लिए बुकिंग की जा सकती है। अपनी इच्छा के अनुसार तारीख और दर्शन का समय चुन सकते हैं। ऐप पर श्रद्धालु द्वारा सभी जानकारियां देने के बाद एसएमएस से परमिशन मिलेगी।

इसके अलावा टोल फ्री नंबर 18002331008 पर भी दर्शन के लिए बुकिंग कराई जा सकती है। 65 और इससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग, 10 साल से छोटे बच्चे व गर्भवती महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंदिर में सेनेटाइजेशन, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सभी भक्तों को करना होगा।

सावन माह में हर सोमवार महाकालेश्वर की सवारी निकाली जाती है। इस बार कोरोना वायरस की वजह से सवारी परंपरागत मार्ग से नहीं निकाली जा रही है। सवारी का मार्ग बहुत छोटा कर दिया गया है। सवारी में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश वर्जित है। प्रशासन ने भक्तों से निवेदन किया है कि वे अपने घर में रहकर सवारी के ऑन लाइन दर्शन करें।
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एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है महाकालेश्वर

महाकालेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। ये द्वादश ज्योतिर्लिंगों के क्रम में तीसरा है। मान्यता है कि दक्षिणमुखी होने की वजह से महाकाल के दर्शन से असमय मृत्यु के भय और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। सिर्फ इसी मंदिर में रोज सुबह भस्म आरती की जाती है।

भस्म आरती इस मंदिर का मुख्य आकर्षण है। उज्जैन, इंदौर से करीब 52 किमी दूर स्थित है।

पुराणों में महाकालेश्वर का उल्लेख

प्राचीन समय में महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र को महाकाल वन के नाम से जाना जाता था। स्कंद पुराण के अवंती खंड, शिवमहापुराण, मत्स्य पुराण आदि ग्रंथों में महाकाल वन का उल्लेख है। यहां शिवजी यानी महाकाल का ज्योति स्वरूप विराजमान है। इसीलिए इसे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।

नागपंचमी पर करें नागदेवता की प्रतिमा की पूजा

नागपंचमी पर जीवित सांप की पूजा करने और दूध पिलाने से बचना चाहिए। सांप मांसाहारी जीव है, इसके लिए दूध विष की तरह होता है। नागपंचमी पर नागदेवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करनी चाहिए।



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1. राजस्थान में सुर्खियों में वसुंधरा
तो चलिए शुरू करते हैं…। कल यानी शनिवार को भी खबरों में राजस्थान का सियासी ड्रामा छाया रहा। ताजा घटनाक्रम ये कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी। उन्होंने एक ट्वीट किया है, जिसमें वे कहती हैं, 'कांग्रेस की अंदरूनी कलह का नुकसान प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।' एक और ट्वीट में कहा कि वे ‘भाजपा’ और ‘उसकी विचारधारा’, दोनों के साथ हैं।

इससे पहले उन पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का साथ देने का आरोप लगा। रालोपा के नेता हनुमान बेनीवाल ने गुरुवार को कहा था कि वे (वसुंधरा) गहलोत सरकार को बचा रही हैं। पायलट खेमे ने भी उन पर ऐसे ही आरोप लगाए थे।

राजस्थान में विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर जारी फोन टैपिंग पर भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। कहा कि क्या आधिकारिक रूप से फोन टैपिंग हुई, क्या सरकार ने खुद को बचाने के लिए गैर संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया? इसकी जांच सीबीआई से कराई जाना चाहिए।

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2. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तारीखें
अब बढ़ते हैं कल की दूसरी सबसे बड़ी खबर की तरफ और आपको लिए चलते हैं उत्तर प्रदेश के अयोध्या। खबर है कि राम मंदिर निर्माण की नींव 3 या 5 अगस्त को रखी जाएगी। आखिरी फैसले के लिए ये दो तारीखें पीएमओ को भेजी गई हैंताकि प्रधानमंत्री मोदी आ सकें। मंदिर की ऊंचाई 161 फीट होगी और मंदिर में तीन की बजाय पांच गुंबद होंगे। कल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अयोध्या में बैठक हुई, जिसमें ये फैसले लिए गए।

3. महाकाल में सिर्फ मध्य प्रदेश के लोग आ सकेंगे
कल की तीसरी अहम खबर महाकाल की नगरी उज्जैन से। अगर आप मध्य प्रदेश से बाहर रहते हैं और महाकाल में आस्था रखते हैं तो ये जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। उज्जैन में कोरोना मरीजों की बढ़ रही संख्या को देखते हुए शनिवार को मंदिर प्रबंधन समिति ने दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर अहम फैसला लिया है। अब केवल मध्य प्रदेश के निवासी ही बाबा महाकाल के दर्शन कर पाएंगे। दूसरे राज्यों से आने वालों को महाकाल मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

4. टिकटॉक के खिलाफ ट्रम्प कैम्पेन चला रहे
एक खबर विदेश से। बात अमेरिका की। यहां जल्द ही टिकटॉक पर बैन को लेकर फैसला हो सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इसके खिलाफ एड कैम्पेन चला रहे हैं। इसमें कहा जा रहा है कि चीन का यह ऐप अमेरिकी नागरिकों की जासूसी कर रहा है। भारत ने पिछले महीने चीन के 59 ऐप्स पर बैन लगा दिया था। अमेरिका के सांसद भारत के इस कदम की तारीफ करते हुए ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन पर भी टिकटॉक को बैन करने का दबाव बना रहे हैं।

5. आज का दिन कैसा रहेगा?
आज रविवार है। सात राशियों कन्या, कुंभ, मीन, मेष, मिथुन, तुला और सिंह राशि वालों के लिए आज संभलकर रहने का दिन है। पांच राशियों वृष, कर्क, वृश्चिक, धनु और मकर राशि वाले लोगों के लिए दिन ठीक-ठाक रहेगा। पढ़ें: सभी 12 राशि वालों के दिन कैसा रहेगा...

ऊपर हुई एस्ट्रोलॉजी की बात। अब जानते हैं कि टैरोकार्ड्स क्या कहते हैं। तो रविवार को धनु राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। दोस्तों की सलाह अहम साबित हो सकती है। मेष राशि वालों के लिए एक काम के लिए कई बार कोशिश करने का दिन रहेगा। पढ़ें: सभी राशि वालों के लिए टैरोकार्ड्स क्या कह रहे हैं...

6. चलते-चलते वो खबरें, जिन्हें शायद आप पढ़ना चाहें

फोन टैपिंग कितनी सही?

राजस्थान में फोन टैपिंग पर सियासत गरमाई हुई है। पिछले साल कर्नाटक और उसके बाद छत्तीसगढ़ में भी फोन टैपिंग के आरोप लगे थे। दरअसल, केंद्र और राज्य सरकारें दो व्यक्तियों के बीच की बातचीत को इंटरसेप्ट कर सकती हैं। पोस्ट ऑफिस एक्ट, इंडियन टेलीग्राफ एक्ट औरइन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट में सरकार को यह अधिकार मिला हुआ है। भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़ें: किन एजेंसियों को फोन रिकॉर्ड करने की इजाजत है?

कोरोना की दवा
मॉडर्न मेडिसिन के सामने कोरोना से बड़ा संकट पहले कभी नहीं आया। दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिक लगातार वैक्सीन की खोज में लगे हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर तय समय में कोरोना की वैक्सीन तैयार हो जाती है, तो यह इतिहास का सबसे तेज वैक्सीन प्रोग्राम होगा। पढ़ें: कोरोना के सबसे चर्चित ड्रग्स और ट्रीटमेंट के बारे में...



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इसी माह 15 जुलाई को ट्विटर के इतिहास में हुई सबसे बड़ी हैकिंग ने पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है। जिस तरह से हैकर्स ने दुनिया के प्रतिष्ठित लोगों के वैरिफाइड ट्विटर हैंडल्स को हैक कर बिटक्वाइन स्कैम को अंजाम दिया, उसने साइबर सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब जबकि वर्तमान में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर गहमागहमी चल रही है। अमेरिका के लिए यह खतरनाक इसलिए भी है क्योंकि लगभग 20 प्रतिशत अमेरिकी ट्विटर का इस्तेमाल कम्युनिकेशन के लिए करते हैं और मतदाताओं को प्रभावित करने में ट्विटर का इस्तेमाल होता है।
बिटक्वाइन पर नजर रखने वाली कंपनी ब्लाॅक चेन के अनुसार घटना के दौरान ट्विटर पर जिस बिटक्वाइन एड्रेस को डाला गया था, उसमें लगभग 300 ट्रांजेक्शन हुए, जिनसे 3 घंटे में लगभग 88 लाख रुपए (1.18 लाख डॉलर) भेजे गए। इसकी शुरुआती जांच में पता चला है कि ट्विटर के एक कर्मचारी के इंटरनल टूल का उपयोग इस घटना में किया गया है। न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार हैकर्स को यह टूल ऑनलाइन कम्युनिटी OGusers.com पर मिला। इसके माध्यम से हैकर्स ने ईमेल रीसेट कर उनके पासवर्ड प्राप्त कर लिए। इसके बाद इन ट्विटर हैंडल को अपने नियंत्रण में ले लिया।
हैकिंग की यह घटना सबसे बड़ी जरूर मानी जा रही है, लेकिन हर साल ऐसी लाखों घटनाएं हो रही हैं। एसेंसर सिक्योरिटी की रिपोर्ट ‘द कास्ट ऑफ साइबर क्राइम’ के अनुसार सोशल अटैक या हैकिंग की घटनाओं में हर साल 16 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है। इसी रिपोर्ट के अनुसार साइबर क्राइम के कारण दुनियाभर में हर साल 1500 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। साइबर अपराधों के मामलों में बढ़ोतरी की वजह से ही साइबर सिक्योरिटी का बाजार भी लगातार बढ़ रहा है क्योंकि साइबर सिक्योरिटी के जरिए ही कम्प्यूटर इंफॉर्मेशन सिस्टम, नेटवर्क और डेटा को साइबर अटैक से रोका जा सकता है।

क्या है ये ट्विटर अकाउंट हैकिंग का मामला?

15 जुलाई को अचानक दुनिया भर की बड़ी हस्तियों के ट्विटर हैंडल अकाउंट से लगभग एक जैसी पोस्ट पर वर्चुअल मनी बिटक्वाइन में पैसा मांगा गया, जिसमें इस पैसे को दोगुना कर वापस देने की बात कही गई। इस घटना को चार युवा हैकर्स ने अंजाम दिया। जिन बड़े लोगों के ट्विटर हैंडल हैक हुए उनमें टेस्ला कंपनी के सीईओ एलन मस्क, माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स, अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन एवं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, सॉफ्टवेयर कंपनी एप्पल, अमेजन के सीईओ जेफ बेजाेस, बिजनेस टाइकून वॉरेन बफेट आिद मुख्य रूप से शामिल हैं।
हैकर्स ने बिटक्वाइन में ही पैसा क्यों मांगा?

बिटक्वाइन एक डिजिटल करेंसी है। रुपए, डॉलर की तरह इसे छापा नहीं जाता। यह डिजिटल यानी इंटरनेट के जरिए इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके ट्रांजेक्शन का सबूत न होना है। कोई गुमनाम व्यक्ति दूसरे गुमनाम व्यक्ति को बिटक्वाइन ट्रांसफर कर सकता है। जिसका कोई भी रिकार्ड नहीं होगा। इससे अपराधी को पकड़ना लगभग नामुमकिन होता है। माइक्रोसॉफ्ट जैसी कुछ बड़ी कंपनियां बिटक्वाइन में लेनदेन में करती हैं।
हैकिंग के लिए हम भी जिम्मेदार...

  • नोबी4 का सिक्योरिटी थ्रेट एंड ट्रेंड ग्लोबल सर्वे के अनुसार लोग पासवर्ड बनाने में अपना नाम @ या # 345 या 123 का ही इस्तेमाल करते हैं। या फिर अपनी जन्म तारीख़, मोबाइल नंबर को ही अपना पासवर्ड बनाते हैं।
  • यही सर्वे बताता है कि किसी संस्था या कंपनी के लिए उसके अपने भीतरी व्यक्ति या जानने वाला ही सबसे बड़ा खतरा होता है। 76 प्रतिशत मामलों में या तो हमला करने वाला व्यक्ति संस्था में काम कर रहा था या पहले काम कर चुका था।

क्यों नहीं पकड़े जाते हैकर्स?

साइबर क्रिमिनल के पकड़ में आने की दर बहुत कम है, क्योंकि वे डीपवेब और डार्क वेब के जरिए अपराध को अंजाम देते हैं जहां आईपी एड्रेस लगातार बदलते रहते हैं। डीपवेब पर फाइलों का एक्सटेंशन ही ओनियन है। यानी कि इस काली दुनिया में इतनी परतों के भीतर डाटा छुपा होता है कि उसे निकाल पाना खासा मुश्किल होता है।

लगातार बढ़ता साइबर सिक्योरिटी बाजार

  • 2023 तक 18.61 लाख करोड़ रुपए का होगा साइबर सिक्योरिटी मार्केट
  • साइबर सिक्योरिटी के तहत ही कम्प्यूटर इंफॉर्मेशन सिस्टम, नेटवर्क और डेटा को साइबर अटैक से रोका जाता है।

हैकिंग से बचने के लिए आजमाएं 6 तरीके...

  • यूआरएल टाइप करके ही साइट पर जाएं: अगर आपको किसी वित्तीय लेनदेन के लिए बैंक आदि की साइट्स पर जाना है तो सर्च इंजिन के जरिए न जाए। इसके बजाय साइट्स के यूआरएल और डोमेन याद रखें। पूरा यूआरएल टाइप करके ही साइट पर जाएं।
  • तीन स्तर की सुरक्षा प्रणाली अपनाएं: बैंक अकाउंट हो या सोशल साइट का अकाउंट, तीन स्तर की सुरक्षा प्रणाली, यानी पासवर्ड, क्वैश्चन और ओटीपी को जरूर अपनाएं। इसके लिए अपने बैंक से या किसी भी एक्सपर्ट से जानकारी ले सकते हैं।
  • एप की परमिशन हटाएं : मोबाइल में एप डाउनलोड करना और फिर उसे परमिशन देना हमारी मजबूरी बन जाता है। इससे बचने के लिए एप डाउनलोड करने के बाद मोबाइल डेटा बंद करें और सेंटिंग्स में एप में जाकर परमिशंस हटा दें।
  • ब्राउजर मना करें तो साइट पर न जाएं: कई बार फाइल डाउनलोड करने से हमारा ब्राउजर मना कर देता है। हालांकि इसके बावजूद हम किसी और तरीके से वह फाइल डाउनलोड करने के रास्ते खोज लेते हैं। लेकिन यह भी सुरक्षित नहीं है।
  • जरूरी होने पर ही अपडेट करें : विंडोज या मोबाइल का सिस्टम सॉफ्टवेयर तभी अपडेट करें, जब वह वाकई जरूरी हों। कई बार अपडेट के माध्यम से भी सिस्टम की हैकिंग हो सकती है। ऐसे में अपडेट से पहले उसे बारीकी से जरूर पढ़ें।
  • पासवर्ड सेव ना करें: जब आप कोई पासवर्ड बनाते हैं तो कई बार अापका ब्राउजर (जिस पर आप इंटरनेट चलाते हैं जैसे गूगल क्रोम, मोजिला आदि) आपसे सेव करने का ऑप्शन देते हैं। तब आप भूलकर भी अपना पासवर्ड सेव नहीं करें।


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Cyber security market to be 18.6 lakh crore in 4 years


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Friday, July 17, 2020

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क्या वायरल: एक फोटो जिसमें कांग्रेस नेता ( अब तक) सचिन पायलट बीजेपी अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया से फूलों का गुलदस्ता लेते दिख रहे हैं। इस फोटो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ले ली है।

पिछले एक सप्ताह से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच लगातार बढ़ रही तनातनी किसी से छुपी नहीं है। बीच में पायलट के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें भी चलीं,जिन पर बाद में उन्होंने खुद विराम लगा दिया। लेकिन, सचिन पायलट की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं।

पायलट समेत राजस्थान कांग्रेस के 19 विधायकों पर गहलोत सरकार एक्शन लेने के मूड में दिख रही है। फिलहाल मामला हाईकोर्ट में है।इसी बीच सोशल मीडिया पर इस मुद्दे से जुड़ी भ्रामक खबरें फैलाए जाने का सिलसिला भी जारी है।

फोटो के साथ इस तरह के ट्वीट किए जा रहे हैं

फेसबुक पर भी फोटो को इसी दावे के साथ पोस्ट किया जा रहा है

फैक्ट चेक पड़ताल

  • फोटो कोगूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया और जेपी नड्‌डा की एक फोटो हमारे सामने आई। साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा ज्वॉइन करने से जुड़ी खबरें भी दिखीं। इन खबरों में भी सिंधिया औरनड्‌डा की यही फोटो है। 11 मार्च, 2020को ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। ये फोटो तब ही की है।
  • दैनिक भास्कर की खबर में भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की यही फोटो है।
  • वायरल फोटो को ज्योतिरादित्य सिंधिया और जेपी नड्‌डा की फोटो से मिलाने पर समझ आता है कि दोनों का बैकग्राउंड बिल्कुल एक जैसा है। फोटो में सिंधिया के पीछे खड़े व्यक्ति की गहरे नीले रंग की पोशाक रही है। यही पोशाक वायरल फोटो में भी दिख रही है। स्पष्ट है कि सिंधिया की फोटो से छेड़छाड़ कर उसमें सचिन पायलट का चेहरा जोड़ा गया है।
  • दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर सचिन पायलट का इंटरव्यू है। जिसमें उन्होंने कहा है कि वे बीजेपी में शामिल नहीं हो रहे हैं।

निष्कर्ष : सोशल मीडिया पर सचिन पायलट की बताकर वायरल हो रही फोटो फर्जी है। सचिन पायलट के बीजेपी में शामिल होने वाला दावा भी भ्रामक है।



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Fact Check : On the basis of fake photos, it is being claimed that Sachin Pilot has joined BJP.


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सचिन पायलट राजस्थान के मुख्यमंत्री तो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। लेकिन दोनों की राह में मोबाइल रिकॉर्डिंग और हैकिंग अड़ंगे लगा रही हैं। पायलट की उड़ान रोकने के लिए गहलोत सरकार ने विधायकों की खरीद-फरोख्त की रिकॉर्डिंग करवा के एसओजी जांच शुरू करवा दी, तो अमेरिकी सत्ता की होड़ में सोशल इंजीनियरिंग से ट्विटर का सिस्टम ही हैक करवा दिया गया।

डिजिटल कंपनियों के इस खतरे को भांपते हुए ही दो दिन पहले यूरोपीय समुदाय ने अमेरिका जा रहे डाटा शेयरिंग के डिजिटल एग्रीमेंटस पर रोक लगा दी है। भारत में कोरोना से ठप पड़े देश में दबे पांव डिजिटल का साम्राज्य स्थापित हो गया, जिसे चौथी औद्योगिक क्रांति बताया जा रहा है।

साइबर औद्योगिक क्रांति के महानायक गूगल, फेसबुक, अमेज़न, अलीबाबा और एप्पल जैसी कंपनियों के आगे बड़े देशों की सरकारें भी सिमटने लगी हैं। भारत में इस डिजिटल क्रांति की बागडोर को वैश्विक कंपनियों से छीनकर रिलायंस के मुखिया मुकेश अंबानी दुनिया के छठवें सबसे बड़े रईस बन गए हैं।

54 साल पुरानी कंपनी के नए उपक्रम जियाे प्लेटफार्म की हिस्सेदारी बेचकर 2.12 लाख करोड़ हासिल करके रिलायंस कर्ज मुक्त होने का दावा कर रही है। भारत में नए संसाधन जुटाकर ही सरकारी योजनाओं को सफल बना सकते हैं। देश में सरकारी कंपनियों के विनिवेश और बिक्री से 2.11 लाख करोड़ रुपए हासिल करने का सालाना लक्ष्य रखा गया है, इसलिए इस नई डिजिटल क्रांति से राज्य और केंद्र सरकारों को बड़े सबक लेने चाहिए।

सस्ते स्मार्टफ़ोन और डाटा प्लान के दो विकट हथियारों से लैस डिजिटल कंपनियां वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग, शिक्षा, मनोरंजन, फिल्म, गेमिंग, मीडिया, खुदरा, ई-कॉमर्स, किराना, बैंकिंग, संचार, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य और चुनावी राजनीति जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आधिपत्य जमा रही हैं। टेलीकॉम या दूसरी औद्योगिक क्रांति से हुए विकास से सरकारों को लंबी-चौड़ी रकम मिलती थी।

दस साल पहले 2जी की नीलामी में 1.76 लाख करोड़ के घोटाले पर सीएजी के हो हल्ले के बाद केंद्र में सरकार ही बदल गई। अब 2015 के बाद दूरसंचार से सरकार को शायद ही आमदनी हुई हो। नए दौर में सरकार और जनता वैश्विक डिजिटल कंपनियों के लिए डाटा हासिल करने का प्लेटफार्म बन गए हैं। एकांगी डिजिटल क्रांति से परंपरागत क्षेत्रों में रोजगार में भारी कमी आई है, जबकि नए रोजगार थोड़े ही बढ़ रहे हैं।

डिजिटल के नियमन के लिए सही टैक्स व्यवस्था लागू नहीं करने से सरकारों की आमदनी भी कम हो रही है। डिजिटल की वजह से अर्थव्यवस्था के खस्ताहाल को समझने के लिए 80 करोड़ वंचित लोगों को जानना जरूरी है, जो भूख मिटाने के लिए सरकारी मदद पर आश्रित हो गए हैं।

औद्योगिक क्रांति की सफलता के बाद खेती और पशुपालन से जुड़े लोग सरकारी मदद के मोहताज होकर नेताओं की वोटर लिस्ट में सिमट गए। अब साइबर क्रांति के विस्तार के बाद टेलीकॉम कंपनियां भी इतिहास की गर्त में जाने को तैयार हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 16 टेलीकॉम कंपनियों पर 1.47 लाख करोड़ भुगतान की जवाबदेही बन गई है।

सरकारी देनदारी के अलावा इनपर बैंकों के भारी कर्ज हैं। टेलीकॉम सेक्टर डूबने से बैंकों को चार लाख करोड़ रुपए की चपत लग सकती है। रिलायंस कम्युनिकेशन समेत पॉवर कंपनियों के मालिक अनिल अंबानी 12 साल पहले विश्व के छठवें अमीर व्यक्ति थे। कुछ महीनों पहले लंदन की अदालत में फाइल अर्जी के अनुसार उनकी नेटवर्थ जीरो हो गई है।

उनकी कंपनियों पर 1 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज भी है। किसी जमाने में बीएसएनएल और एमटीएनएल का सरकारी फ़ोन हासिल करने के लिए सांसदों और मंत्री की सिफारिश लगती थी। अब दस सबसे ज्यादा घाटे वाली सरकारी कंपनियों में शुमार दोनों टेलीकॉम कंपनियों का कोई खरीदार भी नहीं है।

भारत में टेलीकॉम क्षेत्र की विफलता के लिए कुछ अजब बातों पर गौर करके कौटिल्य के अर्थशास्त्र के नियमों पर फिर से अमल जरूरी है। सन 2003 के बाद कॉल रिसीव करने पर चार्ज ख़त्म हो गया। इसके बावजूद अन्य सेवाओं पर मोबाइल कंपनियां ग्राहकों से पैसा वसूलकर सरकार को लाइसेंस फीस समेत अनेक मदों पर भारी रकम का भुगतान करती हैं।

फिर भी देश के अनेक इलाकों में मोबाइल नेटवर्क पर बात नहीं हो पाती। दूसरी तरफ वॉट्सएप न तो ग्राहकों से फीस लेता है और न ही सरकार को कोई भुगतान करता है, इसके बावजूद जनता, अफसर, विधायक, सांसद, मंत्री और जज सभी वॉट्सएप पर आसान और सुरक्षित तरीके से बात कर लेते हैं।

डिजिटल कंपनियों के फ्री के फर्जीवाड़ा को समझने में समाज और सरकार की विफलता से टेलीकॉम सेक्टर शहीद होकर, डिजिटल तले दफन हो रहा है। कोरोना से लड़ने के लिए विश्व के 83 बड़े रईसों ने ज्यादा टैक्स देने की जो इच्छा जाहिर की है, उसे वैश्विक डिजिटल कंपनियों को अपनाना चाहिए। डिजिटल होते समाज के अनुरूप सरकार और संसद भी कानूनी व्यवस्था के सॉफ्टवेयर को अपडेट करें तो अर्थव्यवस्था का लॉकडाउन भी जल्द ख़त्म हो जाएगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)



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विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील


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राजस्थान में कांग्रेस सरकार का भविष्य जो भी हो, इससे इनकार नहीं कर सकते कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के तौर पर कांग्रेस कमजोर हो चुकी है। कुछ राज्यों में कांग्रेस को बहुमत मिला और कुछ में वह सबसे बड़ा दल बनकर उभरी लेकिन आज कांग्रेस उनमें से कई में विरोधी दल बनकर बैठने पर मजबूर हुई है।

लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस जितने वर्षों तक इस विशाल देश में सत्तारूढ़ रही है, शायद दुनिया की कोई पार्टी नहीं रही है। आज भी देश का कोई जिला ऐसा नहीं है, जहां कांग्रेस कार्यकर्ता न हों। कांग्रेस के अध्यक्षों में किस धर्म, जाति, प्रांत, भाषा और योग्यता के लोग नहीं रहे? सबसे बड़ी बात यह है कि देश की आजादी का बहुत बड़ा श्रेय कांग्रेस को ही है।

ऐसी कांग्रेस का अत्यंत निर्बल होना या खत्म हो जाना क्या देश के लिए फायदेमंद है? क्या भारत जैसे विशाल देश में कांग्रेस जैसा फैलाव किसी अन्य पार्टी का रहा है? भारतीय लोकतंत्र के लिए यह शुभ-शकुन है कि भाजपा एक अखिल भारतीय पार्टी बनती जा रही है। इसके अध्यक्ष का दावा है कि उसके 11 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं।

लेकिन हम यह न भूलें कि इसका मुख्य कारण यह है कि अभी भाजपा केंद्र और राज्यों में सत्तारूढ़ है। किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है कि वहां कम से कम दो बराबर की पार्टियां हों।1967 में और 1977 के बाद से हम देख चुके हैं कि चाहे केंद्र हो या कोई राज्य, जब भी गठबंधन सरकारें बनती हैं तो उनकी गांठ कभी भी खुल पड़ती है और ढीली तो वे हमेशा ही रहती हैं।

भारत पिछले 73 वर्षों में इतना पिछड़ा इसीलिए रहा है। जो देश हमसे बहुत पिछड़े थे, वे कितने आगे निकल गए? चीन, वियतनाम, कोरिया, श्रीलंका और ईरान जैसे राष्ट्रों ने हमें कई मामलों में पीछे छोड़ दिया है।
इन राष्ट्रों में लगभग एक पार्टीतंत्र रहा है। क्या हम भी उसी नक्शे-कदम पर चलनेवाले हैं?

यदि हां तो ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ का नारा हमें उसी दिशा में ले जाएगा, जो भारतीय लोकतंत्र का अंतिम संस्कार कर देगा। अभी दूर-दूर तक ऐसी कोई संभावना नहीं दिखाई पड़ रही है कि कांग्रेस-जैसी कोई अखिल भारतीय पार्टी उभर जाए। तो देश क्या करे ? कांग्रेस में जान डाले। उसे जिंदा करे। कैसे करें?

सबसे पहले कांग्रेस खुद को मुक्त करे। वह खुद को गांधी कांग्रेस बनाए। उससे भी आगे बढ़े। वह नेहरु और इंदिरा परिवार से अपने आप को मुक्त करे। अभी की कांग्रेस का महात्मा गांधी से कुछ लेना देना नहीं है। यदि कांग्रेस को गांधी कांग्रेस बनाना है तो उसे सबसे पहले अधोमूल बनाना होगा।

वह अभी उर्ध्वमूल है। इस समय उसकी जड़े ऊपर हैं। जमीन पर नहीं हैं। उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं की शक्ति जनता से नहीं, नीचे से नहीं, ऊपर से आती है। आज कांग्रेस के कार्यकर्ताओं या नेताओं में इतना दम नहीं है कि वे अपना नेता स्वयं चुनें। वे हतप्रभ या लकवाग्रस्त हो चुके हैं।

यह पहल तो सोनिया गांधी और राहुल को ही करनी होगी। वे महात्मा गांधी की तरह खुद को पदमुक्त रखें। सारे कांग्रेसियों के लिए श्रद्धा और अनुकरण के केंद्र बनें। पार्टी के अध्यक्ष और महासचिव की नियुक्ति कार्यकर्ताओं के खुले मतदान के द्वारा हो। पार्टी के जिला स्तर के पदाधिकारी भी खुले चुनाव द्वारा नियुक्त हों।

देखिए, फिर कैसा चमत्कार होता है! यदि कांग्रेस पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र होगा तो किसी सत्तारूढ़ दल की हिम्मत नहीं है कि वह देश में तानाशाही प्रवृत्तियों को आगे बढ़ा सके। कांग्रेस की देखादेखी देश की अन्य पार्टियां भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां बन गई हैं। यदि कांग्रेस मां-बेटा पार्टी है तो भाजपा आज भाई-भाई पार्टी है।

विभिन्न प्रांतों में हम बाप-बेटा पार्टी, भाई-भतीजा पार्टी, पति-पत्नी पार्टी, ससुर-दामाद पार्टी, बुआ-भतीजा पार्टी, मामा-भानजा पार्टियां भी देख रहे हैं। यदि कांग्रेस परिवारवाद से मुक्त हो जाए तो शायद ये सभी पार्टियां उसके साथ मिलकर देश में एक सक्षम विपक्ष खड़ा कर लें। देश के लोकतंत्र की यह अपूर्व उपलब्धि होगी।

यदि भारत में अमेरिका की रिपब्लिकन और डेमोक्रेट तथा ब्रिटेन की कंजर्वेटिव और लेबर पार्टी की तरह द्विपार्टी व्यवस्था कायम हो जाए तो देश में प्रगति की रफ्तार दोगुनी हो सकती है।कांग्रेस के पास आज भी अनुभवी नेताओं, तपस्वी कार्यकर्ताओं और उच्चकोटि के बौद्धिकों की कमी नहीं है।

विरोधी दल के नेता यदि आंख मारने और झप्पी मारने की बजाय हर मुद्दे पर ठोस तथ्य और तर्क पेश करें तो जनता उन्हें गंभीरता से लेगी। कांग्रेस चाहे तो आज भी वैकल्पिक मंत्रिमंडल का निर्माण करके देश का लाभ और अपनी छवि में सुधार कर सकती है।

सत्तारूढ़ भाजपा और सरकार पर अनावश्यक शब्द-बाण चलाने की बजाय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को देश की प्रमुख समस्याओं के बारे में सुप्रशिक्षित कर सकती है और देश की सभी राजनीतिक पार्टियों को संदेश दे सकती है कि नेताओं का एकमात्र लक्ष्य नोट और वोट कमाना नहीं है, बल्कि भारत को गांधी, महावीर स्वामी और महर्षि दयानंद के ‘महान आर्यावर्त्त’ में परिणिति करना है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)



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डॉ. वेदप्रताप वैदिक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष


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