Friday, September 25, 2020

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कंगना रनोट ने अनुष्का शर्मा पर किए गए सुनील गावस्कर के कमेंट की आलोचना की है। साथ ही अनुष्का पर भी जमकर निशाना साधा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, "जब मुझे धमकाया गया और हरामखोर कहा गया, तब अनुष्का चुप रही थीं। अब वही स्त्री द्वेष उन्हें काटने को आ रहा है। मैं सुनील गावस्कर की ओर से क्रिकेट में उन्हें घसीटे जाने की निंदा करती हूं, लेकिन सिलेक्टिव फेमिनिज्म भी अच्छा नहीं है।"

कंगना ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘नेशनल टीवी पर सुनील गावस्कर की ओर से दिए गए बयान को सेक्सुअल कॉन्टेक्स्ट में लिया जाएगा। उन्हें उनका नाम नहीं लेना चाहिए था, लेकिन अनुष्का अपनी अगली फिल्म में क्रिकेटर की भूमिका निभा रही हैं और उनके पति के साथ उनके प्रैक्टिस के कई वीडियो मौजूद हैं।’

गावस्कर का कमेंट क्या था?

विवाद 24 सितंबर की रात दुबई में हुए किंग्स इलेवन पंजाब और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम के मैच के दौरान हुआ। बेंगलुरु के कप्तान विराट कोहली ने दो अहम मौकों पर कैच छोड़ दिए थे। जब विराट बैटिंग कर रहे थे तो गावस्कर ने कहा था, 'और वो (विराट) चाहते हैं कि जितनी वो प्रैक्टिस करें, उसी से तो वो बेहतर बन सकते हैं, वो जानते हैं। अब जो लॉकडाउन था तो सिर्फ अनुष्का की बॉलिंग की प्रैक्टिस की उन्होंने, वो वीडियो में दिखाई दिया, तो उससे तो कुछ नहीं बनना है।'

अनुष्का ने क्या जवाब दिया था

गावस्कर को जवाब देने के लिए अनुष्का ने सोशल मीडिया पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी थी। उन्होंने लिखा था कि आपका मैसेज अच्छा नहीं था और आप एक पत्नी को उसके पति के खराब प्रदर्शन के लिए कैसे जिम्मेदार ठहरा सकते हैं?" (पढ़ें पूरी खबर)

गावस्कर का बयान किसी और संदर्भ में था

कमेंट्री के दौरान गावस्कर उस वायरल वीडियो के बारे में बात कर रहे थे, जिसमें विराट लॉकडाउन के दौरान अनुष्का के साथ क्रिकेट खेलते और उनकी बॉलिंग पर प्रैक्टिस करते दिख रहे थे, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके बयान को आपत्तिजनक बताते हुए इसका अलग ही मतलब निकाला जाने लगा।



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कंगना रनोट ने अनुष्का शर्मा पर सिलेक्टिव फेमिनिस्ट होने का आरोप लगाया है।


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दुनिया में संक्रमितों का आंकड़ा 3.27 करोड़ से ज्यादा हो गया है। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 2 करोड़ 47 लाख 67 हजार 549 से ज्यादा हो चुकी है। अब तक 9 लाख 92 हजार 914 मौतें हो चुकी हैं। ये आंकड़े https://ift.tt/2VnYLis के मुताबिक हैं। अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन भी कोरोना वैक्सीन डेवलप कर रही है। फिलहाल, इसके ट्रायल्स चल रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके सिंगल डोज के नतीजे काफी अच्छे रहे हैं और इससे इम्यून सिस्टम मजबूत हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है- सेफ्टी प्रोफाइल और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिहाज से सिंगल डोज के टेस्ट किए गए। इससे अगले क्लीनिकल ट्रायल्स में मदद मिलेगी। इस वैक्सीन का नाम Ad26.COV2.S है। यह कोविड संक्रमण से बचाने में कारगर साबित होगी।

Ad26.COV2.S अमेरिका में तैयार हो रही चौथी ऐसी वैक्सीन है, जिसके क्लीनिकल ट्रायल्स चल रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प वादा कर चुके हैं कि साल के आखिरी तक अमेरिका में 10 करोड़ वैक्सीन उपलब्ध होंगे। उनका कहना है कि 3 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले वैक्सीन बाजार में उपलब्ध होगा।

ब्राजील : रियो कार्निवाल टला
ब्राजील और दुनिया में मशहूर रियो डि जेनेरियो को फिलहाल टाल दिया गया है। 100 साल में यह पहला मौका है जब रियो कार्निवाल टला है। हालांकि, इस बात की संभावना बेहद कम है कि इसे इस साल आयोजित किया जा सकेगा। ब्राजील में करीब 46 लाख लोग संक्रमित हैं जबकि मौतों का आंकड़ा एक लाख 40 हजार से ज्यादा हो चुका है। रियो कार्निवाल का आयोजन सांबा स्कूल करता है। उसने एक बयान जारी कर कहा- हम कोविड-19 की वजह से यह आयोजन टाल रहे हैं। इस बात की संभावना काफी कम है कि वैक्सीन आने के पहले इसका आयोजन किया जा सकेगा।

ब्राजील की राजधानी रियो में हर साल होने वाला रियो कार्निवाल इस साल नहीं होगा। इसका ऑर्गनाइजर सांबा स्कूल ने कहा- 100 साल में पहली बार रियो कार्निवाल टाला जा रहा है। जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक आयोजन संभव नहीं है। (फाइल)

पेरू : इमरजेंसी 31 अक्टूबर तक बढ़ी
संक्रमण की दूसरी लहर को लेकर लैटिन अमेरिकी देश पेरू ने सख्त रवैया अपनाया है। यहां राष्ट्रीय आपातकाल 31 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रेसिडेंट मार्टिन विजकारा ने कहा- इस बात की संभावना है कि यह इमरजेंसी साल के आखिर तक बनी रहे। फिलहाल, हम इसे 31 अक्टूबर तक बढ़ा रहे हैं। पेरू की हेल्थ मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा- हम जानते हैं कि लोगों को कुछ प्रतिबंधों से काफी परेशान होना पड़ रहा है। लेकिन, कोविड-19 से बचने का फिलहाल यही उपाय है कि हम हर सावधानी बरतें। मास्क और सैनिटाइजेशन का खास ध्यान रखें।

पेरू में राष्ट्रपति ने हेल्थ इमरजेंसी 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। साथ ही ये भी कहा है कि इसे साल के आखिर तक बढ़ाया जा सकता है। (फाइल)

ऑस्ट्रेलिया : एक और इस्तीफा
विक्टोरिया प्रांत के हेल्थ मिनिस्टर जेनी मिकाकोस ने इस्तीफा दे दिया है। जेनी पर आरोप था कि उन्होंने क्वारैंटीन फेसेलिटीज के लिए होटलों को कॉन्ट्रैक्ट दिए। लेकिन, इसमें कई स्तरों पर धांधली हुई। इसके अलावा इन्फेक्शन कंट्रोल के मामले में उनकी नाकामयाबी को मीडिया ने लगातार उजागर किया। ऑस्ट्रेलिया इस वक्त संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहा है। सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल प्रतिबंधों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

ऑस्ट्रेलिया में संक्रमण की दूसरी लहर चल रही है। कुछ हिस्सों में प्रतिबंधों का विरोध हुआ तो सरकार ने सुरक्षाबल तैनात कर दिए। विक्टोरिया के हेल्थ मिनिस्टर ने इस्तीफा दे दिया है। उन पर कुछ कॉन्ट्रैक्टर्स को फायदा पहुंचाने के आरोप हैं। (फाइल)

फिनलैंड में संक्रमितों की पहचान की नई कोशिश
हेलसिंके एयरपोर्ट पर फिनलैंड सरकार ने संक्रमितों की पहचान के लिए स्निफर डॉग्स तैनात कर दिए हैं। इसके लिए इस डॉग यूनिट को स्पेशल मेडिकल ट्रेनिंग दी गई है। जानकारी के मुताबिक, ये स्निफर डॉग यूनिट 10 मिनट में 100 फीसदी सही तरीके से संक्रमितों की पहचान कर सकेगी। फिलहाल, इस यूनिट को यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंके की देखरेख में ट्रायल के तौर पर तैनात किया गया। कुछ दिनों बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। अगर नतीजे सही रहे तो यह प्रॉसेस जारी रहेगा। बता दें कि इसके पहले ये स्निफर डॉग यूनिट मलेरिया और कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रस्त लोगों की पहचान कर चुकी है।

एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों को एक कपड़ा दिया जाएगा। इससे वे अपना गला और चेहरा पोछेंगे। कपड़े को एक बॉक्स में रखा जाएगा। एक अलग बूथ में डॉग हैंडलर इस बॉक्स को कई अन्य बॉक्स के साथ रखेगा। डॉग इसमें से कोरोनावायरस वाले बॉक्स की पहचान करेगा। एक बार में एक डॉग एक बॉक्स की पहचान करेगा।



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अमेरिका में चार कोरोनावायरस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल्स चल रहे हैं। इनमें एक वैक्सीन जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी का है। (प्रतीकात्मक फोटो)


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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोरोना और भाषा के बीच कनेक्शन ढूंढ़ा है। इनकी रिसर्च कहती है कि जो अमेरिकन अंग्रेजी नहीं बोलते उन्हें कोरोना होने के खतरा ज्यादा है। अमेरिका के ऐसे लोग जिनकी पहली भाषा स्पेनिश या कम्बोडियन है, उनमें कोरोना का संक्रमण होने का खतरा 5 गुना ज्यादा है।

यह दावा यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन ने अपनी रिसर्च में किया है। रिसर्च के लिए 300 मोबाइल क्लीनिक और 3 हॉस्पिटल्स में आए कोरोना मरीजों की जांच के आंकड़े जुटाए गए थे।

किस भाषा में कितने मरीज मिले, ऐसे समझें

  • कोरोना के 31 हजार मरीजों पर 29 फरवरी से 31 मई 2020 के बीच रिसर्च की गई। इनमें 18.6 फीसदी गैर-अंग्रेजी भाषाई थे जबकि मात्र 4 फीसदी अंग्रेजी बोलने वाले अमेरिकन थे।
  • रिसर्चर्स के मुताबिक, जिनकी पहली भाषा कम्बोडियन थी उस समूह में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 26.9 फीसदी था, जबकि स्पेनिश और एम्फेरिक बोलने वालों में यही आंकड़ा 25.1 फीसदी था।
  • अंग्रेजी बोलने वालों में सिर्फ मात्र 5.6 फीसदी अमेरिकन संक्रमित हुए। इसके अलावा जो कई तरह की भाषा बोल लेते थे उस समूह में 4.7 फीसदी मरीज संक्रमित हुए।
  • चीनी भाषा बोलने वालों में यह आंकड़ा 2.6 फीसदी था। अरेबिक और साउथ कोरिया बोलने वालों के समूह में 2.8 फीसदी और 3.7 फीसदी मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव थी।

ब्रिटेन की रिसर्च : यहां अश्वेत-अल्पसंख्यक ज्यादा संक्रमित हुए
नेशनल हेल्थ सर्विसेज (एनएचएस) के अस्पतालों के मई के आंकड़े बताते हैं कि ब्रिटेन में कोरोनावायरस का संक्रमण और इससे मौतों का सबसे ज्यादा खतरा अश्वेत, एशियाई और अल्पसंख्यकों को है। संक्रमण के जो मामले सामने आए उनमें यह ट्रेंड देखने को मिला। अस्पतालों से जारी आंकड़ों के मुताबिक, गोरों के मुकाबले अश्वेतों में संक्रमण के बाद मौत का आंकड़ा दोगुना है। अश्वेत, एशियाई और अल्पसंख्यकों को यहां बेम (BAME) कहते हैं जिसका मतलब है- ब्लैक, एशियन एंड माइनॉरिटी एथनिक।

एक हजार लोगों में 23 ब्रिटिश और 43 अश्वेतों की मौत
'द टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएचएस के अस्पतालों ने जो आंकड़ा जारी किया है उसके मुताबिक, 1 हजार लोगों पर 23 ब्रिटिश, 27 एशियन और 43 अश्वेत लोगों की मौत हुई। एक हजार लोगों में 69 मौतों के साथ सबसे ज्यादा खतरा कैरेबियाई लोगों को था, वहीं सबसे कम खतरा बांग्लादेशियों (22) को था।



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Americans who don't speak English are nearly FIVE TIMES more likely to test positive for coronavirus - but less likely to get tested in the first place, study finds


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की 75वीं बैठक को ऑनलाइन संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में आज जिन्हें बोलना है, उनमें मोदी का नंबर पहला है। यह भाषण पहले से रिकॉर्ड किया होगा। कोरोना महामारी की वजह से इस बैठक में दुनियाभर के नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हो रहे हैं। मोदी कोरोना महामारी से निपटने के उपायों, आतंकवाद, परमाणु ऊर्जा और संयुक्त राष्ट्र में सुधारों पर फोकस कर सकते हैं।

इमरान ने भारत पर कई आरोप लगाए
यूएनजीए में शुक्रवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की स्पीच हुई थी। इस दौरान उन्होंने भारत की जमकर आलोचना ही। आरएसएस पर आरोप लगाया कि वह भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में जुटा है। यह भी आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद को ढहाया गया, 2002 के गुजरात दंगों में मुस्लिमों को मारा गया। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को भी उन्होंने गलत बताया। जिस वक्त इमरान बोल रहे थे उस समय यूएन के असेंबली हॉल में मौजूद भारतीय विदेश सेवा के 2010 बैच के अफसर मिजितो विनितो उठकर बाहर चले गए। (पूरी खबर यहां पढ़ें)

चार दिन पहले मोदी ने संयुक्त राष्ट्र को नसीहत दी थी
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की 75वीं सालगिरह पर हो रहे कार्यक्रम में यूएन को नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था, “हम पुरानी व्यवस्था के साथ आज की चुनौतियों से मुकाबला नहीं कर सकते। बड़े सुधार नहीं हुए तो यूएन पर भरोसा खत्‍म होने का खतरा है। उन्‍होंने कहा कि आज की दुनिया आपस में जुड़ी हुई है, इसलिए हमें ऐसा बहुपक्षीय व्यवस्था चाहिए, जिसमें आज की वास्तविकता झलकती हो, सभी की आवाज सुनी जाती हो, जो वर्तमान चुनौतियों से निपटता हो और मानव कल्याण पर फोकस करता हो।’’

भारत यूएन सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है
भारत को इसी साल जून में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य चुना गया। महासभा में शामिल 193 देशों में से 184 देशों ने भारत का समर्थन किया था। भारत दो साल के लिए अस्थाई सदस्य चुना गया है। भारत के साथ आयरलैंड, मैक्सिको और नॉर्वे भी अस्थाई सदस्य चुने गए। भारत इससे पहले 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में संयुक्त राष्ट्र महासभा का अस्थायी सदस्य चुना गया था।

सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य हैं। ये हैं- अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन। 10 देशों को अस्थाई सदस्यता दी गई है। हर साल पांच अस्थायी सदस्य चुने जाते हैं। अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल दो साल होता है।



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मंगलवार को मोदी ने यूएन को नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था- हम पुरानी व्यवस्था के साथ आज की चुनौतियों से मुकाबला नहीं कर सकते। -फाइल फोटो


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ड्रग्स मामले में धर्मा प्रोडक्शन के 2 लोगों से पूछताछ के बीच करन जौहर की सफाई आई है। उन्होंने ट्विटर के जरिए स्टेटमेंट जारी किया है। करन का कहना है, "मैं न तो ड्रग्स लेता हूं और न ही इसे प्रमोट करता हूं। मेरे और मेरे परिवार के बारे में, साथियों और धर्मा प्रोडक्शन के बारे में जो बातें की जा रही हैं, वे बकवास हैं।"

उधर, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) करन के प्रोडक्शन हाउस धर्मा प्रोडक्शन से जुड़े प्रोड्यूसर क्षितिज रवि प्रसाद को हिरासत में लेकर पिछले 20 घंटे से पूछताछ कर रहा है। क्षितिज के घर पर शुक्रवार को NCB ने छापा भी मारा था। सूत्रों के मुताबिक, उनके घर से थोड़ी ड्रग्स मिली है। NCB आज क्षितिज को गिरफ्तार भी कर सकता है।

क्षितिज के साथ नाम जुड़ने पर करन ने 5 पॉइंट में सफाई जारी की

  • कुछ न्यूज चैनल, प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत रिपोर्टिंग की जा रही है कि मैंने 28 जुलाई, 2019 को अपने घर पर पार्टी की थी, उसमें ड्रग्स यूज हुआ था।
  • यह भी कहा जा रहा है कि क्षितिज प्रसाद और अनुभव चोपड़ा मेरे करीबी सहयोगी हैं। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मैं इन्हें पर्सनली नहीं जानता और इन दोनों में से कोई कोई भी मेरा सहयोगी या करीबी नहीं है।
  • अनुभव चोपड़ा मेरी कंपनी धर्मा प्रोडक्शन में कर्मचारी नहीं थे, हालांकि उन्होंने 2011 और 2013 के बीच इंडिपेंडेंटली हमारी कंपनी के साथ दो प्रोजेक्ट पर काम किया था।
  • क्षितिज रवि प्रसाद नवंबर 2019 में धर्मा प्रोडक्शन से जुड़ी कंपनी धर्ममेटिक एंटरटेनमेंट से जुड़े थे। वे एक प्रोजेक्ट के लिए कॉन्ट्रैक्ट बेस पर एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर थे।
  • न तो मैं और न ही धर्मा प्रोडक्शन इसके लिए जिम्मेदार है कि लोग अपनी पर्सनल लाइफ में क्या करते हैं।


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करण जौहर का कहना है कि मेरे और मेरे परिवार के बारे में जो बातें की जा रही हैं, वे बकवास हैं। किसी की पर्सनल लाइफ के लिए हम जिम्मेदार नहीं। (फाइल फोटो)


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कोरोनाकाल में इंसानियत भी मरती जा रही है। प्राइवेट अस्पताल हों या सरकारी, सभी जगह बेपरवाह सिस्टम अब लोगों को मार रहा है। भोपाल के कोलार की 43 साल की संतोष रजक इसी बेपरवाही का शिकार हो गईं। वे दो दिन अस्पतालों में आईसीयू बेड के लिए भटकीं। जैसे-तैसे बेड मिला तो ठीक से इलाज नहीं हो पाया। अंत में उन्होंने गुरुवार को दम तोड़ दिया। बीते 14 दिन उनकी बेटी प्रियंका और बेटे हर्ष पर क्या-क्या बीती, पढ़ें उन्हीं की जुबानी...

बंसल में एक रात के इलाज का 41 हजार रु. बिल भरा

12 सितंबर की शाम करीब 6 बजे मां को सांस लेने में परेशानी हुई तो हर्ष उन्हें सिद्धांता अस्पताल ले गया। यहां हार्ट अटैक के लक्षण बताए तो हम रात 10 बजे बंसल अस्पताल ले गए। यहां कोरोना का सैंपल लिया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यहां कोविड आईसीयू बेड नहीं हैं, इसलिए अगले दिन दोपहर तीन बजे हमें एंबुलेंस से जेके अस्पताल भेज दिया गया। बंसल में एक रात के इलाज का हमने 41 हजार रु. बिल भरा। जेके में भी आईसीयू बेड खाली नहीं थे, तो उन्होंने भर्ती नहीं किया।

जेके से हमें हमीदिया भेजा, तो वहां रात 9 बजे तक हम बेड का इंतजार करते रहे, लेकिन बेड खाली नहीं होने का कहकर हमें लौटा दिया। फिर हमने पीपुल्स अस्पताल में फोन लगाया तो पता चला, वहां आईसीयू बेड खाली हैं। हम रात 10:20 बजे पीपुल्स हॉस्पिटल पहुंचे। यहां मरीज को भर्ती करने के पहले पांच दिन के 50 हजार रु. जमा करा गए।

यहां इलाज महंगा पड़ता, इसलिए 14 की सुबह हमने कलेक्टर अविनाश लवानिया को आवेदन किया। उनके दखल के बाद मां को 14 सितंबर को दोपहर में जेपी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया। लेकिन, यहां भी इलाज के नाम पर खानापूर्ति हुई।

मां की डेथ हुई, तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया

यहां रात में अक्सर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है, कोई सुनता नहीं है। ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने पर मरीज के परिजन दूसरे वार्ड से खुद ही लाते हैं। 10 दिन इलाज के बाद जब गुरुवार को मां की डेथ हुई, तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया। हमें आईसीयू में बुलाकर पीपीई किट थमा दी और कहा- खुद पहन लो और अपनी मां को पहना दो। मेरे भाई और परिजनों ने पीपीई किट पहनकर मां को पैकिंग बैग में रखा, फिर उन्हें एंबुलेंस से विश्राम घाट लेकर गए।

जब आईसीयू फुल नहीं तो इनकार क्यों करेंगे

जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी ने कहा कि हमारे यहां का आईसीयू कभी फुल नहीं हुआ फिर मरीज को लेने से इनकार क्यों करेंगे। संतोष रजक के इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई।

हमने उन्हें कोविड सेंटर भेज दिया था

बंसल अस्पताल के मैनेजर लोकेश झा ने कहा कि संतोष रजक 12 सितंबर की रात 21:55 बजे भर्ती हुईं थीं। रात में कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हमारे कोविड अस्पताल में आईसीयू बेड खाली नहीं थे। ऐसे में अगले दिन शाम 6:30 बजे उन्हें एंबुलेंस से दूसरे कोविड सेंटर भेजा गया था।

भोपाल में 297, प्रदेश में 2227 नए केस, रिकवरी रेट 1% बढ़ा

राजधानी में शुक्रवार को 297 नए कोरोना संक्रमित मिले। जबकि, तीन मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई। शहर में एक दिन में मिलने वाले कोरोना मरीजों की संख्या के लिहाज से 297 तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 23 सितंबर को 313 और 19 सितंबर को 307 मरीज मिले थे।



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बेटी ने कहा- मौत के बाद हमें पीपीई किट दे दी, कहा- आप लोग डेड बॉडी को पॉलिथीन में पैक कर लो।


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देश के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विस एप पेटीएम 19 सितंबर को उस वक्त चर्चा में आ गया, जब गूगल ने प्लेस्टोर से उसे हटा दिया। हालांकि, 30 करोड़ से अधिक यूजर और 70 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन रोज करने वाले एप की कुछ घंटों में ही प्लेस्टोर पर वापसी भी हो गई। दैनिक भास्कर ने पेटीएम के फाउंडर-सीईओ विजय शेखर शर्मा से बात की। उनका मानना है कि गूगल-फेसबुक जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर देश में अंकुश जरूर होना चाहिए। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...

सवाल- आपको लगता है कि आपके एप को गूगल द्वारा विशेष रूप से टारगेट किया गया था?
जवाब-
मुझे तो यह समझ में नहीं आता कि किस पॉलिसी के तहत उन्हें ऐसा लगा कि यूपीआई कैश बैक देने का जो हमारा प्रोग्राम है, वह गैम्बलिंग है। गैम्बलिंग बता कर फाइनेंशियल एप की विश्वसनीयता को गिरा दिया। हमारे ऊपर लगे यह गलत और झूठे आरोप हैं। आप (गूगल) क्लेम करते हो कि चार-पांच बार बात की है। जबकि सुबह ही कॉल किया कि अपनी मेल देखो- हमने कुछ कर दिया है, इस तरह तो हमें बताया गया। हमें इस बात की कोई भी वार्निंग नहीं दी कि हम एप हटा रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण, दुर्भावनावश, बिजनेस पर अटैक कह सकते हैं।

सवाल- गूगल की क्या दुर्भावना हो सकती है?
जवाब-
सबसे बड़ी बात क्या है कि उनके एप में भी यही सब चीजें चल रही होती हैं। उन्होंने जो ई-मेल भेजा उसमें उन्होंने हमें लिखकर दिया कि आप जो भुगतान करते हो उसके बदले में स्टीकर मिलता है। अब देखिए कि पेमेंट का एप है, तो पेमेंट नहीं करेगा तो क्या करेगा? यह कैसे जुआ हो सकता है? ऐसा नहीं है कि हमने यह अभी शुरू किया है या नया है। हम कैश बैक देते रहे हैं। हमने भी जैसे गूगल पे में स्टीकर आते हैं, वैसे ही दिए हैं।

सवाल- ऐसी डी-लिस्टिंग उन कंपनियों को कैसे प्रभावित करती है जिनका व्यवसाय एप पर ही चलता है?
जवाब-
हम हर दिन लाखों ग्राहक जोड़ते हैं, एप से हटने से नए कस्टमर आने बंद हो गए। बहुत सारे हमारे ग्राहक भ्रमित हो गए। किसी ने अफवाह चला दी कि हमारा एप निकाल दिया है और पैसे निकाल लो। इससे समस्या और बड़ी हो गई। जो कंपनियां अपना बिजनेस मॉडल एप के ऊपर चलाती हैं, उनको यह समझ लेना चाहिए कि आप अपना व्यवसाय भारत के नियम कानून के हिसाब से कर रहे हैं तो उनकी नजर में यह पर्याप्त नहीं हैं। ये हमारे देश के सुपर रेग्युलेटर हो गए हैं। ये बड़ी टेक जाॅइंट कंपनियां बताएंगी कि यहां का बिजनेस कैसे चलेगा? यही सबसे बड़ी समस्या है।

सवाल- क्या वह असर अभी भी जारी है?
जवाब-
डिजिटल भारत के राज की चाबी देश के अंदर नहीं, कैलिफोर्निया में है। हमने 20 हजार करोड़ रुपए देश के डिजिटल इंडिया में निवेश किए हुए हैं। गूगल पे हमारे बाद आया है देश में। गूगल पे उस अपॉर्चुनिटी पर आया जो भारत में हमारे एप ने बनाई। अब हमारे एप को खत्म करने के तरीके ढूंढ़ रहे हैं। यह हमारे एप का मामला भर नहीं है बल्कि भारत की डिजिटल आजादी का भी सवाल है।

सवाल- आपका एप अन्य सभी एप से कैसे अलग है, क्या सेवाएं उपलब्ध हैं?
जवाब-
हमारे एप की शुरुआत हुई थी कि आप अपने वॉलेट से पेमेंट कर सकते हैं- जैसे बिजली के बिल, मोबाइल फोन और अन्य भुगतानों का। हमारा एप एक फाइनेंशियल इन्क्लूजन की सेवा है, जिन लोगों के पास बैंक सेवा नहीं थी उनके पास हम एक पेमेंट का तरीका लेकर गए फिर हम जीराे कॉस्ट अमाउंट वाला बैंक अकाउंट लेकर गए। हम वेब सॉल्यूशन, इंश्योरेंस, लोन आदि की सुविधा दे सकते हैं। वॉलेट सिस्टम डाला, अगर बैंक में पैसे हैं आप उनको ट्रांसफर कर लीजिए जिससे कि आपको कॉन्फिडेंस रहे। वॉलेट सिस्टम किसी और एप के पास नहीं है।

सवाल- गूगल के पास एक भुगतान एप भी है। क्या आपको लगता है कि वे अपनी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए आपसे भेदभाव किया?
जवाब-
जी, बिल्कुल ऐसा है। हमारा जो प्रतिस्पर्धी है, वह हमारे विरुद्ध अपनी सुपर पॉवर से खेल रहा है। भारत में एप का बिजनेस वाली कंपनियों को यह अवश्य समझ लेना चाहिए कि जब उनका बिजनेस बड़ा होगा तब वे आगे जाकर गूगल आदि टेक्नो जाइंट कंपनियों से अवश्य परेशान होंगे। मेरा मानना है कि हमारी मौजूदा सरकार ऐसी सरकार है जो इसको बचा सकती है क्योंकि इन्होंने डिजिटल को कोर एजेंडा बनाया है। प्रधानमंत्री मोदी जी फेसबुक के मुख्यालय भी गए, कभी भी जीरो रेटिंग इस देश ने परमिट नहीं की। मुझे पूरा भरोसा है कि देश के एप ईकोसिस्टम जो बन रहा है उसकी चाबी बाहर तो सरकार नहीं जाने देगी।

सवाल- गूगल बड़े पैमाने पर काल्पनिक खेलों को भी बढ़ावा देता है और बड़े पैमाने पर राजस्व कमाता है। क्या आप दूसरों को भी ऐसा करने से रोकना गलत है?
जवाब-
गूगल तो ऐसी मशीनरी है कि जो रास्ते में आए उसको दबाते जाओ। जिस तरह का पैसा मिले उसे काट लो। सर्च इंजन में तो एड लगा है ऐसा लोगों ने ट्वीट किया, तो क्या सर्च इंजन बंद किया गूगल ने? वहां तो आप एड लगाते हो और जब हमारे एप पर एड लगता है तो आप कहते हैं कि गैम्बलिंग सेशन है। इससे शर्मनाक बात नहीं हो सकती।

सवाल- क्या भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करना चाहिए?
जवाब-
न सिर्फ कॉम्पीटिशन कमीशन बल्कि भारत सरकार को भी आगे आना चाहिए। भारत सरकार को कहना चाहिए कि आप यहां पर आईए और आप जो दूर से कंट्रोल करके अपनी चाबियां चलाते हो वह नहीं होगा बल्कि अपनी चाबियां (कंट्रोल) देश में ही रखवानी चाहिए। यूपीआई चलाने में देश की मर्जी नहीं है बल्कि गूगल की मर्जी है। आज तो उन्होंने हमारा एप बंद कर दिया अब वो किस कारण से किसका एप बंद करें उनकी मर्जी। भारत सरकार कर के ऊपर प्रयास कर रही है लेकिन इसके साथ अविलंब रूप से हमारी टेक्नोलॉजी को कंट्रोल करने वाली कंपनियों पर भी नियंत्रण करे।

सवाल- क्या आपको लगता है कि भारत को एक ऐसी संस्था की जरूरत है जो सही मायने में नई अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम का समर्थन करती हो?
जवाब-
यह बहुत जरूरी बात है। हमारी देश में कार्य करने वाली ऐसी संस्थाएं जो विदेशी कंपनियों के माऊथपीस बने हुए हैं वो हमारे लिए ज्यादा बड़ी समस्या है। इस देश को ऐसे संगठन की आवश्यकता है जो भारतीय टेक्नॉलाजी कंपनियों को रिप्रजेंट करे।

सवाल- भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिग्गजों द्वारा इस तरह के कदमों को कैसे लड़ सकती हैं जिनके पास बड़े पैमाने पर धन भी है?
जवाब-
छोटा कभी जीतता-हारता नहीं है, बल्कि संगठन में शक्ति है और सरकार में हमारा भरोसा है। जब हम साथ में मिलकर आएंगे तब देश ही नहीं दुनिया भी बदलती है। जब एक व्यक्ति के साथ ऐसा हो रहा है जो सबके साथ होना संभव है। आप अगर यूट्यूब या फेसबुक यूज नहीं करोंगे तो ऐ पैसा कैसे बनाएंगे? हम इस देश का विकास चाहते हैं देश में निवेश चाहते हैं। ये कंपनियां देश से पैसा ले जाती हैं निवेश कहां करती हैं?

सवाल- क्या आपको लगता है कि इस तरह की रणनीति सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल को प्रभावित करती है?
जवाब-
यह समस्या अकेले हमारे एप की नहीं है। यह समझने की बात है कि स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल और टेक्नोलाॅजी इन सबको कौन कंट्रोल करता है। आज हमारे एप की बात है कल किसी सरकार विभाग या विंग की हो सकती है। अब तक दसियों स्टार्टअप्स के फाउंडर हमसे बात कर चुके हैं कि हमको भी फोर्सफुली बंद किया।

सवाल- बड़ी टेक कंपनियां ब्रेन-ड्रेन का कारण, यहां से पैसा भी ले जाते हैं
जवाब-
शर्मा ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां जैसे गूगल और फेसबुक देश से 30 से 35 हजार करोड़ रुपए राजस्व कमाती हैं और टैक्स देती हैं जीरो। ये कंपनियां देश के बिजनेस के ऊपर अपनी धौंस जमाती हैं। इन कंपनियों को देश में पूरा-पूरा टैक्स जमा कराना चाहिए। नौकरी अमेरिका में देते हैं। ये लोग ब्रेन ड्रेन और हमारे यहां से पैसा ले जाने का कारण हैं। बिजनेस पर धौंस जताते हैं कि तुम्हारा भविष्य हम तय करते हैं, तुम कुछ नहीं हो।



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Paytm CEO Vijay Shekhar Sharma said / Google-Facebook earns 35 thousand crores revenue from the country, gives tax zero And they put their bullying on the business of the country separately


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