Saturday, November 14, 2020

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(प्रमोद त्रिवेदी) सभी के मन में जिज्ञासा है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या है। अयोध्या में मंदिर निर्माण से जुड़ी 3 खास बाते हैं। पहली, आप राम मंदिर निर्माण में हाथ बंटा सकते हैं। आप अपने हाथों से ईंट लगा सकते हैं, मजदूरी कर सकते हैं। इसके लिए 15 जनवरी से तीन लाख टोलियां आपसे मिलने आपके गांव-घर तक पहुंचेगी। 11 करोड़ लोगों को जोड़ने की कोशिश है।

दूसरी, जहां मंदिर का निर्माण होना है वहां 280 फीट की गहराई तक पथरीली जमीन अभी नहीं मिली है। ऐसे में मजबूत नींव के लिए आईआईटी रुड़की और अन्य बड़ी संस्थानों के वैज्ञानिकों के अलावा 40 संगठनों से जुड़े हजारों एक्सपर्ट इस मुश्किल का हल खोज रहे हैं। खासकर विक्रमादित्यकाल की वास्तुकला पर रिसर्च कर रहे हैं, क्योंकि इसी स्थान पर विक्रमादित्य का बनाया मंदिर 2500 साल तक मजबूती से खड़ा रहा था।

तीसरी बात, मंदिर निर्माण में लगने वाले एक-एक पत्थर की गिनती होगी। इसके लिए कारसेवक पुरम में हर पत्थर पर नंबर अंकित किए जा रहे हैं। फिलहाल नींव टेस्टिंग के लिए 12 ट्रक में 30 नंबर तक के पत्थर कारसेवक पुरम से मंदिर तक पहुंच चुके हैं। रामजन्म भूमि ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी कमलेश्वर चौपाल बताते हैं कि अयोध्या में मिट्‌टी की जांच के साथ लाेड टेस्टिंग का काम चल रहा है, क्योंकि नीचे पथरीली जमीन नहीं होने पर मंदिर धंसने का खतरा रहेगा।

एक फ्लोर का पत्थर तैयार, राजस्थान में चल रहा काम

मंदिर निर्माण के लिए कारसेवकपुरम में पत्थरों का सुपरविजन संभालने वाले चंद्रशेखर सोमपुरा बताते हैं कि मंदिर की नींव से लेकर एक फ्लोर बनने तक का 75 हजार घन फीट पत्थर तैयार है। बाकी दो फ्लोर के लिए लगने वाला लगभग सवा तीन लाख घन फीट पत्थर भी समय के साथ तैयार हो जाएगा। राजस्थान के सागबाड़ा में पत्थर निकालने पर लगातार काम चल रहा है।

सोमपुरा बताते हैं कि हर पत्थर का हिसाब रखा जा रहा है। हर छोटे-बड़े पत्थर पर नंबर लिखा गया है, जिससे पता रहे कि मंदिर निर्माण में कितने पत्थर लगे। अभी पिलर के लिए जो 12 ट्रक पत्थर गए हैं वाे 30 नंबर तक के हैं। पिलर का पत्थर जहां 25 घन फीट का तो अन्य पत्थर 10 और 5 घन फीट के भी हैं। मंदिर में सीमेंट का उपयोग नहीं होता है।

संतों का निर्णय, कोई भी कर सकेगा श्रम

कमलेश्वर चौपाल के अनुसार हाल ही में दिल्ली में हुई दो दिनी बैठक में मंदिर निर्माण की लड़ाई में शुरू से साथ रहे आरएसएस, वीएचपी जैसे 40 संगठनों के मार्गदर्शक मंडलों के बीच हमने नींव की समस्या की बात रखी थी। इन संगठनों में कई संत भी हैं जो लगातार हमारा मार्गदर्शन करते हैं। जो संगठन हमारे साथ हर स्थिति मे खड़े रहे, वो सभी अभियान शुरू कर रहे हैं।

कोरोना के कारण हमने अभी अभियान शुरू नहीं किया है। लेकिन 15 जनवरी से हमारा अभियान देशभर में शुरू होगा, जिसमें 11 करोड़ लोगों को मंदिर निर्माण कार्य से जोड़ा जाएगा। मंदिर निर्माण के लिए जो भी लोग तन-मन-धन से सेवा अर्पित करना चाहते हैं वो इस मंदिर निर्माण के कार्य से जुड़ सकेंगे। इसके लिए पूरे देश के लिए 3 लाख टोली बनेगी। कोई भी गांव ऐसा नहीं बचेगा, जहां टोली संपर्क न करे। शिला पूजन के समय छूटे गांवों को विशेषकर लिया जाएगा।



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3 lakh teams will raise labor money to build the temple, 11 crore people will join


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Friday, November 13, 2020

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार जैसलमेर में जवानों के साथ दिवाली मनाएंगे। उनके साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भी मौजूद रहेंगे। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सैनिकों के साथ दिवाली मनाते रहे हैं।

जवानों को मोदी का संदेश
हमें अपने उन जांबाज सैनिकों को भी याद रखना है, जो इन त्योहारों पर भी सीमाओं पर डटे हैं। भारत माता की सेवा और सुरक्षा कर रहे हैं। हमें उनको याद करके ही अपने त्योहार मनाने हैं। हमें घर में एक दीया भारत माता के इन वीर बेटे-बेटियों के सम्मान में भी जलाना है। मैं अपने वीर जवानों से भी कहना चाहता हूं कि भले ही आप सीमा पर हैं, लेकिन पूरा देश आपके साथ है, आपके लिए कामना कर रहा है। मैं उन परिवारों को भी नमन करता हूं, जिनके बेटे-बेटियां आज सरहद पर हैं। हर वो व्यक्ति जो देश से जुड़ी किसी न किसी जिम्मेदारी की वजह से अपने घर पर नहीं है, अपने परिवार से दूर है, मैं हृदय से उनका आभार प्रकट करता हूं।

6 सालों में कहां मनाई दिवाली
2019: मोदी जम्मू-कश्मीर के राजौरी में नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए राजौरी पहुंचे थे। कहा था- युद्ध हो या घुसपैठ हो, इस क्षेत्र को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह जगह हमेशा उन परेशानियों से निकल आती है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसने कभी हार नहीं देखी।
2018: प्रधानमंत्री दिवाली के मौके पर उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए थे। यहां उन्होंने चीन बॉर्डर के पास हरसिल गांव के केंट इलाके में भारतीय सशस्त्र बल और ITBP के जवानों से मुलाकात की थी। यहां कहा था- बर्फीले इलाके में आपका ड्यूटी के लिए समर्पण देश को मजबूती प्रदान करता है। आपके चलते ही सवा सौ करोड़ लोगों के सपने सुरक्षित हैं।
2017: इस साल मोदी ने दिवाली का जश्न जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सैनिकों के साथ मनाया।
2016: मोदी ने हिमाचल प्रदेश से लगे चीन बॉर्डर के पास इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों के साथ दिवाली मनाई।
2015: प्रधानमंत्री ने अमृतसर (पंजाब) बॉर्डर पर जवानों के साथ दिवाली मनाई थी।
2014: मोदी ने सियाचिन में जवानों के बीच दिवाली मनाई थी।



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पिछले साल मोदी जवानों के बीच जम्मू-कश्मीर के राजौरी पहुंचे थे। -फाइल फोटो


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चुनाव नतीजे साफ होने के करीब एक हफ्ते बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को पहली बार मीडिया से बातचीत की। मसला कोरोनावायरस था। लेकिन, इस दौरान चुनाव नतीजों पर भी बात हुई। ट्रम्प ने कहा- ये वक्त ही बताएगा कि मैं राष्ट्रपति रहूंगा या नहीं। उनका बयान इसलिए अहम है कि खुद ट्रम्प और उनकी कैम्पेन टीम वोटिंग और काउंटिंग में धांधली का आरोप लगाते हुए कई केस दर्ज करा चुके हैं।
विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी सोमवार को एक सवाल के जवाब में कहा था कि ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। हालांकि, पहली बार ट्रम्प ने इस मुद्दे पर नर्म रुख अपनाया।

अब तक हार नहीं मानी
नतीजे साफ हुए एक हफ्ता हो चुका है, लेकिन अब तक ट्रम्प ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है जिससे लगता है कि वो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हार स्वीकार कर लेंगे और परंपरा का पालन करते हुए जो बाइडेन को जीत की बधाई देंगे। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में मुख्य तौर पर कोरोनावायरस वैक्सीन का जिक्र किया।

लॉकडाउन नहीं होगा
यूरोपीय देशों और ब्रिटेन में संक्रमण बढ़ा तो वहां सख्त लॉकडाउन लगाया गया। लेकिन, ट्रम्प ने साफ तौर कहा कि अमेरिका में लॉक डाउन नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने कहा- इसकी कोई जरूरत नहीं है। कुछ हफ्ते में वैक्सीन हमारे पास होगा। इसके लिए सारी तैयारियां की जा चुकी हैं। फिर कहा, “उम्मीद करता हूं कि आगे सब अच्छा होगा। हालांकि, ये कोई नहीं जानता कि आगे क्या होगा। कौन सी एडमिनिस्ट्रेशन रहेगी। मुझे लगता है कि इस सवाल का जवाब वक्त ही देगा।”

आगे क्या होगा
ट्रम्प के पास ज्यादा वक्त नहीं है। अगले महीने इलेक्टोरल कॉलेज की मीटिंग होनी है। इसके पहले उन्हें हार स्वीकार करनी होगी। क्योंकि बाइडेन अब एरिजोना और जॉर्जिया जीतकर 290 वोट के आंकड़े तक पहुंच चुके हैं। 8 दिसंबर को इलेक्टरल मीट और 14 को वोटिंग होनी है। इसके पहले कानूनी मामले भी निपटने हैं। माना जा रहा है कि ट्रम्प जल्द ही बाइडेन को जीत की बधाई देकर व्हाइट हाउस से विदा होने की तैयारी करेंगे।



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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने और उनकी टीम में वोटिंग और काउंटिंग में धांधली के आरोप लगाते हुए कई केस दायर किए हैं। (फाइल फोटो)


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फारसी में एक कहावत है- जो शख्स बदजायका खाने के बाद भी बदमजा न हो, वही शरीफ है। ये शराफत औरतों की देह पर चुस्त खाल की तरह चढ़ा दी गई। निवाले में चाहे जितनी खामियां हों, चुपचाप निगल लो। दांतों में कंकड़ आएं तो भी बेआवाज खाओ। औरतों ने किया भी यही। नतीजा ये रहा कि थाली में अनाज कम, कंकड़ ज्यादा मिलते हैं। हाल ही में कुछ कंकड़ियों की छंटनी ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने की। उसने अपने पन्नों से औरत का समानार्थी 'बिच' शब्द हटा दिया।

कई दूसरे शब्दों में बदलाव के साथ-साथ डिक्शनरी ने ये भी माना कि उससे शब्दों के उदाहरण देने में थोड़ी चूक हो गई। इस चूक को दुरुस्त करने में नामी-गिरामी डिक्शनरी को हजारों औरतों के दस्तखत की जरूरत पड़ी। इससे भी काम न बना। ऑक्सफोर्ड प्रेस ने पूरा एक साल इसे रिव्यू करने में लगा दिया कि उसके पास औरतों की फितरत समझाने के लिए जो शब्द हैं, वे औरत-मर्द दोनों पर समान रूप से लागू होते हैं। अब आप डिक्शनरी देखेंगे, तो उसमें कर्कश के उदाहरण में मिसेज रेचल ही नहीं होंगी, बल्कि मिस्टर जॉन भी हो सकते हैं। हरदम मीन-मेख निकालना अकेले कमला की आदत नहीं, मोहन भी उतना ही तुनकमिजाज हो सकता है।

वैसे औरतों को लेकर ये पक्के राग ऑक्सफोर्ड अकेले की गलती नहीं। पूरा का पूरा इंसानी कुनबा बोली-भाषा के जरिए औरत को उसकी औकात दिखाए रखता है। अंग्रेजी और दूसरी भाषाओं में लगभग 220 शब्द हैं, जो जनाने अंगों को जोड़ते हुए छुट्टा गालियां देते हैं। यहां तक कि औरत को वेश्या बताने के लिए 500 से ज्यादा शब्द खोजे गए, वहीं पुरुष वेश्या के लिए केवल 65 शब्द हैं। और ऐसा हो भी क्यों न। आखिर भोगने वाला तो पुरुष होता है, स्त्रियां तो जमीन हैं, जिस पर हल-कुदाल चला बीज रोपे जाते हैं।

ज्यादा दूर न जाकर पड़ोस के श्यामगढ़ चलते हैं। वहां हर घर में लल्ला की मां या श्यामू की बहू रहती हैं। वे या तो किसी मर्द बच्चे की मां हैं या फिर बीवी। इन अनाम औरतों की यही पहचान है। अगर मां-बाप ने कोई नाम दिया था, तो भी वो दशकों पहले बिसारा जा चुका। अब फर्ज करें कि ऐसी ही कोई अनाम औरत लापता हो जाए। तब क्या होगा! घरवालों के लिए औरत उपयोगी रही, यानी झाडू-फटका, मर्द के नखरे संभालना जैसे काम कर सकने लायक उम्र की हो तो उसे खोजने की कवायद चलेगी। अखबार में फोटो आएगा- जिसके नीचे मोटे-मोटे अक्षरों में छपा होगा- लल्ला की मां, लौट आओ। या फिर तस्वीर के साथ लिखा होगा कि फलां औरत का दिमाग कमजोर है, उसे अपना नाम याद नहीं।

ठीक ही तो है। जो औरत अपना नाम तक भूल जाए, भला वो कम अक्ल क्यों न कहलाए! वो औरत आज नहीं खोई, वो तो तभी खो चुकी थी, जब इस दुनिया में आई। बस हमने अखबार में लापता का विज्ञापन देना टाल रखा था। शब्दों के जरिए औरत पर हिंसा उसकी पहचान नोंचने तक सीमित नहीं। एक और खेल भी है। अंग्रेजीदां लोग इसे पॉलिटिक्स ऑफ टच कहते हैं। इसमें औरत हमेशा उस रोल में होती है, जहां मर्दों को उसे छूने-टटोलने की छूट मिलती है। जैसे डॉ जतिन मरीज मीना का पेट टटोलते हैं। या फिर बॉस कुलदीप को अंग्रेजी बोलने और बढ़िया कॉफी बनाने वाली सेक्रेटरी चाहिए।

गौर करें तो पाएंगे कि सेक्रेटरी शब्द के मायने इतने सिमट गए हैं कि उसे उचारते ही दुबली-नाजुक, ऊंची एड़ियां खड़काती युवती की तस्वीर जहन में आ जाती है। किसी कंपनी के रिसेप्शन पर भी अक्सर चमकदार चेहरे और खनकती आवाज वाली युवतियां ही दिखेंगी। उनकी बोली-समझ चाहे जितनी महीन हो, लिया उन्हें खूबसूरत औरत की तरह ही जाएगा। दो-चार कीट-पतंगे रिसेप्शन के चारों ओर मंडराते रहेंगे और रिसेप्शनिस्ट लिहाज में गालियां भी न दे सकेगी।

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में हाल और खराब हैं। वहां लड़की की भर्ती से पहले उसके शादीशुदा होने से जुड़े सवाल होते हैं। इंटरव्यू सवाल तक ही सीमित नहीं रहता, आगे उसे बच्चा न करने की बात भी चेतावनी की तरह बता दी जाती है। मां बनी तो युवती के चेहरे से लेकर काया में भी बदलाव आ सकते हैं। हो सकता है, बच्चे की संभाल उसे चिड़चिड़ा भी बना दे। ऐसी औरत भला फोन उठाने के काम की भी कहां रह जाएगी! यानी अव्वल तो औरत की कोई अलग पहचान नहीं होती और अगर पहचान मिले भी तो उतनी ही, जितने में मर्दों को सहूलियत हो।

एक और बिरादरी है, जो मूंग दाल खाते हुए भी डिनर जैकेट पहने होती है। वो फरमाती है कि भेदभाव की ये शिकायत नई औरतों के चोंचले हैं। पहले ही क्या औरतें कम नखरीली थीं, जो अब नया नाटक बघारने लगीं। औरतों की नई पौध को कोसने वाली ये बिरादरी वही है, जो औरतों को सिंगार-पट्टी तक सीमित मानती है। ये अपनी औरत पर खुश होते हैं, तो उसे गहने देते हैं। और गुस्से में आते हैं, तो किसी मर्द को चूड़ियां पहना देते हैं। मानो चूड़ियां न हुईं, कोई गाली हो गई जो औरत के हाथों ही सजती है।

भाषा और सिंगार-पटार के जरिए औरतों को उनकी जगह दिखाने का चलन कहीं भी तो नहीं छूटा। घर में नौकर भी रखे जाते हैं तो बेगम साहिबा का उदाहरण देते हुए मालिक मर्द बताते हैं कि वे खुद सुबह 5 से रात 10 तक जुती रहती हैं। बेगम की मिसाल देकर नौकर से काम लिया जाता है। कई और भी लोग हैं, जो अपने मजाकिया अंदाज में औरतों को गरियाते हैं। ऐसे लोग पढ़ी-लिखी औरत के घर खाने पर बुलाए गए तो ड्रॉइंग रूम में पैर पर पैर रखे नमकीन चुभलाते हुए एक मजाक करेंगे- भई हमें तो पता ही नहीं था कि तालीम-याफ्ता औरतें भी शानदार दावत कराती हैं। औरतों का रसोई से रिश्ता पक्का कराने को जाने कितने ही चुटकुले निकल पड़े।

ऐसे भी काम न बने तो एक बेहद मुलायम अंदाज भी है, जो औरत को फट्ट से बस में कर लेगा। वो ये रहा- मर्द के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर जाता है! लीजिए साहब, औरत को गाली-गुफ्तार किए बिना उसे काबू में कर लिया। भाषा का जन्म कब हुआ, इसके ठीक-ठाक प्रमाण अब तक नहीं मिल सके। शायद हजारों साल पहले, या उससे भी पहले, जब गिनती की खोज बाकी थी। ठीक है। भाषा का जन्म हमें नहीं पता लेकिन भाषा की मौत करीब है।

भाषाएं अब बुढ़ा चुकी हैं। बोलने में जबान लड़खड़ाती है। शब्द घिसकर मायने खो चुकी एक आखिरी गाली और जल्द ही वो वक्त आएगा, जब समाज जबान खो देगा। तब बाकी रहेगी, मौन की भाषा। ये वही भाषा है, जो आदम और हव्वा ने मिलकर रची थी। जिसमें औरत की चूड़ी गाली नहीं, उसकी मर्जी होगी। और मर्दों के दिल का रास्ता पेट नहीं, बल्कि दिल ही होगा।



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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार जैसलमेर में जवानों के साथ दिवाली मनाएंगे। उनके साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भी मौजूद रहेंगे। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सैनिकों के साथ दिवाली मनाते रहे हैं।

जवानों को मोदी का संदेश
हमें अपने उन जांबाज सैनिकों को भी याद रखना है, जो इन त्योहारों पर भी सीमाओं पर डटे हैं। भारत माता की सेवा और सुरक्षा कर रहे हैं। हमें उनको याद करके ही अपने त्योहार मनाने हैं। हमें घर में एक दीया भारत माता के इन वीर बेटे-बेटियों के सम्मान में भी जलाना है। मैं अपने वीर जवानों से भी कहना चाहता हूं कि भले ही आप सीमा पर हैं, लेकिन पूरा देश आपके साथ है, आपके लिए कामना कर रहा है। मैं उन परिवारों को भी नमन करता हूं, जिनके बेटे-बेटियां आज सरहद पर हैं। हर वो व्यक्ति जो देश से जुड़ी किसी न किसी जिम्मेदारी की वजह से अपने घर पर नहीं है, अपने परिवार से दूर है, मैं हृदय से उनका आभार प्रकट करता हूं।

6 सालों में कहां मनाई दिवाली
2019: मोदी जम्मू-कश्मीर के राजौरी में नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए राजौरी पहुंचे थे। कहा था- युद्ध हो या घुसपैठ हो, इस क्षेत्र को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह जगह हमेशा उन परेशानियों से निकल आती है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसने कभी हार नहीं देखी।
2018: प्रधानमंत्री दिवाली के मौके पर उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए थे। यहां उन्होंने चीन बॉर्डर के पास हरसिल गांव के केंट इलाके में भारतीय सशस्त्र बल और ITBP के जवानों से मुलाकात की थी। यहां कहा था- बर्फीले इलाके में आपका ड्यूटी के लिए समर्पण देश को मजबूती प्रदान करता है। आपके चलते ही सवा सौ करोड़ लोगों के सपने सुरक्षित हैं।
2017: इस साल मोदी ने दिवाली का जश्न जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सैनिकों के साथ मनाया।
2016: मोदी ने हिमाचल प्रदेश से लगे चीन बॉर्डर के पास इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों के साथ दिवाली मनाई।
2015: प्रधानमंत्री ने अमृतसर (पंजाब) बॉर्डर पर जवानों के साथ दिवाली मनाई थी।
2014: मोदी ने सियाचिन में जवानों के बीच दिवाली मनाई थी।



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पिछले साल मोदी जवानों के बीच जम्मू-कश्मीर के राजौरी पहुंचे थे। -फाइल फोटो


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आज महालक्ष्मी पूजा और दीपावली पर्व मनाया जाएगा। ग्रंथों के मुताबिक, कार्तिक महीने की अमावस्या को समुद्र मंथन से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं इसलिए इस दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है। पद्म पुराण के मुताबिक, इस दिन दीपदान करना चाहिए। इससे पाप खत्म हो जाते हैं इसलिए इस दिन दीपक जलाए जाते हैं। दीपों की कतार के कारण ही इसे दीपावली (दीप अवली) कहा जाता है।

दिवाली पर लक्ष्मीजी के साथ गणेश, कुबेर, सरस्वती और कालिका की भी पूजा की जाती है। ज्योतिषियों का कहना है कि इस बार 17 साल बाद दिवाली पर सर्वार्थसिद्धि योग बनने से इस दिन की गई पूजा का दोगुना फल मिलेगा।

भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा विधि

पंचोपचार पूजन में काफी कम समय लगता है। ये पूजा विधि उन लोगों के लिए सबसे अच्छी रहती है, जिनके पास समय की कमी रहती है। पंचोपचार में सामान्य विधि से कोई भी आसानी से पूजा कर सकता है। इस विधि से भी बड़े पूजन के समान पुण्य प्राप्त होता है।

इस पूजा में सबसे पहले तीन बार आचमन करना चाहिए। यानी तीन बार पानी ग्रहण करें। इसके बाद हाथ साफ करें। खुद पर और पूजन सामग्री पर पानी का छिड़काव करके सभी चीजें पवित्र करें। पृथ्वी देवी को प्रणाम करें। संकल्प करें। दीपावली पर लक्ष्मी जी के सभी स्वरूपों की पूजा करनी चाहिए।

लक्ष्मी पूजा से पहले गणेशजी का पूजन करें। गणेशजी के मंत्रों का जाप करें। जैसे श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके बाद विष्णुजी की पूजा करें और विष्णु मंत्रों का जाप करें। जैसे ऊँ नमो नारायणाय। महालक्ष्मी की पूजा शुरू करें। ऐसा भाव रखें कि देवी आपके घर में आ गई हैं। देवी का सत्कार करें।

देवी को पूजन सामग्री चढ़ाएं। पुष्पहार चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। भोग लगाएं। फल अर्पित करें। दीपक जलाकर देवी की आरती करें। आरती के बाद देवी को अर्पित करें और खुद भी ग्रहण करें। मंत्र पुष्पांजली अर्पित करें। आखिरी में पूजा में हुई जानी-अनजानी भूल के लिए देवी से क्षमायाचना करें। पूजा के बाद जमीन पर जल छोड़ें और ये जल अपनी आंखों पर लगाएं। इसके बाद आप उठ सकते हैं। इस तरह पूजा पूरी हो जाती है।
(वेदाचार्य डॉ.पतञ्जलि कुमार पाण्डेय, प्राचार्य ब्रह्मर्षि श्री श्री मौनी बाबा वेदविद्यापीठ गंगा घाट, उज्जैन)

दीपावली पर होने वाली अन्य पूजा

दिवाली पर लक्ष्मीजी के साथ ही देहली विनायक (श्रीगणेश), कलम, सरस्वती, कुबेर और दीपक की पूजा भी की जाती है। ग्रंथों के मुताबिक, ये दीपावली पूजा का ही हिस्सा है। इनकी पूजा से सुख, समृद्धि, बुद्धि और ऐश्वर्य मिलता है। साथ ही दीपों की पूजा से हर तरह के दुख और पाप खत्म हो जाते हैं।

देहली विनायक पूजा: दुकान या ऑफिस में दीवारों पर ॐ श्रीगणेशाय नम:, स्वस्तिक चिह्न, शुभ-लाभ सिंदूर से लिखें और लिखते वक्त ॐ देहलीविनायकाय नम: मंत्र बोलते जाएं। साथ ही पूजा सामग्री और फूल से पूजा करें।

महाकाली (दवात) पूजा : दवात (स्याही की बोतल) को महालक्ष्मी के सामने फूल और चावल पर रखें। उस पर सिंदूर लगाकर मौली लपेट दें। ॐ श्रीमहाकाल्यै नम: बोलते हुए पूजा की सुगंधित चीजें और फूलों से दवात और महाकाली की पूजा कर के प्रणाम करें।

लेखनी पूजा: लेखनी (कलम) पर मौली बांधकर सामने रख लें और ॐ लेखनीस्थायै देव्यै नम: मंत्र बोलते हुए गंध, फूल, चावल से पूजा कर के प्रणाम करें।

बहीखाता पूजन: बहीखाता पर रोली या केसर-चंदन से स्वास्तिक बनाएं। उस पर पांच हल्दी की गांठें, धनिया, कमलगट्टा, चावल, दूर्वा और कुछ रुपए रखकर ॐ वीणापुस्तकधारिण्यै श्रीसरस्वत्यै नम: बोलते हुए गंध, फूल, चावल चढ़ाएं और सरस्वती माता को प्रणाम करें।

कुबेर पूजा: तिजोरी या रुपए रखने वाली जगह पर स्वस्तिक बनाकर कुबेर का ध्यान करें। ॐ कुबेराय नम: बोलते हुए पूजा सामग्री और फूल से पूजा करें। पूजा के बाद प्रार्थना करते हुए हल्दी, चंदन, केसर, धनिया, कमलगट्टा, रुपए और दूर्वा तिजोरी में रखें। इसके बाद कुबेर से धन लाभ के लिए प्रार्थना करें।

दीपमालिका (दीपक) पूजन

  1. एक थाली में 11, 21 या उससे ज्यादा दीपक जलाकर महालक्ष्मी के पास रखें।
  2. एक फूल और कुछ पत्तियां हाथ में लें। उसके साथ सभी पूजन सामग्री भी लें।
  3. इसके बाद ॐ दीपावल्यै नम: इस मंत्र बोलते हुए फूल पत्तियों को सभी दीपकों पर चढ़ाएं और दीपमालिकाओं की पूजा करें।
  4. दीपकों की पूजा कर संतरा, ईख, धान इत्यादि पदार्थ चढ़ाएं। धान का लावा (खील) गणेश, महालक्ष्मी तथा अन्य सभी देवी-देवताओं को भी अर्पित करें।


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वीडियोग्राफी - काईद जौहर


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दीपावली रोशनी का पर्व और मां लक्ष्मी के आगमन का दिन है। लक्ष्मीजी के स्वागत के लिए घर में दीपक जलाने की परंपरा है, इस दिन कुछ खास जगहों पर दीपक जरूर जलाना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक घर के 9 स्थान और घर से बाहर की दो जगहें ऐसी हैं, जहां दीपावली पर दीपक लगाना शुभ माना जाता है। इसका महत्व शास्त्रों में भी माना गया है और वास्तु में भी। दीपक लगाने की परंपरा में नियम अलग हैं, कुछ जगह लक्ष्मी पूजन से पहले और कुछ जगह पूजन के बाद दीपक लगाने चाहिए। आइए. जानते हैं यह जगह कौन-कौन सी हैं।

1. दीयों की पूजा करने के बाद सबसे पहला दीपक घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ रखा जाता है, मां लक्ष्मी घर में पहला कदम यहीं से रखती हैं। माना जाता है कि यहां दीप जलाने से घर में पॉजिटिविटी आती है, इसलिए दीवाली पर लक्ष्मी पूजा से पहले सरसों के तेल के दिए घर के दरवाजे के दोनों ओर रखने चाहिए।

2. दूसरा दिया घर के आंगन में रखना चाहिए। अगर घर में आंगन नहीं है, तो आप घर के बीच वाले कमरे में घी का दीपक रख सकते हैं, यह घर का ब्रह्म स्थान माना जाता है। यहां दीपक लगाने से परिवार के सदस्यों में संतुष्टि का भाव आता है।

3. लक्ष्मी पूजन के पहले घर के मंदिर में 5 दीपक लगाए जाते हैं, इसके साथ ही अगर घर के आसपास कोई मंदिर हो तो वहां भी दीपक रखना चाहिए। मान्यता है इससे घर में समृद्धि आती है और पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है।

4. लक्ष्मी पूजन से पहले 4 चारमुखी दीपक, यानि ऐसे दीये जिनमें 4 बातियां जलाई जा सकें, घर के चारों कोनों में जलाएं और भगवान गणेश से सुख-समृद्धि की कामना करें। इससे घर को एक सुरक्षा कवच मिलता है।

5. लक्ष्मी पूजन के बाद घर में तुलसी के पौधे पर तेल का दीपक लगाना चाहिए। तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। तुलसी पर दीपक लगाने से घर में शुद्धता और शांति बनी रहती है।

6. घर में जल के किसी भी स्त्रोत के नजदीक एक दीपक जरूर जलाना चाहिए जैसे घर की पंढेरी के पास या जहां पानी का मटका रखा जाता है। वहां दीया रख सकते हैं। इससे घर में पवित्रता का वातावरण बना रहता है और घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

7. अगर घर के पास कोई पीपल का पेड़ हो, तो एक दिया यहां जरूर जलाएं। पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। यहां दीपक लगाने से घर की समस्याएं कम होती हैं।

8. लक्ष्मी पूजन के बाद दो दीपक घर की रसोई में भी जरूर जलाना चाहिए। इससे मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और घर पर अन्न भंडार में वृद्धि होती है।

9. लक्ष्मी पूजन के बाद भगवान कुबेर की प्रार्थना करते हुए घर की तिजोरी की पूजा कर तिल के तेल का दीपक घर की तिजोरी के पास जलाएं। इससे घर में समृद्धि बनी रहती है।

10. घर के पास जो चौराहा हो वहां पर भी दीपक जलाने की परंपरा है। चौराहे पर दीपक लगाने के बाद घर आते समय मुड़ कर ना देखें। माना जाता है कि चौराहे पर दीपक लगाने से समस्याएं कम होती हैं और घर से नकारात्मकता दूर रहती है।

11. इसके अलावा घर के आसपास कहीं भी अंधेरा दिखे तो वहां दीपक जलाकर रोशनी जरूर करें। इससे घर के आसपास की नकारात्मकता कम होती है।



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