कहानी- डॉ. भीमराव अंबेडकर के छात्र जीवन से जुड़ी घटना है। अंबेडकर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे। उस समय वे एक मात्र विद्यार्थी थे, जो यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में सबसे पहले पहुंचते थे और लाइब्रेरी बंद होने तक लगातार पढ़ते रहते थे। कभी-कभी वे ज्यादा समय भी वहां रुकते थे।
लाइब्रेरी का एक कर्मचारी हर रोज अंबेडकर को देखता था। एक दिन उसने अंबेडकर से कहा, 'मैं आपको रोज देखता हूं। आपकी उम्र के यहां कई लोग हैं, वे पढ़ाई के अलावा अन्य काम भी करते हैं। वे मौज-मस्ती भी करते हैं, लेकिन आप हमेशा पढ़ाई ही करते हैं, ऐसा क्यों?'
अंबेडकर बोले, 'मुझे बहुत पढ़ना है, क्योंकि मेरे पास वर्तमान शिक्षा के लिए भविष्य का एक बड़ा लक्ष्य है। मैं केवल अपने लिए पढ़ाई नहीं कर रहा हूं। भारत में मुझसे जुड़े कई लोग हैं, मुझे उनके लिए इसी शिक्षा से बहुत कुछ करना है।'
अंबेडकर की बातें सुनकर कर्मचारी हैरान रह गया। उसने सोचा कि शिक्षा का दूरगामी लक्ष्य लेकर भी कोई विद्यार्थी इस तरह पढ़ाई कर सकता है। कर्मचारी ने ये देखा कि अंबेडकर अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं की किताबें भी बहुत ध्यान से पढ़ते थे। ये देखकर वह और ज्यादा आश्चर्यचकित हो गया।
काफी समय बाद भारत में अंबेडकर और लालबहादुर शास्त्री के बीच संस्कृत में वार्तालाप हुआ तो उन्हें देखकर सभी चौंक गए थे। अंबेडकर का संस्कृत ज्ञान भी बहुत बेहतरीन था।
सीख- हमारे लिए अंबेडकर की सीख यही है कि भारत में शिक्षा का सदुपयोग तब ही हो पाएगा, जब यहां के विद्यार्थी परिश्रम, लगन, साधन के साथ ही लक्ष्य और भाषाएं भी स्पष्ट होंगी।
महाराष्ट्र में अहमदनगर की रहने वाली सुमन धामने को कुछ महीने पहले तक कोई नहीं जानता था लेकिन, अब वो इंटरनेट सेंसेशन हैं। 70 साल की सुमन कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन इन दिनों उनके यूट्यूब चैनल ‘आपली आजी’ पर 6.5 लाख सब्सक्राइबर हैं।
इस पर सुमन पारंपरिक स्वाद में घर के बने मसालों के साथ महाराष्ट्रीयन डिशेज बनाती हैं। अहमदनगर से करीब 10 किलोमीटर दूर सरोला कसार गांव में रहने वाली सुमन धामने हिंदी नहीं बोल पाती हैं, वो सिर्फ मराठी ही बोलती हैं। वो अपने चैनल पर अब तक करीब 150 रेसिपी के वीडियो शेयर कर चुकी हैं।
सुमन कहती हैं कि इससे पहले वो यूट्यूब के बारे में कुछ भी नहीं जानती थीं। उन्होंने कभी ये सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी ऐसी वीडियो के जरिए सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से खाने के बारे में बात करेंगी। सुमन का यह यूट्यूब चैनल शुरू करने में उनके पोते यश पाठक ने उनकी मदद की।
अहमदनगर से करीब 10 किलोमीटर दूर सरोला कसार गांव में रहने वाली सुमन धामने पारंपरिक स्वाद में घर के बने मसालों के साथ महाराष्ट्रीयन डिशेज बनाती हैं।
11वीं क्लास में पढ़ने वाले 17 साल के यश बताते हैं कि इसी साल जनवरी महीने में दादी को पाव भाजी बनाने को कहा था। दादी ने कहा कि उन्हें ये बनाना नहीं आता है, तो मैंने उन्हें कुछ रेसिपीज के वीडियो दिखाए। वीडियो देखने के बाद, दादी ने कहा कि वो इससे अच्छी पाव भाजी बना सकती है। उस दिन दादी ने वाकई में बहुत शानदार पाव भाजी बनाई, घर के हर सदस्य ने उनके खाने की तारीफ की। बस इसी दौरान मुझे दादी का यूट्यूब चैनल शुरू करने का ख्याल आया।
‘करेले की सब्जी’ वीडियो को कुछ दिनों में ही मिले एक मिलियन व्यूज
यश कहते हैं ‘मैं 8वीं क्लास से ही अपना एक यूट्यूब चैनल चला रहा था, लेकिन मैं बहुत कम वीडियो बनाता था। दादी के चैनल के लिए मैंने प्लानिंग की और नवम्बर 2019 में एक यूट्यूब चैनल बनाया और इस पर कुछ वीडियो अपलोड किए। दिसम्बर 2019 में हमने ‘करेले की सब्जी’ बनाने का एक वीडियो अपलोड किया। इसी वीडियो को कुछ दिनों में एक मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले। (अब इस पर 6 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज हैं) इसके बाद हम मूंगफली की चटनी, महाराष्ट्रीयन मिठाइयां, बैंगन, हरी सब्जियां और भी कई महाराष्ट्रीयन डिशेज के वीडियो बनाकर अपलोड करने लगे।’
यश और उनकी दादी मिलकर हफ्ते में दो वीडियोज यूट्यूब चैनल पर अपलोड करते हैं।
सुमन कहती हैं कि जब यश ने यूट्यूब चैनल शुरू करने की बात कही थी तो वो बहुत डरी हुई थी। उन्होंने जीवन में कभी कैमरा फेस नहीं किया था, शुरुआती कई वीडियो में वो काफी असहज नजर आईं। कई बार कैमरे के सामने बोलते समय भूल जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे कैमरे के सामने भी सहज हो गईं। सुमन कहती हैं ‘जब मुझे यूट्यूब क्रिएटर अवार्ड मिला है तो मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ, मेरे परिवार और रिश्तेदारों ने भी मेरी काफी तारीफ की।’
6.5 लाख सब्सक्राइबर हैं, हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपए की कमाई
यश कहते हैं ‘इन सबके बीच एक सबसे महत्वपूर्ण चुनौती ये थी कि रेसिपी बनाते समय कुछ अंग्रेजी के शब्द होते थे, जो दादी नहीं बोल पाती थीं। इसके बाद मैंने दादी को सॉस, बेकिंग पाउडर, कैचअप, मिक्सचर जैसे कई अंग्रेजी शब्दों को सही तरीके से उच्चारण करना सिखाया, दादी ने भी एक हफ्ते में ये सब कुछ सीख लिया।’
यश बताते हैं कि हमारे शुरुआती तीन महीने में ही एक लाख सब्सक्राइबर हो गए थे। आज हमारे चैनल पर 6.5 लाख सब्सक्राइबर हैं और हमें यूट्यूब की ओर से सिल्वर प्ले बटन मिला है। इस चैनल के जरिए हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपए की कमाई होती है।
11वीं क्लास में पढ़ने वाले 17 साल के यश ने ही अपनी दादी को यूट्यूब चैनल शुरू करने का आइडिया दिया था।
16 अक्टूबर को हैक हो गया था चैनल, चार दिन बाद वापस मिला
सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन 16 अक्टूबर को अचानक ‘आपली आजी’ चैनल हैक हो गया। इस घटना से दादी-पोते की इस जोड़ी को बड़ा झटका लगा। यश कहते हैं कि जब ये बात मैंने दादी को बताई तो वो इतना परेशान हो गई थी एक दिन खाना तक नहीं खाया। इसके बाद मैंने ने यूट्यूब को ई-मेल किया तब जाकर 21 अक्टूबर को हमें हमारा चैनल वापस मिल सका, तब जाकर दादी को राहत मिली।
यश के पापा डॉक्टर और मम्मी हाउसवाइफ हैं, जब यश ने ये चैनल शुरू किया तो उन्होंने काफी सपोर्ट किया। यश वर्तमान में ‘आपली आजी’ चैनल के लिए हफ्ते में दो वीडियो बनाते हैं। यश इससे पहले सैमसंग के फोन से वीडियो रिकॉर्ड करते थे लेकिन जब कमाई हुई तो उन्होंने आईफोन 11 प्रो मैक्स और कैनन-750 DSLR ले लिया है, अब वो इसके जरिए ही वीडियो रिकॉर्ड करते हैं।
क्या हो रहा है वायरल: सोशल मीडिया पर किसानों के प्रदर्शन में शामिल हुई एक वृद्ध महिला की फोटो वायरल हो रही है। एक तरफ जहां महिला के हौसले की तारीफ की जा रही है। वहीं कई यूजर इन्हें फर्जी किसान बता रहे हैं।
वायरल फोटो
दावा किया जा रहा है कि किसानों के प्रदर्शन में शामिल हुई ये महिला वही मशहूर बिलकिस दादी हैं, जो शाहीन बाग के प्रदर्शन में थीं। अभिनेत्री कंगना रनोट ने 27 नवंबर रात 10 बजे फोटो को इसी दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया। हालांकि, बाद में कंगना ने पोस्ट डिलीट कर लिया। कई सोशल मीडिया यूजर कंगना के इस दावे को सच मानकर शेयर कर रहे हैं।
और सच क्या है
वायरल फोटो में वृद्ध महिला एक झंडा हाथ में रखे दिख रही हैं। झंडे पर बहुमुखी में लिखे टेक्स्ट को गूगल ट्रांसलेट करने पर पता चला कि ये- भारतीय किसान यूनियन का झंडा है।
अलग-अलग कीवर्ड सर्च करने से भी इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली। जिससे पता चल सके कि वायरल फोटो में दिख रही महिला कौन हैं।
दैनिक भास्कर ने शाहीन बाग आंदोलन से चर्चा में आईं बिलकिस दादी से संपर्क किया। बिलकिस बानो ने भास्कर से बातचीत में कहा- फोटो मेरी नहीं है। मैं तो पिछले एक हफ्ते से अपने घर से ही नहीं निकली। फिलहाल तो आंदोलन में जाने के बारे में नहीं सोचा। आगे देखते हैं।
साफ है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा फेक है। बिलकिस बानो ने खुद किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने वाली बात से इनकार कर दिया है।
न्यूजीलैंड दौरे पर पहुंची पाकिस्तान टीम के 7 खिलाड़ी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। 3 देश और 13,120 किलोमीटर की यात्रा करके ऑकलैंड पहुंची टीम पर हेल्थ प्रोटोकॉल फॉलो नहीं करने के भी आरोप लगे हैं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुताबिक, रवाना होने से पहले सभी खिलाड़ियों के कोरोना टेस्ट निगेटिव आए थे। हालांकि, न्यूजीलैंड में उतरते ही 6 खिलाड़ी पॉजिटिव आए।
इतना ही नहीं न्यूजीलैंड हेल्थ डिपार्टमेंट ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर क्वारैंटाइन के दौरान आइसोलेट रहने की जगह एक-दूसरे से मिलने और साथ खाने-पीने का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि 4 खिलाड़ियों में फ्रेश संक्रमण पाया गया। जबकि 2 की कोविड हिस्ट्री होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में पाकिस्तान का न्यूजीलैंड दौरा खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है।
न्यूजीलैंड दौरे के लिए रवाना होने से पहले फखर जमां में कोरोना के लक्षण दिखने की वजह से उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। हालांकि बाद में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि न्यूजीलैंड में पाकिस्तान खिलाड़ी कोरोना संक्रमित कैसे हुए?
शोएब ने पूछा- चार्टर्ड प्लेन से क्यों नहीं भेजा
पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर ने कहा कि न्यूजीलैंड में पाकिस्तानी क्रिकेटर के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) भी काफी हद तक जिम्मेदार है। PCB को अपने खिलाड़ियों को चार्टर्ड फ्लाइट से ऑकलैंड भेजना चाहिए था, जो उसने नहीं किया।
वे अपने खिलाड़ियों को पाकिस्तान से पहले दुबई ले गए। फिर वहां से कुआलालम्पुर और फिर ऑकलैंड ले गए, जिससे खिलाड़ियों पर कोरोना का खतरा ज्यादा बढ़ा। फ्लाइट में खिलाड़ियों के अलावा बाकी पैसेंजर्स भी थे, जिससे खिलाड़ी पॉजिटिव हुए होंगे।
न्यूजीलैंड में जिस होटल में ठहरे, वहां और भी लोग ठहरे
उन्होंने कहा कि इसके बाद न्यूजीलैंड को उन्हें किसी ऐसे होटल में ठहराना था, जहां सिर्फ पाकिस्तान की टीम और उसका सपोर्टिंग स्टाफ ही रुकता, लेकिन उसने सभी को ऐसे होटल में ठहरा दिया, जहां और लोग भी ठहरे हुए हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण कैसे रोक पाएंगे? शोएब ने आरोप लगाते हुए कहा कि वहां के होटल के वेटर भी मास्क उतारकर घूम रहे हैं।
पाकिस्तान को जिस होटल में आइसोलेट किया गया है, उसके बाहर डिफेंस स्टाफ और टाइट सिक्योरिटी देखी गई।
रवाना होने से पहले फखर जमां में दिखे थे कोरोना के लक्षण
न्यूजीलैंड रवाना होने से पहले पाकिस्तान टीम के प्लेयर फखर जमां में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए थे। इस कारण उन्हें पहले ही सीरीज से बाहर कर दिया गया था। फखर को फीवर था। हालांकि फखर की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
4 नए संक्रमित, 2 की कोविड हिस्ट्री होने की आशंका
मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ के मुताबिक, जिन 6 खिलाड़ियों में कोरोना की पुष्टि हुई थी, उनमें 4 में कोरोना फ्रेश केस हैं। वहीं, 2 की कोविड हिस्ट्री होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में अगर टीम होटल में प्रोटोकॉल नहीं मान रही, तो यह पूरे टीम के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम को क्राइस्टचर्च स्थित होटल में आइसोलेट किया गया है।
टीम के खिलाड़ियों पर प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के CEO वसीम खान ने कहा था कि उन्होंने न्यूजीलैंड सरकार से बात की। न्यूजीलैंड सरकार ने बताया कि पाकिस्तानी टीम ने 3 से 4 स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) का उल्लंघन किया। न्यूजीलैंड में इसके लिए जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। उन्होंने हमें फाइनल वॉर्निंग दी है।
मुझे पता है कि ये हमारे लिए मुश्किल समय है। हमें इंग्लैंड में भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था। दावा किया गया कि पाकिस्तानी खिलाड़ी होटल में सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज में खिलाड़ी होटल में घूमते और एक-दूसरे से खाना शेयर करते दिखाई दे रहे हैं।
न्यूजीलैंड के लिए दौरा क्यों जरूरी
न्यूजीलैंड क्रिकेट पर वेस्टइंडीज, पाकिस्तान (34 खिलाड़ी और 20 सपोर्ट स्टाफ), ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की महिला क्रिकेट टीम के MIQ (मैनेज्ड आइसोलेशन एंड क्वारैंटाइन) के लिए 2 मिलियन डॉलर (14.93 करोड़ ज्यादा) से ज्यादा का बिल फेस कर रहा है। बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड प्रेसिडेंट ग्रेग बार्कले पहले ही कह चुके हैं कि बोर्ड इस सीजन में करीब 3.5 मिलियन (25.88 करोड़ रुपए) के नुकसान का सामना कर रहा है।
इंग्लैंड दौरे से पहले 10 खिलाड़ी संक्रमित हुए थे
पाकिस्तान टीम ने कोरोना के बीच जुलाई में अपना पहला दौरा इंग्लैंड का किया था। तब 28 जून को इंग्लैंड रवाना होने से पहले पाकिस्तान के 10 प्लेयर्स संक्रमित पाए गए थे। यह खिलाड़ी हैदर अली, हरीस रउफ, शादाब खान, मोहम्मद हफीज, वहाब रियाज, फखर जमां, इमरान खान, काशिफ भट्टी, मोहम्मद हसनैन और मोहम्मद रिजवान थे।
IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट बायो-बबल माहौल में हुए
19 सितंबर से 10 नवंबर तक यूएई में इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें सीजन का आयोजन किया गया। टूर्नामेंट बायो-सिक्योर माहौल में कराया गया। टीम के खिलाड़ियों को बबल से बाहर जाने या किसी को बबल में प्रवेश की इजाजत नहीं थी। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले चेन्नई सुपर किंग्स के दीपक चाहर और ऋतुराज गायकवाड़ कोरोना की चपेट में आ गए थे। हालांकि इसके बाद पूरे टूर्नामेंट में कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया था।
IPL के दौरान करीब 40 हजार लोगों का टेस्ट हुआ
बोर्ड प्रेसिडेंट सौरव गांगुली ने बताया था IPL के लिए तैयार किए गए बायो-बबल में 400 लोग रुक रहे थे। ढाई महीनों में करीब 30 से 40 हजार टेस्ट कराए गए, ताकि सभी सुरक्षित रह सकें। गांगुली ने कहा था कि कोरोना के बीच टूर्नामेंट में दुनियाभर के खिलाड़ियों की भागीदारी के बाद भी हम सफलतापूर्वक इसका आयोजन करा सके, इससे मैं बहुत खुश हूं।
स्कॉटलैंड से खबर आई है। वहां औरतें को पीरियड से जुड़े उत्पाद नहीं खरीदने होंगे। स्कॉटिश संसद ने माना कि कोरोना-काल में पीरियड पॉवर्टी बढ़ी है। यानी पगार कम होने का असर सिर्फ रोटी पर नहीं पड़ा, बल्कि पहली मार औरतों की गैर-जरूरतों पर पड़ी। यानी सैनेटरी पैड। आखिर लिपस्टिक की तरह ये भी गैरजरूरी खर्च है। लिहाजा कटौती हुई और औरतों को घर के पुराने कपड़ों का रास्ता दिखा दिया गया।
शादी के बाद दुल्हन के अरमानों की तरह मुसी हुई चादर की कतरनें काटकर बंटवारा हुआ। ये वाला मां लेगी। ये वाला हिस्सा बेटी का। धोने के बाद घर के किसी गीले-सीले कोने में सुखाने का इंतजाम हुआ। और सूखने के बाद अगले पीरियड तक रखने के लिए कोने खोजे गए। पुराने समय में मुसीबत के वक्त राजाओं के छिपने के बंदोबस्त भी क्या ही इतने पुख्ता होते होंगे, जितनी गुप्त जगहें इन कपड़ों के लिए एक कमरे वाले घरों ने खोज निकालीं।
कई जगहों के हाल इससे भी खराब हैं। वहां तन ढंकने के कपड़े पूरे नहीं पड़ते तो खून सोखने के कहां से आएं! वहां के समाज ने इसका भी तोड़ खोज निकाला। औरतों को रेत दे दी या वो भी नहीं मिला तो नारियल की जूट। जिन दिनों में महीन से महीन कपड़ा जांघों में जख्म ला देता है, उन दिनों के लिए नारियल की जूट से बढ़िया क्या सजा होगी। शिकायत करें तो फट से सुनें- अभी से रो रही हो। जब बच्चा पैदा करोगी तो क्या हाल होगा। नतीजा! दर्द से ऐंठती औरतें संक्रमण से मरने लगीं।
वॉटर एड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल दुनियाभर में 8 लाख के करीब औरतें इसी दौरान होने वाले संक्रमण से मरती हैं। इस दौरान या फिर बच्चे के जन्म के बाद साफ-सफाई की कमी औरतों की मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। दसरा (Dasra) की एक रिपोर्ट बताती है कि कैसे हर साल 23 मिलियन लड़कियां पीरियड शुरू होते ही स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं। क्योंकि, स्कूलों में टॉयलेट की व्यवस्था नहीं। पीरियड के दौरान लड़कियों से छेड़छाड़ तो जैसे चना-मुर्रा है।
स्कूल तो स्कूल, अंग्रेजीदां कॉर्पोरेट भी इससे बचे हुए नहीं। जहां कोई औरत जरा चिड़चिड़ाई कि फौरन ऐलान हो जाता है- लगता है, फलां का टाइम आ गया! दिलदार-दिल्ली के हाल और भी खराब हैं। वहां मेट्रो की रेड लाइन के नाम पर लड़के ठहाके मारते और लड़कियों को घूरते कहीं भी दिख जाएंगे। मेट्रो में दफ्तर या कॉलेज से थकी, और तिसपर पीरियड के दर्द से दोहरी-तिहरी होती लड़कियों के चेहरे अलग से दिख जाएंगे। उन चेहरों को गौर से देखते और कानों में ईयरफोन ठूंसे चेहरे भी दिखते हैं, जो इत्मीनान से सीटों में धंसे होते हैं। औरतों को लेडीज सीट तो मिली हुई है। अब क्या अपना हक भी दे दें, का भाव बहुतेरे चेहरों का स्थायी भाव हो गया है।
पड़ोस का मुल्क नेपाल इस मामले में हमसे भी कई कदम आगे हैं। वहां चौपदी प्रथा के तहत पीरियड्स आते ही बच्ची हो या पचास-साला- सबको गांव से बाहर एक फूस-मिट्टी की बनी झोपड़ी में रहना होता है। कई गांवों में अलग घर नहीं होते तो उन्हें जानवरों के बीच रहना होता है। धोने-सुखाने का कोई बंदोबस्त नहीं। पास की नदी भी किलोमीटरों दूर। ऐसे में सालाना कई बच्चियां दम तोड़ देती हैं।
जो संक्रमण से नहीं मरतीं, वे किसी और कारण से मरती हैं। जैसे सांप काटने या फिर ठंड से। इससे भी कोई बच जाए तो बलात्कार तो है ही। गांव से बाहर सुनसान में इन अपवित्र औरतों का बलात्कार कर अघाए मर्द आराम से अपनी कुटिया लौट जाते हैं। इसके बाद औरत महीना-दर-महीना या तो रेप झेलती है या बच सकी तो डर से मरती है।
अमेरिकी खोजकर्ता एलन मस्क मंगल और चांद पर इंसानों को बसाने की तकनीक खोज रहे हैं। इधर मांएं अपनी बच्चियों को पीरियड का राज खुसपुसाते हुए बता रही हैं। पापा से मत बताना। भैया से मत कहना। पड़ोसी लड़कों के साथ उछल-कूद बंद। खून की वो पहली बूंद लड़कियों को उतना दर्द नहीं देती, जितना मां या दूसरी औरतों की ये घुट्टी।
खुद को आधुनिक बताता एक दूसरा तबका भी है, जो विज्ञापन में सैनेटरी पैड हिलाते हुए हरदम खिला हुआ रहने के नुस्खे देता है। यानी पैड लगाने भर से दर्द छूमंतर हो जाएगा। नतीजा ये कि सामर्थ्यवान मर्द नमक-तेल की तरह सैनेटरी पैड भी स्टॉक कर देता है। साथ में ये भाव रहता है कि देखो, अब दर्द का रोना मत रोना। बॉस, पीरियड एक हार्मोनल बदलाव है, जिसमें खून के साथ-साथ थक्के भी निकलते हैं। पैड खून रोकता है, दर्द नहीं.
कुछ सालों पहले यौन-बीमारियों से बचाने के लिए मुफ्त कंडोम बांटना शुरू किया गया। आज भी आंगनबाड़ी कार्यकताएं कंडोम वितरण करती हैं। साथ में एक पिटाया-पिटाया तर्क पुतले की तरह दोहराती चलती हैं कि इससे औरतों का ही भला होगा। अनचाहा बच्चा पेट में नहीं आएगा। या फिर मर्द की मुंहमारी का अंजाम औरतें नहीं भुगतेंगी। लेकिन अगर पुरुषों की यौन जरूरतें बगैर डर पूरी हो सकें, इसके लिए कंडोम दिया जा सकता है, तो औरतों के लिए सैनेटरी पैड क्यों नहीं! स्कॉटलैंड ने शुरुआत की, अब हमारी बारी है।
1. कोरोना वायरस महामारी के नए उफान ने डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। अमेरिका के 12% स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं, वहीं ब्रिटेन में 40% से अधिक डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। समस्याओं के मुख्य केंद्र जानने के लिए पढ़ें ये लेख...
2. टाइम मैग्जीन ने 2020 की सर्वश्रेष्ठ किताबों की सूची जारी की है। इसमें भारतीय मूल की दो लेखिकाओं- मेघा मजूमदार और दीपा अनप्परा के उपन्यासों को शामिल किया है। इनमें से सात किताबों का ब्योरा पेश है इस लेख में...
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4. अमेरिका में कोरोना वायरस के दोबारा तेजी से फैलने के बीच पर्यटन स्थल हवाई को फिर खोलने पर स्थानीय लोग चिंतित हैं। वहीं कुछ लोग टूरिस्ट की वापसी को द्वीप के लिए अच्छा मानते हैं। महामारी के चलते हवाई में पर्यटकों के लिए क्या है नई व्यवस्था? जानने के लिए पढ़ें ये लेख...