खेल डेस्क. न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारतीय टीम का चयन आज मुंबई में किया जाएगा। टीम इंडिया 24 जनवरी से छह हफ्ते के लिए न्यूजीलैंड जाएगी। वहां पांच टी-20, तीन वनडे और दो टेस्ट खेलेगी। पीठ की चोट से परेशान हार्दिक पंड्या की टीम में वापसी मुश्किल हो गई है। वे चयन से एक दिन पहले ही फिटनेस टेस्ट में फेल हो गए। वहीं, टेस्ट में रिजर्व ओपनर के तौर पर लोकेश राहुल और शुभमन गिल में से किसी एक को चुना जा सकता है। टीम इंडिया पिछले साल न्यूजीलैंड में पांच वनडे की सीरीज 4-1 से जीती थी। वहीं, तीन टी-20 की सीरीज में 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था।
चयनकर्ता सीमित ओवरों के लिए 16 या 17 सदस्यीय टीम की घोषणा कर सकते हैं। इस दौरान टी-20 वर्ल्ड कप भी वे ध्यान में रखेंगे। टीम इंडिया ने श्रीलंका के खिलाफ शुक्रवार को खत्म हुए तीन टी-20 की सीरीज को 2-0 से अपने नाम किया था, लेकिन इस दौरान हार्दिक टीम के साथ नहीं थे। वे भारत-ए टीम के साथ न्यूजीलैंड जाने वालेथे। फिटनेस टेस्ट में फेल होने के कारण उनकी जगह विजय शंकर को भेजा गया।
हार्दिक टी-20 वर्ल्ड कप प्लान के अहम हिस्सा: बीसीसीआई
बीसीसीआई के एक पदाधिकारी ने न्यूज एजेंसी से कहा, ‘हार्दिक को लेकर केवल इस बात की जांच करना है कि वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए फिट हैं या नहीं। वे भारत के टी-20 वर्ल्ड कप प्लान के अहम हिस्सा हैं।’ हार्दिक टीम इंडिया के लिए पिछला मैच सितंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बेंगलुरु में खेले थे। हार्दिक पिछला वनडे वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले थे।
वनडे में रहाणे की वापसी संभव
वनडे टीम की सबसे कमजोर कड़ी केदार जाधव हैं। न्यूजीलैंड में जाधव की तकनीकी खामियां सामने आ सकती हैं। हाल के दिनों में ज्यादा ओवर नहीं खेलने को देखते हुए उन्हें टीम से बाहर किया जा सकता है। अगर टीम तकनीकी मजबूती के पहलू को देखती है तो अजिंक्य रहाणे वापसी कर सकते हैं। सूर्यकुमार यादव भी उनके साथ इस दौड़ में शामिल हैं। दूसरी ओर, टेस्ट टीम में सिर्फ तीसरे ओपनर के स्थान पर ही विचार किया जाना है।
टेस्ट में नवदीप सैनी पांचवें तेज गेंदबाज हो सकते हैं
घरेलू सीरीज के लिए रिजर्व ओपनर के तौर पर चुने गए युवा शुभमन गिल चयन के हकदार हैं, लेकिन लोकेश राहुल की मौजूदा फॉर्म और टेस्ट क्रिकेट में उनके अनुभव पर विचार किया जा सकता है। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह, उमेश यादव, मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा का साथ निभाने के लिए पांचवें तेज गेंदबाज के तौर पर नवदीप सैनी को दल में रखा जा सकता है।
नई दिल्ली.दिन: बुधवार। तारीख: 7 मई 2014। जगह: बेतिया, बिहार। भाजपा की चुनावी रैली। भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी बोल रहे हैं- 'भाइयो-बहनो... दिल्ली की धरती पर निर्भया का कांड हुआ। एक गरीब बेटी को जुल्म से मार दिया गया। उसपे बलात्कार हुआ। ये निर्भया का कांड आपकी आंख के सामने हुआ। ये नीच राजनीति है कि नहीं? आपने 1000 करोड़ रुपएका निर्भया का फंड बनाया, एक साल हो गया, एकपैसा खर्च नहीं किया। येनीच राजनीति है कि नहीं है? ये निर्भया के साथ धोखा है, ये नीच कर्म है कि नहीं है? नीच राजनीति कौन करता है?'
मोदी के इस बयान से लेकर आज तक 5 साल 8 महीने और 5 दिन हो गए हैं। यूपीए सरकार में बना निर्भया फंड आज भी है। लेकिन जिस निर्भया फंड को एक हजार करोड़ की राशि के साथ शुरू किया गया था। उसकी राशि मोदी सरकार में ही आधी कर दी गई। निर्भया फंड को शुरू करने के दो साल तक ही हजार करोड़ रुपए डाले गए, लेकिन पिछले तीन साल में इसमें 1600 करोड़ रुपए ही डाले गए। जबकि, मोदी सरकार आने के अगले ही साल यानी 2015-16 में इसके लिए कोई राशि ही नहीं दी गई। ये बात हम नहीं बल्कि खुद सरकार 27 जुलाई 2018 को लोकसभा में बताई थी। उस समय 11 विपक्षी सांसदों के सवाल पर महिला-बाल विकास मंत्रालय की तरफ से बताया गया था कि 2018-19 तक निर्भया फंड के लिए पब्लिक अकाउंट में 3,600 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जा चुके हैं। 2018-19 के बजट में निर्भया फंड के लिए 500 करोड़ रुपए का आवंटन ही किया गया है, जो अभी तक का सबसे कम है।
5 साल में महिला सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए 5670 करोड़ मंजूर, लेकिन 76% का ही इस्तेमाल ही नहीं
लोकसभा में 26 जुलाई 2019 को जुगल किशोर शर्मा, संजय जायसवाल और रीति पाठक ने निर्भया फंड के अंतर्गत शुरू हुए प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी मांगी थी। जिसके जवाब मेंमहिला-बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने अलग-अलग मंत्रालयों के अधीन शुरू किए गए प्रोजेक्ट और उनके खर्च के बारे में बताया था। इन मंत्रालयों में गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, सड़क-परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, महिला-बाल विकास मंत्रालय, न्यायिक मंत्रालय और आईटी मंत्रालय शामिल थे। जवाब के मुताबिक, निर्भया फंड के अंतर्गत महिला सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए 5670.41 करोड़ रुपए अलग-अलग मंत्रालयों को दिए जा चुके हैं, लेकिन इसमें से सिर्फ 1376.81 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं, जो सिर्फ 24% होता है। यानी 76% फंड का अभी तक इस्तेमाल ही नहीं हुआ।
राज्यों की हालत भी खराब: अभी तक जितना फंड दिया गया, उसमें से 9% से कम का ही इस्तेमाल
सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए निर्भया फंड शुरू तो कर दिया और इसके जरिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को राशि भी दी जा रही है। लेकिन, इसके बावजूद इन पैसों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। अलग-अलग मंत्रालयों की तरफ से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए राशि मिलती है। अकेले गृह मंत्रालय की तरफ से 1672.21 करोड़ रुपए की राशि दी गई है, लेकिन इसमें से 9% से भी कम यानी सिर्फ 146.98 करोड़ रुपए ही खर्च हुए हैं। गृह मंत्रालय की तरफ से सबसे ज्यादा राशि 390.90 करोड़ रुपए दिल्ली को दिए गए, लेकिन उसमें से सिर्फ 19.41 करोड़ ही खर्च हो पाए। इस बात की जानकारी 9 नवंबर 2018 को एक सवाल के जवाब में स्मृति ईरानी ने लोकसभा में दी थी।
अलग-अलग मंत्रालयों की तरफ से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी फंड और खर्च का ब्यौरा
महिला सुरक्षा के लिए तीन प्रमुख योजनाओं का क्या हुआ?
1) महिला पुलिस वॉलेंटियर स्कीम : 22% राशि ही खर्च हुई
जुलाई 2019 में इसे शुरू किया गया। इसके तहत कोई भी महिला या लड़की वॉलेंटियरिंग कर सकती है। इसके लिए हर महीने 1000 रुपए का मानदेय दिया जाता है। इस स्कीम के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की तरफ से 16.23 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, लेकिन इसमें से 22% यानी 3.58 करोड़ ही खर्च हुए हैं।
2) वन स्टॉप सेंटर स्कीम : 13% राशि का ही इस्तेमाल हुआ
किसी भी तरह की हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को एक ही छत के नीचे पुलिस, कानूनी, चिकित्सा सहायता और रहने की व्यवस्था मिल सके, इसके लिए 2015 में इस योजना को शुरू किया गया। इसके लिए निर्भया फंड के जरिए 311.14 करोड़ रुपए दिए गए, जिसमें से 43 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं। यानी कि जितनी राशि दी गई, उसका सिर्फ 13% ही इस्तेमाल हो पाया।
3) महिला हेल्पलाइन योजना : 47% राशि को खर्च ही नहीं कर सके
महिलाओं की मदद के लिए केंद्र सरकार ने 2015 में इस योजना को शुरू किया गया था। इसके लिए सरकार की तरफ से 45.26 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। जबकि, 24.16 करोड़ रुपए ही इस योजना पर खर्च हुए हैं। महिला हेल्पलाइन के लिए सरकार की तरफ से जारी पैसे में से 47% राशि खर्च ही नहीं हो सकी।
क्या है निर्भया फंड?
दिसंबर 2012 में हुए निर्भया केस के बाद 2013-14 के बजट में तत्कालीन यूपीए सरकार ने निर्भया फंड की शुरुआत की। ये फंड महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन काम करता है। पहले दो साल इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसमें एक हजार करोड़ रुपए डाले थे। यही मंत्रालय निर्भया फंड की नोडल एजेंसी है। पहले यही मंत्रालय बाकी मंत्रालयों को फंड जारी करता था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार या राज्य सरकारों की तरफ से निर्भया स्कीम के तहत प्रोग्राम या प्रोजेक्ट मंत्रालय को दिए जाते हैं, जिसे संबंधित मंत्रालय मंजूर करता है और उसे इकोनॉमिक अफेयर्स मंत्रालय के पास भेजता है। इकोनॉमिक अफेयर्स मंत्रालय की तरफ से ही फंड जारी किया जाता है।
नई दिल्ली.दिन: बुधवार। तारीख: 7 मई 2014। जगह: बेतिया, बिहार। भाजपा की चुनावी रैली। भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी बोल रहे हैं- 'भाइयो-बहनो... दिल्ली की धरती पर निर्भया का कांड हुआ। एक गरीब बेटी को जुल्म से मार दिया गया। उसपे बलात्कार हुआ। ये निर्भया का कांड आपकी आंख के सामने हुआ। ये नीच राजनीति है कि नहीं? आपने 1000 करोड़ रुपएका निर्भया का फंड बनाया, एक साल हो गया, एकपैसा खर्च नहीं किया। येनीच राजनीति है कि नहीं है? ये निर्भया के साथ धोखा है, ये नीच कर्म है कि नहीं है? नीच राजनीति कौन करता है?'
मोदी के इस बयान से लेकर आज तक 5 साल 8 महीने और 5 दिन हो गए हैं। यूपीए सरकार में बना निर्भया फंड आज भी है। लेकिन जिस निर्भया फंड को एक हजार करोड़ की राशि के साथ शुरू किया गया था। उसकी राशि मोदी सरकार में ही आधी कर दी गई। निर्भया फंड को शुरू करने के दो साल तक ही हजार करोड़ रुपए डाले गए, लेकिन पिछले तीन साल में इसमें 1600 करोड़ रुपए ही डाले गए। जबकि, मोदी सरकार आने के अगले ही साल यानी 2015-16 में इसके लिए कोई राशि ही नहीं दी गई। ये बात हम नहीं बल्कि खुद सरकार 27 जुलाई 2018 को लोकसभा में बताई थी। उस समय 11 विपक्षी सांसदों के सवाल पर महिला-बाल विकास मंत्रालय की तरफ से बताया गया था कि 2018-19 तक निर्भया फंड के लिए पब्लिक अकाउंट में 3,600 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जा चुके हैं। 2018-19 के बजट में निर्भया फंड के लिए 500 करोड़ रुपए का आवंटन ही किया गया है, जो अभी तक का सबसे कम है।
5 साल में महिला सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए 5670 करोड़ मंजूर, लेकिन 76% का ही इस्तेमाल ही नहीं
लोकसभा में 26 जुलाई 2019 को जुगल किशोर शर्मा, संजय जायसवाल और रीति पाठक ने निर्भया फंड के अंतर्गत शुरू हुए प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी मांगी थी। जिसके जवाब मेंमहिला-बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने अलग-अलग मंत्रालयों के अधीन शुरू किए गए प्रोजेक्ट और उनके खर्च के बारे में बताया था। इन मंत्रालयों में गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, सड़क-परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, महिला-बाल विकास मंत्रालय, न्यायिक मंत्रालय और आईटी मंत्रालय शामिल थे। जवाब के मुताबिक, निर्भया फंड के अंतर्गत महिला सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए 5670.41 करोड़ रुपए अलग-अलग मंत्रालयों को दिए जा चुके हैं, लेकिन इसमें से सिर्फ 1376.81 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं, जो सिर्फ 24% होता है। यानी 76% फंड का अभी तक इस्तेमाल ही नहीं हुआ।
राज्यों की हालत भी खराब: अभी तक जितना फंड दिया गया, उसमें से 9% से कम का ही इस्तेमाल
सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए निर्भया फंड शुरू तो कर दिया और इसके जरिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को राशि भी दी जा रही है। लेकिन, इसके बावजूद इन पैसों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। अलग-अलग मंत्रालयों की तरफ से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए राशि मिलती है। अकेले गृह मंत्रालय की तरफ से 1672.21 करोड़ रुपए की राशि दी गई है, लेकिन इसमें से 9% से भी कम यानी सिर्फ 146.98 करोड़ रुपए ही खर्च हुए हैं। गृह मंत्रालय की तरफ से सबसे ज्यादा राशि 390.90 करोड़ रुपए दिल्ली को दिए गए, लेकिन उसमें से सिर्फ 19.41 करोड़ ही खर्च हो पाए। इस बात की जानकारी 9 नवंबर 2018 को एक सवाल के जवाब में स्मृति ईरानी ने लोकसभा में दी थी।
अलग-अलग मंत्रालयों की तरफ से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी फंड और खर्च का ब्यौरा
महिला सुरक्षा के लिए तीन प्रमुख योजनाओं का क्या हुआ?
1) महिला पुलिस वॉलेंटियर स्कीम : 22% राशि ही खर्च हुई
जुलाई 2019 में इसे शुरू किया गया। इसके तहत कोई भी महिला या लड़की वॉलेंटियरिंग कर सकती है। इसके लिए हर महीने 1000 रुपए का मानदेय दिया जाता है। इस स्कीम के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की तरफ से 16.23 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, लेकिन इसमें से 22% यानी 3.58 करोड़ ही खर्च हुए हैं।
2) वन स्टॉप सेंटर स्कीम : 13% राशि का ही इस्तेमाल हुआ
किसी भी तरह की हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को एक ही छत के नीचे पुलिस, कानूनी, चिकित्सा सहायता और रहने की व्यवस्था मिल सके, इसके लिए 2015 में इस योजना को शुरू किया गया। इसके लिए निर्भया फंड के जरिए 311.14 करोड़ रुपए दिए गए, जिसमें से 43 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं। यानी कि जितनी राशि दी गई, उसका सिर्फ 13% ही इस्तेमाल हो पाया।
3) महिला हेल्पलाइन योजना : 47% राशि को खर्च ही नहीं कर सके
महिलाओं की मदद के लिए केंद्र सरकार ने 2015 में इस योजना को शुरू किया गया था। इसके लिए सरकार की तरफ से 45.26 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। जबकि, 24.16 करोड़ रुपए ही इस योजना पर खर्च हुए हैं। महिला हेल्पलाइन के लिए सरकार की तरफ से जारी पैसे में से 47% राशि खर्च ही नहीं हो सकी।
क्या है निर्भया फंड?
दिसंबर 2012 में हुए निर्भया केस के बाद 2013-14 के बजट में तत्कालीन यूपीए सरकार ने निर्भया फंड की शुरुआत की। ये फंड महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन काम करता है। पहले दो साल इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसमें एक हजार करोड़ रुपए डाले थे। यही मंत्रालय निर्भया फंड की नोडल एजेंसी है। पहले यही मंत्रालय बाकी मंत्रालयों को फंड जारी करता था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार या राज्य सरकारों की तरफ से निर्भया स्कीम के तहत प्रोग्राम या प्रोजेक्ट मंत्रालय को दिए जाते हैं, जिसे संबंधित मंत्रालय मंजूर करता है और उसे इकोनॉमिक अफेयर्स मंत्रालय के पास भेजता है। इकोनॉमिक अफेयर्स मंत्रालय की तरफ से ही फंड जारी किया जाता है।
from Dainik Bhaskar /db-originals/news/nirbhaya-fund-utilization-by-narendra-modi-states-government-news-updates-on-nirbhaya-fund-amount-126495797.html
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कोच्चि .केरल के कोच्चि शहर में प्रशासन ने शनिवार को दो बहुमंजिला रिहायशी इमारतों होली फेथ एच-20 और अल्फा सेरेन को विस्फोट कर गिरा दिया। 19 मंजिला होली फेथ में 90 और 16 मंजिला अल्फा सेरेन में 80 फ्लैट थे। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में ऐसी चार इमारतों को समुद्र तटीय निर्माण नियमों के उल्लंघन के कारण गिराने का आदेश दिया था। दो अन्य इमारतें गोल्डन कायालोरम और जैन कोरल रविवार को गिराई जाएंगी। कोर्ट ने चारों इमारतें गिराने के लिए 138 दिन दिए थे। अधिकारियों के मुताबिक होली फेथ और अल्फा सेरेन को गिराने में करीब 800 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। सुरक्षा के लिहाज से इमारतों से 200 मीटर के दायरे में धारा-144 लगा दी गई थी। आसपास ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध था। सुरक्षाबलों के हेलीकॉप्टरों ने वायुक्षेत्र और नौकाओं ने समुद्री क्षेत्र का मुआयना किया। सड़कों पर करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात थे। इनके अलावा 300 लोगों की टीम यातायात और भीड़ को नियंत्रित कर रही थी।
800 किलो बारूद लगा, धारा-144 लगानी पड़ी
कार्रवाई से 4 घंटे पहले आसपास के इलाकों को खाली कराया गया। लोगों से कहा गया कि वे घर छोड़ने से पहले बिजली उपकरण, खिड़कियां-दरवाजे बंद कर दें, ताकि आग और प्रदूषण से बचा जा सके।
कुछ लोगों ने कहा कि उन्होंने इन इमारतों में एक-एक करोड़ रुपए में फ्लैट खरीदे थे। उनका सपना टूट गया। बता दें कि कोर्ट ने प्रत्येक फ्लैट मालिक को 25-25 लाख रुपए मुआवजा का आदेश दिया था।
नई दिल्ली.नई दिल्ली. जनरल मनोज मुकुंद नरवणे शनिवार को सेना प्रमुख बनाए जाने के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अभी हम भविष्य में काम आने वाली ट्रेनिंग दे रहे हैं। हमारा जोर संख्याबल पर नहीं, गुणवत्ता पर है। हम तय करेंगे कि हमारे लोग अपना सर्वश्रेष्ठ दें।
नरवणे ने यह भी कहा कि तीनों सेनाओं के भीतर तालमेल बेहद जरूरी है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) इस क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। सेना बदलाव की प्रक्रिया में है। हम हमेशा यह तय करने की कोशिश करेंगे कि हमें बेस्ट मिले। हमारे सामने जो भी चुनौतियां आएं भविष्य में हम उनके लिए तैयार रहें। यही हमारा फोकस है।संविधान के प्रति निष्ठा ही हर वक्त हमारी मार्गदर्शक होनी चाहिए। हम संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे को आधार बनाकर ही आगे बढ़ेंगे।
31 दिसंबर को नरवणे सेना प्रमुख बनाए गए
पूर्व सेना प्रमुख बिपिन रावत के इस्तीफा देने के बाद नरवणे ने 31 दिसंबर को 28वें सेना प्रमुख का पदभार संभाला। जनरल विपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाए गए। इससे पहले,जनरलनरवणेगुरुवार को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रसियाचिन पहुंचे थे।
नई दिल्ली.नई दिल्ली. जनरल मनोज मुकुंद नरवणे शनिवार को सेना प्रमुख बनाए जाने के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अभी हम भविष्य में काम आने वाली ट्रेनिंग दे रहे हैं। हमारा जोर संख्याबल पर नहीं, गुणवत्ता पर है। हम तय करेंगे कि हमारे लोग अपना सर्वश्रेष्ठ दें।
नरवणे ने यह भी कहा कि तीनों सेनाओं के भीतर तालमेल बेहद जरूरी है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) इस क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। सेना बदलाव की प्रक्रिया में है। हम हमेशा यह तय करने की कोशिश करेंगे कि हमें बेस्ट मिले। हमारे सामने जो भी चुनौतियां आएं भविष्य में हम उनके लिए तैयार रहें। यही हमारा फोकस है।संविधान के प्रति निष्ठा ही हर वक्त हमारी मार्गदर्शक होनी चाहिए। हम संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे को आधार बनाकर ही आगे बढ़ेंगे।
31 दिसंबर को नरवणे सेना प्रमुख बनाए गए
पूर्व सेना प्रमुख बिपिन रावत के इस्तीफा देने के बाद नरवणे ने 31 दिसंबर को 28वें सेना प्रमुख का पदभार संभाला। जनरल विपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाए गए। इससे पहले,जनरलनरवणेगुरुवार को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रसियाचिन पहुंचे थे।
from Dainik Bhaskar /national/news/general-narwanes-first-press-conference-after-becoming-army-chief-training-future-emphasizing-quality-not-numbers-126492398.html
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मुंबई. देश के सबसे बड़े पेमेंट प्लेटफॉर्म पेटीएम ने व्यापारियों के लिए ऑल-इन-वन क्यूआर शुरू करने की घोषणा की है। यह क्यूआर व्यापारियों से बिना कोई शुल्क लिए उन्हें सीधे पेटीएम वॉलेट, रुपे कार्ड और सभी यूपीआई आधारित भुगतान ऐप के माध्यम से असीमित भुगतान स्वीकार करने की सुविधा देगा। यह प्लेटफार्म अपने 'पेटीएम फॉर बिजनेस' ऐप के माध्यम से सभी भुगतानों के लिए सिंगल विंडो की सुविधा देता है।