Sunday, January 12, 2020

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नई दिल्ली. देश में हो रहेछात्रों केविरोध, नागरिकता कानून,एनआरसी औरमौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के लिए विपक्षी पार्टियां सोमवार को बैठक करेंगी। इसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बसपा प्रमुख मायावती शामिल नहीं होंगी।

ममता बनर्जी ने पिछले हफ्तेट्रेड यूनियन की स्ट्राइक के दौरान वामदलों औरतृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पों की वजह से घोषणा की थी कि वह विपक्षी बैठक में शामिल नहीं होंगी। उन्होंने कहा था कि मैंने ही विपक्ष को बैठक का विचार दिया।राज्य में जो हुआ, इसकी वजह से मेरे लिए अब बैठक में शामिल होना संभव नहीं है। एनआरसी-सीएए के खिलाफ सबसे पहले मैंने आंदोलन शुरू किया। सीएए-एनआरसी के नाम पर वामपंथी और कांग्रेस जो कर रहे हैं, वह आंदोलन नहीं, बल्कि बर्बरता है।

मायावती ने प्रियंका की पीड़ित परिवारों से मुलाकात को ड्रामा बताया था

मायावती ने भी हाल ही में राजस्थान में कोटा के एक अस्पताल में बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर हमला किया था। उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस महासचिव बच्चों को खोने वाली माताओं से मिलने के लिए कोटा नहीं जाएंगी, तो उत्तर प्रदेश में पीड़ित परिवारों के साथ उनकी मुलाकात को राजनीतिक हित और ड्रामा ही माना जाएगा।

सोनिया ने सीएए को विभाजनकारी कानून बताया था

कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने शनिवार को नागरिकता कानून को एक भेदभावपूर्ण और विभाजनकारी कानून करार दिया था, जिसका उद्देश्य लोगों को धार्मिक आधार पर बांटना है। पार्टी ने सीएए को तत्काल वापस लेने और एनपीआर की प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी।

कई मुख्यमंत्रियों ने कहा- वे अपने राज्यों मेंसीएए-एनआरसी लागू नहीं करेंगे

पिछले महीने सीएए को लेकर विरोध कर रहे दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। इसके बाद देशभर के यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इसमें राजनीतिक दल भी शामिल हो गए थे। भाजपा ने सीएए को लेकर कांग्रेस पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। ममता बनर्जी और कांग्रेस शासित राज्यों में कई मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि वे अपने राज्यों में सीएए या एनआरसी की अनुमति नहीं देंगे। उधर, केरल के विधानसभा में सीएए को राज्य में पारित नहीं किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी पास किया गया था।



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सोनिया गांधी ने शनिवार को सीएए को वापस लेने और एनपीआर की प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी। -फाइल फोटो


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नई दिल्ली. देश में हो रहेछात्रों केविरोध, नागरिकता कानून,एनआरसी औरमौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के लिए विपक्षी पार्टियां सोमवार को बैठक करेंगी। इसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बसपा प्रमुख मायावती शामिल नहीं होंगी।

ममता बनर्जी ने पिछले हफ्तेट्रेड यूनियन की स्ट्राइक के दौरान वामदलों औरतृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पों की वजह से घोषणा की थी कि वह विपक्षी बैठक में शामिल नहीं होंगी। उन्होंने कहा था कि मैंने ही विपक्ष को बैठक का विचार दिया।राज्य में जो हुआ, इसकी वजह से मेरे लिए अब बैठक में शामिल होना संभव नहीं है। एनआरसी-सीएए के खिलाफ सबसे पहले मैंने आंदोलन शुरू किया। सीएए-एनआरसी के नाम पर वामपंथी और कांग्रेस जो कर रहे हैं, वह आंदोलन नहीं, बल्कि बर्बरता है।

मायावती ने प्रियंका की पीड़ित परिवारों से मुलाकात को ड्रामा बताया था

मायावती ने भी हाल ही में राजस्थान में कोटा के एक अस्पताल में बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर हमला किया था। उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस महासचिव बच्चों को खोने वाली माताओं से मिलने के लिए कोटा नहीं जाएंगी, तो उत्तर प्रदेश में पीड़ित परिवारों के साथ उनकी मुलाकात को राजनीतिक हित और ड्रामा ही माना जाएगा।

सोनिया ने सीएए को विभाजनकारी कानून बताया था

कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने शनिवार को नागरिकता कानून को एक भेदभावपूर्ण और विभाजनकारी कानून करार दिया था, जिसका उद्देश्य लोगों को धार्मिक आधार पर बांटना है। पार्टी ने सीएए को तत्काल वापस लेने और एनपीआर की प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी।

कई मुख्यमंत्रियों ने कहा- वे अपने राज्यों मेंसीएए-एनआरसी लागू नहीं करेंगे

पिछले महीने सीएए को लेकर विरोध कर रहे दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। इसके बाद देशभर के यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इसमें राजनीतिक दल भी शामिल हो गए थे। भाजपा ने सीएए को लेकर कांग्रेस पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। ममता बनर्जी और कांग्रेस शासित राज्यों में कई मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि वे अपने राज्यों में सीएए या एनआरसी की अनुमति नहीं देंगे। उधर, केरल के विधानसभा में सीएए को राज्य में पारित नहीं किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी पास किया गया था।



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वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान में सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। ईरान की जनता रूहानी सरकार के खिलाफ विमान हादसे पर दो दिन से प्रदर्शन कर रही है। इन्हें काबू में करने के लिए पुलिस ने रविवार को भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद ट्रम्प ने प्रदर्शनों पर एक ही दिन में दूसरा ट्वीट किया और कहा- “राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने बताया कि नए प्रतिबंधों से ईरान का दम घुट गया है और वे समझौता करने के लिए मजबूर होने वाले हैं। असल में मुझे चिंता नहीं है कि वे समझौता करते हैं या नहीं। लेकिन ईरानी नेताओं को संदेश है कि उन्हें परमाणु हथियार नहीं बनाने हैंऔर प्रदर्शनकारियों को नहीं मारना चाहिए।

ट्रम्प ने आगे कहा, “हजारों को पहले ही मारा या जेल में डाला जा चुका है और पूरी दुनिया देख रही है। सबसे जरूरी है कि अबअमेरिका भी देख रहा है। अपना इंटरनेट शुरू करो और रिपोर्टर्स को आजादी से घूमने दो। अपने महान ईरानियों का कत्ल बंद करो।”

ईरान में अचानक क्यों भड़के प्रदर्शन?
ईरान ने 8 जनवरी को यूक्रेन के विमान को मार गिराया था। ईरान ने शनिवार को कबूला कि उसकी सेना ने गलती से यूक्रेन के यात्री विमान को निशाना बना दिया। सरकार की तरफ से जारी बयान में इसे इंसानी भूल (ह्यूमन एरर) बताया गया। इस घटना के बाद से ईरान में हजारों लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

ट्रम्प ईरान के लिए फारसी में ट्वीट कर चुके हैं
इससे पहले ट्रम्प ने शनिवार रात को भी ईरान के प्रदर्शनों पर फारसी में ट्वीट किया था। उन्होंने कहा था- ईरान के बहादुर और लंबे समय से पीड़ित लोगों के साथ मैं अपने कार्यकाल की शुरुआत से खड़ा हूं। मेरा प्रशासन आपके साथ खड़ा रहेगा। शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों का नरसंहार नहीं होना चाहिए, न ही उनका इंटरनेट बंद होना चाहिए। पूरी दुनिया देख रही है।

एनएसए ने कहा था- ईरान के पास बातचीत के अलावा कोई चारा नहीं

ट्रम्प का यह बयान उनके एनएसए रॉबर्ट ओ ब्रायन के एक न्यूज चैनल से किए ईरान के बारे में किए दावों के बाद आया। राॅबर्ट ने कहा कि नए प्रतिबंधों की वजह से ईरान के पास समझौते के अलावा कोई चारा नहीं है। हमारा ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाने का अभियान काम कर रहा है। उसके पास विकल्प कम हैं और उसे बात करनी ही होगी।

रॉबर्ट ने कहा, “ईरान की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव है और ऐसे में जब छात्र विमान हादसे पर बाहर आकर ‘तानाशाह को मौत’ जैसे नारे लगाएं और हजारों ईरानी सड़कों पर उतरें तो इस तरह का दबाव उन्हें समझौते के लिए आगे लेकर ही आएगा।



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ट्रम्प की ईरान की रूहानी सरकार को चेतावनी- हम प्रदर्शनकारियों के साथ, पूरी दुनिया तुम्हें देख रही।


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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में 2017 से 2019 तक486 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, इनमें 213 लोगों की मौत हो गई।ज्यादातर दुर्घटनाएं तेज रफ्तार और रोड के घुमावदार होने के कारणहुईं।बस हादसेके बाद भी स्थानीयप्रशासन सतर्क नहीं है।कन्नौजमें 13 ब्लैक स्पॉट चिह्नितहैं। इसके बावजूद 100 मीटर के दायरे में कहीं कोई संकेतक बोर्डनहीं लगाया गया है। कन्नौज बस हादसे में आग लगने से 20 लोगों के जलने की आशंका है।

हालांकि, अब जिला प्रशासन एहतियातन उन जगहों को चिह्नितकरने में जुट गया है, जहां सबसे ज्यादा हादसे हुए। छिबरामऊ पुलिस के अनुसार,2018 में इसी रोड पर 3बड़े हादसे हुए। 2019 में एक ही केसदर्ज है। इस दौरान किसी की मौत नहीं हुई। सिर्फ 8 लोग घायल हुए।हाल ही मेंहुए हादसे में 11 की मौत की पुष्टि हुई और 25 घायल हुए हैं। हर बार हादसों के बाद जागरूकता अभियान चलाया गया।

परिवहन विभाग ने किए हैं चिह्नित
परिवहन विभाग का दावा है कि जिले में हादसोंको रोकने के लिए सुरक्षा के उपाय बढ़ाए जाएंगे।आरटीओ संजय कुमार झा ने बताया किविभाग ने जिले में 13 जगहों को ब्लैक स्पॉट के तौर परचिह्नितकिया है। इन सभी जगहों पर जल्द सांकेतिक बोर्ड लगाए जाएंगे। इसमें रिफ्लेक्टर औरलाइट्सलगाई जाएंगी।

एक्सप्रेस-वे, हाईवे पर भी स्पॉट चिह्नित
हाइवे पर मानीमऊ बाजार, मोजचीपुर रेलवे क्रॉसिंग, तिर्वा क्रॉसिंग, अंधा मोड़ सरायमीरा, मकरंदनगर क्रॉसिंग, गोर्वधनी तिराहा, हरदोई मोड़, पश्चिमी बाइपास, मंडी समिति, सिकंदपुर कस्बा, करमुल्ला चौराहा, सराय प्रयाग, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे 207 से 210 तक ब्लैक स्पॉट चिह्नित किएगए हैं। एसपी अमेन्द्र सिंह का कहना है कि छिबरामऊ ब्लैक स्पॉट में दर्ज हैं और वहां पर संकेतक चिह्नभी है।

क्या है ब्लैक स्पॉट्स?
एक ही स्पॉट पर 3 साल में कम से कम 5 से अधिक हादसे और 3 से ज्यादा मौतें हुई हों, उस जगह को ब्लैक स्पॉट कहा जाता है। आरटीओ, ट्रैफिक और पीडब्ल्यूडी टीम के सर्वे के बाद इन्हें ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया जाता है। ऐसी जगहों पर हादसे को टालने के लिए वैकल्पिक सड़क बनाए जाने की भी व्यवस्था है। ‘धीरे चलें’, ‘दुर्घटना बाहुल्य इलाका है’, ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’जैसे स्लोगन लगे बोर्ड ब्लैक स्पॉट्स पर हादसे को रोकने के लिए लगाए जाते हैं। स्पीड ब्रेकर बनाए जाते हैं, जिससे तेज गति में कोई गाड़ी न गुजरे।

ट्रक से भिड़ंत के बाद बस में आग लग गई थी

कन्नौज केछिबरामऊ इलाके मेंजीटी रोड पर बिलोई गांवके पास शुक्रवार रात (10 जनवरी) ट्रक की टक्कर के बाद स्लीपर बस में आग लग गई थी। हादसे के बाद बमुश्किल 10-12 सवारियां सुरक्षित निकल सकीं। करीब 20 लोगों के जलने की आशंका है, जिनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लिया जाएगा। वहीं, करीब 25 यात्रियों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। ये यात्री झुलस गए थे। हादसे के बाद एक के बाद एक तीन ब्लास्ट हुए, जिससे लोगों को निकलने का मौका तक नहीं मिला था।हादसे की वजह कोहरे बताया जा रहा है।



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छिबरामऊ में ट्रक से टक्कर के बाद बस में लग गई थी आग।- फाइल


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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में 2017 से 2019 तक486 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, इनमें 213 लोगों की मौत हो गई।ज्यादातर दुर्घटनाएं तेज रफ्तार और रोड के घुमावदार होने के कारणहुईं।बस हादसेके बाद भी स्थानीयप्रशासन सतर्क नहीं है।कन्नौजमें 13 ब्लैक स्पॉट चिह्नितहैं। इसके बावजूद 100 मीटर के दायरे में कहीं कोई संकेतक बोर्डनहीं लगाया गया है। कन्नौज बस हादसे में आग लगने से 20 लोगों के जलने की आशंका है।

हालांकि, अब जिला प्रशासन एहतियातन उन जगहों को चिह्नितकरने में जुट गया है, जहां सबसे ज्यादा हादसे हुए। छिबरामऊ पुलिस के अनुसार,2018 में इसी रोड पर 3बड़े हादसे हुए। 2019 में एक ही केसदर्ज है। इस दौरान किसी की मौत नहीं हुई। सिर्फ 8 लोग घायल हुए।हाल ही मेंहुए हादसे में 11 की मौत की पुष्टि हुई और 25 घायल हुए हैं। हर बार हादसों के बाद जागरूकता अभियान चलाया गया।

परिवहन विभाग ने किए हैं चिह्नित
परिवहन विभाग का दावा है कि जिले में हादसोंको रोकने के लिए सुरक्षा के उपाय बढ़ाए जाएंगे।आरटीओ संजय कुमार झा ने बताया किविभाग ने जिले में 13 जगहों को ब्लैक स्पॉट के तौर परचिह्नितकिया है। इन सभी जगहों पर जल्द सांकेतिक बोर्ड लगाए जाएंगे। इसमें रिफ्लेक्टर औरलाइट्सलगाई जाएंगी।

एक्सप्रेस-वे, हाईवे पर भी स्पॉट चिह्नित
हाइवे पर मानीमऊ बाजार, मोजचीपुर रेलवे क्रॉसिंग, तिर्वा क्रॉसिंग, अंधा मोड़ सरायमीरा, मकरंदनगर क्रॉसिंग, गोर्वधनी तिराहा, हरदोई मोड़, पश्चिमी बाइपास, मंडी समिति, सिकंदपुर कस्बा, करमुल्ला चौराहा, सराय प्रयाग, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे 207 से 210 तक ब्लैक स्पॉट चिह्नित किएगए हैं। एसपी अमेन्द्र सिंह का कहना है कि छिबरामऊ ब्लैक स्पॉट में दर्ज हैं और वहां पर संकेतक चिह्नभी है।

क्या है ब्लैक स्पॉट्स?
एक ही स्पॉट पर 3 साल में कम से कम 5 से अधिक हादसे और 3 से ज्यादा मौतें हुई हों, उस जगह को ब्लैक स्पॉट कहा जाता है। आरटीओ, ट्रैफिक और पीडब्ल्यूडी टीम के सर्वे के बाद इन्हें ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया जाता है। ऐसी जगहों पर हादसे को टालने के लिए वैकल्पिक सड़क बनाए जाने की भी व्यवस्था है। ‘धीरे चलें’, ‘दुर्घटना बाहुल्य इलाका है’, ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’जैसे स्लोगन लगे बोर्ड ब्लैक स्पॉट्स पर हादसे को रोकने के लिए लगाए जाते हैं। स्पीड ब्रेकर बनाए जाते हैं, जिससे तेज गति में कोई गाड़ी न गुजरे।

ट्रक से भिड़ंत के बाद बस में आग लग गई थी

कन्नौज केछिबरामऊ इलाके मेंजीटी रोड पर बिलोई गांवके पास शुक्रवार रात (10 जनवरी) ट्रक की टक्कर के बाद स्लीपर बस में आग लग गई थी। हादसे के बाद बमुश्किल 10-12 सवारियां सुरक्षित निकल सकीं। करीब 20 लोगों के जलने की आशंका है, जिनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लिया जाएगा। वहीं, करीब 25 यात्रियों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। ये यात्री झुलस गए थे। हादसे के बाद एक के बाद एक तीन ब्लास्ट हुए, जिससे लोगों को निकलने का मौका तक नहीं मिला था।हादसे की वजह कोहरे बताया जा रहा है।



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छिबरामऊ में ट्रक से टक्कर के बाद बस में लग गई थी आग।- फाइल


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नादिया (पश्चिम बंगाल). पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने रविवार को कहा कि राज्य में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को हम गोली मार देंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसे लोगों न केवल हिरासत में लिया था। बल्कि उनपर लाठीचार्ज भी की और गोलियां भी बरसाईं थीं।

खड़गपुर के सांसद दिलीप घोष नागरिकता कानून के समर्थन में एक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे।उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। क्योंकि वे उनके वोटर हैं।

‘ममता बनर्जी के वे वोटर हैं, इसलिए कार्रवाई नहीं करतीं’

घोष ने कहा कि उन्हें क्या लगता है वे जिस सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, क्या उनके पिता की है? सार्वजनिक संपत्ति करदाताओं की है। आप (ममता) कुछ नहीं कहती, क्योंकि वे आपके वोटर हैं। असम और उत्तर प्रदेश में, हमारी सरकार ने ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की थी।

‘हमारा खाना खाते हैं और हमारी ही संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं’

उन्होंने कहा कि आप यहां आते हैं, हमारा खाना खाते हैं, यहां रहते हैं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। क्या यह आपकी जमींदारी है? हम आपको लाठियों से पीटेंगे, आपको गोली मार देंगे और आपको जेल में डाल देंगे। ममता बनर्जी इनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं करना चाहती हैं।



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बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष। -फाइल


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उन्नाव. उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में जिंदा जलाई गईगैंगरेप पीड़ितकी मौत को 37 दिन बीत चुके हैं। परिवार सरकार जिला प्रशासन के एक्शन से संतुष्ट नहीं है। पीड़ित की बहन ने कहा- हमें मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया जा रहा है। जब भी लखनऊ जाने की कोशिश करते हैं, जिला प्रशासन रोक लेता है। अभी तक दीदी का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं भेजा गया है। जबकि सीएम ने खुद इसका आश्वासन दिया था। मैं चाहती हूं किदीदी के हत्यारों को फांसी मिले। दीदी को जिंदा जलाने वाले धमकी देते हैं। कहते हैं किबयान दिया तोतुम्हारी ऐसी हालत करेंगे कि किसी लायक नहीं रहोगी। बहन ने कहा-मैं13 जनवरी को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए लखनऊ जाऊंगी, अगर किसी ने रोकने की कोशिश की तो आत्मदाह कर लूंगी।

प्रशासन ने रोकने की कोशिश की, तब भीनहीं रुकेंगे

पीड़ित की बहन ने कहा- 5दिसंबर को हमारी बहन को जिंदा जलाया गया था।सीएम से मिलने के लिएतीन-चार बार लखनऊ जाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने रोक दिया। एक बार तो घर से निकलने ही नहीं दिया गया। 13 जनवरी को किसी प्रशासन के अधिकारी ने रोकने की कोशिश की तो हम नहीं रुकेंगे। आत्महत्या कर लेंगे। यह बात हमनेथाने में भी बोल दीहै।


प्रकरण को दबाने की कोशिश
पीड़ित की बहन ने कहा- मैंने औरमेरे भाई ने करीब 6 बार डीएम से मुलाकात की, लेकिन सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। बस यही कहा जाता है किमामले में एक्शन हो रहा है। लेकिन क्या हो रहा है, कुछ पता नहीं। इस प्रकरण को कुछ लोग दबाना चाहते हैं।

मांग पूरी नहीं हुई, रोज मिल रहीं धमकियां
पीड़ित की बहन ने कहा- सरकार ने नौकरी, मकान औरआर्थिक मदद देने का आश्वासन दिया था। लेकिन, अभी तक सिर्फ रुपए पिताजी के खाते में आए हैं। मालूम हो किसरकार ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए की सहायता प्रदान की थी। बहन ने कहा- मकान औरनौकरी की मांग अधूरी है। रोज-रोज धमकियां मिल रही हैं। सरकार केसुरक्षा देने केसवाल पर कहा- तीन दिन पहले राशन लेने दुकान पर गई थीतभी वाजपेयी परिवार का एक लड़का औरकुछ औरतें पीछे लगी थीं। उन लोगों ने कहा- तुमको मारेंगे तो बयान भी नहीं दे पाओगी। हर समय सुरक्षा वाले साथ नहीं होते हैं। धमकियां ग्रामीणों के सामने दी गईं।लेकिन, वे डरे सहमे हैं। इसलिए कोई खुलकर हमारा समर्थन भी नहीं करता है।


क्या था मामला, अब तक क्या हुआ?
उन्नाव के बिहार इलाके में 5 दिसंबर को गैंगरेप केस की पैरवी करने के लिए पीड़ितरायबरेली कोर्ट जा रही थी। तड़केगांव के बाहरशिवम और शुभम ने तीन अन्य के साथ मिलकर पीड़ित को जला दिया था। करीब 43 घंटे के बाद पीड़ित ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था। मरने से पहलेपीड़ितके बयान के आधार पर गांव के प्रधानपति हरिशंकर त्रिवेदी, उसके बेटे शुभम, गांव के शिवम औरउमेश बाजपेई समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामले की जांच एसआईटी कर रही है। घटना के 20 दिन बाद 26 दिसंबर को आरोप पत्र तैयार किया गया।एक जनवरी को कोर्ट खुलने पर पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था। तीन जनवरी को आरोपियों की पहली पेशी थी।



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5 दिसंबर को रेलवे स्टेशन जाते वक्त पीड़ित को इसी जगह जिंदा जला दिया गया था। -फाइल


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