Saturday, March 7, 2020

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नई दिल्ली. बात शरीर की हो या मन की, उन्हें हर बार टूटने के लिए मजबूर किया जाता है। सदियों से यही सोच है कि लड़कियां वो सब नहीं कर सकती जो लड़के कर सकते हैं।इस पर अगर उसका रंग काला हो, शरीर भारी हो या फिर कोई और शारीरिक समस्या हो तो फिर मुश्किलें ज्यादा बढ़ जाती हैं।कहते हैं ना कि हिम्मत से हिमालय भी झुकता है, तो इसी सोच के साथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भास्कर सुना रहा है 5 महिलाओं कीकहानियां जिन्होंने अपनी बेड़ियों को तोड़ा और जिद करके अपनी पहचान बनाई है। 2020 के महिला दिवस की थीम बराबरी की सोच वाली ‘आई एम जनरेशन इक्वेलिटी:रिअलाइजिंग वुमन्स राइट’ है।

दुनिया की सबसे डार्क (काली) मॉडल न्याकिम गेटवेक, दृष्टिबाधित होने के बावजूद ओडिशा सिविल सर्विसेज में रैंक हासिल करने वाली तपस्विनी दास, भारत कीअल्ट्रा रनर सूफिया खान,अकेले 193 देश घूमने वाली मेलिसा रॉयऔर 138 किलो की प्लस साइज मॉडल-एक्टिविस्ट टेस हॉलिडे ने हमारे साथसाझा की अपनी कहानी …

पहली कहानी:‘क्वीन ऑफ डार्क’ हैं न्याकिम गेटवेक, कहती हैं - खूबसूरती के लिए गोरा रंग जरूरी नहीं

सूडानी मूल की अमेरिकी फैशन मॉडल न्याकिमगेटवेक को गोरा दिखना पसंद नहीं। गहरे काले रंग के कारण लोग उन्हें 'क्वीन ऑफ डार्कनेस' कहते हैं। उसे अपनी डार्क स्किन टोन पर गर्व है। खुद को काला कहने में शर्म नहीं आती।। ब्लीच करना जरूरी नहीं समझती। नस्लीय तानें भी खूब झेलें लेकिन न तो अपनी सोच बदली और न इरादे। मॉडलिंग की दुनिया में यही काला रंग उनकी खूबसूरती को बयां कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'बंदिशों की बेड़ियां, बराबरी की कहानियां' थीम की अहम किरदार हैंन्याकिम। जो कहती हैं- हमें खूबसूरत लगने के लिए गोरा दिखने की जरूरत नहीं। Click >न्याकिमकी कहानी उन्हीं की जुबानी...


दूसरी कहानी/ हादसे में आंखें गंवाईं, लेकिन बिना आरक्षण ओडिशा सिविल सर्विसेज में रैंक बनाई तपस्विनी ने

एक ऑपरेशन हुई लापरवाही के कारणमें तपस्विनी की आंखों कीरोशनी हमेशा के लिए चली गई।छह माह बाद आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद जगाई गई, लेकिन ऐसा होता नहीं है। उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। उसने खुद को बदला और इतनी हिम्मत जुटाई कि हर क्लास में सामान्य बच्चों से ऊपर तपस्विनी का नाम आने लगा।लोगों ने उससे कहायूपीएससी की तैयार करो उसमें दृष्टिबाधित बच्चों को आरक्षण मिलता है लेकिन उसने बिना आरक्षण के सफलता पाई। ओडिशालोक सेवा आयोग की परीक्षा में रैंक हासिल करके उसने कामयाबी की मिसाल कायम की। Click >तपस्विनीकी कहानी उन्हीं की जुबानी...


तीसरी कहानी:शांति-भाईचारे का संदेश देने 87 दिनों में 4 हजार किमी दौड़ीं सूफिया, कहा- हम कमजोर नहीं

देश में अमन का पैगाम देने का जुनून और फिटनेस के लिए दौड़ने के जज्बे ने सूफिया खान कोउस जगह लाकर खड़ा कर दिया है जहां बराबरी की मिसाल दी जाती हैं। जहां पुरुष-महिला का भेद नहीं है और समाज की बेड़ियों को तोड़कर कुछ हासिल करने की खूबसूरत तस्वीर नजर आती है। राजस्थान के अजमेर की सूफिया ने 87 दिनों में 4 हजार किलोमीटर की दौड़ पूरी करके गिनीज रिकॉर्ड बनाया है। लेकिन वह न तो थकीं हैं और न रुकी हैं। फिर रिकॉर्ड बनाने के लिए उन्होंने एक नया लक्ष्य तय किया है। Click >सूफिया की कहानी उन्हीं की जुबानी...


चौथीकहानी:सिर्फ 34 साल उम्र में सारे 193 देश घूम लिए मेलिसा ने, परिवार ने कभी नहीं चाहा था

अनजाने देश पहुंचना, अंजान लोगों के घरों में रहना, सफर के लिए खर्च भी खुद ही जुटाना और महज 34 साल की उम्र वो कर जाना जो ज्यादातर औरतों को नामुमकिन लगता है, लेकिन है नहीं। ऐसी हैं मेलिसा रॉय। उनकी सोच और विजन एकदम साफ रहा है। कॉलेज के समय में एक लक्ष्य तय किया और उसे पूरा करके दुनिया को चौंकाया। 193 देशों की यात्रा का अंतिम पड़ाव था बांग्लादेश, जिसे मेलिसा ने 31 दिसम्बर 2019 को पूरा किया।

मेलिसाकहती हैं अपने अंदर का डर निकालना है तो बाहर निकलिए। Click >मेलिसा की कहानी उन्हीं की जुबानी...


पांचवी कहानी:138 किलोकीप्लस साइज मॉडल टेस कोपिता से गालियां मिलीं और लोगों से मौत की धमकी

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'बंदिशों की बेड़ियां, बराबरी की कहानियां' थीम की अहम किरदार हैं 138 किलो वजन वाली मॉडल-एक्टिविस्टटेस हॉलिडे। टेस का जन्म मिसीसिपीहुआ। बचपन में ही माता-पिता अलग हो गए। एक दिन गुस्से में आकर पिता ने मां को गोली मारी और वह हमेशा के लिए पैरालाइज्ड हो गईं। टेस कहती हैं, जो मॉडल प्लस साइज हैं, उन्हें शर्माने या घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें गर्व होना चाहिए। मैं मोटी हूं, लोग मुझे प्लस साइज कहते हैं। मुझे इस पर गर्व है। Click >टेस की कहानी, उन्हीं की जुबानी



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women's day 2020 special story based on I am Generation Equality, Realizing Women's Rights theme about nyakim gatwech, tapaswani das, ultra runner sufiya khan, actress-traveller melissa roy and plus size model activist tess holiday


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फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन मात्र 34 साल की हैं। इतनी कम उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाली वे दुनिया की एक मात्र शख्स हैं। 19 सदस्यों वाली उनकी कैबिनेट में 12 महत्वपूर्ण मंत्रालय महिलाओं के पास हैं। जब उनसे बतौर ‘महिला प्रधानमंत्री’ बात की जाती है तो वे असहज हो जाती हैं। उनका मानना है कि लैंगिक और धार्मिक भेदभाव इंसानियत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा हैं।अमेरिका में भास्कर के प्रतिनिधि सिद्धार्थ राजहंस ने फिनलैंड जाकर उनसे विशेष बातचीत की, पढ़िए सना मरीन की जुबानी...

मेरा मानना है कि लीडरशिप का महिला या पुरुष हाेने से कोई लेना-देना नहीं है। आश्चर्य होता है और अफसोस भी कि दुनिया इस बात से चकित है कि फिनलैंड की बागडोर एक महिला के हाथों में है। लोगों को महिलाओं के आगे बढ़ने या उनके नेतृत्व करने पर हैरान होने की कोई जरूरत नहीं है। शायद लिंग-भेद की मानसिकता ही ऐसे प्रश्न खड़े करती है। मेरी उम्र और मेरा महिला होना कोई मुद्दा ही नहीं है। मैं यहां मतदाताओं के विश्वास की वजह से हूं। मैं यहां मुद्दों को सुलझाने के लिए हूं। जब आप तय मापदंडों को तोड़ते हैं और कुछ अलग करते हैं तो स्वाभाविक है कि लोग आप पर ध्यान देने लगते हैं। वास्तव मेंमैं तो ये मानती हूं कि दुनियाभर में उम्रदराज नेता, नई पीढ़ी की समस्याओं जैसे-जलवायु संकट और नए उद्योगों के बारे में उदासीन हैं। ये जेनरेशन गैप है और यह राजनीतिक स्तर पर आज और बड़ा नजर आता है। इसलिए यह जरूरी है कि नई पीढ़ी आगे आए और जिम्मेदारी ले। यही वह विचार है, जिसने मुझे राजनीति में आने और नेतृत्व लेने के लिए प्रेरित किया है।

मेरा यह भी मानना है कि महिलाओं में उन मुद्दों को लेकर स्वाभाविक रूप से अधिक संवेदनशीलता है, जिसका सामना दुनिया कर रही है। इसलिए हम बेहतर काम करने के लिए हर तरह से तैयार हैं। यही वजह है कि मेरी कैबिनेट में भी महिला मंत्रियों की संख्या ज्यादा है। मेरी कैबिनेट के लिए, लैंगिक समानता और अधिकार काफी अहम हैं। सुनियोजित ढंग से सामाजिक सोच में बदलाव लाकर और नीतियां बदलकर लैंगिक समानता लाई जा सकती है। मसलन, आज भी लोग मुझसे बतौर ‘महिला प्रधानमंत्री’ बात करते हैं, न कि प्रधानमंत्री के तौर पर। इससे समाज की सोच पता चलती है। हम यह क्यों नहीं स्वीकार कर पा रहे हैं कि महिला भी बराबर है, बल्कि मुद्दों को डील करने में ज्यादा सक्षम है। इस मामले में फिनलैंड और भारत उदाहरण स्थापित कर सकते हैं।


भारत में 40 साल से कम उम्र की आबादी ज्यादा है। निश्चित रूप से इतनी ही हिस्सेदारी महिलाओं की भी है। भारत को अपनी इस युवा आबादी के अनुसार नीतियों में बदलाव लाना होगा। तभी लिंग, यौन या धार्मिक भेदभाव रुकेगा। इसके अलावा नए युग में काम और उत्पादकता के मापदंड भी बदल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर देर तक ऑफिस में रुकना और कड़ी मेहनत करना एक विशेष गुण माना जाता रहा है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि आपकी कड़ी मेहनत का परिणाम क्या निकला है, उससे हासिल क्या हुआ है। मौजूदा समय में तो कम से कम इनपुट में ज्यादा से ज्यादा आउटपुट की आवश्यकता है। इसीलिए हमने हफ्ते में 24 घंटे काम करने की नीति पर काम शुरू किया है। इससे लोग परिवार को समय दे पाएंगे। काम और जीवन में यह संतुलन हमारा अगला कदम है। मैं भी परिवार को ज्यादा वक्त देना चाहूंगी। काम के घंटों को मानक नहीं बनाऊंगी।

मैं कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाकर राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लचीली कार्य संस्कृति की पैरवी करती हूं। क्योंकिखुशी और उत्पादकता में गहरा संबंध है। अर्थव्यवस्था के अनगिनत मापदंडों में हैप्पीनेस इंडेक्स, नेशनल इंडेक्स जितना ही महत्वपूर्ण है। मैं इस फैक्ट को मानती हूं और नई सोच रखती हूं। क्योंकि मेरी परवरिश अलग रही है। मेरे माता-पिता दोनों महिलाएं रही हैं और दोनों ने मुझे हमेशा अपनी पसंद का काम करने के लिए प्रेरित किया है। मुझे याद नहीं कि मेरे परिवार ने लड़की होने के नाते मुझसे कभी भेदभाव किया हो। जब मैं बेकरी में हफ्ते के 20 यूरो के लिए काम करती थी, तब भी मां मुझे प्रोत्साहित करती थीं। मैं हमेशा अपनी अपरंपरागत पहचान और अपने जेंडर पर गर्व करती हूं। मैं हमेशा इसके साथ खड़ी रहूंगी। मुझे लगता है कि इसी तरह हम आलोचनाओं का सामना कर सकते हैं और पॉजिटिव चेंज भी ला सकते हैं। आप जो सोचते हैं, वही सही है- इसके साथ हमेशा खड़े रहिए। मैं ऐसी ही हूं। मैं कभी डरी नहीं। बेहद जिद्दी भी हूं। मैं जवाब में ‘न’ नहीं सुनती। मुझे लगता है कि अच्छे बदलाव ऐसे ही आते हैं।

भारत में अपार संभावनाएं

भारत में बहुत संभावनाएं हैं। भारतीय संस्कृति में पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। मैं वसुधैव कुटुम्बकम के विचार को बहुत अच्छी तरह से तो नहीं जानती, लेकिन भारत के मूल्य और संस्कृति सम्मान योग्य है। मुझे लगता है कि भारत न सिर्फ ग्लोबल सुपर पावर है, बल्कि वह असमानता और क्लाइमेट चेंज जैसे नए मुद्दों पर विश्व का नेतृत्व कर सकता है।

हमें स्कूलों में जीवन का मानवीय पक्ष पढ़ाने की जरूरत है

अगर मुझे स्कूली पाठ्यक्रम बनाने का मौका मिले तो मैं इसमें उन बातों को शामिल करूंगी जो युवाओं के लिए जरूरी हैं। पाठ्यक्रम में समान अधिकार और उसकी विस्तृत परिभाषा होनी चाहिए। वैश्विक मुद्दे, हमारे समाज-संस्कृति में आया परिवर्तन और बदलते आर्थिक मुद्दों को शामिल करूंगी। हमारे आसपास हो रहे तेज सामाजिक-आर्थिक बदलाव के साथ ही जीवन का मानवीय पक्ष पढ़ाने-समझाने की सबसे ज्यादा जरूरत है, क्योंकि यही आधुनिक समाज के मजबूत स्तंभ हैं।

मेरी बेटी मुझे सजग और परिपक्व इंसान बनाती है

मेरी बेटी का जन्म मेरे लिए जिंदगी का सबसे अहम और खुशनुमा वाकया है। मैं कामकाजी मां हूं और एमा बचपन से ही इसका सामना कर रही है। लेकिन मुझे ऐसा महसूस होता है कि जैसे इस नन्ही बच्ची ने मेरे कामकाजी जीवन के हिसाब से खुद को ढाल लिया हैै। यह बात मुझे उस खास ‘अहा’ पल का अहसास कराती है। मैं बेहद साधारण व अपरंपरागत माहौल में पली-बढ़ी हूं। गंभीर विषयों पर मैं बचपन से ही मुखर रही हूं। और एक मां के तौर पर भी मैं इन मूल्यों को साथ लेकर चलती हूं। मैंने अपने इंस्टाग्राम पर बेबी बंप और स्तनपान की तस्वीरें भी पोस्ट की हैं। ये सब चीजें मातृत्व के सबसे अहम और प्राकृतिक पहलू हैं। मैं मां बनकर बेहद खुश हूं और उन चीजों को भी आगे बढ़कर गले लगा रही हूं, जिन पर लोग चर्चा करने में सामान्य तौर पर संकोच करते रहे हैं। इस तरह मेरी बेटी मुझे सजग और परिपक्व इंसान बना रही है। ये नई सोच ही है कि मैं और मेरे पति मार्कस बेटी की परवरिश में समान भागीदारी निभाते हैं। वे बेहद समझदार हैं। उन्होंने एमा के जन्म के समय पितृत्व अवकाश लेकर एक बेंचमार्क सेट किया है। आखिरकार एक बच्चे के प्रति माता-पिता, दोनों की समान जिम्मेदारी है। मैं हमेशा उनसे सलाह लेती हूं, न सिर्फ रोजमर्रा के मुद्दों पर बल्कि अपनी नीतियों पर भी। मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी भी उन मूल्यों को आगे ले जाए, जिनके साथ मैं पली और बड़ी हुई हूं।



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Worlds youngest PM Sana Marine Spl interview with dainik Bhaskar first in Indian media


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खेल डेस्क. महिला टी-20 वर्ल्ड कप में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच मेलबर्न में रविवार को फाइनल खेला जाएगा। भारत गेंदबाजों के दम पर 11 साल में पहली बार टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा है। मौजूदा टूर्नामेंट में भारत के टॉप-3 गेंदबाजों ने 4 मैच में 21 विकेट लिए हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष 3 गेंदबाजों ने भारत से एक मैच ज्यादा खेलने के बाद भी 2 विकेट कम लिए हैं। भारतीय गेंदबाजों ने टूर्नामेंट के 4 मैच में कुल 35 विकेट लिए। इसमें से60 फीसदी विकेट पूनम यादव, शिखा पांडे और राधा यादव ने लिए हैं।

पूनम यादव टूर्नामेंट कीसबसे सफल गेंदबाज रही हैं। वे अब तक 4 मैच में 9.88 की औसत से 9 विकेट ले चुकी हैं।उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड कप के ओपनिंग मैच में 19 रन देकर 4 विकेट लिए थे। वे हर 11वीं गेंद पर विकेट ले रही हैं। भारत के लिए दूसरी सफल गेंदबाज शिखा पांडे हैं। उन्होंने 4 मैच में 12 की औसत से 7 विकेट लिए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 13 का है। राधा यादव भी इस टूर्नामेंट में असरदार रही हैं। उन्होंने सिर्फ 2 दो मैच ही खेले हैं,लेकिन 5 विकेट लेने में कामयाब रहीं। वो भी सबसे कम 9.6 की औसत से।

औसत के मामले में राधा यादव सबसे बेहतर

गेंदबाज

मैच विकेट औसत बेस्ट
पूनम यादव 4 9 9.88 4/19
शिखा पांडे 4 7 12.00 3/14
राधा यादव 2 5 9.60 4/23

मेगन ने पूनम के बराबर 9 विकेट लिए, लेकिन 1 मैच ज्यादा खेला

ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने टूर्नामेंट के 5 मैचों में कुल 31 विकेट लिए। इसमें से 19 विकेट मेगन शूट, जेस जोनासेन और जॉर्जिया वेरहैम ने लिए। शूट सबसे सफल ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज रहीं। उन्होंने टूर्नामेंट में भारतीय गेंदबाज पूनम के बराबर 9 विकेट लिए हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने एक मैच ज्यादा खेला।उनका स्ट्राइक रेट भारतीय गेंदबाज से कम है। वे हर 12वीं गेंद पर विकेट ले रही हैं। जेस जोनासेन ने 5 मैच में 17 की औसत से 7, जबकि जॉर्जिया वेरहैम ने 3 मैच में 11 की औसत से 3 विकेट लिए हैं। ऑस्ट्रेलिया का कोई भी गेंदबाज टूर्नामेंट के एक मैच में 4 विकेट नहीं ले पाया, जबकि भारत की पूनम और राधा यादव ऐसा करने में सफल रहीं।

ऑस्ट्रेलिया की तरफ सेजॉर्जिया वेरहैम का औसत सबसे कम

गेंदबाज मैच विकेट औसत बेस्ट
मेगन शूट 5 9 12.88 3/21
जेस जोनासेन 5 7 17.14 2/17
जॉर्जिया वेरहैम 3 3 10.66 3/17

ऑस्ट्रेलिया ने टूर्नामेंट में36 और भारत ने सिर्फ 26 की औसतसे रन बनाए

बल्लेबाजी के मामले में ऑस्ट्रेलिया का टीम इंडिया पर पलड़ा भारी है। ऑस्ट्रेलिया ने टूर्नामेंट के 5 मैच में करीब 36 की औसत से 716 रन बनाए, जबकि भारतीय टीम ने 4 मैच में करीब 26 की औसत से 523 रन बनाए हैं। टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया से एक मैच कम खेला है। क्योंकि भारत-इंग्लैंड सेमीफाइनल बारिश के कारण रद्द हो गया था। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले पांच बल्लेबाजों में से 2 ऑस्ट्रेलिया के हैं। इसमें बेथ मूनी तीसरे स्थान पर हैं। वे 5 मैच में 2 अर्धशतक की बदौलत 181 रन बना चुकी हैं। एलिसा हिली पांचवें स्थान पर हैं। उन्होंने 5 मैच में 161 रन बनाए हैं। इस लिस्ट में 16 साल की शेफाली वर्मा इकलौती भारतीय हैं। वे 4 मैच में 161 रन बना चुकी हैं। वे भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज भी हैं। इसके अलावा जेमिमा रॉड्रिग्स ने 4 मैच में 85 और दीप्ति शर्मा ने 83 रन बनाए हैं। कोई भी भारतीय बल्लेबाज टूर्नामेंट में अर्धशतक नहीं लगा पाया है।

भारत अब तक चैम्पियन नहीं बना
अब तक 6 बार टी-20 वर्ल्ड कप हो चुके हैं। यह 7वां टूर्नामेंट है। भारत एक बार भी फाइनल में नहीं पहुंचा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया सबसे ज्यादा 4 बार खिताब जीत चुका है। भारत 3 बार (2009, 2010, 2018) में सेमीफाइनल में पहुंचा। पिछली बार उसे सेमीफाइनल में इंग्लैंड के हाथों हार मिली थी।



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IND W Vs Aus W Final: India Vs Australia Women Bowling Performance Comparison In ICC T20 World Cup 2020; Poonam Yadav, Shikha Pandey, Radha Yadav


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श्रीनगर. कश्मीर कोइंसान जन्नत मानता है। पर इसी जन्नत में महिलाओं के लिए पीरियड्स पर बात करना और जिम जाने का नाम लेना हमेशा मुश्किलों भरा रहा है। खेल के मैदान में उतरना भी महिला के लिए आसान नहीं रहा। लेकिन धीरे-धीरे ही सही अब यहां की तस्वीर बदल रही है। आगे बढ़ाने के मामले में महिलाएं नजीर पेश कर रही हैं। अब वे पीरियड्स पर खुलकर चर्चा कर रही हैं, जिम जा रही हैं और खेल भी रही हैं। महिलाओं के लिए धरती के इस स्वर्ग में फूल खिलने लगे हैं और बदलाव की खुशबू से कश्मीर की फिजा महकने भी लगी है। पेश है ऐसी ही कुछ महिलाओं की किस्से, जो खुद ही बता रही है बदलाव की कहानी…


डॉ. ऑकाफीन निसार, श्रीनगर के साइदा कदल में हेल्थ सेंटर चलाती हैं
पीरियड्स, एक ऐसा मुद्दा जिसपर कश्मीर के कई इलाकों में आज भी खुलकर बात नहीं की जाती। ऐसे में श्रीनगर के एक छोटे से इलाके साइदा कदल में हेल्थ सेंटर चलाने वाली डॉ. ऑकाफीन निसार ने महिलाओं को जागरूक करने की पहल की है। 29 साल की डॉ. निसार ने ‘पनिन फिक्र' नाम के एक अभियान की शुरुआत की। पनिन फिक्र का मतलब है खुद की फिक्र करना।

डॉ. निसार बताती हैं कि ‘एक महिला सभी की चिंता करती है, लेकिन खुद का ध्यान कभी नहीं रख पाती। मैं चाहती हूं कि इस इलाके की महिलाएं मासिक धर्म को लेकर फैली भ्रांतियों से ऊपर उठें और अपनी चिंता करें। अभियान की शुरुआत जनवरी 2019 में दो नर्सेज और चार आशा कार्यकर्ताओं के साथ एक सब-सेंटर में हुई थी। इस सेंटर के जरिए 4000 की आबादी को सेवाएं दी जाती हैं।’

डॉ. निसार महिलाओं को जागरूक करने के लिए हेल्थ सेंटर चलाती हैं।

2017 में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के डॉक्टर्स ने स्टडी की, जिसमें पाया कि कश्मीरी महिलाओं में माहवारी (पीरियड्स) की समस्याएं आम हैं। 10% महिलाओं को अनियमित माहवारी होती है। पीएमएस (48%) और मेनोरेजिया (24%) के बाद 51% महिलाओं में डिस्मेनोरिया सबसे आम मासिक धर्म डिसऑर्डर था। डॉ. निसार हर वीकेंड अपनेक्लीनिक में एक सेशन भीकरती हैं, जिसके जरिए महिलाओं को उनके मासिक धर्म स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया जाता है।

डॉ. निसार ने टीम के साथ मिलकर रिसर्च की तो पाया कि जागरूकता की कमी और पैड का महंगा होना महिलाओं की परेशानियों का मुख्य कारण है। मुहिम के जरिए टीम ने दो सस्ते पैड बनाने वाली कंपनियों का चुनाव किया। यहां से मिलने वाले दो नैपकिन्स की कीमत 5 रुपए होती है। शुरू में लोगों की प्रतिक्रियाएं जानने के लिए पैकेट्स को फ्री में बांटा गया, लेकिन बाद में इन्हें रियायती दरों पर दिया जाने लगा।डॉ. निसार बताती हैं कि माहवारी को लेकर सामाजिक परेशानियों और अंधविश्वास की कीमत महिलाएं अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के जरिए चुकाती हैं। किसी को तो बदलाव के लिए आगे आना होगा।


महरीन अमीन, जिम संचालक
25 साल की महरीन अमीन, हवाल में इस्लामिया कॉलेज के नजदीक एक जिम चलाती हैं। अमीन बताती हैं कि फिटनेस को आज भी समाज में गंभीरता से नहीं लिया जाता और इसलिए मेरे काम को हर बार अनदेखा कर दिया जाता है। मेरे काम के चलते कई बार मुझे भद्दे कमेंट्स और गालियां मिलती हैं, लेकिन जब तक मेरे क्लाइंट्स और परिवार खुश हैं, मुझे फर्क नहीं पड़ता।

आमीन के क्लब में एक हजार से ज्यादा महिलाएं रजिस्टर हैं और तमाम रोक-टोक के बाद भी यह आंकड़ा रोज बढ़ रहा है। ट्रेनर बताती हैं कि फिटनेस और हेल्थ को लेकर घाटी में लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है, सभी जान गए हैं कि जिम का मतलब केवल सिक्स पैक एब्स नहीं होता।

महरीन अमीन जिम चलाती हैं।

अंजुमन फारुख, प्रोफेशनल मार्शल आर्ट खिलाड़ी
15 नेशनल मैचों में 14 गोल्ड मेडल और 2 सिल्वर मेडल जीत चुकीं थांग ता(मार्शल आर्ट) प्लेयर और कोच अंजुमन फारुख लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देती हैं। अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाली अंजुमन ने अपने शौक और खेल प्रेम के लिए सामाजिक परेशानियां उठाईं। बीमार पिता की असमय मौत के बाद घर में आर्थिक मुश्किलें बढ़ गईं थीं, लेकिन अंजुमन ने इसे भी अपनी ताकत बनाया।


27 साल की चैंपियन बताती हैं,‘लड़की होने के कारण मुझे कई दिक्कतें हुईं पर मैंने कभी हार नहीं मानी। थांग ता मेरा जुनून था, जो बाद में मेरा पेशा भी बना।’अंजुमन फिलहाल एक सरकारी स्कूल में फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर हैं और लड़कियों को ट्रेनिंग देती हैं। उन्होंने साल 2011 में पहली बार वर्ल्ड कप खेला था और गोल्ड जीतने वाली पहली सीनियर लड़की थीं।

महक जुबैर, रेडियो जॉकी
रेडियो-शो खुश-खबर की होस्ट महक जुबैर को लोग आरजे महक और महक मिर्ची के नाम से भी जानते हैं। महक रेडियो मिर्ची एफएम में मॉर्निंग शो को होस्ट करती हैं। अपनी जॉब के बारे में बताते हुए महक ने कहा, यह दुनिया का सबसे अच्छा काम है, लेकिन उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। आप लगभग हर दिन ऑन एयर होते हैं, फिर चाहे इलाके में मौसम खराब हो या हड़ताल हो। शो खुश-खबर में महक कश्मीर और उसके नागरिकों के बारे में अच्छी बातें पेश करती हैं।

रेडियो-शो खुश-खबर की होस्ट महक जुबैर

महक कहती हैं कि उथल-पुथल से भरी घाटी में हर रोज अच्छी खबरें निकालने में बहुत परेशानी होती थी। एक न्यूज चैनल के साथ बतौर सिटीजन जर्नलिस्ट करियर की शुरुआत करने वाली महक रेडियो जॉब से बेहद खुश हैं। वो बताती हैं कि मुझे बात करना बहुत पसंद है और रेडियो इसका सबसे अच्छा जरिया है।



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मार्शल आर्ट प्लेयर और कोच अंजुमन फारुख लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देती हैं।


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मुंबई. नगदी संकट से जूझते यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें रविवार को तड़के 3 बजे गिरफ्तार किया गया। इससे पहले, शनिवार सुबह कपूर को पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर ले जाया गया था। वहां वे पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी कर ली गई। उन्हें रविवार को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।

ईडी ने शुक्रवार की देर रात को उनके घर पर छापा मारा था। जांच एजेंसी की टीम ने मुंबई के समुद्र महल टॉवर स्थित कपूर के घर पर देर रात तक छानबीन की थी। रिजर्व बैंक ने हालात को देखते हुए यस बैंक के खाताधारकों को 50 हजार रुपए तक ही निकालने की इजाजत दी है। साथ ही बैंक के बोर्ड का कंट्रोल 30 दिन के लिए अपने हाथ में ले लिया है।

कपूर पर अनियमितताओं का आरोप

यस बैंक के फाउंडर, पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ राणा कपूर पर कारोबारी घरानों को लोन देने और उसे वसूल करने की प्रक्रिया अपने हिसाब से तय करने का आरोप है। बैंक अनिल अंबानी ग्रुप, आईएलएंडएफएस, सीजी पावर, एस्सार पावर, रेडियस डिवेलपर्स और मंत्री ग्रुप जैसे कारोबारी घरानों को लोन देने में आगे रहा। इन कारोबारी समूहों के डिफॉल्टर साबित होने से बैंक को करारा झटका लगा। 2017 में बैंक ने 6,355 करोड़ रुपए की रकम को बैड लोन में डाल दिया था। जिसके बाद आरबीआई ने बैंक पर लगाम कसना शुरू की। 2018 में आरबीआई ने राणा कपूर के ऊपर कर्ज और बैलेंस शीट में गड़बड़ी के आरोप लगाए। साथ ही, उन्हें चेयरमैन के पद से जबरन हटा दिया। बैंक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी चेयरमैन को इस तरह से हटाया गया हो।

तिरुपति बालाजी ट्रस्ट ने बैंक से 1300 करोड़ निकाले
तिरुपति बालाजी मंदिर का प्रबंधन देखने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने बताया कि उसने पिछले साल अक्टूबर में ही यस बैंक से 1300 करोड़ रुपए निकाल लिए थे। उधर, जगन्नाथ मंदिर के 592 करोड़ रुपए बैंक में अभी भी डिपॉजिट हैं। यह टर्म डिपॉजिट था, जो इसी महीने मेच्योर होना है। इस बीच, आरबीआई ने 3 अप्रैल तक यस बैंक से 50 हजार से ज्यादा विड्रॉल पर रोक लगा दी है। इसके बाद जगन्नाथ मंदिर के डिपॉजिट की निकासी पर संशय खड़ा हो गया है। संकट में फंसे बैंक को ग्राहकों में भी चिंता है। बैंक की शाखाओं और एटीएम पर शुक्रवार को लंबी कतारें देखने को मिलीं। मुंबई में तो एटीएम के सामने पुलिस भी लगानी पड़ी।

वित्त मंत्री ने कहा- सभी खाताधारकों का पैसा सुरक्षित
इससे पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि यस बैंक को बचाने के लिए सरकार और आरबीआई साथ काम कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने हर खाताधारक को भरोसा दिलाया कि उनका पैसा सुरक्षित है और वे लगातार आरबीआई के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बैंक के लिए जल्द ही रिजोल्यूशन प्लान लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि वह आरबीआई से बात करेंगी कि यस बैंक के जमाकर्ताओं को नकदी की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही कम से कम एक साल के लिए बैंक में काम करने वालों का रोजगार और वेतन सुनिश्चित किया जाएगा।

एक समय देश के सफलतम बैंकर्स में शामिल थे कपूर
दिल्ली में जन्मे राणा9 सितंबर1957 एक समय वे देश के सफलतम बैंकर्स की लिस्ट में शामिल थे। पढ़ाई के दौरान उन्हें ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) की तरफ से मानद फैलोशिप, रटगर्स यूनिवर्सिटी न्यूजर्सी से प्रेसिडेंट मेडल और जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर से मानद फेलोशिप मिल चुकी है। उनके परिवार में पत्नी बिंदू कपूर और तीन बेटियां राधा, राखी और रोशनी हैं।



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यस बैंक के फाउंडर डायरेक्टर राणा कपूर। (फाइल फोटो)


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मुंबई. नगदी संकट से जूझते यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें रविवार को तड़के 3 बजे गिरफ्तार किया गया। इससे पहले, शनिवार सुबह कपूर को पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर ले जाया गया था। वहां वे पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी कर ली गई। उन्हें रविवार को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।

ईडी ने शुक्रवार की देर रात को उनके घर पर छापा मारा था। जांच एजेंसी की टीम ने मुंबई के समुद्र महल टॉवर स्थित कपूर के घर पर देर रात तक छानबीन की थी। रिजर्व बैंक ने हालात को देखते हुए यस बैंक के खाताधारकों को 50 हजार रुपए तक ही निकालने की इजाजत दी है। साथ ही बैंक के बोर्ड का कंट्रोल 30 दिन के लिए अपने हाथ में ले लिया है।

कपूर पर अनियमितताओं का आरोप

यस बैंक के फाउंडर, पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ राणा कपूर पर कारोबारी घरानों को लोन देने और उसे वसूल करने की प्रक्रिया अपने हिसाब से तय करने का आरोप है। बैंक अनिल अंबानी ग्रुप, आईएलएंडएफएस, सीजी पावर, एस्सार पावर, रेडियस डिवेलपर्स और मंत्री ग्रुप जैसे कारोबारी घरानों को लोन देने में आगे रहा। इन कारोबारी समूहों के डिफॉल्टर साबित होने से बैंक को करारा झटका लगा। 2017 में बैंक ने 6,355 करोड़ रुपए की रकम को बैड लोन में डाल दिया था। जिसके बाद आरबीआई ने बैंक पर लगाम कसना शुरू की। 2018 में आरबीआई ने राणा कपूर के ऊपर कर्ज और बैलेंस शीट में गड़बड़ी के आरोप लगाए। साथ ही, उन्हें चेयरमैन के पद से जबरन हटा दिया। बैंक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी चेयरमैन को इस तरह से हटाया गया हो।

तिरुपति बालाजी ट्रस्ट ने बैंक से 1300 करोड़ निकाले
तिरुपति बालाजी मंदिर का प्रबंधन देखने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने बताया कि उसने पिछले साल अक्टूबर में ही यस बैंक से 1300 करोड़ रुपए निकाल लिए थे। उधर, जगन्नाथ मंदिर के 592 करोड़ रुपए बैंक में अभी भी डिपॉजिट हैं। यह टर्म डिपॉजिट था, जो इसी महीने मेच्योर होना है। इस बीच, आरबीआई ने 3 अप्रैल तक यस बैंक से 50 हजार से ज्यादा विड्रॉल पर रोक लगा दी है। इसके बाद जगन्नाथ मंदिर के डिपॉजिट की निकासी पर संशय खड़ा हो गया है। संकट में फंसे बैंक को ग्राहकों में भी चिंता है। बैंक की शाखाओं और एटीएम पर शुक्रवार को लंबी कतारें देखने को मिलीं। मुंबई में तो एटीएम के सामने पुलिस भी लगानी पड़ी।

वित्त मंत्री ने कहा- सभी खाताधारकों का पैसा सुरक्षित
इससे पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि यस बैंक को बचाने के लिए सरकार और आरबीआई साथ काम कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने हर खाताधारक को भरोसा दिलाया कि उनका पैसा सुरक्षित है और वे लगातार आरबीआई के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बैंक के लिए जल्द ही रिजोल्यूशन प्लान लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि वह आरबीआई से बात करेंगी कि यस बैंक के जमाकर्ताओं को नकदी की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही कम से कम एक साल के लिए बैंक में काम करने वालों का रोजगार और वेतन सुनिश्चित किया जाएगा।

एक समय देश के सफलतम बैंकर्स में शामिल थे कपूर
दिल्ली में जन्मे राणा9 सितंबर1957 एक समय वे देश के सफलतम बैंकर्स की लिस्ट में शामिल थे। पढ़ाई के दौरान उन्हें ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) की तरफ से मानद फैलोशिप, रटगर्स यूनिवर्सिटी न्यूजर्सी से प्रेसिडेंट मेडल और जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर से मानद फेलोशिप मिल चुकी है। उनके परिवार में पत्नी बिंदू कपूर और तीन बेटियां राधा, राखी और रोशनी हैं।



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यस बैंक के फाउंडर डायरेक्टर राणा कपूर। (फाइल फोटो)


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तिरुवरुर. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीसामी ने शनिवार को मजदूरों के साथ खेत में धान की रोपाई की। वे किसान और मजदूरों के साथ खेत में धोती मोड़कर नंगे पांव खड़े नजर आए।

दरअसल, सीएम पलानीसामी डेल्टा इलाके के दौरे पर जा रहे थे। इस बीच उन्होंने तिरुवरुर जिले के सिध्धौली में धान की रोपाई कर रहे मजदूरों को देखा तो अपना काफिला रोक लिया। वह खेत पहुंचे और मजदूरों के साथ धान की रोपाई शुरू कर दी। उधर, रोपाई के बाद मजदूरों ने मुख्यमंत्री से खेती-किसानी के विषय पर चर्चा की।

उपराष्ट्रपति भी कर चुके हैं पलानीसामीकी तस्वीर शेयर
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने जनवरी में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीसामी की खेती करने वाली एक फोटो शेयर की थी। उसमें वे हाथ दरांती लिए खेत में खड़े हैं। नायडू ने जड़ों को नहीं भूलने के लिए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि यह सिम्बॉलिक है, लेकिन लोगों को प्रेरणा देगा।



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मुख्यमंत्री पलानीसामी शनिवार को खेत में मजदूरों के बीच करीब आधा घंटा रहे।
मुख्यमंत्री पलानीसामी ने शनिवार को खेत में खुद धान की रोपाई की।
खेत में काम करने वाले मजदूर ने कहा- हमें विश्वास ही नहीं हुआ कि मुख्यमंत्री हमारे बीच है।


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