Sunday, March 8, 2020

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बीजिंग/रोम.चीन के वुहान शहर से फैला कोरोनावायरस सोमवार तक 101 देशों तक फैल चुका है। इटली में रविवार को दुनिया में सबसे ज्यादा 233 लोगों की मौत हुई। कोरोना संक्रमण से यहां 366 जानें जा चुकी हैं। 24 घंटे में 1200 नए संक्रमितों की पुष्टि हुई। इटली सरकार ने देश के डेढ़ करोड़ लोगों को लॉकडाउन कर दिया है। वहीं, चीन में इस पर धीरे-धीरे काबू किया जा रहा है। रविवार तक दुनियाभर में 3661 लोगों की मौत दर्ज की गई थी। एक दिन में 1752 नए मामले आए और 89 की मौत हुई थी।

चीन में कोरोनावायरस से पीड़ित 100 साल के बुजुर्ग की हालत पूरी तरह ठीक हो गई है। उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। चीन में अब तक 80 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। करीब 3000 की मौत हो चुकी। दुनियाभर में ओवरऑल संक्रमित मरीजों की संख्या 1,07,802 पहुंच गई है।

चीन के निर्यात में गिरावट
कोरोनावायरस के चलते बीते दो महीनों में चीन के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। निर्यात में 17.2% की गिरावट आई है। यह फरवरी 2019 के दौरान अमेरिका से ट्रेड वॉर के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। चीन के आयात में भी 4% की कमी आई है।

60924 लोग सही हुए, 6041 की हालत गंभीर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, अभी तक दुनियाभर के 60924 संक्रमित नागरिक ठीक हो चुके हैं। 43217 का अभी भी इलाज चल रहा है। इसमें 43217 गंभीर बताए जा रहे हैं। चीन के बाहर 24,724 लोग संक्रमित हुए हैं और 563 लोगों की मौत हुई है। चीन के हेल्थ कमीशन ने रविवार को कहा कि शनिवार को अस्पताल से 1660 लोगों को छुट्टी मिली। यहां अब तक 57,065 नागरिक ठीक हो चुके हैं। चीन में सबसे ज्यादा हुबेई प्रांत में 67707 लोग संक्रमित हुए हैं। यहां का वुहान शहर कोरोनावायरस का केंद्र रहा है।

मलेशिया और थाईलैंड ने कोस्टा फॉर्च्यूना क्रूज अपने बंदरगाह पर आने से रोका
मलेशिया और थाईलैंड ने कोरोनावायरस के डर से 2,000 लोगों को लेकर पहुंचे कोस्टा फॉर्च्यूना क्रूज को अपने बंदरगाहों पर आने से बैन कर दिया है। इसमें इटली के 64 लोग हैं। इस जहाज पर कोरोनोवायरस का एक भी संदिग्ध नहीं है। शुक्रवार को कोस्टा फॉर्च्यूना क्रूज को थाईलैंड के फुकेट आईलैंड पर रुकने की इजाजत नहीं मिली थी। शनिवार को इस जहाज ने मलेशिया के पेनांग स्टेट में डॉक करने की कोशिश की थी, लेकिन इसे रोक दिया गया। मलेशिया के स्थानीय नेता फी बून पो ने बताया कि मलेशिया ने सभी जहाजों को अपने बंदरगाहों पर प्रवेश नहीं देने का निर्णय लिया है। इसलिए कोस्टा फॉर्च्यूना को भी यहां आने की इजाजत नहीं दी गई।



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उत्तर कोरिया के प्योंगयोंग में एयरपोर्ट पर जांच की जा रही है।


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भुज (रोनक गज्जर).गुजरात में कच्छ के धार्मिक स्थल माता-ना-मढ़ में मंगल ग्रह जैसी सतह पाई गई है। वैज्ञानिकों की जांच में पता चला है कि यह मंगल की सतह से समानता रखने वालीदुनिया की इकलौती जगह है। इस तथ्य के सामने आने के बाद दुनियाभर केवैज्ञानिक यहां सोध के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, इसरो, आईआईटी खड़गपुर और जियोफिजिकल रिसर्च सेंटर हैदराबाद ने इस पर संयुक्त रूप से शोध करने की बात कही है।

आईआईटी खड़गपुर के भूशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. साईबल गुप्ता ने कहा- “माता-ना-मढ़ का अध्ययन बेहदमहत्वपूर्ण साबित होगा। इस अध्ययन से भविष्य में नासा और इसरो के मंगल मिशन के दौरान लैंडिंग साइट तय करने में मदद मिलेगी।” उन्होंने कहा कि हाइड्रो सल्फेट ऑफ पॉटेशियम और लौह तत्व के घटकों से जैरोसाइट बनता है, जो मंगल की सतह पर पाया जाताहै। माता-ना-मढ़ की जमीन में भी इसकी मौजूदगी पाई गई है।

अमेरिकी वैज्ञानिक मुआयना करने पहुंचे

मंगल की सतह से समानता की खबर मिलने के बाद,अमेरिका से वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकमाता-ना-मढ़की जमीन का मुआयना करने पहुंचे। उन्होंने कहा- खनिज विज्ञान पर शोध करने के लिए यह जगह बेहतरीन है। करीब साढ़े 3 साल का समय और 10 लाख रुपए खर्च करकेयहां दुर्लभ खनिज जैसोराइस की मौजूदगी वाले स्पॉट को खोजा गयाहै।इसके लिए आधुनिक स्पैक्ट्रोस्कोपिक और एक्स-रे डिफ्रैक्शन पैटर्न पद्धति की मदद ली गई।

मंगल पर हो रहे परिवर्तन का पता लगाना उद्देश्य
भूशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. महेश ठक्कर ने कहा- माता-ना-मढ़ पृथ्वी परइकलौता ऐसा स्थानहै, जहां बेसाल्ट टैरेन (कालेपत्थर की श्रृंखला) में जैरोसाइट की मौजूदगी पाई गई है। इसरो द्वारा कराए जाने वाले शोध का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मंगल पर पानी का अस्तित्व था या नहींऔर सदियों पहले वातावरण में हुए बदलाव के चलते वहां के वातावरण में क्या-क्या परिवर्तन हुए।



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माता-ना-मढ़ दुनिया में इकलौती जगह है, जहां बेसाल्ट टैरेन जैरोसाइट की मौजूदगी मिली है।


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नई दिल्ली.पोर्न वेबसाइट्स पर पाबंदी को लेकर 3 फरवरी से शुरू हुए भास्कर समूह के अभियान को जबर्दस्त जनसमर्थन मिला है। अश्लीलता फैलाने वाली वेबसाइट्स पर प्रतिबंध को लेकर दैनिक भास्कर की अपील को 2,00,243 लोगों ने मिस्ड कॉल के जरिए समर्थन दिया, जबकि 1.18 लाख लोगों ने ऑनलाइन पिटीशन के माध्यम से सहमति जताई। अभियान को आगे बढ़ाते हुए भास्कर अब प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रतिवेदन सौंपकर पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह करेगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी प्रतिवेदन सौंपकर उनसे भीकार्यवाही की मांग की जाएगी। साथ ही, पोर्न साइट्स पर पूर्ण पाबंदी के लिए दो लाख लोगों के समर्थन के आधार पर दैनिक भास्कर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा।

पोर्न साइट्स पर पाबंदी को लेकर एक महीने के अभियान के दौरान भास्कर समूह ने 12 राज्यों के 65 संस्करणों में विशेष समाचार, विश्लेषण और आलेख प्रकाशित किए। भास्कर की वेबसाइट, फेसबुक पेज पर ऑनलाइन लिंक और ग्राउंड एक्टिविटीज के जरिए लोगों को जागरूक किया गया। दैनिक भास्कर समूह उन सभी नागरिकों, लाखों पाठकों और विशेषज्ञों का आभारी है, जिन्होंने इस अभियान में सहयोग दिया और इसका समर्थन किया।



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पोर्न साइट्स पर पाबंदी के लिए भास्कर समूह ने 3 फरवरी से अभियान शुरू किया था।


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नई दिल्ली.पोर्न वेबसाइट्स पर पाबंदी को लेकर 3 फरवरी से शुरू हुए भास्कर समूह के अभियान को जबर्दस्त जनसमर्थन मिला है। अश्लीलता फैलाने वाली वेबसाइट्स पर प्रतिबंध को लेकर दैनिक भास्कर की अपील को 2,00,243 लोगों ने मिस्ड कॉल के जरिए समर्थन दिया, जबकि 1.18 लाख लोगों ने ऑनलाइन पिटीशन के माध्यम से सहमति जताई। अभियान को आगे बढ़ाते हुए भास्कर अब प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रतिवेदन सौंपकर पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह करेगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी प्रतिवेदन सौंपकर उनसे भीकार्यवाही की मांग की जाएगी। साथ ही, पोर्न साइट्स पर पूर्ण पाबंदी के लिए दो लाख लोगों के समर्थन के आधार पर दैनिक भास्कर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा।

पोर्न साइट्स पर पाबंदी को लेकर एक महीने के अभियान के दौरान भास्कर समूह ने 12 राज्यों के 65 संस्करणों में विशेष समाचार, विश्लेषण और आलेख प्रकाशित किए। भास्कर की वेबसाइट, फेसबुक पेज पर ऑनलाइन लिंक और ग्राउंड एक्टिविटीज के जरिए लोगों को जागरूक किया गया। दैनिक भास्कर समूह उन सभी नागरिकों, लाखों पाठकों और विशेषज्ञों का आभारी है, जिन्होंने इस अभियान में सहयोग दिया और इसका समर्थन किया।



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पोर्न साइट्स पर पाबंदी के लिए भास्कर समूह ने 3 फरवरी से अभियान शुरू किया था।


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मेरा जन्म 11 नवंबर 1943 को मध्यप्रदेश के बड़वानी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ। पिता पुरुषोत्तम काकोडकर मूल रूप से गोवा के थे, उन्होंने काशी से ‘शास्त्री’ की पदवी ली थी। इसके बाद वे वर्धा स्थित गांधीजी के सेवा आश्रम चले गए। मां कमला मूल रूप से बड़वानी की थीं। बाद में वे भी गांधीजी का सहयोग करने के लिए वर्धा आश्रम चली गईं। इसी आश्रम में मेरे पिता-मां ने एक-दूसरे को जाना और यहीं विवाह कर लिया। भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए पिता 1942 में मुंबई आ गए। इसी दौरान 1943 में मेरा जन्म हुआ। मेरे जन्म बाद माता-पिता गोवा आ गए, क्योंकि उन्हें गोवा मुक्ति आंदोलन का कार्यकर्ता बनाया गया था। 1946 पिता को गिरफ्तार कर पुर्तगाल ले जाया गया। इसके बाद एक-एक कर मुश्किलें आने लगीं। घर चलाने के लिए मां ने एक स्कूल ज्वाइन कर लिया, कुछ समय बाद उन्हें खरगोन (मप्र) भेज दिया गया। मेरी पढ़ाई में कमी न रहे, इसका मां बहुत ध्यान रखती थीं। गणित, विज्ञान मेरे प्रिय विषय रहे। मैट्रिक के बाद मैं मुंबई चला गया, इसी बीच पिता को छोड़ दिया। उस वक्त महाराष्ट्र के सभी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी थीं और मेरा रिजल्ट मप्र में आना बाकी था। थक-हारकर मैं रूपारेल कॉलेज में डॉ. भिडे से मिला और निवेदन किया कि मैं प्रथम श्रेणी में पास होने वाला हूं, मुझे एडमिशन दे दीजिए। वे सुनते रहे, फिर पूछा- इतना आत्मविश्वास है? फिर कहा- ठीक है, यदि प्रथम श्रेणी नहीं आई तो प्रवेश रद्द कर दूंगा। मुझे प्रथम श्रेणी मिली और मेरा एडमिशन पक्का हो गया। आर्थिक स्थिति खराब थी, ट्यूशन पढ़ नहीं सकता था। हमारा खर्च मां के वेतन से बमुश्किल चलता था। मुझे इंजीनियरिंग के लिए वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (वीजेटीआई) में प्रवेश मिल गया। आंदोलन में व्यस्त पिता का हमें सहारा नहीं था। कई बार तो घर का किराया देने की स्थिति भी नहीं रहती थी। इसी बीच मां को टीबी हो गया। फिर भी वे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष करती रहीं। मुझे पता नहीं था कि मेरे जीवन की दिशा अब बदलने वाली है।


मुझे एटॉमिक एनर्जी इस्टैब्लिशमेंट ट्रॉमवे (अब BARC) में इंटरव्यू के लिए बुलाया और चुन लिया गया। 1963 में कनाडा के सहयोग से अप्सरा परमाणु रिएक्टर की स्थापना टीम में मैं रहा। साथ ही रिएक्टर इंजीनियर, रिएक्टर कंट्रोलर और हीट ट्रांस्फर की विशेष पढ़ाई-ट्रेनिंग की और प्रथम श्रेणी में पास हुआ। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के नोजल्स सिरेमिक कोटिंग, फिर श्रीहरिकोटा के रॉकेट लांचिंग की कोटिंग जैसे काम मैंने किए। एक्सपेरिमेंटल स्ट्रेस एनॉलिसिस विषय की मास्टर डिग्री के लिए मैं इंग्लैंड रवाना हुआ। इसके लिए मुझे इंटरनेशनल परमाणु ऊर्जा एजेंसी की ओर से फेलोशिप मिली। वैज्ञानिक बनने के लिए नई तकनीक का अनुभव लेकर मैं स्वदेश लौटा। अज हमारे 28 परमाणु रिएक्टर कार्यरत हैं, लेकिन 1950 के आसपास विश्वस्तर पर परमाणु ज्ञान हमारे लिए नया था। (हमने थोरियम-यूरेनियम आधारित सुरक्षित आणविक ऊर्जा टेक्नोलॉजी पर जमकर शोध किए।) देश में पहली अणुभट्ठी ‘अप्सरा’ 4 अगस्त 1956 को शुरू हुई थी, वहीं 10 जुलाई 1960 को सायरस (कैनेडियन इंडियन रिएक्टर यूरेनियम सिस्टम) भट्ठी शुरू हुई। 1974 में ध्रुव भट्ठी पर काम करने लगे। इसकी पूरी डिजाइन स्वदेशी यानी BARC की थी। यहां मुझे पहला मौका मिला और हमने 1985 में इसे शुरू कर दिया। इस भट्ठी से 500 मेगावॉट बिजली बनना संभव हुआ। इसके लिए फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और ईंधन के रूप में थोरियम के उपयोग के साथ तीन स्तरों पर काम करने का मुझे मौका मिला। हमारे देश में थोरियम बहुतायत में है, लेकिन यूरेनियम के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। भविष्य में टेक्नोलॉजी आधारित बिजलीघर किस रूप में होंगे, इसकी प्लानिंग की जिम्मेदारी भी हमारे ऊपर थी। थोरियम आधारित रिएक्टर स्थापित करना चुनौतीपूर्ण था। हम जिद मानकर इस काम में जुट गए और तमिलनाडु में पहला ‘कामिनी’ रिएक्टर शुरू कर दिया। अणुभट्ठी बिगड़ने पर उसे सुधारने की चुनौतीपूर्ण तकनीक भी हमने पा ली। कलपक्कम अणुभट्ठी सुधारना हमारे लिए गर्व की बात थी।


वर्ष 2000 तक मैं परमाणु अनुसंधान केंद्र का निदेशक बना, साथ ही विज्ञान-प्रौद्योगिकी के लिए केंद्र सरकार में सचिव भी रहा। 1974 में पहला परमाणु परीक्षण, 11 व 13 मई 1998 को बुद्ध फिर हंसे...। इन प्रयोगों से विश्व को पता चला कि हम अपने दम पर परमाणु संपन्न राष्ट्र बने हैं। इसी समय बीएआरसी का संचालक होने के साथ मैं एक डिवाइस पर काम कर रहा था तभी पिता का निधन हो गया, लेकिन मुझे तुरंत पोखरण लौटना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबल हो रही थी कि भारत में कुछ तो पक रहा है और हमने पोखरण परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया। परमाणु क्षेत्र में इतना काम किया है कि सभी का उल्लेख यहां करना संभव नहीं। 2009 में सेवानिवृत्त हुआ तो लगा शरीर को अब कुछ आराम मिलेगा, लेकिन कई शैक्षणिक, ग्रामीण विकास की, कृषि क्षेत्र, आईआईटी की समितियों का पदाधिकारी बना दिया गया, तब से सिर्फ ही कर रहा हूं। जब तक शरीर साथ दे रहा है, मैं ग्रामीण भाग में खूब काम करना चाहता हूं। अपने देश के सबसे पड़े सम्मान में 1998 में पद्मश्री, 1999 में पद्म भूषण तथा 2009 को पद्म विभूषण मुझे दिए गए। इसके अलावा देश-विदेश से इतने पुरस्कार मिले हैं कि अब गिनती याद नहीं। देश का हर एक छात्र वह सब कर सकता है जो मैंने किया। जरूरत है खुद को परिस्थिति में ढालकर आगे बढ़ने की। -केंद्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्षअनिल काकोडकर(जैसा उन्होंने दिव्य मराठी पुणे की जयश्री बोकिल को बताया)



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इस सप्ताह केंद्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल काकोडकर।


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जीवन मंत्र डेस्क. रंगों का त्योहार होली इस बार मंगलवार 10 मार्च को मनेगा। इससे एक दिन पहले 9 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्रा के अनुसार होलिका दहन पर इस बार भद्रा दोष बाधक नहीं होगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि रात को करीब 11 बजे तक होने से प्रदोष काल में होलिका दहन हो सकेगा। वहीं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और अन्य ग्रहों की स्थिति से हर्ष, शंख और हंस नाम के 3 राजयोग भी बन रहे हैं। जिनमें होलिका दहन होने से मान-सम्मान, पारिवारिक सुख और समृद्धि प्राप्ति होती है। शुभ योगों में होलिका दहन होना देश के लिए शुभ और समृद्धिकारक रहेगा।

राजयोग में होलिका दहन का शुभ फल
होलिका दहन पर बुध और चंद्रमा से शंख योग बन रहा है। इस राजयोग के प्रभाव से देश की प्रतिष्ठा बढ़ेगी। देश की प्रगति और आर्थिक स्थिति में भीसुधार होने की संभावना है। वहीं, शनि के प्रभाव से हर्ष नाम का राजयोग बन रहा है। इसके प्रभाव से देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। दुश्मनों पर विजय मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताकतवर देशों में भारत की गिनती होगी। वहीं, स्वराशि स्थित बृहस्पति से बन रहे हंस योग से देश में धार्मिक भेदभाव की स्थिति खत्म होगी।

ग्रह नक्षत्रों से बन रहे शुभ योग
  • इस बार पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में होली मनेगी। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र सुख-सुविधा और समृद्धि आदि का कारक है। ये ग्रह उत्सव, हर्ष, आमोद-प्रमोद और ऐश्वर्य का भी कारक है। इससे सालभर शुक्र की कृपा मिलेगी।
  • आज सोमवार व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र होने से ध्वज योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. मिश्रा के अनुसार ध्वज योग से यश-कीर्ति और विजय मिलती है। वहीं, सोमवार को चंद्रमा का दिन माना जाता है। इसलिए पूर्णिमा तिथि होने से आज चंद्रमा का प्रभाव ज्यादा रहेगा। इसके साथ ही स्वराशि स्थित बृहस्पति की दृष्टि चंद्रमा पर होने से गजकेसरी योग का प्रभाव रहेगा।
  • आज सूर्य और बुध एक ही राशि में होकर बुधादित्य योग बना रहे हैं। गुरु और शनि भी अपनी-अपनी राशि में हैं। तिथि-नक्षत्र और ग्रहों की इस विशेष स्थिति में होलिका दहन पर रोग, शोक और दोष का नाश तो होगा ही, शत्रुओं पर भी विजय मिलेगी। इसके साथ ही धुलेंडी पर 10 मार्च को त्रिपुष्कर योग बनेगा।

होली की पूजा कैसे और कब करें
होली की पूजा से पहले भगवान नरसिंह और प्रह्लाद की पूजा की जाती है। पूजा के बाद अग्नि स्थापना की जाती है यानी होली जलाई जाती है। उस अग्नि में अपने-अपने घर से होलिका के रूप में उपला, लकड़ी या कोई भी लकड़ी का बना पुराना सामान जलाया जाता है। मान्यता है कि किसी घर में बुराई का प्रवेश हो गया हो तो वह भी इसके साथ जल जाए।

पूजा का महत्व
घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति आदि के लिए महिलाएं इस दिन होली की पूजा करती हैं। होलिका दहन के लिए लगभग एक महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। कांटेदार झाड़ियों या लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है, फिर होली वाले दिन शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन में जौ और गेहूं के पौधे डाले जाते हैं। शरीर में उबटन लगाकर उसके अंश भी डाले जाते हैं। ऐसा करने से जीवन में आरोग्य और सुख समृद्धि आती है।

भद्रा में नहीं होता होलिका दहन और पूजा
होली की पूजा प्रदोषकाल यानी शाम को करने का विधान है। होलिका दहन पूर्णिमा तिथि पर होने से इस पर्व पर भद्रा काल का विचार किया जाता है। भद्रा काल में पूजा और होलिका दहन करने से रोग, शोक, दोष और विपत्ति आती है। लेकिन इस साल भद्रा काल दोपहर करीब 1:38 तक ही रहेगा। इसलिए शाम को होलिका पूजन और दहन किया जा सकता है।

पूर्णिमा तिथि
प्रारंभ - 9 मार्च को सुबह 03 बजे
समाप्त - 9 मार्च को रात 11:20 तक

भद्रा काल
9 मार्च की सुबह 09:40 से दोपहर 12:25 तक
भद्रा काल रहेगा, इस समय शुभ कार्य वर्जित है।

होलिका दहन और पूजा मुहूर्त
शाम 6:35 से रात 11:05 तक

रंग धुलेंडी
10 मार्च को होली पर माता-पिता सहित सभी बड़े लोगों के पैरों में रंग लगाकर आशीर्वाद लें। इससे प्रेम बढ़ता है।

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Holi Holika Dahan 2020 Time | Holik Dahan Puja Vidhi Shubh Muhurat - Sruya Transit On Meen Rashifal, Saturn In Makar Rashi


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जीवन मंत्र डेस्क. रंगों का त्योहार होली इस बार मंगलवार 10 मार्च को मनेगा। इससे एक दिन पहले 9 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्रा के अनुसार होलिका दहन पर इस बार भद्रा दोष बाधक नहीं होगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि रात को करीब 11 बजे तक होने से प्रदोष काल में होलिका दहन हो सकेगा। वहीं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और अन्य ग्रहों की स्थिति से हर्ष, शंख और हंस नाम के 3 राजयोग भी बन रहे हैं। जिनमें होलिका दहन होने से मान-सम्मान, पारिवारिक सुख और समृद्धि प्राप्ति होती है। शुभ योगों में होलिका दहन होना देश के लिए शुभ और समृद्धिकारक रहेगा।

राजयोग में होलिका दहन का शुभ फल
होलिका दहन पर बुध और चंद्रमा से शंख योग बन रहा है। इस राजयोग के प्रभाव से देश की प्रतिष्ठा बढ़ेगी। देश की प्रगति और आर्थिक स्थिति में भीसुधार होने की संभावना है। वहीं, शनि के प्रभाव से हर्ष नाम का राजयोग बन रहा है। इसके प्रभाव से देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। दुश्मनों पर विजय मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताकतवर देशों में भारत की गिनती होगी। वहीं, स्वराशि स्थित बृहस्पति से बन रहे हंस योग से देश में धार्मिक भेदभाव की स्थिति खत्म होगी।

ग्रह नक्षत्रों से बन रहे शुभ योग
  • इस बार पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में होली मनेगी। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र सुख-सुविधा और समृद्धि आदि का कारक है। ये ग्रह उत्सव, हर्ष, आमोद-प्रमोद और ऐश्वर्य का भी कारक है। इससे सालभर शुक्र की कृपा मिलेगी।
  • आज सोमवार व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र होने से ध्वज योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. मिश्रा के अनुसार ध्वज योग से यश-कीर्ति और विजय मिलती है। वहीं, सोमवार को चंद्रमा का दिन माना जाता है। इसलिए पूर्णिमा तिथि होने से आज चंद्रमा का प्रभाव ज्यादा रहेगा। इसके साथ ही स्वराशि स्थित बृहस्पति की दृष्टि चंद्रमा पर होने से गजकेसरी योग का प्रभाव रहेगा।
  • आज सूर्य और बुध एक ही राशि में होकर बुधादित्य योग बना रहे हैं। गुरु और शनि भी अपनी-अपनी राशि में हैं। तिथि-नक्षत्र और ग्रहों की इस विशेष स्थिति में होलिका दहन पर रोग, शोक और दोष का नाश तो होगा ही, शत्रुओं पर भी विजय मिलेगी। इसके साथ ही धुलेंडी पर 10 मार्च को त्रिपुष्कर योग बनेगा।

होली की पूजा कैसे और कब करें
होली की पूजा से पहले भगवान नरसिंह और प्रह्लाद की पूजा की जाती है। पूजा के बाद अग्नि स्थापना की जाती है यानी होली जलाई जाती है। उस अग्नि में अपने-अपने घर से होलिका के रूप में उपला, लकड़ी या कोई भी लकड़ी का बना पुराना सामान जलाया जाता है। मान्यता है कि किसी घर में बुराई का प्रवेश हो गया हो तो वह भी इसके साथ जल जाए।

पूजा का महत्व
घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति आदि के लिए महिलाएं इस दिन होली की पूजा करती हैं। होलिका दहन के लिए लगभग एक महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। कांटेदार झाड़ियों या लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है, फिर होली वाले दिन शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन में जौ और गेहूं के पौधे डाले जाते हैं। शरीर में उबटन लगाकर उसके अंश भी डाले जाते हैं। ऐसा करने से जीवन में आरोग्य और सुख समृद्धि आती है।

भद्रा में नहीं होता होलिका दहन और पूजा
होली की पूजा प्रदोषकाल यानी शाम को करने का विधान है। होलिका दहन पूर्णिमा तिथि पर होने से इस पर्व पर भद्रा काल का विचार किया जाता है। भद्रा काल में पूजा और होलिका दहन करने से रोग, शोक, दोष और विपत्ति आती है। लेकिन इस साल भद्रा काल दोपहर करीब 1:38 तक ही रहेगा। इसलिए शाम को होलिका पूजन और दहन किया जा सकता है।

पूर्णिमा तिथि
प्रारंभ - 9 मार्च को सुबह 03 बजे
समाप्त - 9 मार्च को रात 11:20 तक

भद्रा काल
9 मार्च की सुबह 09:40 से दोपहर 12:25 तक
भद्रा काल रहेगा, इस समय शुभ कार्य वर्जित है।

होलिका दहन और पूजा मुहूर्त
शाम 6:35 से रात 11:05 तक

रंग धुलेंडी
10 मार्च को होली पर माता-पिता सहित सभी बड़े लोगों के पैरों में रंग लगाकर आशीर्वाद लें। इससे प्रेम बढ़ता है।

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Holi Holika Dahan 2020 Time | Holik Dahan Puja Vidhi Shubh Muhurat - Sruya Transit On Meen Rashifal, Saturn In Makar Rashi


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