Friday, January 24, 2020

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खेल डेस्क. टोक्यो ओलिंपिक गेम्स के लिए चीन में होने वाले बॉक्सिंग क्वालियर मुकाबले अब जॉर्डन में खेले जाएंगे। कोरोनावायरस के कारण चीन से इसकी मेजबानी छिन ली गई है। इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी की बॉक्सिंग टास्क फोर्स (बीटीएफ) ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। एशियन/ओशियाना क्वालिफाइंग इवेंट अब जॉर्डन की राजधानी अम्मान में 3 से 11 मार्च तक होंगे।

इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी ने कहा, ‘‘ये मुकाबले चीन के वुहान में 3 से 14 फरवरी तक होने थे। बीटीएफ और चीनी ओलंपिक कमेटी के संयुक्त फैसले के बाद कोरोनावायरस के कारण इवेंट को वहां से हटाया गया है। सभी विकल्पों की सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद बीटीएफ ने जॉर्डन ओलंपिक समिति के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी। इससे इवेंट की तारीखों और स्थान की जल्द से जल्द पुष्टि हो सकेगी।’’

बॉक्सिंग और महिला फुटबॉल क्वालिफाइंग मुकाबले भी वुहान से बाहर
इससे पहले बॉक्सिंग और महिला फुटबॉल क्वालिफाइंग मुकाबले को वुहान से बाहर करवाने का फैसला लिया गया था। यहां 3 से 9 फरवरी के बीच चीन, ताइवान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीमें महिला एशियन फुटबॉल के ग्रुप बी के मुकाबले होने थे। साथ ही 3 से 14 फरवरी के बीच एशिया/ओशियाना बॉक्सिंग मुकाबले होने थे। फुटबॉल मुकाबले अब चीन के ही नानझिंग में होंगे। उसकी तारीखों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।



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बॉक्सिंग क्वालिफायर मुकाबले वुहान में 3 से 14 फरवरी तक होने थे।


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मुंबई. भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी 2018 को हुई हिंसा से जुड़े सभी मामलों की जांचअब राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) करेगी। केंद्र सरकार के इस फैसले पर महाराष्ट्र केगृह मंत्री अनिल देशमुख ने कड़ीआपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य सरकार की अनुमति के बिनामामले की जांच एनआईए को सौंप दी, जो कि संविधान के खिलाफ है। पिछले दो साल से भीमा कोरेगांव से जुड़े सभीमामलों की जांच महाराष्ट्र पुलिस कर रही थी।

केंद्र का यह फैसला महाराष्ट्र सरकार द्वारा भीमा कोरेगांव मामले को लेकर समीक्षा बैठक के एक दिन बाद आया है। गुरुवार कोउपमुख्यमंत्री अजित पवार और गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भीमा कोरेगांव मामले की अधिकारियों के साथ समीक्षा की थी।


बैठक में कुछ केस वापस लिए जाने पर चर्चा हुई थी: देशमुख
गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि भीमा कोरेगांव मामले की समीक्षा बैठक मेंकुछ केस वापस लिए जाने और पूरे मामले की एसआईटी द्वारा जांच कराए जाने पर चर्चा हुई थी। आशंका है कि अब केंद्र और राज्य में बीचइस मामले को लेकर खींचतान बढ़ सकती है। वहीं, पूर्व सीएम फडणवीस ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंपे जाने को सही कदम बताया। उन्होंने कहा, 'यह सही फैसला है। क्योंकि मामला सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश में बढ़ रहा है। जांच से देशभर में फैले अर्बन नक्सलियों का खुलासा होगा।

मामले में 19 आरोपी
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में अरुण थॉमस फेरेरिया, रोना जैकब विल्सन, सुधीर प्रल्हाद धवले समेत 19 आरोपी हैं। पुलिस द्वारा अदालत में कुछ महीने पहले पेश की गई ड्राफ्ट चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या की तरह ही रोड शो के दौरान पीएम मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे। आरोपियों में मानवाधिकार वकील, शिक्षाविद और लेखक शामिल हैं। पुलिस ने इनका संबंध प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी), कबीर कला मंच (केकेएम) से बताया है।

पुणे में ऐसे हुई थी हिंसा
31 दिसंबर 2017 को यलगार परिषद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें दिए गए भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन 1 जनवरी 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के निकट हिंसा हुई थी।इसमें एक युवक की जान चली गई थी। साथ हीकरोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ था।



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1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा में एक युवक की मौत हो गई थी-फाइल


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नई दिल्ली. पतंजलि के प्रमोटर योगगुरु रामदेव ने उम्मीद जताई है कि अगले वित्त वर्ष में कंपनी का टर्नओवर 35 हजार से 40 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा। अगले 5 साल में यह 50 हजार करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपए तक होगा और पतंजलि हिंदुस्तान यूनीलीवर को पीछे छोड़ एफएमसीजी सेक्टर में देश की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी।

पतंजलि ने रुचि सोया को 4350 करोड़ रुपए में खरीदा है
रामदेव के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में पतंजलि का टर्नओवर 25,000 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है। इसमें पतंजलि ग्रुप की पहले से चल रही कंपनियों का योगदान 12 हजार करोड़ रुपए और रुचि सोया का 13,000 करोड़ रुपए रह सकता है। पतंजलि ने दिवालिया प्रक्रिया के तहत 4,350 करोड़ रुपए में रुचि सोया को खरीदा है।

रुचि सोया को खरीदने की दौड़ में अदाणी ग्रुप भी शामिल था

रुचि सोया के अधिग्रहण से पतंजलि को ग्रोथ में तीन गुना इजाफे की उम्मीद है। इस अधिग्रहण से पतंजलि खाद्य तेल की श्रेणी में भी प्रमुख कंपनी बन गई। वह सोयाबीन, सनफ्लॉवर और पाम ऑयल के घरेलू उत्पादन में भी अग्रणी हो गई है। रुचि सोया को खरीदने की दौड़ में अदाणी ग्रुप भी शामिल था। दूसरी ओर हिंदुस्तान यूनीलीवर (एचयूएल) का रेवेन्यू पिछले वित्त वर्ष में 38,224 करोड़ रुपए रहा था। जीएसके के कंज्यूमर हेल्थकेयर बिजनेस को खरीदने से एचयूएल के रेवेन्यू में भी इजाफा होने की उम्मीद है।

एफएमसीजी सेक्टर में सुस्ती का असर सिर्फ लग्जरी उत्पाद बेचने वाली कंपनियों पर: रामदेव

रामदेव ने बताया कि रुचि सोया के न्यूट्रेला ब्रांड के तहत तीन नए प्रोडक्ट- ऑयल न्यूट्रेला गोल्ड, न्यूट्रेला हनी और न्यूट्रेला प्रोटीन आटा लॉन्च करने की योजना है। सेहत के प्रति जागरुक, दिल की बीमारियों और हाई बीपी जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को ध्यान में रखकर ये उत्पाद लाए जाएंगे। एफएमसीजी सेक्टर में सुस्ती के बारे में रामदेव ने कहा कि यह अस्थाई दौर था। इससे लग्जरी प्रोडक्ट बेचने वाली कंपनियां ज्यादा प्रभावित हुईं, रोजाना जरूरत की वस्तुएं बेचने वाली कंपनियों पर असर नहीं पड़ा।



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पतंजलि के प्रमोटर रामदेव।


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नई दिल्ली. निर्भया मामले के 3 दोषियों विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर की तरफ सेदिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की गई। शनिवार को इस पर सुनवाई के दौरान प्रॉसिक्यूशन ने दलील दी किजेल अधिकारियों ने दोषियों के वकीलों को सभी जरूरी दस्तावेज दे दिए हैं,लेकिन वे सजा टालने के लिएलगातार तरकीबें अपना रहे हैं। इस पर विनय के वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल को धीमा जहर दिया जा रहा है।उसे हॉस्पिटल में भी भर्ती कराया गया, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट अब तक नहीं दी गई।

दोषियों की याचिका में कहा गया कि कई बार के अनुराेध के बावजूद तिहाड़ जेल प्रशासन ने 2012-2015 और2019-20 कामेडिकल रिकाॅर्ड, दाेषियाें के व्यवहार से जुड़े दस्तावेज मुहैया नहीं कराए, जबकि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करनी है।

गुनहगार विनय राष्ट्रपति काे अपनी डायरी भी देना चाहता है

गुनहगारविनय राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद काे दया याचिका के साथ अपनी डायरी भी देना चाहता है। अपने वकील एपी सिंह के जरिए काेर्ट में दाखिल याचिका में विनय ने तिहाड़ प्रशासन से अपनी 170 पेज की डायरी देने का आदेश देने का अनुराेध किया है। वह इस डायरी काे अपनी दया याचिका के साथ राष्ट्रपति काे भेजेगा।


अन्नाअठावले दोषियों को फांसी हाेने तक उपवास करेंगे

निर्भया के गुनहगाराें काे फांसी की सजा देने की मांग को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे 34 दिन से मौन व्रत पर हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शुक्रवार काे अन्ना से उनके गांव रालेगण सिद्धी में मुलाकात की। इसके बाद अठावले ने कहा, “मैंने यह तय किया है कि जब तक निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा नहीं हो जाती, मैं कुछ नहीं खाऊंगा।’

निर्भया केस में अब तक

निर्भया के चारों गुनहगार जेल नंबर 3 की हाई सिक्योरिटी सेल की अलग-अलग कोठरियों में हैं। दूसरे कैदियों से तो दूर ये लोग आपस में भी नहीं मिल पाते। दिन में एक-डेढ़ घंटे के लिए ही इन्हें कोठरियों से निकाला जाता है। चारों एक साथ नहीं निकाले जाते।

20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्मी पवन की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने वारदात के वक्त खुद के नाबालिग होने का दावा किया था। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई नया आधार नहीं है।

3 दोषियों के पास 5 विकल्प
1) पवन, मुकेश, अक्षय और विनय शर्मा की फांसी के लिए दूसरी बार डेथ वॉरंट जारी हो चुका है। इसमें फांसी की तारीख 1 फरवरी मुकर्रर की गई है। पहले वॉरंट में यह तारीख 22 जनवरी थी। दोषी पवन के पास अभी क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका का विकल्प है। यही विकल्प अक्षय सिंह के पास हैं। विनय शर्मा के पास भी दया याचिका का विकल्प है। दोषी मुकेश के पास अब कोई कानूनी विकल्प नहीं है। यानी तीन दोषी अभी 5 कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
2) फांसी में एक और केस अड़चन डाल रहा है। वह है सभी दोषियों के खिलाफ लूट और अपहरण का केस। दोषियों के वकील एपी सिंह का कहना है कि पवन, मुकेश, अक्षय और विनय को लूट के एक मामले में निचली अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में लंबित है। जब तक इस पर फैसला नहीं होता जाता, दोषियों को फांसी नहीं दी जा सकती।
3) जिन दोषियों के पास कानूनी विकल्प हैं, वे तिहाड़ जेल द्वारा दिए गए नोटिस पीरियड के दौरान इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। दिल्ली प्रिजन मैनुअल के मुताबिक, अगर किसी मामले में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी दी जानी है तो किसी एक की याचिका लंबित रहने तक सभी की फांसी पर कानूनन रोक लगी रहेगी। निर्भया केस भी ऐसा ही है, चार दोषियों को फांसी दी जानी है। अभी कानूनी विकल्प भी बाकी हैं और एक केस में याचिका भी लंबित है। ऐसे में फांसी फिर टल सकती है।



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Gunhugare again filed a petition in the court, a second time warrant has been issued against the culprits; Hanging on February 1


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पटना.बिहार के पटना स्थित जेडी वीमेंस कॉलेज में महिलाओं के बुर्का पहन कर आने पर पाबंदी लगा दी गई है। कॉलेज प्रशासन ने ड्रेस कोड को लेकर नए नियम लागू किए हैं। इसके मुताबिक, सभी छात्राओं को एक तय ड्रेस में ही कॉलेज आना होगा। सिर्फ शनिवार को ही छात्राएं अलग ड्रेस में आ सकती हैं।हालांकि, इस दिन भी वे बुर्का नहीं पहन सकतीं। इन नियमों के उल्लंघन पर 250 रुपए के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

कॉलेज के नए नियमों परछात्राओं नेआपत्ति जताई है। उनका कहना है कि बुर्के से कॉलेज को क्या दिक्कत हो सकती हैये नियम थोपने वाली बात है। इस मामले में प्राचार्या डॉ. श्यामा राय ने कहा कि ये घोषणा हमने पहले ही की थी। नए सेशन के ओरिएंटेशन के समय में छात्राओं को इस बारे में बताया गया था। हमने ये नियम छात्राओं में एकरूपता लाने के लिए किया है। शनिवार के दिन वो अन्य ड्रेस पहन सकती हैं, शुक्रवार तक उन्हें ड्रेस कोड में आना होगा।

लड़कियां बुर्कापहनकर पढ़ने जाएं, यह इस्लाम में नहीं: इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज

वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज़ फॉर डायलॉग की डीजी डॉ. जीनत शौकत अली कहती हैं कि बुर्का शब्द कहीं पर भी कुरान में नहीं आया है। कॉलेज अगर किसी के विशेष पहनावे पर रोक लगाता है तो यह व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो सकता है। इस्लाम में कहीं नहीं कहा गया है कि बच्चियां बुर्का पहनकर पढ़ने जाएं। बस महिलाओं को सम्मानजनक तरीके से कपड़े पहनने को कहा गया है। छोटी-छोटी बातों को तूल देने की बजाय बच्चियों को पढ़ाने पर जोर देना चाहिए।

कॉलेज में ड्रेस कोड का पालन करना चाहिए: वरिष्ठ वकील

पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रभाकर टेकरीवाल का कहना है कि अगर कॉलेज में ड्रेस कोड तय है, तो उसकापालन जरूरी है। वकील तककोर्ट के लिए तय ड्रेस कोड का पालन करते हैं। कोर्ट में कोई बुर्का पहन कर नहीं आता। लिहाजा, कॉलेज के मामले में भी आपत्ति का औचित्य नहीं है। कानूनन भी इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

पाबंदी लगी है तो विरोध किया जाएगा

कार्यवाहक नाजिम, इमारत-ए-शरिया,मौलाना शिबली अलकासमी बोले-मामले की तहकीक जाएगी। अगर पाबंदी लगी है तो फिर इसका विरोध किया जाएगा। जेडी वीमेंस कॉलेज का यह कदम गलत है। यह प्राचार्या की मानसिकता को दर्शाता है। एक खास तबके को निशाना बनाया जा रहा है। यह समाज को तोड़ने वाला कदम है।,



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जीडी कॉलेज की प्राचार्य ने कहा- ये नियम छात्राओं में एकरूपता लाने के लिए किया है। (फाइल फोटो)


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लंदन. यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने यूरोपियन यूनियन (ईयू) से बाहर होने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। जॉनसन ने डील पर हस्ताक्षर के दौरान कहा कि देश के लिए यह शानदार पल है। 2016 के जनमत संग्रह का नतीजा आखिरकार लागू होने वाला है। उम्मीद है कि इससे दोनों (यूके और ईयू) के बीच सालों से हो रही बहस और अलगाव में कमी आएगी। माना जा रहा है कि यूके की ईयू से बाहर होने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। समझौते के बाद जॉनसन सरकार 31 जनवरी तक ब्रेग्जिट डील पूरी कर सकती है।

एक दिन पहले ही यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने भी यूके को बाहर करने के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। अब 29 जनवरी को ब्रिटिश संसद में यूरोप से बाहर होने के समझौतों पर चर्चा और वोटिंग होगी। यूरोप की संसद में भी इसी दिन यूके को बाहर करने पर वोटिंग होगी, हालांकि यह सिर्फ प्रतीकात्मक रहेगी। यूरोप के ज्यादातर नेता यूके को ईयू से बाहर करने के फैसले पर हामी भर चुके हैं।

ब्रेग्जिट में अब आगे क्या?

31 जनवरी के बाद 11 महीने का ट्रांजिशन पीरियड रखा गया है। इस दौरान ब्रिटेन यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं रहेगा, पर उसके नियमों का पालन करेगा और बजट में योगदान देगा। ट्रांजिशन पीरियड इसलिए रखा गया है ताकि ब्रिटेन और ईयू व्यापार समझौते समेत भविष्य में संबंधों पर बात कर सकें। ट्रांजिशन पीरियड 1 फरवरी से शुरू हो जाएगा।

यूके को ईयू से बाहर होने का भारीनुकसान

ब्रेग्जिट से ब्रिटिश इकोनॉमी को 2016 से 2020 तक 18.9 लाख करोड़ का नुकसान संभव है। फिलहाल यह 12 लाख करोड़ रु. है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक हाल के वर्षों में वैश्विक वृद्धि कमजोर रही है, पर ब्रिटेन ज्यादा ही पिछड़ गया है। इसकी सालाना ग्रोथ रेट 2% से घटकर 1% रह गई है।


यूरोपियन यूनियन ने ब्रिटेन को ट्रेन से भेजे ब्रेग्जिट के दस्तावेज
बेल्जियम के ब्रसेल्स में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद यूरोपियन यूनियन से ब्रेग्जिट के दस्तावेज ट्रेन के जरिए भेजे गए। ट्रेन शुक्रवार को ही लंदन पहुंची, जहां से डील के दस्तावेज जॉनसन तक पहुंचाए गए। इस मौके पर बेल्जियम के पूर्व प्रधानमंत्री और ईयू समिट की अध्यक्षता करने वाले चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूके के बाहर होने से हमारे रिश्ते बदलेंगे, लेकिन हमारी दोस्ती कायम रहेगी। हम जल्द नए सहयोगी और मित्र राष्ट्र की तरह साथ काम करेंगे।

3 साल पहले यूके ने किया था ईयू से अलग होने का फैसला
यूके ने जून 2016 में यूरोपियन यूनियन से अलग होने का फैसला किया था। ऐतिहासिक रेफरेंडम में ब्रिटेन की जनता ने 28 देशों के यूरोपियन यूनियन से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद ईयू ने यूके को अलग होने के लिए 31 मार्च 2018 तक का समय दिया। हालांकि, तब ब्रिटिश सांसदों ने यूरोप से बाहर होने की सरकार की शर्तों को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद ईयू ने ब्रेग्जिट की तारीख को 31 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दिया। हालांकि, संसद ने इस बार भी सरकार की शर्तेंनामंजूर कर दीं और ब्रेग्जिट की तारीख 31 जनवरी कर दी गई।



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Prime Minister Johnson signs agreement to exit European Union, Brexit set for 31 January news and updates


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नई दिल्ली. निर्भया मामले के 3 दोषियों विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर की तरफ सेदिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की गई। शनिवार को इस पर सुनवाई के दौरान प्रॉसिक्यूशन ने दलील दी किजेल अधिकारियों ने दोषियों के वकीलों को सभी जरूरी दस्तावेज दे दिए हैं,लेकिन वे सजा टालने के लिएलगातार तरकीबें अपना रहे हैं। इस पर विनय के वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल को धीमा जहर दिया जा रहा है।उसे हॉस्पिटल में भी भर्ती कराया गया, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट अब तक नहीं दी गई।

दोषियों की याचिका में कहा गया कि कई बार के अनुराेध के बावजूद तिहाड़ जेल प्रशासन ने 2012-2015 और2019-20 कामेडिकल रिकाॅर्ड, दाेषियाें के व्यवहार से जुड़े दस्तावेज मुहैया नहीं कराए, जबकि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करनी है।

गुनहगार विनय राष्ट्रपति काे अपनी डायरी भी देना चाहता है

गुनहगारविनय राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद काे दया याचिका के साथ अपनी डायरी भी देना चाहता है। अपने वकील एपी सिंह के जरिए काेर्ट में दाखिल याचिका में विनय ने तिहाड़ प्रशासन से अपनी 170 पेज की डायरी देने का आदेश देने का अनुराेध किया है। वह इस डायरी काे अपनी दया याचिका के साथ राष्ट्रपति काे भेजेगा।


अन्नाअठावले दोषियों को फांसी हाेने तक उपवास करेंगे

निर्भया के गुनहगाराें काे फांसी की सजा देने की मांग को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे 34 दिन से मौन व्रत पर हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शुक्रवार काे अन्ना से उनके गांव रालेगण सिद्धी में मुलाकात की। इसके बाद अठावले ने कहा, “मैंने यह तय किया है कि जब तक निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा नहीं हो जाती, मैं कुछ नहीं खाऊंगा।’

निर्भया केस में अब तक

निर्भया के चारों गुनहगार जेल नंबर 3 की हाई सिक्योरिटी सेल की अलग-अलग कोठरियों में हैं। दूसरे कैदियों से तो दूर ये लोग आपस में भी नहीं मिल पाते। दिन में एक-डेढ़ घंटे के लिए ही इन्हें कोठरियों से निकाला जाता है। चारों एक साथ नहीं निकाले जाते।

20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्मी पवन की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने वारदात के वक्त खुद के नाबालिग होने का दावा किया था। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई नया आधार नहीं है।

3 दोषियों के पास 5 विकल्प
1) पवन, मुकेश, अक्षय और विनय शर्मा की फांसी के लिए दूसरी बार डेथ वॉरंट जारी हो चुका है। इसमें फांसी की तारीख 1 फरवरी मुकर्रर की गई है। पहले वॉरंट में यह तारीख 22 जनवरी थी। दोषी पवन के पास अभी क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका का विकल्प है। यही विकल्प अक्षय सिंह के पास हैं। विनय शर्मा के पास भी दया याचिका का विकल्प है। दोषी मुकेश के पास अब कोई कानूनी विकल्प नहीं है। यानी तीन दोषी अभी 5 कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
2) फांसी में एक और केस अड़चन डाल रहा है। वह है सभी दोषियों के खिलाफ लूट और अपहरण का केस। दोषियों के वकील एपी सिंह का कहना है कि पवन, मुकेश, अक्षय और विनय को लूट के एक मामले में निचली अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में लंबित है। जब तक इस पर फैसला नहीं होता जाता, दोषियों को फांसी नहीं दी जा सकती।
3) जिन दोषियों के पास कानूनी विकल्प हैं, वे तिहाड़ जेल द्वारा दिए गए नोटिस पीरियड के दौरान इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। दिल्ली प्रिजन मैनुअल के मुताबिक, अगर किसी मामले में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी दी जानी है तो किसी एक की याचिका लंबित रहने तक सभी की फांसी पर कानूनन रोक लगी रहेगी। निर्भया केस भी ऐसा ही है, चार दोषियों को फांसी दी जानी है। अभी कानूनी विकल्प भी बाकी हैं और एक केस में याचिका भी लंबित है। ऐसे में फांसी फिर टल सकती है।



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