Sunday, April 26, 2020

easysaran.wordpress.com

(वीरेंद्र सिंह चौहान) एक पिता के तीनों मासूम कोरोना पाॅजिटिव आ जाएं, पूरा परिवार क्वारैंटाइन भेजा जाए ताे सदमे और चिंता के बीच काेई रास्ता नहीं दिखता। जोधपुर के उदयमंदिर निवासी रविंद्र चांवरिया ने तीनों बच्चों और भांजे के लिए सदमे का नहीं, बल्कि संघर्ष और जोखिम का रास्ता चुना। उन्होंने स्वस्थ होते हुए भी चारों कोरोनाग्रस्त मासूमों के साथ हॉस्पिटल में रहने का निर्णय लिया। लक्ष्य सिर्फ एक- कोरोना की बात से सदमे में आए चारों मासूमों को शारीरिक व मानसिक तौर पर पॉजिटिव रखना।

उन्हें विश्वास दिलाना कि कोरोना को हराना है और घर जाना है। पिता में इतना आत्मविश्वास हो तो भला बच्चे प्रतिभा (6), विनीत (12), उदिता (13) और भांजा मयंक (11) यकीन क्याें नकरें। इसके लिए हॉस्पिटल में रविंद्र ने 8 अप्रैल से अपनी पूरी दिनचर्या बदल दी है। सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक वे बच्चों को योग करवाने, खाना खिलाने, दवाइयां देने, गेम्स खिलाने, पढ़ाने, आराम करवाने, प्रार्थना करवाने में जुटे रहते हैं। इन सबका ही असर है कि बच्चे काेराेना के डर से उबरकर पूरी मजबूती और प्रसन्नता से जुटे हैं।

दादा से हुआसंक्रमण,पूरा परिवार क्वारैंटाइन सेंटर में
मासूम बच्चाें काे अपने दादा से संक्रमण हुआ था। दादा भी एमडीएम हाॅस्पिटल में ही अलग एडमिट हैं। इसके बाद पूरे परिवार काे क्वारैंटाइन किया गया। इसमें बच्चाें की मां के साथ ही 3 चाचा और 3 चाचियां भी हैं।
अस्पताल में अलग रूम दिया, लिखवाया कुछ हुआताे जिम्मेदारी स्वयं की
एक ही परिवार के 4 बच्चाें काे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने आईसीयू में बच्चों और पिता के लिए 5 बेड का अलग रूम दिया है। रविंद्र संक्रमण से बचने काे डिस्टेंस रखते हैं, उन्हें हर दूसरे दिन एन-95 मास्क मिलता है, जिसे वे 24 घंटे लगाते हैं। हालांकि, रविंद्र से यह भी लिखवाया गया कि उन्हें काेराेना और इसके खतरे की जानकारीहै, वे अपने जाेखिम पर यहां रुक रहे हैं, कुछ भी हाेने पर वे खुद जिम्मेदार हैं। बच्चाें के लिए अस्पताल प्रशासन राेज नए मास्क देता है। रविंद्र का कहना है कि यहां पर बढ़िया भाेजन, दूध आदि के साथ ही दवा और केयर बहुत अच्छी है।
बच्चाें काे सुलाकर ही न्यूज देखते हैं
रविंद्र सुबह 5 बजे उठकर खुद नित्यकर्म से निवृत होकर बच्चों को उठाते हैं। उन्हें तैयार कर अंदर ही वॉकिंग और नाश्ता करवाते हैं। इसके बाद उन्हें पढ़ाते हैं। लंच के बाद वे वीडियोकॉल से पूरे परिवार से बात करवाते हैं। दोपहर में कुछ देर आराम करवाने के बाद वे बच्चों को योग और आर्टवर्क करवाते हैं। इसके बाद रूम में ही गेम खिलाते हैं। सांझ ढले वे बच्चों को पूजा के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ भी करवाते हैं। बच्चों को मोबाइल पर प्रोग्राम दिखाने, खाना खिलाने और दूध पिलाने के बाद सुलाते हैं। इसके बाद ही वे ऑनलाइन न्यूज देखते हैं।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
कोरोना वार्ड के अपने रूम में चारों बच्चे गेम खेलते हुए। पिता ने उनके अंदर इतनी सकारात्मकता भर दी कि बच्चे कोरोना का सारा डर भूल गए।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2KzEGyX
via

No comments:

Post a Comment

easysaran.wordpress.com

from देश | दैनिक भास्कर https://ift.tt/eB2Wr7f via