Sunday, March 15, 2020

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बागपत.गोवा के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। सत्यपाल मलिक ने कहा कि गवर्नर का कोई काम नहीं होता। कश्मीर में जो गवर्नर होता है वो अक्सर दारू पीता है और गोल्फ खेलता है। बाकी जगह जो गवर्नर होते हैं वो आराम से रहते हैं, किसी झगड़े में नहीं पड़ते। दरअसल, गोवा के राज्यपाल सत्यपाल सिंह मलिक रविवार को बागपत स्थित अपने पैतृक गांव हिसावदा पहुंचे थे, जहां एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं। मलिक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रह चुके हैं।



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गोवा के राज्यपाल सत्यपाल मलिक- फाइल फोटो।


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मदीना (विवियन यी).पश्चिमी देशों में सऊदी अरब को प्रताड़ित महिलाओं, धार्मिक कट्‌टरता, मानव अधिकारों के उल्लंघन जैसी बातों के लिए जाना जाता है। ऐसी खबरें भी आती हैं कि यहां से महिलाएं हर हाल में भागना चाहती हैं। लेकिन, युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने महिलाओं को कई अधिकार देकर इस छवि को सुधारने की कोशिश की है। महिलाओं को ड्राइविंग करने, खेल प्रतियोगिताएं देखने, पुरुष की अनुमति के बिना यात्रा करने जैसी छूट मिली है। बड़े शहरों में महिलाएं बाल खुले रखकर बाहर निकलती हैं। पुरुषों के साथ खुलकर मिलती-जुलती हैं। मदीना, रियाद, जेद्दा में कई महिलाएं पुरुषों के साथ कॉफी शॉप में काम कर रही हैं। लेकिन, कई परिवारों में अब भी महिलाओं को पिता, पति, भाइयों और बेटों की मर्जी से ही चलना पड़ता है।

दो साल की खींचतान के बाद दोनों को काम करने की अनुमति मिली

युवराज सलमान महिलाओं को पुरुषों के नियंत्रण से बाहर करने की चर्चा करते हैं। पर विवाह, स्वेच्छा से जीवन बिताने सहित कई मामलों में उनकी इच्छा का कोई महत्व नहीं है। तीर्थ स्थान मदीना की रागदा और रफा अबुजा ने अपने पिता को बताया कि वे कॉफी शॉप में काम करना चाहती हैं। परिवार में तूफान खड़ा हो गया। पिता ने कहा लोग क्या कहेंगे? दो साल की खींचतान के बाद दोनों को काम करने की अनुमति मिल गई। उनके ग्राहकों और सहयोगियों में महिलाएं और पुरुष भी हैं। वे अपने बाल ढांकती हैं लेकिन चेहरा खुला रहता है। अचरज है कि उनके माता-पिता भी कॉफी शॉप पर आने लगे हैं।

पहलेऑफिस में पुरुषों से अलग काम करती थीं

रागदा और रफा पहले बुर्का पहनती थीं। एक ऑफिस में पुरुषों से अलग काम करती थीं। छोटे शहरों और गांवों में लोग अब भी पुरानी परंपराओं से चिपके हुए हैं। दूसरी तरफ रियाद, जेद्दा जैसे शहरों में जिंदगी एकदम अलग है। रागदा और रफा ने जब नौकरी की शुरुआत की थी तब मदीना में महिलाओं के स्टाफ वाली कॉफी शॉप नहीं थीं। दोनों बहनों ने हिजाब पहनना बंद कर दिया। वे लड़कों से बेझिझक बात करती थीं। शॉप मालिक ने इससे चिढ़कर उन्हें नौकरी से निकाल दिया। रफा का कहना है, मेरा चेहरा मेरी पहचान है। इस बीच महिला, पुरुष स्टाफ के कई कॉफी शॉप खुल गए। रागदा को लेडी बग और रफा को ब्लिंक नामक शॉप में काम मिल गया।

पति, पत्नियों के काम करने के पक्ष में

2018 में एक स्टडी में पाया गया कि अधिकतर सऊदी पति अपनी पत्नियों के घर से बाहर काम करने के पक्ष में है लेकिन वे सोचते हैं कि दूसरे पुरुष क्या कहेंगे। कई लोगों ने पत्नियों के नाम भर्ती एजेंसियों में दर्ज कराए हैं। रियाद में 18 साल की रेवान मोहा एक कॉफी शॉप में काम करती हैं पर उन्होंने अपने पिता को इसकी जानकारी नहीं दी है। उसने मां को सब कुछ बता दिया है। मोहा के साथ काम करने वाली बीस साल की जुमाना अलशेख के परिवार ने उसे खुली छूट दे रखी है। वह कहती है, युवराज सलमान ने महिलाओं को सभी अधिकार दिए हैं।



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मदीना की एक कॉफी शॉप में रागदा और रफा।


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बीजिंग/वॉशिंगटन (जेवियर हर्नांडेज, माइकेल शीयर,दाईसुके वाकाबयाशी).दुनियाभर में फैल रहे कोरोना वायरस का जीवन के सभी क्षेत्रों पर असर दिखाई पड़ रहा है। चीन की सरकार ने वायरस के प्रकोप की खबरों को रोकने के लिए अभियान छेड़ रखा है। खबरें सेंसर हो रही हैं। न्यूज साइट बंद कर दी हैं। सिटीजन जर्नलिस्ट को प्रताड़ित किया जा रहा है। लेकिन, पत्रकार दूसरे तरीके से खबरें देने लगे हैं। सेंसरशिप के बीच राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना करने वाले एक अरबपति के अचानक गायब होने पर संदेह उभरे हैं। एक अन्य आलोचक को गिरफ्तार कर लिया है। उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कोरोना से राहत देने के संबंध में बार-बार गलत जानकारी दे रहे हैं।

वुहान में टेस्टिंग किट की कमी का खुलासा

कई चीनी पत्रकारों ने सरकार की विफलता और जानकारी छिपाने की कोशिशों का भंडाफोड़ किया है। वे प्रेस की आजादी की मांग उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर देश में चल रहे अन्याय और ज्यादती को सामने ला रहे हैं। कई पत्रकारों ने नाकाबंदी से पहले वुहान में होटलों में अस्थायी न्यूज ब्यूरो खोल लिए थे। प्रोफाइल मैग्जीन ने वुहान में टेस्टिंग किट की कमी का खुलासा किया है। बिजनेस मैग्जीन काइजिंग ने एक अज्ञात स्वास्थ्य विशेषज्ञ के हवाले से बताया कि वुहान में अधिकारियों ने जनता को देर से आगाह किया। न्यूज मैग्जीन काइसिन ने बताया कि किस तरह सरकार ने बीमारी को छिपाए रखा। सेंसरशिप बढ़ने पर पत्रकारों ने अपनी खबरों को स्थानीय अधिकारियों की विफलता पर केंद्रित रखा है। सेंसर से बचने के लिए राष्ट्रीय नेताओं की आलोचना बंद कर दी गई है।

राष्ट्रपति से इस्तीफे की मांग की

बीजिंग में कानून के प्रोफेसर शू झानग्रुन ने पिछले माह प्रकाशित एक आलेख में लिखा है कि महामारी ने चीनी सरकार की सड़न को उजागर कर दिया है। कानूनी एक्टिविस्ट शू झियांग ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति शी के नाम एक पत्र में उन पर लीपापोती करने का आरोप लगाया है। इस्तीफे की मांग की है। शू को गिरफ्तार कर लिया है। इधर, राष्ट्रपति की आलोचना करने वाले अरबपति रेन झिकियांग का शनिवार से पता नहीं लग रहा है। उनके मित्रों ने बताया कि रेन को विदेश जाने से रोकने के लिए सरकार उन पर लगातार नजर रख रही थी। सरकार ने रेन के सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए हैं। रेन के गायब होने को कई एक्टिविस्ट चिंताजनक मानते हैं। उनका कहना है, सरकार खबरों को रोेकने कि लिए दमन कर रही है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सत्ता का भूखा जोकर बताया

बीजिंग में संपत्ति का कारोबार करने वाले अरबपति रेन झिकियांग ने एक आलेख में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सत्ता का भूखा जोकर बताया था। उनका कहना है, अभिव्यक्ति पर कड़े प्रतिबंधों के कारण कोरोना वायरस फैला है। रेन का लेख चीन में अमीरों के बीच और विदेशों में सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंच गया। रेन ने शी का नाम का जिक्र किए बिना लिखा है, मैंने एक सम्राट को नए वस्त्रों में नहीं देखा बल्कि एक निर्वस्त्र जोकर को देखा है। वह अपने सम्राट होने पर जोर दे रहा है। रेन कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य हैं। 2016 में अपने माइक्रोब्लॉग पर उन्होंने लिखा कि चीनी समाचार मीडिया को पार्टी की नहीं जनता की सेवा करनी चाहिए। पार्टी ने फौरन रेन की खिंचाई की थी। रेन बड़े शहरों में जनसंख्या सीमित करने जैसे मुद्दों पर सरकार की आलोचना करते रहे हैं।

अमेरिका में ट्रम्प ने गलत बयान दिए

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वायरस के असर से निपटने के बारे में बार-बार गलत बयान दिए हैं। टेस्टिंग की सीमित व्यवस्था होने के बावजूद उन्होंने कहा था कि कोई भी व्यक्ति वायरस की जांच करा सकता है। फिर उन्होंने कहा, अमेरिका वैक्सीन बनाने के करीब है। जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें कम से कम एक साल तो लगेंगे। ट्रम्प ने कहा, यूरोप सेयात्रियों का आना रोक दिया है जबकि अमेरिकियों और वैधानिक रहवासियों को आने की छूट है। नया मामला गूगल की एक सहायक कंपनी वेरिली की साइट से जुड़ा है। ट्रम्प ने घोषणा की कि कंपनी ऐसी वेबसाइट बना रही है जिससे वायरस की टेस्टिंग बड़े पैमाने पर तेजी से हो सकेगी। उन्होंने दावा किया कि गूगल के 1700 इंजीनियर इस पर काम कर रहे हैं। वे बहुत आगे निकल चुके हैं। दरअसल एक हजार कर्मचारियों की वेरिली का प्रोजेक्ट एकदम शुरुआती चरण में है। अब तक वेबसाइट शुरू नहीं हुई है। जांच के स्थान तक नहीं बताए गए है।



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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प- फाइल फोटो।


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नई दिल्ली (पवन कुमार).कोरानावायरस के संदिग्धों और मरीजों की बढ़ती संख्या की वजह से देश में अब 52 लैब में नमूनों की जांच की इजाजत दी गई है। इन लैब तक सैंपल पहुंचाने का जिम्मा दो कोरियर एजेंसी को दिया गया है, जो इक्यूप्ड बॉक्स में सैंपल रखकर हवाई जहाज से संबंधित प्रयोगशाला तक पहुंचा रही हैं।

सैंपल पहुंचने में 6 से 10 घंटे का समय लग रहा

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि हवाईजहाज की उपलब्धता के अनुसार लैब तक सैंपल पहुंचाने का समय 6 से 10 घंटे तक लग रहे हैं। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के निदेशक डॉ सुजीत सिंह ने बताया कि सैंपल की जांच में छह घंटे का समय लगता है,लेकिन यह समय कई बार बढ़ जाता है क्योंकि एक बार मशीन पर सैंपल की जांच होने लगी और उसके बाद कुछ सैंपल उसी लैब में जांच के लिए पहुंचा तो जांच का समय छह घंटे की जगह 14 से 16 घंटे तक हो जाता है।

साढ़े सात हजार सैंपल की जांच हुई
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के वैज्ञानिक डॉ आर गंगाखेड़कर ने बताया कि अभी तक साढ़े सात हजार से ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है। किसी भी संदिग्ध की दो बार जांच की जाती है। हालांकि अभी संदिग्ध की जांच का पूरा खर्च सरकार उठा रही है। पहली जांच में 1500 रुपए खर्च होते हैं। दोनों बार की जांच मिलाकर सरकार को करीब 5000 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। चार हजार से ज्यादा ऐसे लोग हैं जो कोराना मरीज के किसी न किसी रूप में संपर्क में आए हैं उनको सर्विलांस पर रखा गया है।



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लैब में एक सैंपल की जांच में छह घंटे का समय लगता है- फाइल फोटो।


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त्रिपोली.लीबिया के युद्धग्रस्त क्षेत्रों में हर साल सैकड़ों बच्चों की मौत इसलिए हो जाती थी, क्योंकि उनका सही समय पर दिल का ऑपरेशन नहीं हो पाता था। इस हालत में अमेरिका के एक डॉक्टर उम्मीद की किरण बनकर सामने आए। नाम है- डॉ. विलियम नोविक। डॉ. नोविक (66) की टीम हर साल विमान से लीबिया के युद्धग्रस्त क्षेत्रों में जाती है। वह यहां बच्चों के दिल का इलाज करती है। टीम ने नौ साल में 1200 बच्चों की हार्ट सर्जरी की है। इनमें से कई बच्चे नवजात थे। साल 2011 में लीबिया में करीब 150 बच्चों की मौत हार्ट सर्जरी न हो पाने के कारण हो गई थी। तभी डॉ नोविक ने फैसला किया कि वह लीबिया जाकर बच्चों का इलाज करेंगे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी करता है इस टीम की मदद

डॉ. नोविक की टीम में 20 डॉक्टर हैं। इन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि हासिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी टीम की मदद करता है। वह टीम को दवा और अन्य चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराता है। राजधानी त्रिपोली में बच्चों के इलाज के लिए नेशनल हार्ट केयर सेंटर बनाया गया है। यहीं टीम बच्चों का ऑपरेशन करती है। हाल में यहां याजन नाम के बच्चे के दिल का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन करीब 5 घंटे चला। याजन के परिवार ने बताया कि वे 1500 किमी दूर से ऑपरेशन के लिए सेंटर में आए थे। डॉक्टरों ने कहा है कि याजन जल्द पूरी तरह ठीक हो जाएगा।

अब तकहजारों बच्चों की हार्ट सर्जरी कर चुके डॉ. नोविक

डॉ. नोविक यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा में रेजीडेंट डॉक्टर और चाइल्ड हार्ट सर्जन हैं। उन्होंने टीम के लिए ऐसे डॉक्टरों को चुना, जिन्होंने गंभीर स्थिति में भी बच्चों को बचा लिया था। टीम लीबिया में ही बच्चों का इलाज नहीं करती, वह यूक्रेन, नाइजीरिया, इराक, ईरान और कोलंबिया समेत 32 देशों में जाकर हजारों बच्चों की हार्ट सर्जरी कर चुकी है।

लीबिया में 2011 से संघर्ष जारी
लीबिया 2011 से गृहयुद्ध में फंसा है। लीबिया में सत्ता-विरोधी आंदोलनों का एक सिलसिला चला, जिससे पहले गृहयुद्ध के हालात बने। फिर तानाशाह मोहम्मद गद्दाफी की विद्रोहियों ने हत्या कर दी। तभी से यह देश स्थिर शासन, आधारभूत ढांचे, शांति, सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। अभी यहां संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली सरकार है।



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डॉ. नोविक की टीम हर साल लीबिया के युद्धग्रस्त क्षेत्रों में जाती है- प्रतीकात्मक फोटो।


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रोम/मिलान. चीन के बाद कोरोनावायरस की वजह से इटली में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। पूरा देश ठहर सा गया है। 6 करोड़ से ज्यादा लोग घरों में बंद हैं। इस बीच इटलीवासियों में जर्बदस्त जोश देखने को मिल रहा है। रोम, मिलान और सिसली में लोग अपनी छतों और बालकनी से गाना गा रहे हैं,ताकि लोगों का हौसला कम न हो। इसमें आम लोगों के साथ इटली की सेलिब्रिटी शामिल हैं।

इस पहल में ओपेरा गायक, संगीतकार और आम लोग साथ दे रहे हैं। बता दें कि ऐसा ही दृश्य कुछ दिन पहले चीन के वुहान में देखने को मिला था।हौसला बढ़ाते वक्त लोग गिटार, बांसुरी, ढपली और अन्य वाद्य यंत्र बजाते देखे गए। कुछ इटली का राष्ट्रगान भी गा रहे थे। इटली में 15 मार्च सुबह तक मरने वालों का आंकड़ा 1,441 तक पहुंच गया है। 21157 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं।

ओपेरा गायिका लौरा बलदासारी अपनी बालकनी में गाना गाती दिखीं।
इस पहल में हर उम्र के लोग शामिल हो रहे हैं।
जिनके पास जो वाद्य यंत्र है, वे उसे बजाते देखे गए।
रोम में एक महिला पॉट लिड्स को झांझ के तौर पर बजाते हुए।
मिलान में कुछ लोग बालकनी में ताली बजाते भी दिखे गए।
यह फोटो मिलान का है। बालकनी में सेक्सोफोन बजाकर लोगों को उत्साह बढ़ाता बच्चा।
यह फोटो टयूरिन का है। शुक्रवार को सुबह ही यहां लोग बालकनी में गाना गाते देखे गए।
इटली में लॉकडाउन की वजह से सड़कें, चौराहे और बाजार वीरान हैं।
सड़कें सूनी हैं। लोग जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकल रहे हैं।


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इटली में पांच दिन से लॉकडाउन है। 6 करोड़ लोग घरों में कैद हैं।


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Saturday, March 14, 2020

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भोपाल. बेंगलुरु में ठहरे ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने रविवार सुबह एक नया वीडियो जारी कर जान को खतरा बताया है। विधायकों ने वीडियो में कहा कि उन्होंनेअपनेइस्तीफा दे दिएहैं।सभी भोपाल आना चाहते हैं, इसके लिए उन्हेंसीआरपीएफ की सुरक्षा दी जाए। सभी ने कांग्रेस सरकार से खुद को खतरा बताया है। विधायकों का तर्क है किजब सिंधियाजी परभोपाल में हमला कियाजा सकता है तो हमें भी खतरा है।


विधायकों ने कहा किहम अपनी स्वेच्छा से यहां आए हुए हैं। किसी ने हमें बंधक नहीं बनाया है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए संभावनाहै कि हमें विधानसभास्पीकर से मिलने नहीं दिया जाए। विधायकों ने यह भी कहा कि अगर परिजनद्वारा कोई शिकायत की जाए तो उसे अमान्य कर दिया जाए।

कांग्रेस ने कहा- विधायकों से जबरदस्ती वीडियो बनवाए जा रहे

इधर, कांग्रेस के प्रवक्ता जफर ने वीडियो की विश्वसनीयता पर सवाल किए हैं। उन्होंने इमरती देवी का एक वीडियो जारी किया है। इसमें फुसफुसाने की आवाज आ रही है। कांग्रेस का कहना है किये वीडियो विधायकों से जबरदस्ती बनवाए जा रहेहैं।

बेंगलुरु में ठहरे22 विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को अपने इस्तीफे भेजे हैं। इनमेंसे6 विधायकोंकी सदस्यता शनिवार शाम को विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने समाप्त कर दी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राज्यपाल पहले हीतुलसीराम सिलावट, महेंद्र सिंह चौहान,डॉ. प्रभुराम चौधरी, इमरती देवी, गोविंद सिंह और प्रद्युम्न सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर चुके हैं।



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सिंधिया समर्थक माने जा रहे सभी 22 विधायकों ने वीडियो जारी कर सुरक्षा मांगी है।


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